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जब तक हम गर्भवती होने की कोशिश नहीं करती हैं तब तक हम में से अधिकांश महिलाएं हमारे मासिक धर्म चक्रों पर ध्यान केंद्रित नहीं करती हैं। फिर अचानक से हम किसी असाइनमेंट पर काम करने वाले वन्यजीव विशेषज्ञ की तरह हर विवरण पर ध्यान देने लगती हैं। हमारे पास नोट्स और संख्याओं वाले कैलेंडर्स, ओवुलेशन प्रेडिक्शन किट और विभिन्न प्रकार की पीई स्टिक्स होती है, जिनके बारे में हम पहले कभी नहीं जानती थी।

कुछ महिलाओं को, यह सब कुछ करने से पता चलता है कि उनके मासिक धर्म चक्र "अनियमित" हैं। हालाँकि, उन्हें पहले भी इसका आभास हो सकता था लेकिन उन्होंने कभी इस पर ध्यान ही नहीं दिया होता है। ऐसी कई महिलाएं हैं जिनके मासिक धर्म अनियमित हैं और इससे अनियमित ओवुलेशन होते हैं। कुछ महिलाएं कभी-कभी ओवुलेट करती हैं। कुछ में कभी-कभी मासिक धर्म तो आता है, लेकिन ओवुलेट नहीं करती हैं। कुछ महिलाओं में तो दोनों में से कुछ भी नहीं होता है।

बांझपन वाली लगभग आधी महिलाओं को यह विकार होता है जिसे “ओवुलेटरी डिसऑर्डर" के रूप में जाना जाता है। हिंदी में इसका अर्थ “अंडोत्सर्जन से जुड़ा विकार” है। इस लेख में ओवुलेशन न होना, ओवुलेशन न होने के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में विस्तार से बताया गया हैं।

  1. ओवुलेशन न होना क्या है - Ovulation nahi hona kya hai in hindi
  2. ओवुलेशन न होने के लक्षण - Ovulation na hone ke lakshan
  3. ओवुलेशन न होने के कारण - Ovulation na hone ke karan
  4. ओवुलेशन न होने का इलाज - Ovulation na hone ka ilaj in hindi
  5. ओवुलेशन न होने के लक्षण, कारण, इलाज के डॉक्टर

जो महिलाएं नियमित रूप से ओवुलेशन नहीं कर रही हैं, उन महिलाओं के लिए आमतौर पर इसका कारण यह है कि अंडाशय परिपक्व होने और अंडे को मुक्त करने के लिए उचित समय पर संकेत प्राप्त नहीं कर रहा है।

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मस्तिष्क में पिट्यूटरी ग्रंथि एफएसएच (फॉलिकल उत्तेजक हार्मोन) और एलएच (ल्यूटीनाइज़िन्ग हार्मोन) नामक हार्मोन उत्पन्न करती है जो अंडाशय को नियंत्रित करते हैं। यदि नियमित, समयबद्ध तरीके से ओवुलेशन नहीं हो रहा है, तो यह संभावना है कि अंडाशय और पिट्यूटरी ग्रंथि सही तरह से आपस में संपर्क नहीं कर रहे हैं।

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सामान्य ओव्यूलेशन प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली स्थितियां जिनके परिणामस्वरूप असफल या अनियमित ओवुलेशन होता है उन्हें “अंडाशय संबंधी विकार” कहा जाता है। यह महिलाओं में बांझपन के सबसे आम कारणों में से एक होता है।

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ओवुलेटरी डिसऑर्डर के प्रकार -

अनओवुलेशन (Anovulation)
अनओवुलेशन या ओवुलेशन न होना, एक विकार है जिसमें अंडे ठीक से विकसित नहीं होते हैं, या अंडाशय के फॉलिकल से इन्हें जारी नहीं किया जाता है। जिन महिलाओं को यह विकार है, उनमें कई महीनों तक मासिक धर्म नहीं होने की परेशानी हो सकती है। कुछ को मासिक धर्म हो भी सकता है भले ही वे ओवुलेट नहीं कर रही हों।

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ओलिगो-ओवुलेशन
ओलिगो-ओवुलेशन एक विकार है जिसमें ओवुलेशन नियमित आधार पर नहीं होता है और मासिक धर्म चक्र 21 से 35 दिनों के सामान्य चक्र से अधिक लंबा हो सकता है।

अनओवुलेशन मतलब ओवुलेशन की कमी, या ओवुलेशन न होना है। ओवुलेशन का अर्थ अंडाशय से अंडे का निकलना है। गर्भावस्था को स्वाभाविक रूप से प्राप्त करने के लिए यह होना आवश्यक है। अगर ओवुलेशन अनियमित है, लेकिन पूरी तरह से अनुपस्थित नहीं है, तो इसे ओलिगो-ओवुलेशन कहा जाता है।

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जब एक महिला अंडोत्सर्जन नहीं करती है, तो वह गर्भवती नहीं हो सकती क्योंकि उसके गर्भ में उर्वरक होने के लिए कोई अंडे नहीं मिलते हैं। अगर किसी महिला को अनियमित ओवुलेशन होता है, तो उसके गर्भधारण करने की कम संभावना होती है, क्योंकि वह कम बार-बार अंडे बनाती है।

