कोलोरेक्टल कैंसर - Colorectal Cancer in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS

June 28, 2017

April 08, 2021

कोलोरेक्टल कैंसर

कोलोरेक्टल कैंसर क्या है?

आंत का कैंसर (colon cancer) और मलाशय कैंसर (rectal cancer) एक साथ हो सकते हैं, इसे "कोलोरेक्टल कैंसर" कहा जाता है। मलाशय कैंसर मलाशय में उत्पन्न होता है, जो गुदा के निकटतम बड़ी आंत का हिस्सा होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अमेरिका के सीडीसी (CDC) का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर के बाद दुनिया भर में होने वाला यह दूसरा सबसे आम कैंसर है।

कोलोरेक्टल कैंसर के अधिकतर मामले अडेनोमाटोस पॉलिप्स (adenomatous polyps) नामक कोशिकाओं के छोटे, कैंसर मुक्त गुच्छों के रूप में शुरू होते हैं। समय के साथ इनमें से कुछ पॉलिप्स कोलोरेक्टल कैंसर बन जाते हैं।

पॉलिप्स अक्सर छोटे होते हैं, और उनके होने के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। इसलिए डॉक्टर नियमित रूप से स्क्रीनिंग टेस्ट कराने का सुझाव देते हैं। ये टेस्ट कोलन कैंसर बनने से पहले पॉलिप्स की पहचान कर लेते हैं और कोलोरेक्टल कैंसर को रोकने में मदद करते हैं। 

कोलोरेक्टल कैंसर वीडियो - Colorectal Cancer video in Hindi

इस वीडियो में डॉ असित अरोरा कोलोरेक्टल कैंसर से जुड़ी सारी जानकारी दे रहे हैं। डॉ अरोरा एक सीनियर कैंसर विशेषज्ञ हैं जो कोलोरेक्टल कैंसर के स्पेशलिस्ट हैं। myUpchar से इस चर्चा में उन्होंने कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती लक्षण, कारण, इलाज, जांच और बचाव के तरीकों के बारे में बताया है।

कोलोरेक्टल कैंसर के लक्षण - Colorectal Cancer Symptoms in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर के संकेत और लक्षण

कोलोरेक्टल कैंसर,खासकर प्रारंभिक अवस्था में किसी विशेष लक्षण को प्रकट नहीं करता है। यदि आप लक्षणों का अनुभव करते हैं, तो इनमें शामिल हो सकते हैं –

डॉक्टर को कब दिखाएं?

इनमें से अधिकांश लक्षण अन्य संभावित स्थितियों की ओर भी संकेत कर सकते हैं, अतः रोगी को उचित निदान के लिए डॉक्टर से संपर्क करना बहुत आवश्यक है। कोई भी व्यक्ति जो चार हफ्तों तक इन लक्षणों में से कुछ का अनुभव करता है, उसे डॉक्टर को दिखाना चाहिए।  

कोलोरेक्टल कैंसर के कारण - Colorectal Cancer Causes in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर के कारण 

विशेषज्ञों का कहना है कि वे पूरी तरह से आश्वस्त नहीं हैं कि कोलोरेक्टल कैंसर क्यों होता है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में कोलोरेक्टल कैंसर के कई जोखिम कारकों की पहचान की गई है। 

कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम कारक 

जोखिम कारक वह होता है, जो किसी व्यक्ति में बीमारी विकसित करने की संभावना को बढ़ा सकता है।

