डिमेंशिया या मनोभ्रंश क्या है?

डिमेंशिया सामान्य रूप से मानसिक क्षमता में आई कमी को कहते हैं, जिसमे सोचने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे दैनिक जीवन में काफी प्रभाव पड़ता है।

डिमेंशिया एक बीमारी नहीं है बल्कि एक सिंड्रोम (Syndrome/ किसी रोग में कईं लक्षणों का एक साथ होना) है, जिसके लक्षण कई मस्तिष्क रोगों में आम होते हैं। इसके लक्षणों में स्मरण शक्ति में कमीं, सोचने में कठिनाई, समस्याओं को ना सुलझा पाना और शब्दों के चुनाव में कठिनाई शामिल है। यह रोज की गतिविधियों को करने के लिए किसी व्यक्ति की क्षमता को कम कर देती है। डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के मूड व व्यवहार में बदलाव हो जाता है। सामान्य रूप से यह उम्र बढ़ने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ती जाती है।

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अंत में डिमेंशिया रोज की जाने वाली गतिविधियों को पूरा करने की क्षमता को पूरी तरह से खत्म कर देता है, जैसे कि ड्राइविंग, घर के कामकाज और यहां तक ​​कि व्यक्तिगत देखभाल जैसे स्नान करना, कपड़े पहनना और खाना भी इसमें शामिल है। डिमेंशिया से पीड़ित होने की संभावना उम्र के साथ बढ़ जाती है। अक्सर डिमेंशिया आधी जिंदगी खत्म होने के बाद होता है, ज्यादातर 65 वर्ष के बाद। 

डिमेंशिया के कुछ प्रकार उपचार करने पर काफी या पूरी तरह ठीक हो सकते हैं। इसके ठीक होने के परिणाम अक्सर इस बात पर निर्भर करते हैं कि कितनी जल्दी इसके होने के कारण का पता किया गया है और इसका इलाज शुरू किया गया है। दूसरे प्रकार के डिमेंशिया अपरिवर्तनीय होते हैं, जिन्हें ठीक नहीं किया जा सकता और इसका सबसे आम प्रकार अल्जाइमर रोग है।

डिप्रेशन के लक्षण बिलकुल डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण की तरह हो सकते हैं जिसका इलाज एंटी डिप्रेस्सेंट दवाओं से किया जाता है।

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  1. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के प्रकार - Types of Dementia in Hindi
  2. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के चरण - Stages of Dementia in Hindi
  3. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लक्षण - Dementia Symptoms in Hindi
  4. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के कारण और जोखिम कारक - Dementia Causes & Risk Factors in Hindi
  5. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) से बचाव - Prevention of Dementia in Hindi
  6. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का परीक्षण - Diagnosis of Dementia in Hindi
  7. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) का इलाज - Dementia Treatment in Hindi
  8. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) की जटिलताएं - Dementia Complications in Hindi
  9. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) में परहेज - What to avoid during Dementia in Hindi?
  10. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Dementia in Hindi?
  11. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) की दवा - Medicines for Dementia in Hindi
  12. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) की दवा - OTC Medicines for Dementia in Hindi
  13. डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के डॉक्टर

डिमेंशिया के प्रकार:
 
डिमेंशिया के लक्षण और इसका बढ़ना इस बात पर निर्भर करता है कि किस व्यक्ति को कौन से प्रकार का डिमेंशिया है। 

कुछ सामान्य रूप के डिमेंशिया जिसका निदान किया जा सकता है, उसमें निम्नलिखित शामिल है -

  1. अल्जाइमर रोग
    अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम प्रकार है। 60 से 80 प्रतिशत मामलों में अल्जाइमर रोग होता है। यह आम तौर पर धीरे-धीरे बढ़ता है। इसके निदान के बाद व्यक्ति सामान्यतः 4 से 8 वर्षो तक जिन्दा रहता है, मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो इसके निदान के बाद करीब 20 साल तक जिन्दा रहते हैं। अल्जाइमर रोग होने का कारण दिमाग में परिवर्तन होता है जिसमें कुछ प्रोटीन का निर्माण होता है जो तंत्रिका को नुकसान पहुंचाता हैं।
     
  2. लेवी बॉडीज डिमेंशिया
    यह डिमेंशिया का एक रूप है जो कोर्टेक्स में प्रोटीन के एकत्र होने के कारण होता है। याददाश्त में कमी और भ्रम के अलावा, लेवी बॉडीज डिमेंशिया कुछ अन्य स्थिति भी पैदा कर सकता है, जैसे कि-
    • नींद संबंधी परेशानियां,
    • वहम,
    • असंतुलन,
    • अन्य गतिविधियों में कठिनाई इत्यादि।
       