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इसके अलावा, देर से ओवुलेशन सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले अंडे का उत्पादन नहीं करता है। इससे निषेचन या फर्टिलाइजेशन कम हो सकता है। इसके अलावा, अनियमित ओवुलेशन का मतलब है कि महिला के शरीर में हार्मोन संतुलित नहीं हैं। ये हार्मोनल अनियमितताएं कभी-कभी कुछ अन्य परेशानियों का भी कारण बन सकती हैं, जो निम्नलिखित हैं -

  • उपजाऊ ग्रीवा श्लेष्म (फर्टाइल सर्वाइकल म्यूकस) की कमी
  • एंडोमेट्रियम (जहां उर्वरित अंडे को चिपकने की आवश्यकता होती है) का पतला या अधिक मोटा होना
  • प्रोजेस्टेरोन का असामान्य रूप से निम्न स्तर
  • एक छोटा लुटल फेज (ओवुलेशन होने और फिर से अगले मासिक धर्म के शुरू होने के बीच का अंतराल)

जो महिलाएं नियमित रूप से ओवुलेशन करती हैं, आमतौर पर उनकी मासिक अवधि नियमित होती है, अक्सर हर 28 दिनों में, सामान्य रूप से 21-35 दिनों के बीच से कहीं भी हो सकती है। हालाँकि, अनओवुलेशन वाली महिलाओं में मासिक अवधी अनियमित होती है। कुछ सबसे बुरे मामलों में तो, कोई मासिक धर्म नहीं होते हैं।

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यदि आपके चक्र 21 दिनों से कम या 36 दिनों से लंबे हैं, तो आपको ओवुलेशन की समस्या हो सकती है। यदि आपके चक्र 21 से 36 दिनों की सामान्य सीमा के भीतर आते हैं, लेकिन आपके चक्र की लंबाई एक महीने से दूसरे महीने में व्यापक रूप से भिन्न होती है, तो ये भी ओवुलेशन संबंधी अक्षमता का संकेत हो सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि एक महीने आपकी अवधि 22 दिन है और अगली 35 दिन है, तो चक्रों के बीच इतनी बड़ी भिन्नताएं ओवुलेशन की समस्या का संकेत दे सकती हैं। यह भी संभव है कि आप अपने मासिक चक्र को लगभग सामान्य शेड्यूल पर प्राप्त कर रही हो पर ओवुलेशन नहीं कर रही हो, हालांकि यह आम नहीं है।

ऐसा मासिक धर्म चक्र जहां ओवुलेशन नहीं होता है उसे एक अनओवुलेटरी चक्र कहा जाता है। अपने मासिक धर्म और ओवुलेटरी चक्रों की निगरानी करना, जिसमें ओवुलेशन के लक्षणों के बारे में जागरूक होना भी शामिल है, आपको अनओवुलेशन या ओवुलेशन न होने के लक्षणों की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।

अनओवुलेशन और ओवुलेटरी अक्षमता कई कारकों के कारण हो सकती है। प्रजनन एक प्रणाली या सिस्टम द्वारा नियंत्रित होता है जिसमें हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क का एक क्षेत्र), पिट्यूटरी ग्रंथि, अंडाशय, और अन्य ग्रंथियां, जैसे एड्रेनल ग्रंथियां और थायराइड ग्रंथि शामिल हैं।

ओवुलेशन (अंडे की निकलना) के साथ समस्याएं तब होती हैं जब इस प्रणाली का एक हिस्सा खराब हो जाता है। उदाहरण के लिए,

  • हाइपोथैलेमस से गोनाडोट्रोपिन-रिलीजिंग हार्मोन का स्राव नहीं होता है, जो पिट्यूटरी ग्रंथि को हार्मोन (फॉलिकल उत्तेजक हार्मोन और ल्यूटीनाइज़िन्ग हार्मोन) का उत्पादन करने के लिए उत्तेजित कर सकता है और जो अंडाशय को उत्तेजित करते है और ओवुलेशन को ट्रिगर करते है। (और पढ़े - महिला हाइपोगोनैडिज़्म का इलाज)
  • पिट्यूटरी ग्रंथि बहुत कम ल्यूटीनाइज़िन्ग हार्मोन या फॉलिकल उत्तेजक हार्मोन का उत्पादन करती है।
  • अंडाशय बहुत कम एस्ट्रोजेन पैदा करते हैं। (एस्ट्रोजेन का स्तर कम होने का इलाज)
  • पिट्यूटरी ग्रंथि बहुत अधिक प्रोलैक्टिन उत्पन्न कर सकता है, प्रोलैक्टिन एक हार्मोन है जो दूध उत्पादन को उत्तेजित करता है। प्रोलैक्टिन (हाइपरप्रोलैक्टिनिया) के उच्च स्तर के परिणामस्वरूप उन हार्मोन का स्तर कम हो सकता है जो ओवुलेशन को ट्रिगर करते हैं। पिट्यूटरी ग्रंथि ट्यूमर (प्रोलैक्टिनोमा) की वजह से प्रोलैक्टिन का स्तर अधिक हो सकता है, जो लगभग हमेशा बिना कैंसर वाला ट्यूमर होता है। (और पढ़े - प्रोलैक्टिन टेस्ट क्या है)
  • अन्य ग्रंथियां खराब हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, एड्रेनल ग्रंथियां पुरुष हार्मोन (जैसे टेस्टोस्टेरोन) को अधिक उत्पादन कर सकती हैं या थायराइड ग्रंथियां थायरॉइड हार्मोन का अधिक उत्पादन या कम उत्पादन कर सकती हैं, जो पिट्यूटरी ग्रंथि और अंडाशय को संतुलन में रखने में मदद करते है।
  • कई अन्य विकारों के कारण भी ओवुलेशन समस्याएं हो सकती हैं। सबसे आम कारणों में से एक पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम है, आम तौर पर जिसकी विशेषता अंडाशय द्वारा पुरुष हार्मोन का अतिरिक्त उत्पादन और अधिक वजन होती है।