कोलोरेक्टल कैंसर के जोखिम कारक हैं –

  • बुजुर्ग होना – आपकी उम्र जितनी अधिक होती है, जोखिम भी उतना ही बढ़ता है।
  • आहार में पशुओं से मिलने वाला प्रोटीनबहुत ज़्यादा होना। 
  • संतृप्त वसा (saturated fats) से भरपूर आहार। 
  • ऐसा भोजन, जिसमें फाइबर की मात्रा बहुत कम हो। 
  • आहार, जिसमें बहुत ज़्यादा कैलोरी हो। (और पढ़ें - खाने में कितनी कैलोरी होती हैं
  • बहुत ज़्यादा शराब पीना।  
  • जिन महिलाओं को स्तन कैंसर, अंडाशय कैंसर या गर्भाशय कैंसर रह चुका है। 
  • कोलोरेक्टल कैंसर का पारिवारिक इतिहास
  • अल्सरेटिव कोलाइटिस से ग्रस्त मरीज़ 
  • अधिक वजन / मोटापा  
  • धूम्रपान – इस अध्ययन में पाया गया कि कोलोरेक्टल कैंसर और उससे होने वाली मौत के जोखिम को बढ़ाने में धूम्रपान की विशेष भूमिका है। (और पढ़ें – धूम्रपान छोड़ने के घरेलू उपाय)
  • शारीरिक रूप से सुस्त होना। 
  • बृहदान्त्र (colon) या मलाशय में पॉलिप्स की उपस्थिति। अनुपचारित पॉलिप्स अंततः कैंसर बन सकते हैं।
  • क्रोहन रोग या इर्रिटेबल बाउल डिजीज के कारण कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

कोलोरेक्टल कैंसर से बचाव - Prevention of Colorectal Cancer in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर की रोकथाम 

हम कोलोरेक्टल कैंसर के विकास की संभावना कम करने के लिए बहुत कुछ कर सकते हैं –

  • नियमित जांच – विशेष रूप से यदि आपको पहले कोलोरेक्टल कैंसर रह चुका है, आपकी उम्र 60 वर्ष से अधिक है, इस प्रकार के कैंसर का एक पारिवारिक इतिहास है, आप क्रोहन रोग से पीड़ित हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि 50 वर्ष की आयु के बाद जांच कराना शुरू कर देना चाहिए।
  • पोषण – सुनिश्चित करें कि आपके आहार में भरपूर फाइबर, फल, सब्जियां और अच्छी गुणवत्ता वाले कार्बोहाइड्रेट हों। लाल मांस और संसाधित (processed) मांस के सेवन को सीमित कर दें या बंद कर दें। संतृप्त वसा के स्थान पर अच्छी गुणवत्ता वाले वसा, जैसे कि एवोकाडो, जैतून का तेल, मछली के तेल और मेवे का सेवन करें। हालांकि, इस अध्ययन में पाया गया कि यद्यपि शाकाहारी व्यक्तियों में कैंसर विकसित करने का जोखिम कम होता है, लेकिन कोलोरेक्टल कैंसर विकसित होने का खतरा मांस खाने वालों की तुलना में इन व्यक्तियों में अधिक है।
  • व्यायाम – नियमित रूप से व्यायाम करें। प्रतिदिन थोड़ा-थोड़ा व्यायाम करने से कोलोरेक्टल कैंसर के विकास का खतरा कम किया जा सकता है। (और पढ़ें - व्यायाम के फायदे)
  • शरीर का वज़न – अपने शरीर के वज़न को संतुलित बनाए रखें। अधिक वजन बढ़ने से या मोटापे के कारण व्यक्ति में कोलोरेक्टल कैंसर सहित अन्य कैंसर विकसित करने का जोखिम बढ़ जाता है।

कोलोरेक्टल कैंसर का परीक्षण - Diagnosis of Colorectal Cancer in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर का निदान किस तरह किया जाता है? 

कोलोरेक्टल कैंसर के शीघ्र निदान से इसका इलाज अच्छे तरीके से किया जा सकता है। चिकित्सक आपके मेडिकल और पारिवारिक इतिहास के बारे में जानकारी प्राप्त करने से शुरुआत करेंगे। वे एक शारीरिक परीक्षण भी करेंगे। डॉक्टर आपके पेट को दबाकर या गुदा परीक्षण द्वारा गांठों या पॉलिप्स की उपस्थिति निर्धारित कर सकते हैं।

1. रक्त परीक्षण

डॉक्टर आपके लक्षणों के कारण का पता लगाने के लिए कुछ रक्त परीक्षण कर सकते हैं। यद्यपि कोई रक्त परीक्षण नहीं है, जो विशेष रूप से कोलोरेक्टल कैंसर, लिवर के कार्य की जांच करता है। पूर्ण रक्त गणना (CBC) परीक्षण द्वारा अन्य रोगों और विकारों को दूर किया जा सकता है।