  3. वैस्कुलर डिमेंशिया:
    वैस्कुलर डिमेंशिया, जिसे पोस्ट स्ट्रोक या मल्टी-इन्फर्क्ट (multi-infarct) डिमेंशिया भी कहा जाता है। यह डिमेंशिया के लगभग 10 प्रतिशत मामलों में होता है। यह रक्त वाहिकाओं के रूक जाने के कारण होता है इसके अलावा स्ट्रोक या मस्तिष्क में अन्य किसी प्रकार की चोट लगने के कारण भी ऐसा हो सकता है।
     
  4. पार्किंसंस रोग
    पार्किंसंस रोग एक न्यूरोडीजेनेरेटिव अवस्था (ऐसी स्थिति जिसमें तंत्रिका तंत्र को क्षति पहुँचती है) होती है जो डिमेंशिया पैदा कर सकती है और बाद के चरणों में अल्जाइमर के जैसे भी काम कर सकती है। इस बीमारी के कारण अन्य गतिविधियों और गाड़ी आदि चलाने में कठिनाई होने लगती है। मगर इसके कारण कुछ लोगों को डिमेंशिया भी हो जाता है।
     
  5. फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया:
    फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया, इसके एक समूह को दर्शाता है जो अक्सर व्यक्तित्व और व्यवहार में परिवर्तन का कारण होता है। इससे भाषा समझने या बोलने में भी कठिनाई हो सकती है। पिक रोग (Pick's Disease) और प्रगतिशील सुपरन्यूक्लियर पाल्सी (Progressive Supranuclear Palsy) सहित कई परिस्थितियों के कारण फ्रंटोटेमपोरल डिमेंशिया हो सकता है।
     
  6. मिश्रित डिमेंशिया:
    यह एक ऐसे प्रकार का डिमेंशिया है जिसमें कई प्रकार के अन्य डिमेंशिया शामिल होते हैं, जिससे मस्तिष्क में असामान्यताएं पैदा हो जाती हैं। यह सबसे अधिक अल्जाइमर और वैस्कुलर डिमेंशिया में होता है, लेकिन इसमें अन्य प्रकार के डिमेंशिया भी शामिल रहते हैं।

डिमेंशिया के चरण क्या होते हैं?

डिमेंशिया के 7 चरण होते हैं, जो कि इस प्रकार हैं -

  • स्टेज 1: कोई संज्ञानात्मक कमी नहीं
    चरण 1 में, व्यक्ति सामान्य रूप से कार्य करता है, इसमें कोई मानसिक हानि नहीं होती है, वह मानसिक रूप से स्वस्थ होते है। जिन लोगों को डिमेंशिया नहीं होता है उन्हें इस चरण में रखा जाता है। 
     
  • स्टेज 2: बहुत हल्की संज्ञानात्मक कमी
    स्टेज 2 में सामान्य भूलने की बीमारी होती है, जिसे उम्र के साथ जोड़ा गया है। उदाहरण के लिए, नामों को भूलना और परिचित वस्तुओं को भूलना। आमतौर पर इसके लक्षण प्रियजनों, परिवार या रोगी के डॉक्टर के सामने भी स्पष्ट नहीं होते हैं।
     
  • स्टेज 3: हल्की संज्ञानात्मक कमी
    इस चरण में भूलने की बीमारी बढ़ जाती है, साथ ही ध्यान देने में कठीनाइयां और काम के प्रदर्शन में कमी होना भी इसमें शामिल है। इस चरण में लोग अक्सर चीज़ों को भूलते रहते हैं और सही शब्दो का चुनाव भी नहीं कर पाते हैं। इस स्तर तक पहुंचने के बाद रोगी के प्रियजनों और परिवार को इससे जुड़ी समस्याओं का तब पता चलता है जब वह कहीं नए स्थान पर जाते है। ध्यान दे कि शोधकर्ता इस चरण को या तो पहले चरण में या फिर तीसरे चरण के पहले चरण में (प्रारंभिक, मध्यम या गंभीर स्टेजिंग सिस्टम) में शामिल करेंगे।
     
  • स्टेज 4 मध्यम संज्ञात्मक कमी
    इस स्थिति में डिमेंशिया से ग्रस्त लोगों को ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है, उन्हें हाल में हुई घटनाएं याद नहीं रहती और पैसे आदि प्रबंध करने के मामलों में, अकेले नए स्थानों पर यात्रा करने जैसे कामों में कठिनाई आती है। संबंधित लोगों को जटिल कार्यों को पूरा करने में परेशानी होती है क्योंकि उनकी मानसिक क्षमता इसे इंकार कर देती हैं। ऐसे लोग खुद को इस कारण दोस्तों और परिवार वालो से दूर रखना शुरू कर देते हैं क्योंकि सामाजिकता उनके लिए मुश्किल होने लगती है। डॉक्टर मरीज के इंटरव्यू के दौरान उसके बोलने के तरीके, शारीरिक परीक्षण एवं डिमेंशिया के टेस्ट लेकर उसकी बीमारी का पता लगा सकते हैं।
     
