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ट्विटर के सीईओ और अरबपति जैक डोरसे पिछले वर्ष अपने मेडिटेशन ट्वीट के चलते काफी विवादों में फंस गए थे। उस समय वह म्यांमार में थे, जहां उन्होंने अपने 10 दिन की विपश्यना की दूसरी अवधि पूरी की थी। हालांकि, उस समय म्यांमार में चल रहे विवादों के कारण उनकी ट्विटर पर ही काफी आलोचना भी हुई थी। इस वर्ष भी उन्होंने ट्वीट करते हुए बताया की वह अपने विपश्यना की 10 दिन की तीसरी अवधि को पूरा कर चुके हैं। जैक ने यह मेडिटेशन संस्कार दक्षिण अफ्रीका के धम्म पताका में पूरा किया। उन्होंने इसके बारे में ट्वीट करते हुए कहा, यह मेरे लिए कठिन व सबसे बेहतरीन कार्य है।

अफ्रीका में जहां जैक ने विपश्यना मेडिटेशन का अभ्यास किया है उसे 1970 के दशक में एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु में शुरू किया था।

क्या है विपश्यना?
विपश्यना भारत की सबसे पुरानी ध्यान केंद्रित करने वाली तकनीक है। इसका मतलब होता है, चीजों को उनके वास्तविक रूप में देखना। आज से करीब 2500 वर्ष पहले गौतम बुध ने इस तकनीक को पुनर्जीवित किया और तमाम बीमारियों के इलाज के लिए उन्होंने खुद इसका प्रसार किया। यह गैर-सांप्रदायिक तकनीक मस्तिष्क के सभी विकारों व गंदगी को दूर करने के साथ ही, खुशहाल जीवन प्रदान करती है।

विपश्यना आत्म अवलोकन (खुद को जानने) के माध्यम से आत्म परिवर्तन (खुद को बदलने) का एक तरीका है। यह मन और शरीर के बीच गहरे अंतरसंबंध स्थापित करता है। इस प्रक्रिया के दौरान हमारा मन और शरीर अपनी सभी मानसिक अशुद्धियों को भूलकर प्रेम और दया का वहन करता है।

विपश्यना से व्यक्ति के विचार, भावना, निर्णय और संवेदना के सभी ख्याल स्पष्ट हो जाते हैं। इसे अपनाने से व्यक्ति को यह समझ आता है कि कैसे कोई प्राकृतिक रूप से बढ़ता है और फिर से उसी स्थिति में वापिस आ जाता है या कैसे कोई अपनी समस्याओं से पीड़ित होकर उनसे मुक्त हो जाता है।

विपश्यना करने का तरीका
खुद को अशुद्धियों से मुक्त कर देने वाली इस प्रक्रिया के लिए व्यक्ति में बेहद लगन और अनुशासन होना जरूरी है, क्योंकि खुद को शुद्ध करने की स्थिति में व्यक्ति केवल आत्मानुभूति के प्रयासों से ही जा सकता है। कोई और उनके लिए ऐसा नहीं कर सकता है। इसीलिए यह मेडिटेशन केवल उन्हीं पर काम करती है जो इसे गंभीरता से अपनाते हैं।

इस तकनीक को दस दिन के लिए अपनाना होता है, जिसमें प्रतिभागियों को कोड ऑफ डिसिप्लिन का पालन करना होता है। इस तकनीक को पूरा करने के लिए 3 भागों में बांटा गया है

पहला चरण व्यक्ति को हत्या, चोरी, यौन गतिविधि, गलत तरीके से बात करना और नशे की आदतों को छोड़ना होता है। यह मन को शांत करने में मदद करता है।

दूसरे चरण में व्यक्ति अपनी सांस लेने की विधि को काबू में करके मन को शांत करना सीखता है। इस प्रक्रिया के चौथे दिन तक मन बेहद शांत और केंद्रित हो जाता हैं और व्यक्ति अपने आप ही विपश्यना क्रिया को खुद पर लागू करने लगता है। शरीर की सभी संवेदनाओं के बारे में जानना, उसकी प्रकृति को समझना और उनको संतुलित करने की क्रिया को विकसित करना इसके अंग हैं।

आखिरी चरण, विपश्यना के आखिरी यानि दसवें दिन तक प्रतिभागी दया के प्रति प्रेम और सभी के प्रति अच्छे कर्म करना व अपनी सभी अशुद्धियों को भुलाकर ध्यान केंद्रित करना सीख चुका होता है।

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