2. कोलोनोस्कोपी 

कोलोनोस्कोपी में आपके बृहदान्त्र की जांच के लिए कैमरे से जुड़ी एक लंबी ट्यूब का इस्तेमाल किया जाता है। इस प्रक्रिया द्वारा डॉक्टर आपके बृहदान्त्र और मलाशय का निरीक्षण करते हैं और असामान्यताओं को लिख लेते हैं। एक कोलोनोस्कोपी आपके डॉक्टर को असामान्य हिस्सों से उत्तक को निकालने में सक्षम बनाती है, ताकि वे उन्हें विश्लेषण के लिए एक प्रयोगशाला में भेज सकें।

3. एक्स-रे

आपके चिकित्सक एक्स-रे के लिए बेरियम नामक रेडियोधर्मी तरल का उपयोग कर सकते हैं। डॉक्टर एक एनीमा के माध्यम से आँतों में इस तरल को डालेंगे। तरल के आँतों में जाने के बाद यह बृहदान्त्र की परतों पर आवरण बना लेता है और एक रूपरेखा प्रदान करता है, ताकि एक एक्स-रे लिया जा सके।

4. सीटी स्कैन

सीटी स्कैन द्वारा आपके बृहदान्त्र की एक विस्तृत छवि चिकित्सक को प्राप्त होती है। कोलोरेक्टल कैंसर के मामले में, आभासी कोलोनोस्कोपी (वर्चुअल कोलोनोस्कोपी) नामक एक अन्य सीटी स्कैन किया जाता है।  

कोलोरेक्टल कैंसर का इलाज - Colorectal Cancer Treatment in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर का इलाज कैसा होता है?

कोलोरेक्टल कैंसर का उपचार विभिन्न कारकों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, आपके संपूर्ण स्वास्थ्य की स्थिति और कोलोरेक्टल कैंसर का चरण आपके डॉक्टर को एक प्रभावी उपचार योजना बनाने में मदद करेंगे।

सर्जरी

कोलोरेक्टल कैंसर के शुरुआती चरण में, आपके सर्जन द्वारा सर्जरी के माध्यम से कैंसरयुक्त पॉलिप्स को निकालना संभव हो सकता है। सर्जरी के दौरान, यदि पोलिप आंत की सतह से संलग्न (attach) नहीं होता है, तो आपकी सर्जरी के सफल होने की संभावना बढ़ जाएगी।

यदि आपका कैंसर आंत की भित्तियों में फैल गया है, तो आपके सर्जन को बृहदान्त्र या मलाशय के एक हिस्से के साथ उसके आसपास मौजूद लिम्फ नोड्स को निकालने की आवश्यकता हो सकती है। यदि संभव हो, तो आपके सर्जन बृहदान्त्र के शेष स्वस्थ भाग को मलाशय में पुनः जोड़ देंगे। यदि ऐसा संभव नहीं है, तो वे कोलोस्टॉमी कर सकते हैं। इसमें अपशिष्ट को निकालने के लिए उदर भित्ति (abdominal wall) की बनावट में एक विशेष बदलाव कर दिया जाता है। एक कोलोस्टॉमी आमतौर पर अस्थायी होती है।

कीमोथेरेपी 

कीमोथेरेपी में कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने वाली दवाओं का उपयोग किया जाता है। कोलोरेक्टल कैंसर के मामले में, सर्जरी के बाद बची रह जाने वाली कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए कीमोथेरेपी एक सामान्य उपचार है। कीमोथेरेपी आपके ट्यूमर के विकास को नियंत्रित करती है और कैंसर के अंतिम चरण के लक्षणों से राहत प्रदान करती है।

रेडिएशन 

रेडिएशन थेरेपी में सर्जरी से पहले और बाद में कैंसर कोशिकाओं को पहचानने और नष्ट करने के लिए एक्स रे में इस्तेमाल होने वाली एक शक्तिशाली ऊर्जा किरण (beam of energy) का उपयोग किया जाता है। रेडिएशन उपचार सामान्यतः कीमोथेरेपी के साथ होता है।

