जानी-मानी अंतरराष्ट्रीय मेडिकल पत्रिका दि लांसेट ने चीन में किए गए उस अध्ययन को अपने एक प्लेटफॉर्म से वापस ले लिया है, जिसमें आशंका जताई गई थी कि कोविड-19 महामारी की वजह बना कोरोना वायरस सार्स-सीओवी-2 का सबसे प्रारंभिक ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिशन (वायरस का इन्सान से इन्सान में फैलना) भारत में हुआ था। खबर के मुताबिक, लांसेट ने प्रकाशित होने के लगभग एक महीने बाद अपने प्रीप्रिंट प्लेटफॉर्म से इस दावे और इससे जुड़े अध्ययन को वापस ले लिया है। अंतरराष्ट्रीय अखबार ग्लोबल टाइम्स ने बताया है कि बीती 17 नवंबर को पत्रिका ने अपने प्रीप्रिंट प्लेटफॉर्म एसएसआरएन डॉट कॉम पर यह अध्ययन ऑनलाइन प्रकाशित किया था, जिसे अब वहां से हटा लिया गया है।

समाचार एजेंसी आईएएनएस की रिपोर्ट की मानें तो चीन के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस के एक सदस्य ने ग्लोबल टाइम्स से बातचीत में इस जानकारी की पुष्टि की है। बता दें कि इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंस, चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के तहत आता है। इसी संस्थान के वैज्ञानिकों ने अध्ययन के आधार यह संभावना जताई थी कि सार्स-सीओवी-2 के ऑरिजिन का संबंध भारत से हो सकता है। अध्ययन में चीन की फूडान यूनिवर्सिटी और अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास के वैज्ञानिक भी शामिल थे।

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खबर के मुताबिक, अध्ययन को 'अर्ली क्रिप्टिक ट्रांसमिशन एंड एवोल्यूशन ऑफ सार्स-सीओवी-2 इन ह्यूमन होस्ट' शीर्षक से प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया गया था कि भारतीय उपमहाद्वीप वह जगह हो सकती है, जहां नया कोरोना वायरस सबसे पहले ह्यूमन-टू-ह्यूमन ट्रांसमिट हुआ था। स्टडी से जुड़े वैज्ञानिकों का कहना था कि यह ट्रांसमिशन वुहान में आए कोरोना वायरस संकट से तीन-चार महीने पहले हुआ था। अब इस संभावना को लांसेट ने फिलहाल एक तरह से स्वीकार नहीं किया है।

ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि एसएसआरन डॉट कॉम पर से किसी अध्ययन का हटना कोई नई और हैरान करने वाली बात नहीं है। इस पर अखबार से बातचीत में बीजिंग स्थित एक जनस्वास्थ्य विशेषज्ञ ने कहा है, 'अगर शोधकर्ताओं या शोध करने वाले संस्थान को लगता है कि उनके अध्ययन में डेटा की कमी है या उनमें दम नहीं है या वे किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं हैं, तो वे अध्ययन को वापस लेने के बारे में विचार कर सकते हैं।' इस विशेषज्ञ ने आगे कहा, 'इस अध्ययन को वापस लेने का मतलब है कि दुनियाभर में वायरस के ऑरिजिन के लिए ट्रैकिंग करना एक जटिल वैज्ञानिक सवाल है और जिसे करना आसान काम नहीं है। बिना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना काफी मुश्किल है।'

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उत्पाद या दवाइयाँ जिनमें कोविड-19: कोरोना वायरस का सबसे पहला ह्यूमन ट्रांसमिशन 'भारत में' होने की संभावना जताने वाले चीनी अध्ययन को दि लांसेट पत्रिका ने वापस लिया है

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