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बी-सेल लिम्फोमा, लिम्फोसाइट्स नामक सफेद रक्त कोशिकाओं के कैंसर को कहा जाता है। लिम्फोसाइट्स के दो मुख्य प्रकार हैं, लेकिन जिस तरह से यह बीमारी विकसित होती है उसे बी कोशिकाएं कहते हैं। ये कोशिकाएं एंटीबॉडी बनाती हैं जो शरीर को बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने में मदद करती हैं। जिन लोगों को बी-सेल लिम्फोमा की समस्या होती है, उनके शरीर में असामान्य रूप से बी कोशिकाओं का निर्माण होने लगता है। ये कोशिकाएं संक्रमणों से मुकाबला नहीं कर पाती हैं। इतना ही नहीं वे शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैल सकती हैं।

लिम्फोमा दो प्रकार का होता है : हॉजकिन का लिम्फोमा और नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा। बी-सेल लिम्फोमा के ज्यादातर मामले नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा होते हैं। किसी व्यक्ति में बी-सेल लिम्फोमा के निदान के साथ डॉक्टर यह जानने की कोशिश करते हैं कि यह किस प्रकार का है। नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा के सबसे आम प्रकार को डिफ्यूज लॉर्ज बी-सेल लिम्फोमा (डीएलबीसीएल) कहा जाता है।

लिम्फोमास हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करता है, जिससे व्यक्ति को संक्रमणों की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है। लिम्फोमा के लिए कुछ उपचार के चलते भी कुछ प्रकार की जटिलताएं हो सकती हैं। जैसे

  • बांझपन
  • दिल, फेफड़े, गुर्दे और थायरॉयड रोग
  • मधुमेह

इस लेख में हम बी-सेल लिम्फोमा के लक्षण, कारण और इसके इलाज के बारे में जानेंगे।

  1. बी-सेल लिम्फोमा के प्रकार - Types of B-Cell Lymphoma in Hindi
  2. बी-सेल लिम्फोमा के लक्षण - B-Cell Lymphoma Symptoms in Hindi
  3. बी-सेल लिम्फोमा के कारण - B-Cell Lymphoma Causes in Hindi
  4. बी-सेल लिम्फोमा का निदान - Diagnosis of B-Cell Lymphoma in Hindi
  5. बी-सेल लिम्फोमा का इलाज - B-Cell Lymphoma Treatment in Hindi
  6. बी-सेल लिम्फोमा के डॉक्टर

बी-सेल लिम्फोमा के प्रकार - Types of B-Cell Lymphoma in Hindi

बी-सेल नॉन-हॉजकिन लिम्फोमा निम्न प्रकार का हो सकता है।

  • फोलीक्यूलर लिम्फोमा- इसका विकास धीमी गति से होता है और यह मुख्य रूप से बुजुर्ग वयस्कों को प्रभावित करता है
  • क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया (धीमा विकसित होने वाला लिम्फोमा)
  • मेंटल सेल लिम्फोमा- तेजी से बढ़ने वाला लिम्फोमा
  • मार्जिनल जोन लिम्फोमा- यह छोटी कोशिकाओं में विकसित होता है जो धीरे-धीरे बढ़ती हैं।
  • बर्किट लिम्फोमा - यह एक दुर्लभ बीमारी है जो तेजी से बढ़ता है
  • लिम्फोप्लाज्मेसिटिक लिम्फोमा- एक दुर्लभ और धीमी गति से बढ़ने वाला लिम्फोमा
  • प्राइमरी मीडियास्टाइनल लार्ज बी-सेल लिम्फोमा- यह एक दुर्लभ प्रकार का लिम्फोमा है जो मुख्य रूप से युवा वयस्कों को प्रभावित करता है। महिलाओं में भी यह समस्या काफी आम है।

बी-सेल लिम्फोमा के लक्षण - B-Cell Lymphoma Symptoms in Hindi

बी-सेल लिम्फोमा के लक्षण एक से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकते हैं। इसके लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह किस स्टेज का है? सामान्य रूप से इन लक्षणों के माध्यम से बी-सेल लिम्फोमा की पहचान की जा सकती है।

  • गर्दन, बगल, या कमर के लिम्फ नोड्स में सूजन
  • पेट में दर्द या सूजन
  • छाती में दर्द
  • खांसी आना
  • सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार और रात को पसीना आना
  • वजन घटना
  • थकान महसूस होना
  • भूख कम लगना
  • कमर में दर्द और तेज खुजली