  • स्टेज 5: मध्यम गहन संज्ञानात्मक कमी
    चरण 5 के लोगो में याददाश्त की बहुत ज्यादा कमी होना शुरू हो जाती हैं जिससे उनको अपनी गतिविधियों को पूरा करने के लिए किसी अन्य व्यक्ति की सहायता लेनी पड़ती है (उदाहरण के लिए, ड्रेसिंग, स्नान, भोजन बनाना)। इसमें याददाश्त में कमी होना ही प्रमुख कारण होता है और आगे जाकर इसमें याददाश्त खोना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो सकती है। उदाहरण के लिए, जैसे ग्रसित व्यक्ति को अपना पता याद ना होना या फ़ोन नंबर याद नहीं रहना और ऐसा भी हो सकता की उन्हें दिन या टाइम या फिर वो वर्तमान में कहाँ है यह भी याद नहीं रहता है।
     
  • स्टेज 6: गंभीर संज्ञानात्मक कमी (मध्यम पागलपन)
    इस चरण के लोगों में, खुद कपड़े पहनने जैसी दैनिक गतिविधियों को पूरा करने के लिए व्यापक सहायता की आवश्यकता होती है। ऐसे में मरीज अपने करीबी रिश्तेदारों के नाम तक भी भूलना शुरू कर देते हैं और ताजा हुई घटनाओं के बारे में भी बहुत ही कम याद रख पाते हैं। कुछ रोगियों को बस अपने पहले जीवन का विवरण याद रहता है। उन्हें 10 से नीचे की गिनती गिनने में भी कठिनाई होती है। इस चरण में मूत्र असंयमिता (मूत्राशय या आंतों के नियंत्रण में कमी) भी एक समस्या है। सही बोलने की क्षमता में भी कमी आ जाती है। व्यक्तित्व में बदलाव में, वहम (कुछ ऐसी चीज़ को सच समझना जो हो ही नहीं), विवशता (एक काम को बार-बार दोहराना, जैसे सफाई) या चिंता और उत्तेजना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
     
  • स्टेज 7: बहुत गंभीर संज्ञानात्मक कमी
    इस स्तर के लोग वास्तव में बोलने या बातचीत करने की क्षमता खो देते हैं। उन्हें सारे सामान्य दैनिक गतिविधियां (जैसे शौचालय का उपयोग करना, खाने) को पूरा करने के लिए सहायक की आवश्यकता होती है। वे अक्सर मनोप्रेरणात्मक कौशल खो देते हैं, उदाहरण के लिए, चलना या कुर्सी पर बैठने की क्षमता आदि।

डिमेंशिया के लक्षण क्या होते हैं?

डिमेंशिया से पीड़ित लोगो को नीचे बताए गए लक्षणों में से कोई भी लक्षण अनुभव हो सकता है, ज्यादातर मस्तिष्क में क्षति के कारण होते हैं - इनमें में कुछ लोग अपने लक्षण को खुद ही देख सकते हैं -   

  • हाल ही में याददाश्त खोना - इसका संकेत ये होगा कि बार-बार एक ही सवाल का पूछना।
  • घरेलू कार्यों को पूरा करने में कठिनाई - उदाहरण के लिए, चाय या कॉफी बनाना या खाना बनाना। 
  • बातचीत करने में समस्या - भाषा के साथ कठिनाई; सरल शब्दों को भूलना और उसके जगह गलत शब्दो का उपयोग करना। 
  • भटक जाना - किसी पुरानी जानी-पहचानी गली या सड़क को भूल जाना 
  • संक्षेप में सोचने की समस्या - उदाहरण के लिए, पैसो का लेन देन। 
  • चीजों को रखकर भूलना - उदाहरण के लिए, उन स्थानों को भूलना जहाँ पर रोज इस्तेमाल करने वाले सामान रखे हो जैसे की चाभी या पर्स। 
  • मूड या व्यवहार बदलना - दृष्टिकोण या स्वभाव में अचानक परिवर्तन आना। (और पढ़ें - मूड अच्छा बनाने के लिये क्या खाएं)
  • व्यक्तित्व में बदलाव - जैसे कि चिड़चिड़ा, संदिग्ध या भयभीत होना। 
  • पहल करने में झिजक - किसी चीज़ को शुरू करना में या फिर कहीं जाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाना।

(और पढ़ें - डर का इलाज)

डिमेंशिया क्यों होता है?

