स्वास्थ्य की दृष्टि से गाय के दूध को भैंस के दूध से बेहतर माना जाता है। इसमें फैट भैंस के दूध के मुकाबले कम मात्रा में पाया जाता है। भैंसों की तरह ही गाय के थनों में भी विभिन्न प्रकार के रोग होने का खतरा रहता है। क्योंकि ये बेहतर संवेदनशील होते हैं। गाय के थन में सूजन होना एक आम समस्या है, जो आमतौर पर ब्यांत के समय होती है। लेकिन कई बार किसी प्रकार के संक्रमण या थन में चोट के कारण भी सूजन हो जाती है, जिसका इलाज कराना बेहद आवश्यक होता है।

एक या अधिक थनों का आकार बढ़ जाना, थन छोटे-बड़े होना और थनों में लालिमा आदि सूजन का मुख्य लक्षण है। यदि सूजन गंभीर नहीं है, तो घर पर ही सिकाई आदि की मदद से इसे ठीक किया जाता है। यदि सूजन बढ़ रही है, तो पशु चिकित्सक परीक्षण की मदद से स्थिति के अंदरूनी कारण का पता लगाकर उसका इलाज कर देते हैं।

  1. गाय के थन में सूजन क्या है - Gaay ke than me sujan kya hai
  2. गाय के थन में सूजन के लक्षण - Gaay ke than me sujan ke lakshan
  3. गाय के थन में सूजन के कारण - Gaay ke than me sujan ke karan
  4. गाय के थन में सूजन से बचाव - Gaay ke than me sujan ke bachav
  5. गाय के थन में सूजन का परीक्षण - Gaay ke than me sujan ka parikshan
  6. गाय के थन में सूजन का इलाज - Gaay ke than me sujan ka ilaaj

जब गाय के थन व उसके आसपास के भाग में असाधारण रूप से द्रव जमा होने लगता है, तो उसका आकार बढ़ने लगता है और इस स्थिति को थन की सूजन कहा जाता है। आमतौर पर गाय के ब्यांत से लगभग एक हफ्ते तक सूजन होने लग जाती है, जो शुरुआत में सामान्य और ब्यांत करीब आते-आते गंभीर होने लग जाती है।

(और पढ़ें - भैंस के थन में सूजन)

गाय के थन में होने वाली सूजन एक साथ चारों थनों या किसी एक थन में विकसित हो सकती है। यदि सूजन गंभीर नहीं है, तो इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। हालांकि, गंभीर मामलों में थन में आई हुई सूजन स्पष्ट दिखाई पड़ती है और साथ ही साथ कुछ अन्य लक्षण भी विकसित हो जाते हैं जैसे :

  • थनों का आकार छोटा बड़ा होना और लालिमा
  • थनों में दर्द व छूने पर अधिक दर्द होना
  • थन से खून या कोई अन्य द्रव आना
  • गाय द्वारा थनों पर जीभ या टांग से खुजली करने की कोशिश करना
  • बार-बार पैर पटकना
  • ब्यांत के बाद आने वाली सूजन
  • प्रभावित थन से दूध न आना
  • दूध के साथ कोई द्रव या रक्त आना
  • थनों के साथ-साथ लेवटी (लूटी) में सूजन आना
  • थन में सूजन के कारण गाय को उठने, बैठने और चलने आदि में परेशानी होना

यदि सूजन गंभीर हो गई है, तो गाय का स्वास्थ्य प्रभावित हो जाता है, जिससे कुछ अन्य लक्षण भी हो सकते हैं जैसे -

  • गाय को बुखार होना
  • घास न खाना
  • जुगाली न करना
  • बार-बार गोबर या पेशाब करना
  • मुंह से लार या आंखों से पानी आना

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

यदि गाय के थन में लगातार सूजन बढ़ती जा रही है और दो या तीन दिनों के भीतर ठीक नहीं हुई है, तो पशु चिकित्सक को दिखा लेना चाहिए। इसके अलावा यदि आप कोई घरेलू उपाय कर रहे हैं औऱ उससे भी आराम नहीं मिल रहा है तो भी डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए। कुछ लक्षण ऐसे हैं, जिनका पता चलने पर जल्द से जल्द पशु चिकित्सक को दिखा लेना चाहिए।

  • थनों में कम ज्यादा दूध होना
  • थन के नीचे छेद में मवाद बनना
  • थन में गांठ हो जाना

गाय के थन में सूजन के विभिन्न कारण हो सकते हैं, जो अलग-अलग स्थितियों पर निर्भर करते हैं। यदि सूजन गाय के ब्यांत के दौरान आई है, तो थन व लेवटी के अन्य भागों में रक्त का बहाव बढ़ने के कारण आती है।

गाय के शरीर में हार्मोन के स्तर में असाधारण रूप से बदलाव होना भी, उनके थनों में सूजन का कारण बन सकता है। कुछ अध्ययनों के अनुसार एस्ट्रोजन व प्रोजेस्टेरोन के स्तर में असामान्य रूप से बदलाव होने पर गाय के थन में सूजन आने लगती है।

