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कहते हैं कि जो जुबां नहीं कह पाती, वो बातें आंखें कह जाती है। आंखें आपकी दिल का आइना होती हैं। इसके साथ ही यह आपके स्वास्थ्य का आइना भी होती है। हालांकि ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि आंखों की समस्या आंखों तक ही सीमित है। इसका शरीर के अन्य हिस्सों से कोई लेना-देना नहीं है। जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। आपकी आंखें, शरीर के बाकी हिस्से में क्या हो रहा है, कैसी परेशानी है, सबके राज खोलती है।

धुंधला दिखना
धुंधला नजर आना, डायबिटीज का एक संकेत हो सकता है। अगर समय रहते इस समस्या का इलाज नहीं किया तो आपको डायबिटिक रेटिनोपेथी (जब आंखों की छोटी रक्तवाहिाकाओं से खून और अन्य तरल पदार्थ बहने लगता है) हो सकता है। ऐसा होने पर आपकी रोशनी धुंधली हो जाती है। यहां तक कि रात के समय आंखों की रोशनी और भी ज्यादा कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में डाॅक्टर उपचार के लिए लेजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसकी मदद से अनचाही रक्त वाहिकाओं से छुटकारा पाया जा सकता है। हालांकि ऐसा करके आंखों की रोशनी प्रभावित होती है। इसके बावजूद कुछ हद तक दिखने की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

पलकों का झपकना
पलकों का झपकना मायस्थीनिया ग्रेविस का एक लक्षण है। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र और मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। इसके साथ ही आंखों, चेहरा, गले की मांसपेशियां, चबाने में समस्या, निगलने में दिक्कत, बातचीत करने में परेशानी हो सकती है। इस तरह के लक्षण दिखने पर जरा भी लापरवाही न करें। तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें और अपना इलाज कराएं। इलाज के लिए डाॅक्टर संभवतः आपके शरीर के खून को फिल्टर कर सकते हैं ताकि इसके लक्षणों से कुछ आराम मिल सके। हालांकि यह ट्रीटमेंट लंबे समय तक काम नहीं करती। इसलिए आपको कुछ दवाईयां भी लेनी पड़ सकती हैं। कुछ मामलों में सर्जरी भी की जाती है।

आंखों में सूखापन
अगर आपकी आंखों में सूखापन और आंखों के पास की त्वचा काफी ज्यादा रूखी है तो सजग हो जाएं। सूखी आंखों की वजह से अक्सर लोग आंखों को तेज हाथों से रगड़ते रहते हैं। इससे पलकें टूट सकती हैं, आंखों में झनझनाहट हो सकती है। पलकें झड़ने की वजह से न सिर्फ आपकी चेहरे पर झुर्रियां पड़ सकती हैं बल्कि आंखों का हवा से संपर्क बढ़ सकता है। नतीजतन आंखों में सूखेपन की समस्या हो सकती है। आमतौर पर ऐसी समस्या मौसमी एलर्जी की वजह से होती है। अतः इस तरह की समस्या हो तो बिना देर किए डाॅक्टर को दिखाएं और जरूरी इलाज कराएं।

आंखों का पीलापन
आंखों में पीलापन उन लोगों में होता है जो बहुत ज्यादा धूप में रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर होने के पहले इस तरह के लक्षण नजर आते हैं। हालांकि यह कैंसर हो, ऐसा जरूरी भी नहीं है। बहरहाल यह समस्या काफी हद तक त्वचा में कैलस (कैलस फीके या पीले रंग के होते हैं) की तरह दिखते हैं। लेकिन दिसंबर 2013 में हुए एक अध्ययन में पराबैंगनी किरणों का आंखों पर प्रभाव पर जांच किया तो पता चला कि आंखों को सूरज की किरणों से बचाने में कुछ लेंस उपयोगी हैं। सो, आंखों में पीलापन नजर आने पर आंखों के विशेषज्ञों से संपर्क करें।

(और पढ़ें - आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय)

आंखों के प्रति लापरवही भारी पड़ सकती है। ताउम्र के लिए आंखों की रोशनी खत्म हो सकती है। इसके साथ ही किसी भी तरह की समस्या को अन्य बीमारी के लक्षण के तौर पर भी समझ सकते हैं। अतः आंखों में कोई भी तकलीफ हो तो तुरंत डाॅक्टर से संपर्क करें।

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