डिमेंशिया आमतौर पर सेरेब्रल कॉर्टेक्स (Cerebral Cortex) में गड़बड़ी के कारण होता है, जो मस्तिष्क का एक हिस्सा होता है। यह विचार करने, निर्णय लेने और व्यक्तित्व को कायम रखने का भी काम करता है। जब इन हिस्सों में मस्तिष्क कोशिकाएं नष्ट हो जाती है तो यह संज्ञानात्मक दोष का कारण बन जाता है, जो डिमेंशिया की विशेषता है।

डिमेंशिया के कुछ ऐसे कारण जिससे इसके होने का जोखिम बढ़ जाता है, जैसे -

डिमेंशिया के दो प्रमुख कारक हैं अल्जाइमर रोग (तंत्रिका कोशिकाओं में लगातार नुकसान होना जिसके कारण का स्थायी रूप से पता न होना) और वैस्कुलर डिमेंशिया (लगातार छोटे स्ट्रोक्स के कारण दिमाग के कार्यों में नुकसान होना) -

  1. अल्जाइमर रोग
    अल्जाइमर रोग डिमेंशिया का सबसे आम रूप होता है, जिसके लक्षण अपरिवर्तनीय होते हैं। अल्जाइमर, मस्तिष्क में असामान्य रूप से प्रोटीन जमा होने के कारण, मस्तिष्क कोशिकाओं को नष्ट कर देता है। जिनका काम मस्तिष्क के क्षेत्र में मानसिक कार्यों को नियंत्रित करना होता है।
     
  2. वैस्कुलर डिमेंशिया
    यह डिमेंशिया का दूसरा सबसे बड़ा प्रकार है। यह डिमेंशिया एथेरोस्क्लेरोसिस (जिसमे वसा, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थ आर्टरी की परत के अंदर और बाहर जम जाता है)। इन रुकावटों के वजह से मस्तिष्क में खून का प्रवाह रुक जाता है, जिसकी वजह से कई स्ट्रोक आने की संभावना रहती है। 

    वैस्कुलर डिमेंशिया को आमतौर पर हाई बीपी, हाई कोलेस्ट्रॉल, ह्रदय रोग, शुगर की बीमारी (डायबिटीज) आदि से संबंधित माना जाता है। इन बीमारियों का इलाज करने से वैस्कुलर डिमेंशिया को बढ़ने से रोका जा सकता है लेकिन इसके कारण से मस्तिष्क की रूकी हुई कार्यप्रणाली को फिर से चलाना संभव नहीं है।​

अन्य कारण
अन्य अपरिवर्तनीय चिकित्सा स्थिति भी डिमेंशिया (बहुत कम दर पर) पैदा कर सकती हैं, जिसका उदाहरण पार्किंसंस रोग है। 

डिमेंशिया होने के जोखिम कारक क्या होते हैं?

  1. उम्र बढ़ना
    उम्र डिमेंशिया के लिए सबसे मजबूत जोखिम कारक माना जाता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है वैसे ही डिमेंशिया बढ़ने की संभावना बढ़ रहती है। उम्र बढ़ने से जुड़े जोखिम कारक हैं -
    • हाई बीपी, हृदय रोग और स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाना।
    • मध्य जीवन के बाद तंत्रिका कोशिकाओं, डीएनए, सेल संरचना में परिवर्तन और सेक्स हार्मोन में कमी आना। (और पढ़ें - sex karne ke tarike)
    • शरीर की प्राकृतिक आरोग्य प्रणाली का कमजोर हो जाना
    • प्रतिरक्षा प्रणाली में परिवर्तन
       
  2. लिंग
    पुरुषों और महिलाओं को डिमेंशिया होने का समान जोखिम होता है। वैस्कुलर डिमेंशिया का जोखिम पुरुषो में महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक होता है। इसका कारण यह है कि पुरुषों में स्ट्रोक और हृदय रोग होने की संभावना अधिक होती है, जो वैस्कुलर और मिक्स्ड डिमेंशिया पैदा कर सकता है।
     
  3. जेनेटिक्स
    डिमेंशिया के विकास में जीन की भूमिका अभी तक पूरी तरह से समझा नहीं गया है, लेकिन हाल के वर्षों में शोधकर्ताओं ने काफी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त की हैं।
     
  4. जातीयता
    ऐसे कुछ सबूतों के तौर पर, कुछ नस्लीय समुदायों के लोगों को दूसरों की तुलना में डिमेंशिया का ज्यादा जोखिम होता है। उदाहरण के तौर पर जैसे कि दक्षिण एशिया के लोग।
     
  5. लाइफस्टाइल कारक
    • शारीरिक आलस्य - यह डिमेंशिया विकसित करने के लिए सबसे प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। इससे हृदय रोग, स्ट्रोक और टाइप 2 मधुमेह (Diabetes) के बढ़ते खतरों से भी जोड़ा गया है।
    • अत्यधिक शराब - नियमित रूप से अल्कोहॉल पीने से एक व्यक्ति में डिमेंशिया का जोखिम बढ़ जाता है। जिसमे अल्जाइमर रोग और वैस्कुलर डिमेंशिया के होने का जोखिम शामिल है। 
    • धूम्रपान - धूम्रपान मस्तिष्क में रक्त वाहिकाओं सहित फेफड़ों और संवहनी वैस्कुलर सिस्टम को अत्यधिक हानि पहुंचाता है। धूम्रपान करने से बाद के जीवन में कभी भी डिमेंशिया विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर अल्जाइमर रोग के विकसित होने का। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के उपाय)
    • सिर की चोट - सिर पर एक गंभीर वार, विशेष रूप से सिर पर पटका जाना या सिर के बल गिर जाना - ऐसी स्थिति में आगे जीवन में किसी भी समय डिमेंशिया का खतरा बढ़ जाता है।

डिमेंशिया होने से कैसे रोक सकते हैं?