बी-सेल लिम्फोमा के कारण - B-Cell Lymphoma Causes in Hindi

बी-सेल लिम्फोमा किन कारणों से होता है इस बारे में बहुत स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। सामान्य रूप से लिम्फोसाइट्स के नियंत्रण से बाहर हो जाने की स्थिति में इस प्रकार के कैंसर की शुरुआत होती है। आमतौर पर हमारा शरीर नए लिम्फोसाइटों का ​निर्माण केवल तभी करता है जब उसे मृत हो चुकी पुरानी कोशिकाओं को बदलने की आवश्यकता होती है।

बी-सेल लिम्फोमा की स्थिति में लिम्फोसाइट्स का निर्माण तब भी होने लगता है, जबकि उनकी आवश्यकता नहीं होती है, इतना ही नहीं वह तेजी से बढ़ते भी रहते हैं। जिन लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है, उन्हें बी-सेल लिम्फोमा होने का खतरा अधिक होता है।

आइए उन स्थितियों के बारे में जानते हैं जिनमें बी-सेल लिम्फोमा होने का खतरा बढ़ जाता है।

  • 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग
  • पुरुष को खतरा अधिक रहता है
  • ऑटोइम्यून बीमारी का इलाज या अंग प्रत्यारोपण के बाद ऐसी दवाइयों का सेवन जो प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यूनोसप्रेसेन्ट्स) को कमजोर करती हों
  • एचआईवी या एपस्टीन-बार वायरस के कारण
  • कीड़े और खरपतवार को मारने वाले रसायनों के संपर्क में आना
  • ऐसी आनुवं​शिक स्थिति जो प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रभावित करती हो

बी-सेल लिम्फोमा का निदान - Diagnosis of B-Cell Lymphoma in Hindi

लिम्फोमा की स्थिति में लिम्फ नोड्स में सूजन आ जाना सबसे आम लक्षण होता है। बी-सेल लिम्फोमा की स्थिति की पुष्टि के लिए डॉक्टर शारीरिक परीक्षण करते हैं। बायोप्सी और बोन मैरो टेस्ट को स्थिति की पुष्टि के लिए सबसे उपयोगी माना जाता है। स्थिति के निदान के लिए डॉक्टर आवश्यकतानुसार निम्न परीक्षणों की भी सलाह दे सकते हैं।

रक्त और पेशाब की जांच

रक्त और पेशाब की जांच के माध्यम से संक्रमण और अन्य बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

इमेजिंग टेस्ट

शरीर में ट्यूमर का पता लगाने के लिए डॉक्टर कई प्रकार के इमेजिंग टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। रोगी को एक्स-रे, सीटी स्कैन, एमआरआई और पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।

बी-सेल लिम्फोमा का इलाज - B-Cell Lymphoma Treatment in Hindi

कुछ प्रकार के लिम्फोमा के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं और इनके इलाज की भी आवश्यकता नहीं होती है। ऐसे में डॉक्टर स्थिति पर नजर रखते हैं। लक्षण दिखाई देने या बीमारी के बढ़ने के संकेत मिलने पर उपचार शुरू हो सकता है। बी-सेल लिम्फोमा के इलाज में अक्सर निम्न प्रकार के उपायोंं को प्रयोग में लाया जाता है।

रेडिएशन

कैंसर कोशिकाओं को मारने और ट्यूमर को कम करने के लिए रेडिएशन थेरपी के दौरान ​हाई पावर वाले ऊर्जा बीम का उपयोग किया जाता है। हालांकि, इसके साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। रोगी को थकान और त्वचा में जलन की समस्या हो सकती है।

कीमोथेरपी

कीमोथेरेपी उपचार को मौखिक या नसों के माध्यम से दिया जाता है। बी-सेल लिम्फोमा के शुरुआती चरणों को कीमोथेरेपी के माध्यम से आसानी से ठीक किया जा सकता है। कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स में मतली, थकान और बालों के झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

इम्यून थेरपी

जैविक दवाएं आपके इम्यून सिस्टम को कैंसर से लड़ने में मदद करती हैं। रेडियोइम्यूनोथेरेपी की दवाएं मोनोक्लोनल एंटीबॉडी से बनी होती हैं। ये दवाएं भी प्रभावी हो सकती हैं।

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट

स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में एक स्वस्थ डोनर से प्राप्त बोन मैरो का ट्रांसप्लांट किया जाता है। इसके लिए सबसे पहले कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने और नए मज्जा के लिए जगह बनाने के लिए हाई डोज की कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरपी की आवश्यकता होती है। इसके बाद बोन मैरो का ट्रांसप्लांट किया जाता है। स्टेम सेल ट्रांसप्लांट के साइड इफेक्ट के रूप में संक्रमण या एनीमिया की समस्या हो सकती है।

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