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क्या आपने कभी सोचा है कि महिलाओं या पुरुषों, दोनों में से किसका दिमाग ज्यादा एक्टिव होता है? हाल ही में शोधकर्ताओं ने इस विषय पर एक शोध किया था, जिसमें यह पता चला कि कई मामलों में महिलाओं का दिमाग पुरुषों की तुलना में ज्यादा एक्टिव होता है। आइए जानते हैं इस शोध के निष्कर्षों के बारे में।  

शोध के निष्कर्ष यह बताते हैं कि महिलाओं में चिंता, अवसाद, अनिद्रा और ईटिंग डिसऑर्डर (खाने से संबंधित विकार) का खतरा ज्यादा क्यों रहता है। कैलिफोर्निया के आमेन क्लीनिक के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह अध्ययन अब तक का सबसे बड़ा 'ब्रेन इमेजिंग सर्वे' है। इसमें कई क्लीनिकों से 46,000 से ज्यादा लोगों के दिमाग का अध्ययन किया गया और पुरुषों व महिलाओं के दिमाग के बीच भिन्नता का विश्लेषण किया गया।

शोधकर्ताओं का मानना है कि दोनों लिंगों के दिमाग के बीच के अंतर को समझना जरूरी है क्योंकि इससे यह जानने में मदद मिलती है कि मस्तिष्क से जुड़े विकार पुरुषों और महिलाओं को अलग-अलग तरीके से कैसे प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, महिलाओं में अल्जाइमर रोग, डिप्रेशन और चिंता संबंधी विकार ज्यादा देखे जाते हैं, जबकि पुरुषों में एडीएचडी (एक कार्य पर अपना ध्यान केंद्रित करने या लंबे समय तक बैठने में परेशानी आना) जैसे विकार ज्यादा पाए जाते हैं।

महिलाओं का दिमाग पुरुषों की तुलना में मुख्यता दो क्षेत्रों में अधिक सक्रिय पाया गया। पहला -  प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स जिसमे फोकस करने व आवेग को नियंत्रित करना शामिल है और दूसरा लिंबिक या इमोशनल क्षेत्र जो कि मूड और चिंता के लिए जिम्मेदार होता है। हालांकि, विजुअल (देखने) और कोऑर्डिनेशन सेंटर (तालमेल बैठाने का केंद्र) पुरुषों में अधिक सक्रिय था। 

(और पढ़ें - महिलाएं पुरुषों से अधिक क्यों जीती हैं)

शोध के प्रमुख लेखक डैनियल जी. आमेन और आमेन क्लीनिक के संस्थापक ने कहा कि महिलाओं और पुरुषों के मस्तिष्क में अंतर को समझने के लिए यह अध्ययन महत्वपूर्ण है। इससे यह जानने में मदद मिलती है कि अल्जाइमर रोग जैसे मस्तिष्क संबंधी विकार महिलाओं और पुरुषों को किस तरह प्रभावित करते हैं और इस तरह के विकार किसे ज्यादा प्रभावित करते हैं।

इस अध्ययन में 119 स्वस्थ लोगों और 26,683 रोगियों को शामिल किया गया था जो कि कई मानसिक स्थितियों जैसे कि ब्रेन ट्रॉमा, बाइपोलर (बार-बार मूड बदलना), सिजोफ्रेनिया (व्यक्ति कल्पना और वास्तविक्ता में अंतर नहीं कर पाता है) और अन्य मानसिक विकार एवं एडीएचडी से ग्रस्त थे।

शोधकर्ताओं ने अध्ययन की शुरुआत में मस्तिष्क के 128 हिस्सों का विश्लेषण किया, जिसमें उन्होंने पाया कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (फोकस करने व आवेग को नियंत्रित करने) में रक्त प्रवाह अधिक था। इससे यह जानने में मदद मिल सकती है कि महिलाएं सहानुभूति, किसी चीज या परिस्थिति को तुरंत समझ लेने, सहयोग और आत्म-नियंत्रण जैसे मामलों में क्यों तेज होती हैं।

इस रिसर्च से कम से कम ये बात तो साफ हो जाती है कि कुछ मामलों में महिलाओं का दिमाग पुरुषों से तेज होता है और ऐसे कई काम हैं जो वो पुरुषों से ज्यादा बेहतर तरीके से कर लेती हैं।

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