डिमेंशिया से बचने के लिए कोई टीका नहीं है।

फिर भी स्वस्थ जीवनशैली के विकल्प जैसे - स्वास्थ्य आहार, व्यायाम, बौद्धिक और सामाजिक गतिविधि आदि, डिमेंशिया होने के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते है। हालांकि, इसकी कोई गारंटी नहीं है कि ये रोकथाम के उपाय हर व्यक्ति के लिए काम करेंगें। इनमें से किसी की भी  वैज्ञानिक रूप से पुष्टि नहीं मिल पाई है।

1. आहार / पोषण -

शोध के अनुसार, 'स्वस्थ-मस्तिष्क' संबंधी आहार के सेवन से डिमेंशिया होने के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके तहत फल, सब्जियां, साबुत अनाज, अन्य मिश्रित कार्बोहाइड्रेट, पोटेशियम, कैल्शियम, फाइबर और मैग्नीशियम का ज्यादा सेवन करें। सप्लिमेंट्स जैसे विटामिन बी 12, विटामिन सी, विटामिन ई और फोलेट, एक स्वस्थ दिमाग बनाए रखने में मदद करते हैं। अगर संभव हो तो ऐसे भोजन का सेवन करें जिनसे सीधे इन पोषक तत्वों की प्राप्ति हो। 

2. व्यायाम -

नियमित रूप से व्यायाम करना और उसकी आदत बनाएं रखना, जीवनशैली में बदलाव लाता है। जब मस्तिष्क के स्वास्थ्य की बात आती है तो बहुत ज्यादा व्यायाम करने की जरूरत नहीं होती और ज्यादा लाभ के लिए ज्यादा समय लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ती। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह नियमित आधार पर किया जाना चाहिए (जैसे, अधिकतर लोगों के लिए प्रति दिन 30 मिनट बेहतर परिणाम के लिए पर्याप्त है।)

कार्डियोवास्कुलर व्यायाम (Cardiovascular exercise- वह व्यायाम जो आपके दिल की पम्पिंग बल को मजबूत करता है, जैसे कि तैरना, पैदल चलना, दौड़ना और साइकिल चलाना) और रेजिस्टेंस ट्रेनिंग (Resistance training; जैसे कि वजन उठाना जो मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करता है) ये स्वास्थ्य के लिए सबसे बेहतर व्यायाम में से एक हैं।

व्यायाम काफी फायदेमंद होते है क्योंकि यह मस्तिष्क तक पहुंचने वाले रक्त प्रवाह को बढ़ाते हैं और वास्कुलर डिमेंशिया होने के जोखिम को कम करते हैं। नियमित शारीरिक व्यायाम हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है, जो मस्तिष्क सेल के अस्तित्व को बनाए रखने वाले जरूरी रसायनों को उत्तेजित करता है। इस प्रकार, यह डिमेंशिया को शुरु होने से रोक सकता है।

(और पढ़ें - फिट रहने के लिए एक्सरसाइज)

3. मानसिक गतिविधि -

मानसिक व्यायाम करने से अल्जाइमर होने के जोखिम को कम किया जा सकता है। मस्तिष्क को सक्रिय रखने से मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच संपर्क को मजबूत किया जा सकता है और साथ ही मानसिक शक्ति को बढ़ाया जा सकता है।

मानसिक रूप से सक्रिय रहने के लिए आजीवन सीखने के विचार का होना महत्वपूर्ण है। इसका मतलब यह है कि हमेशा नई चीजें सीखे, पुराने कार्यों को दोबारा करने के बजाय कुछ नया करने का अनुभव करना चाहिए। अलग-अलग और नई चीज़े दिमाग को तेज रखती हैं और स्वस्थ मस्तिष्क की तरफ बढ़ावा देती हैं।

(और पढ़ें - दिमाग तेज करने के तरीके)

4. सामाजिकता से जुड़ना -

घर परिवार के लोगों के साथ घुल-मिल कर रहना और दोस्तों के साथ भी अपना संपर्क बनाएं रखना, ऐसा करने से डिमेंशिया होने के जोखिम कम हो जाते हैं। जैसे कि, परिवार और दोस्तों के नेटवर्क में हमेशा भाग लेना चाहिए, जो डिमेंशिया के लक्षण को कम कर सकते हैं।

सामाजिक संपर्क भी दिमाग के लिए अच्छा होता है क्योंकि यह मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच संपर्क को उत्तेजित करता है। शोध के मुताबिक सामाजिक गतिविधियां जो शारीरिक और मानसिक गतिविधि को जोड़ती हैं, डिमेंशिया को रोकने में सबसे ज्यादा प्रभावी होती हैं। 

डिमेंशिया का परीक्षणनिदान कैसे किया जाता है?