दवाएं 

सितंबर, 2012 में संयुक्त राज्य अमेरिका की संस्था फ़ूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने मेटास्टेटिक कैंसर या अंतिम चरण के कोलोरेक्टल कैंसर जो कि अन्य प्रकार के उपचार के लिए कोई प्रतिक्रिया नहीं देते और शरीर के अन्य भागों में फैल जाते हैं – के उपचार के लिए स्टीवार्गा - Stivarga दवा (रेगोराफेनिब) को मंजूरी दे दी। यह दवा कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले एंजाइमों को अवरुद्ध करती है।

कोलोरेक्टल कैंसर के प्रकार - Types of Colorectal Cancer in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर के दो प्रकार हैं 

  1. बृहदान्त्र कैंसर (Colon Cancer): बड़ी आंत – जो आपके पाचन तंत्र का निचला हिस्सा होता है – का कैंसर है।
  2. मलाशय कैंसर (Rectal Cancer): बृहदान्त्र के कई इंच लम्बे अंतिम सिरे का कैंसर है।

इन दोनों को अक्सर "कोलोरेक्टल कैंसर" कहा जाता है।

कोलोरेक्टल कैंसर के चरण - Stages of Colorectal Cancer in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर के चरण

आपका कैंसर कितना फैल चुका है, यह पता लगाने के लिए डॉक्टर स्टेजिंग का उपयोग कर सकते हैं।  चिकित्सक के लिए आपके कैंसर के स्तर को जानना बहुत महत्वपूर्ण है, ताकि वे आपके लिए सबसे अच्छी उपचार योजना तैयार कर सकें और आपके ठीक होने में लगने वाले समय का एक अनुमान बता सकें। कोलोरेक्टल कैंसर का चरण -1 सबसे प्रारंभिक अवस्था है। अवस्था चरण -4 तक प्रगति कर सकती है, जो कि सबसे अंतिम चरण है। कोलोरेक्टल कैंसर के निम्न चरण हैं –

  • स्टेज I कैंसर बृहदान्त्र या मलाशय के चारों ओर स्थित झिल्ली में प्रवेश करता है, लेकिन अंगों की भित्तियों (walls) में नहीं फैलता है।
  • स्टेज 2 कैंसर बृहदान्त्र या मलाशय की भित्तियों में फैल जाता है, लेकिन अभी भी लसीका ग्रंथियों (लिम्फ नोड्स) या आसपास के ऊतकों को प्रभावित नहीं करता है।
  • स्टेज 3 कैंसर लसीका ग्रंथियों में फैल जाता है, लेकिन अभी तक शरीर के अन्य हिस्सों तक नहीं पहुँचता। आमतौर पर, इस स्तर पर एक से तीन लिम्फ नोड्स शामिल होते हैं।
  • स्टेज 4 कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैल जाता है, जैसे लिवर या फेफड़े।


संदर्भ

  1. Patil PS, Saklani A, Gambhire P, Mehta S, Engineer R, De'Souza A, Chopra S, Bal M. Colorectal Cancer in India: An Audit from a Tertiary Center in a Low Prevalence Area. Indian J Surg Oncol. 2017 Dec;8(4):484-490. PMID: 29203978
  2. B. Meyer, Chandrakanth Are. Current Status and Future Directions in Colorectal Cancer. December 2018, Volume 9, Issue 4
  3. Granados-Romero JJ et al. Colorectal cancer: a review. Int J Res Med Sci. 2017 Nov;5(11):4667-4676
  4. Indian Council of Medical Research. Consensus document for management of colorectal cancer . Division of Non Communicable Diseases; Delhi, India.
  5. American Cancer Society [internet]. Atlanta (GA), USA; About Colorectal Cancer

कोलोरेक्टल कैंसर के डॉक्टर

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कोलोरेक्टल कैंसर की दवा - Medicines for Colorectal Cancer in Hindi

कोलोरेक्टल कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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