सूजन का एक कारण नमक भी होता है। यदि गाय को चारे, दाने, दलिया या खल आदि के साथ अधिक नमक दिया जा रहा है, तो उसके शरीर में सोडियम क्लोराइड जमा होने लगता है। यदि यह थन व लेवटी के आस-पास जमा होने लगता है, तो इस भाग में सूजन आने लगती है।

कुछ गाय अपने थन को खुद मुंह में लेकर दूध पीने लग जाती हैं। ऐसे में बार-बार कोशिश करने पर गाय के दांत लगने का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं कई बार बछड़ा/बछड़ी के दांत लगने से भी थन में घाव हो जाता है औऱ सूजन आ जाती है।

इसी प्रकार की कुछ अन्य स्थितियां हैं, जो गाय के थन में सूजन का कारण बन सकती हैं -

  • बैठते समय अपने ही घुटने या खुरों के नीचे थन आ जाना
  • बैठने के बाद मिट्टी से कोई बैक्टरिया या परजीवी संक्रमण हो जाना

यदि गाय के थन में गंभीर सूजन है, तो उसका इलाज कराना जरूरी है। हालांकि, यदि सूजन कम है, तो कुछ घरेलू उपायों से उसे ठीक किया जा सकता है। थन में सूजन के लिए निम्न का इस्तेमाल किया जा सकता है -

  • ठंडी व गर्म सिकाई
  • गाय के बैठने के लिए स्वच्छ व साफ सुधरी जगह
  • समय पर उचित कीटनाशकों का छिड़काव करना

यदि अधिक नमक खाने के कारण गाय के थनों में सूजन आने लगी है, तो डॉक्टर नमक बंद करने की सलाह दे सकते हैं। इसके अलावा पशु चिकित्सक गाय के लिए विशेष प्रकार का नमक भी दे सकते हैं, जो सूजन का कारण नहीं बनता है।

यदि आप गाय को एक ही जगह बांध कर रखते हैं, तो डॉक्टर उसे थोड़ा बहुत चलाने फिराने की सलाह दे सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि चलने फिरने से गाय से शरीर में रक्त का संचारण सही बना रहेगा और सूजन संबंधी समस्याएं कम होने लगेंगी। जिन गायों का ब्यांत करीब है उनके लिए चलना-फिरना बेहद लाभदायक रहता है।

गाय के थन में आई सूजन का परीक्षण करने के लिए पशु चिकित्सक थन को करीब से देखते हैं और आवश्यकता पड़ने पर इसे छूकर भी देख सकते हैं। परीक्षण के दौरान मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि सूजन किस कारण से हुई है। यदि मवाद या अन्य द्रव बन गया है या फिर थन पर घाव बनने लगा है, तो उसमें से सैंपल भी लिया जा सकता है।

थन को देखने के बाद पशु चिकित्सक मालिक से गाय के स्वास्थ्य के बारे में कुछ सवाल पूछ सकते हैं। जिसमें हाल ही में दिए गए किसी विशेष चारे या दवाओं और गाय के स्वास्थ्य संबंधी किसी रोग के बारे में पूछा जाता है।

गाय के थन में सूजन का इलाज स्थिति की गंभीरता के अनुसार किया जाता है। यदि सूजन थोड़ी बहुत ही है, तो उसका इलाज करने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। कुछ गायों को ब्यांत से कुछ दिन पहले सूजन आने लगती है और ब्यांत के बाद धीरे-धीरे कम होने लग जाती है। लेकिन कई बार सूजन अधिक गंभीर हो जाती है, जिसके कारण गाभिन गाय को उठने-बैठने और चलने आदि में दिक्कत होने लगती है, ऐसी स्थिति में पशु चिकित्सक कुछ एंटी इंफ्लामेटरी दवाएं दे सकते हैं।

यदि सूजन ब्यांत से संबंधित नहीं है, तो उसके अंदरूनी कारणों के अनुसार इलाज किया जाता है। कुछ मामलों में अधिक नमक खाने के कारण सूजन हो जाती है, ऐसी स्थिति में नमक बंद कर दिया जाता है और डाईयुरेटिक दवाएं देते हैं, जिससे शरीर के अंदर जमा नमक पेशाब के माध्यम से निकल जाता है।

इसके अलावा यदि सूजन के साथ जलन, लालिमा या खुजली जैसी समस्याएं भी हैं, तो उनके लिए भी डॉक्टर कुछ एंटीहिस्टामिन और एंटी इंफ्लामेटरी दवाएं दे सकते हैं।

कई बार सूजन के कारण थन के छेद में घाव बन जाता है और संक्रमण हो जाता है। ऐसे में डॉक्टर कुछ एंटीबायोटिक दवाएं भी दे सकते हैं।

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