1. डिमेंशिया मस्तिष्क स्कैन (Dementia brain scans)

मस्तिष्क स्कैन का उपयोग अक्सर डिमेंशिया के निदान के लिए किया जाता है। उन्हें अन्य संभावित समस्याओं के प्रमाण की जांच करने की जरूरत होती है जो किसी व्यक्ति के लक्षणों, जैसे कि एक प्रमुख स्ट्रोक या मस्तिष्क ट्यूमर को दर्शाता है। इसके तहत सीटी स्कैन (CT Scan) और एमआरआई स्कैन (MRI Scan) किया जाता है जो स्ट्रोक या ब्रेन ट्यूमर के लक्षण की जांच के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

स्कैन से रक्त वाहिकाओं के खराब होने की (अगर खराब हैं तो) पूर्ण जानकारी मिल जाती है, जो वास्कुलर डिमेंशिया होने के कारण खराब होती हैं। इसके साथ ही इस जाँच से यह भी पता किया जाता है कि मस्तिष्क का कोई भाग सिकुड़ तो नहीं रहा है। फ्रोंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में, दिमाग के फ्रंटल और टेम्पोरल लोब मुख्य रूप से सिकुड़ना शुरू कर देते हैं। कुछ मामलों में, इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम (EEG) किया जा सकता है जो मस्तिष्क के विद्युत संकेतों (मस्तिष्क गतिविधि) का रिकॉर्ड रखता है। 

2. डिमेंशिया के लिए रक्त परीक्षण

जिन लोगों में डिमेंशिया का संदेह हो रहा है उन लोगों में स्वास्थ्य की पूर्ण जांच के लिए रक्त परीक्षण (ब्लड टेस्ट) किया जाता है। इस ब्लड टेस्ट में अन्य प्रकार कि स्थितियों का पता भी चला जाता है, जैसे कि थाइरॉयड हार्मोन और विटामिन बी 12 के स्तर आदि।

3. मिनी मानसिक स्थिति परीक्षा (Mini mental state examination)

एक व्यापक रूप से इस्तेमाल किया जाने वाला परीक्षण मिनी मानसिक स्थिति परीक्षा (एमएमएसई - MMSE) है।

एमएमएसई (MMSE) विभिन्न मानसिक क्षमताओं की स्थिति का जांच करता है, जिनमें निम्न शामिल हैं:

  • लघु और दीर्घकालिक याददाश्त
  • ध्यान केंद्रित रखने की सीमा 
  • ध्यान केंद्रित रखना (और पढ़ें - ध्यान लगाने की विधि)
  • भाषा और बातचीत करने का कौशल
  • योजनाएं बनाने की क्षमता
  • निर्देशों को समझने की क्षमता
  • एमएमएसई (MMSE) डिमेंशिया का निदान करने के लिए परीक्षण नहीं है। हालांकि, मानसिक विकृति के स्तर का आकलन करने के लिए यह उपयोग किया जाता है जो डिमेंशिया पीड़ित व्यक्ति को हो सकता है।

4. संज्ञानात्मक डिमेंशिया परीक्षण (Cognitive dementia test)

संज्ञानात्मक डिमेंशिया परीक्षण का उपयोग डिमेंशिया के संकेतों का पता करने का एक विश्वसनीय तरीका माना जाता है।

4.1 मानसिक परीक्षण स्कोर

संक्षिप्त मानसिक परीक्षण स्कोर में कुछ ऐसे प्रश्न होते हैं, उदाहरण के लिए-

  • आपकी उम्र क्या है?
  • समय क्या है?
  • साल क्या है?
  • आपकी जन्मतिथि क्या है?

प्रत्येक सही जवाब पर एक अंक मिलता है, जिसमें दस में से छह या उससे कम अंक हासिल होने पर उस व्यक्ति में संज्ञानात्मक हानि का पता चलता है।

4.2 जनरल प्रैक्टिशनर असेसमेंट ऑफ कॉग्निशन (GPCOG) टेस्ट

जनरल प्रैक्टिशनर असेसमेंट ऑफ कॉग्निशन (GPCOG) के परीक्षण के दौरान रिश्तेदारों और देखभालकर्ताओं की मरीज के प्रति उनकी निगरानी या देखभाल का अवलोकन किया जाता है। यह परीक्षण डॉक्टरों के लिए बनाया गया है, इस तरह की जांच एक व्यक्ति की मानसिक क्षमता का पहला औपचारिक मूल्यांकन कर सकता है और परीक्षण के दूसरे भाग में रोगी के किसी करीबी व्यक्ति की जांच होती है और इसमें यह जानने के लिए सवाल किए जाते हैं -

