अल्जाइमर एक ऐसा रोग है, जो याददाश्त और अन्य महत्वपूर्ण मानसिक कार्यों को बाधित करता है। यह डिमेंशिया यानी मनोभ्रंश का सबसे आम कारण है, जिससे हमारी बौद्धिक क्षमता काफी हद तक प्रभावित होती है। ये परिवर्तन हमारे दैनिक जीवन के लिए खराब साबित हो सकते हैं। हालांकि, वर्तमान में इस बीमारी के स्थाई इलाज को लेकर कोई दवा उपलब्ध नहीं है। लेकिन वैज्ञानिक इस कोशिश में जुटे हैं, ताकि अल्जाइमर रोग का पूरी तरह से इलाज हो सके। इसी कड़ी में शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर के लिए एक संभावित दवा विकसित की है। हालांकि, इस दवा के अप्रुवल को लेकर दो दशकों का सबसे बड़ा फैसला धुंधला दिखाई दे रहा है। क्योंकि अमेरिकी रेगुलेटरी इस विचार में है कि इसे अल्जाइमर की पहली दवा के रूप में मंजूरी दी जाए या नहीं। दरअसल निर्माताओं ने दावा किया है कि इस ड्रग (आदुकानुमाब- aducanumab) से अल्जाइमर के कारण मानसिक क्षमता की कमी (जो कि मनोभ्रंश का सबसे आम रूप है) में सुधार किया जा सकता है।

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मानसिक गिरावट की दर को धीमा करती है दवा- वैज्ञानिक
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार आदुकानुमाब दवा पर सलाह देने के लिए बाहरी विशेषज्ञों के एक पैनल ने बीते शुक्रवार को खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) से मुलाकात की। हालांकि, एफडीए हमेशा पैनल की सलाह का पालन नहीं करता है लेकिन आमतौर पर सही फैसला लेने तक इसे बनाए रखता है। दरअसल यह दवा कैम्ब्रिज, मैसाचुसेट्स स्थित बायोजन इंक और जापान की फार्मास्युटिकल कंपनी इज़ायी को (Eisai Co.) के सहयोग से तैयार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक यह दवा अल्जाइमर का इलाज नहीं करती है। बल्कि ऐसा दावा किया गया है कि यह मानसिक गिरावट की दर को थोड़ा धीमा कर करती है।

गौरतलब है कि दोनों कंपनियों ने पिछले साल दो अध्ययनों को रोक दिया था, क्योंकि दवा का सकारात्मक प्रभाव नहीं दिखाई दिया था। हालांकि, कुछ वक्त के बाद कहा गया कि एक अध्ययन में दवा से जुड़े अतिरिक्त परिणाम उच्च खुराक के साथ प्रभावी थे। लेकिन परिणाम अब भी किसी मेडिकल जर्नल में प्रकाशित नहीं हुए हैं। बीते बुधवार को जारी एफडीए स्टाफ की एक रिपोर्ट में कहा गया कि सकारात्मक अध्ययन को "असाधारण प्रेरक" यानी मजबूत साक्ष्य के तौर पर देखा जा सकता है। लेकिन एफडीए के सांख्यिकीविद् को इसके परिणामों और संभावित सुरक्षा मुद्दों में खामियां नजर आईं। दूसरी ओर उपभोक्ता समूह पब्लिक सिटीजन ने चेतावनी देते हुए कहा कि दवा बहुत महंगी होने की संभावना है और मरीजों को झूठी उम्मीद देते हुए हमारी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को बाधित कर सकती है।

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क्या कहते हैं अल्जाइमर बीमारी से जुड़े आंकड़े?
आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो अमेरिका में 50 लाख (5 मिलियन) से अधिक लोग और दुनिया भर में एक बड़ा तबगा अल्जाइमर से पीड़ित है। चूंकि वर्तमान में दवाएं केवल अस्थायी रूप से लक्षणों को कम करती हैं। इससे जुड़ी आखिरी दवा को लगभग दो दशक (20 साल) पहले अनुमोदित किया था। एफडीए मूल्यांकन सुरक्षा और प्रभावशीलता पर केंद्रित है। लेकिन अल्जाइमर एसोसिएशन समेत बाकी समर्थक दवा के अप्रुवल के फैसले पर जोर दे रहे हैं।  

अल्जाइमर के ड्रग डिस्कवरी फाउंडेशन के मुख्य विज्ञान अधिकारी और बायोजन के कंसलटेंट डॉ. हॉवर्ड फिलिट का कहना है "यह एक कठिन फैसला है। हालांकि, फर्क नहीं पड़ता कि दवा कैसे मनोभ्रंश को कम करने का काम करती है, लेकिन मुझे लगता है कि यह विवाद का हिस्सा हो सकता है।"

कैसे काम करती है दवा?
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस दवा आदुकानुमाब का लक्ष्य मस्तिष्क से बीटा-एमीलॉइड नामक प्रोटीन के हानिकारक थक्कों को नष्ट करना है। अन्य एक्सपेरिमेंटल दवाओं ने ऐसा किया है, लेकिन इससे मरीजों की सोचने, खुद की देखभाल करने या स्वतंत्र रूप से जीने की क्षमता पर कोई फर्क नहीं पड़ा। यह जीवित कोशिकाओं से बनी बायोटेक दवा है और ऐसी दवाएं बहुत महंगी होती हैं। लेकिन दवा के लिए कोई अभी कीमत का अनुमान नहीं लगाया गया है, जिसे महीने में एक बार दिया जाता है।

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