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बवासीर से जुड़े सवाल और जवाब

सवाल लगभग 1 साल पहले

पाइल्स में खुजली रोकने के तरीके बताएं?

Dr. Gangaram Saini MD, MBBS

बवासीर में खुजली होने पर खरोंचना नहीं चाहिए। बार-बार खरोंचने से अंग विशेष में चोट लग सकती है, जिससे स्थिति और भी भयंकर हो सकती है। हालांकि कई बार खुजली करने की चाह इतनी तीव्र होती है कि सोते हुए भी मरीज खरोंचने लगता है। ऐसी सिचुएशन से बचने के लिए रात को सोने से पहले सूती के ग्लव्स पहनें। उस जगह को हमेशा साफ-सुथरा रखें। माइल्ड और एलर्जन फ्री (नरम और एलर्जी फ्री) साबुन और पानी का इस्तेमाल करें। इसके अलावा कुछ और उपायों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है जैसे-

  • खुजली से बचने के लिए बाथ टब में बैठें। बाथ टब को हल्के-गुनगुने पानी से भरें। ध्यान रखें पानी ज्यादा गर्म न हो और अगर पानी ज्यादा गर्म है, तो उसमें बिल्कुल न बैठें।
  • गुनगुने पानी में बैठने से गुदा रिलैक्स होगी और जख्म को ठीक होने में मदद मिलेगी। इस प्रक्रिया को दिन में दो बार दोहराएं।
  • कुछ विशेषज्ञ राहत के लिए गुनगुन पानी में बेकिंग सोडा मिलाने की सलाह भी देते हैं।
  • इसके अलावा आराम के लिए डाक्टर ओएंटमेंट या क्रीम भी गुदा में लगाने को देते हैं।

सवाल 12 महीना पहले

बवासीर से होने वाले नुकसान क्या हैं?

Dr. Kuldeep Meena MBBS, MD

इस बीमारी के होने से मरीज को कुछ नुकसान भी उठाने पड़ते हैं। मतलब यह कि मरीज मल त्याग करने के बावजूद हमेशा यही अनुभव करता है कि उसका पेट अभी साफ नहीं हुआ है। इसके अलावा बाहरी बवासीर जो गुदा के चारों ओर बनते हैं, रक्त को एकत्रित करते हैं, जिससे खून के थक्के जम जाते हैं। अतः मल त्यागने के दौरान तीव्र दर्द का अहसास होता है।

सवाल 11 महीना पहले

शिशु या बच्चों में बवासीर के लक्षण क्या हैं?

Dr. Vedprakash Verma MBBS

शिशु या छोटे बच्चों में बवासीर के लक्षण इस प्रकार हैं-

  • मल से बलगम निकलना।
  • मल त्यागने के दौरान बहुत ज्यादा रोना।
  • सख्त और सूखा स्टूल (मल) निकलना।
  • मल के साथ सुर्ख लाल खून निकलना।
  • एनल में कट लगना।

ध्यान रखें कि अगर शिशु के मल के साथ खून भी निकल रहा है तो उसे तुरंत डाक्टर को दिखाएं। कई बार यह बवासीर न होकर किसी अन्य बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

सवाल 11 महीना पहले

शिशु में बवासीर का इलाज क्या है ?

Dr. Amit Singh MBBS

छोटे बच्चों और शिशु को बवासीर बहुत कम होता है। आमतौर छोटे बच्चे और शिशु पूरी तरह मां के दूध पर निर्भर होते हैं, ऐसे में कब्ज होना आम बात होती है। इसके अलावा अगर छोटे बच्चे ने हाल फिलहाल में ही सख्त आहार का सेवन शुरू किया है तो इससे भी उन्हें कब्ज होने की आशंका बनी  रहती है। बड़े बच्चों में कब्ज होने की वजह पर्याप्त मात्रा में पानी न पीना, फाइबर न लेना और एक्सरसाइज न करना है। जहां तक छोटे बच्चे और शिशु में बवासीर के इलाज की बात है, इसके लिए उन्हें पर्याप्त पानी पिलाएं, मल त्यागने के दौरान ल्यूब्रिकेंट या पेट्रोलियम जेली का उपयोग करें, अंग विशेष को साफ करने के लिए साफ और नर्म कपड़े या टिश्यू का इस्तमेाल करें। शिशु की सफाई के दौरान उसे ध्यान से हिलाएं ताकि उसे दर्द न हो। इसके अलावा स्थिति ज्यादा गंभीर हो तो डाक्टर को दिखाएं।