  • हाल की घटनाओं या बातचीत को याद करने में दिक्कत,
  • सही शब्दों का चुनाव न कर पाना और उसकी जगह पर गलत शब्दों का इस्तेमाल करना, 
  • पैसे या दवाओं को गिनने या रखने में कठिनाई होना,
  • बाहर जाने के समय अधिक सहायता लेने की आवश्यकता इत्यादि।

यदि ये सवाल याददाश्त की कमी को दर्शाते है, तो मानक जांच का सुझाव दिया जाता है, जैसे नियमित रूप से खून की जांच और मस्तिष्क सीटी स्कैन जैसा कि ऊपर बताया गया है।

(और पढ़ें - लैब टेस्ट)

डिमेंशिया क इलाज क्या है?

डिमेंशिया का उपचार उसके कारण पर निर्भर करता है। अधिकांश डिमेंशिया का जिसमें अल्जाइमर रोग भी शामिल है का कोई इलाज नहीं है, जो इन्हे बढ़ने से रोक सके। लेकिन कुछ ऐसी दवाइयां हैं जो अस्थायी तौर पर इनके लक्षणों में सुधार कर सकती हैं। जो दवाइयां अल्जाइमर रोग के इलाज के लिए इस्तेमाल की जाती है, कभी-कभी ऐसी ही दवाओं का प्रयोग अन्य प्रकार के डिमेंशिया के लक्षणों में मदद करने के लिए भी किया जाता है। कुछ ऐसे उपचार भी हैं जिसमें दवाओं का उपयोग नहीं किया जाता है, जो इसके लक्षणों में काफी मददगार होते हैं। 

अधिकांश प्रकार के डिमेंशिया को ठीक नहीं किया जा सकता है। पर कुछ ऐसे रास्ते हैं जिससे मरीज के लक्षणों में सुधार लाया जा सकता है। 

1. दवाएं 

नीचे बताई गई दवाओं का सेवन करने से डिमेंशिया के लक्षणों में सुधार किया जा सकता है -

  • कोलीनेस्टेरेस इनहिबिटर्स (Cholinesterase inhibitors) - इन दवाओं में डॉनेपेजिल अरिसेप्ट (Donepezil Aricept), राइवस्टिगमिन (एक्सेलॉन- Exelon),गैलेंटामीन (Galantamine) शामिल हैं, जो मष्तिष्क के रासायनिक घटकों के स्तर को बढ़ाकर याददाश्त और निर्णय लेने की शक्ति को मजबूत करता है। हालाँकि, ये दवाएं अल्जाइमर रोग के इलाज में काम आती हैं, पर इन दवाओं को, अन्य डिमेंशिया का इलाज करने के लिए भी निर्धारित किया जा सकता है, जिनमें- वैस्कुलर डिमेंशिया, पार्किंसंस डिमेंशिया और लेवी बॉडी डिमेंशिया शामिल है। 
  • मैंमेनंटाइन (Memantine) - मैंमेनंटाइन, नंमेंडा (Memantine namenda)) ग्लूटामेट की गतिविधि के क्रम में काम करता है। कुछ मामलों में, मैंमेनंटाइन (Memantine) को कोलीनेस्टेरेस इनहिबिटर्स (Cholinesterase inhibitors) के साथ निर्धारित किया जाता है।
  • अन्य दवाएं - आपके चिकित्सक अन्य लक्षण जैसे की अवसाद, नींद न आना या बेचैनी आदि के इलाज के लिए अन्य दवाएं लिख सकते हैं-
    • साइकोट्रॉपिक दवाएं (Psychotropic Drugs) - मनोचिकित्सक दवाओं (Psychotropic drugs) का उपयोग डिमेंशिया में होने वाले स्वभाव-संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए सहायक माना जाता है। उदाहरण के लिए, एंटीसाइकोटिक दवाएं (Antipsychotic medications/ आमतौर पर सिज़ोफ्रेनिया जैसी विकारों का इलाज के लिए इस्तेमाल होता हैं), जो मरीज की लगातार बढ़ती उत्तेजनाओं को नियंत्रित करती हैं। यह उन मरीजों के लिए भी प्रभावित हो सकती हैं जो नॉन-फार्मेकोलोजिकल (Non-Pharmacological) दवाइयों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देते। ऐसी स्थिति में भी इन दवाइयों का प्रयोग किया जाता है, जहां रोगी का स्वयं या दूसरों को नुकसान पहुंचाने का खतरा होता हो। हालांकि, इस तरह की स्थिति में क्रम अनुसार इलाज करने की बजाय कम अवधि का इलाज किया जाना चाहिए। 
    • चिंता निवारक दवाएं - आमतौर पर चिंता निवारक दवाएं, चिंता विकारों का इलाज करने के लिए उपयोग की जाती हैं) इनका प्रयोग मरीज की उत्तेजना और बैचेनी जैसी समस्याओं का इलाज करने के लिए किया जाता है। इसी तरह एंटीडिप्रेस्सेंट दवाएं अवसाद के लक्षणों को कम करने के लिए निर्धारित की जाती हैं। इसमें अवसाद के लक्षणों का इलाज विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि अवसाद के वजह से डिमेंशिया वाले व्यक्तियों को चीजें याद रखने में और जीवन का आनंद लेने में काफी कठिनाई होती है। अवसाद के कारण उनमें किसी दूसरे व्यक्ति की बहुत ज्यादा देखभाल करने समस्या भी हो जाती है। अवसाद के इलाज से मरीज में महत्वपूर्ण सुधार किए जा सकते हैं, जिससे रोगी के मूड और अन्य गतिविधियों में भाग लेने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है।