ओवुलेशन की समस्याओं के कुछ अन्य कारण निम्नलिखित हैं -

कभी-कभी जल्दी रजोनिवृत्ति होना भी एक कारण होता है कि जब परिपक्व होने के लिए अंडों की आपूर्ति जल्दी खत्म हो जाती है।

आपके डॉक्टर आपको आपके मासिक धर्म चक्र के बारे में पूछेंगे। यदि आप अनियमित या अनुपस्थित चक्र को महसूस करते हैं, तो ओवुलेटरी डिसफंक्शन की आशंका हो सकती है। आपके डॉक्टर आपको कुछ महीनों तक घर पर अपने बेसल बॉडी तापमान को ट्रैक करने के लिए भी कह सकते हैं।

इसके बाद, आपके डॉक्टर हार्मोन के स्तर की जांच के लिए आपके ब्लड टेस्ट करने का आदेश देंगे। उन परीक्षणों में से एक दिन में 21 प्रोजेस्टेरोन ब्लड टेस्ट शामिल हो सकते हैं। ओवुलेशन के बाद, प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ता है। यदि आपके प्रोजेस्टेरोन का स्तर बढ़ता नहीं है, तो आप शायद ओवुलेशन नहीं कर रही हैं।

आपके डॉक्टर अल्ट्रासाउंड करने के लिए भी कह सकते हैं। अल्ट्रासाउंड गर्भाशय और अंडाशय के आकार की जांच करेगा, और यह भी देखने में मदद करेगा कि क्या आपका अंडाशय पॉलीसिस्टिक हैं, जो पीसीओएस का एक लक्षण है।

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अल्ट्रासाउंड का उपयोग फॉलिकल विकास और ओवुलेशन को ट्रैक करने के लिए भी किया जा सकता है, हालांकि आमतौर पर ऐसा नहीं किया जाता है। इस मामले में, आपके पास एक से दो सप्ताह की अवधि में कई अल्ट्रासाउंड हो सकते हैं।

उपचार अनओवुलेशन के कारण पर निर्भर करेगा। अनओवुलेशन के कुछ मामलों में जीवनशैली या आहार में बदलाव से इलाज किया जा सकता है।

यदि शरीर का कम वजन या अत्यधिक व्यायाम अनओवुलेशन का कारण है, तो वजन कम करना या व्यायाम को कम करना ओवुलेशन को पुनः प्रारंभ करने के लिए पर्याप्त हो सकता है। मोटापा के लिए भी यही है। यदि आपका वजन अधिक हैं, तो आपके वर्तमान वजन का 10 प्रतिशत भी कम करना ओवुलेशन को पुनः प्रारंभ करने के लिए पर्याप्त हो सकता है।

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कुछ दवाओं की मदद भी ली जा सकती है। क्लॉमिफेन, लेट्रोज़ोल (एक एरोमैटस अवरोधक) या ह्यूमन गोनाडोट्रोपिन्स जैसी दवा, आमतौर पर ओवुलेशन को ट्रिगर कर सकती है। विशिष्ट समस्या के आधार पर विशेष दवा का चयन किया जाता है। यदि बांझपन का कारण जल्दी रजोनिवृत्ति है, तो फिर न क्लॉमिफेन और न ही मानव गोनाडोट्रोपिन ओवुलेशन को उत्तेजित कर सकती हैं।

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अगर अनओवुलेशन का कारण प्रीमैच्योर ओवेरियन फेलियर या कम ओवरियन रिज़र्व है, तो प्रजनन दवाओं के काम करने की संभावना कम होती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप अपने अंडों से गर्भवती नहीं हो सकती हैं। कुछ महिलाएं अपने अंडों से गर्भ धारण करने में असमर्थ होंगी, उन्हें अंडे के डोनर और आईवीएफ उपचार की आवश्यकता हो सकती है।

Dr. Giri Prasath

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Dr. Madhav Bhondave

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