सामान्य तौर पर, डिमेंशिया के मरीजों को दवाएं बहुत सावधानीपूर्वक और प्रभावी खुराक दी जानी चाहिए, ताकि उनमें दवाओं के दुष्प्रभावों की संभावना कम हो। आमतौर पर दवा लेने के समय मरीज की देख-रेख रखना आवश्यक है। इनमे से प्रत्येक दवा के साथ, साइड इफेक्ट्स और अन्य कई जोखिम जुड़े हुऐ हैं। इसलिए, सावधानीपूर्वक जोखिम- लाभों का मूल्यांकन, इलाज शुरू करने से पहले और इलाज के दौरान नियमित रूप से किया जाना चाहिए। हालांकि, यह ध्यान में रखना चाहिए कि ये दवाएं डिमेंशिया का इलाज नहीं कर सकती हैं और ना ही लक्षणों को कम या खत्म कर सकती हैं। इसका कोई सबूत नहीं है कि इन दवाओं के लेने से किसी का जीवन लंबा हो सकता है। लेकिन, ये दवाएं कुछ मरीजों के गतिविधि को लंबी अवधि के लिए बेहतर बना सकती हैं।

कृपया कोई भी दवा लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

2. अन्य चिकित्सा

नीचे लिखे तकनीकों से डिमेंशिया वाले लोगों में उत्तेजना को कम करने और उनको राहत का अनुभव कराने में मदद मिल सकती है।

  • संगीत थैरेपी, जिसमें शांतिदायक संगीत सुनना शामिल है।
  • पेट थैरेपी, जिसमें पशुओं को पाला जाता है, जैसे कि कुत्ते को पालना और उसके साथ घूमने निकलना, इससे डिमेंशिया ग्रस्त लोगों के मूड और व्यवहार को सुधारने में मदद मिल सकती है। 
  • अरोमाथैरेपी, जिसमे सुगंधित पौधे के तेलों का उपयोग किया जाता है।
  • मालिश थैरेपी, जिसमें मालिश की सहायता से मरीज की बेचैनी जैसी समस्याओं से राहत दी जाती है।
  • आर्ट थेरेपी, जैसे कला बनाना, जिसमें परिणाम की बजाय प्रक्रिया पर ध्यान को केंद्रित किया जाता है।

डिमेंशिया से क्या जटिलताएं पैदा हो सकती हैं?

 कुछ ऐसी संभावित जटिलताएं हो सकती हैं, जिनमें निम्न शामिल हैं -

  • पहले की तुलना में कार्यो को करने में कम क्षमता महसूस होना जैसे खुद के लिए कोई काम करने या अपनी देखभाल करनें में कमी, 
  • पहले की तुलना में दूसरों के साथ बातचीत करने के क्षमता में कमी आना,
  • जीवनकाल में कमी आना,
  • शरीर के भीतर संक्रमण का बढ़ना। 

जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, अतिरिक्त जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे -

  • एक समय में एक से अधिक कार्य करने में कठिनाई,
  • समस्याओं को सुलझाने में कठिनाई,
  • कठिन गतिविधियां को करने के लिए अधिक समय लगना,
  • भाषा के प्रयोग की समस्या,
  • चीज़ो को भूलना,
  • जाने-माने रास्तों पर खो जाना, 
  • व्यक्तित्व में परिवर्तन और सामाजिक कौशल की कमी,
  • उन चीजों में रुचि खोना जिसमे पहले मज़ा आता था,
  • नींद की आदतों में बदलाव, अक्सर रात में जागना,
  • पढ़ने या लिखने में कठिनाई,
  • निर्णय लेने की क्षमता और खतरों को पहचानने की क्षमता में कमी,
  • गलत शब्द का प्रयोग करना, शब्दो का उच्चारण सही से न करना, बेमतलब की बातें करना,
  • मतिभ्रम, बहस करना, हड़बड़ी करना और हिंसक व्यवहार,
  • भ्रम, अवसाद, उत्तेजना,
  • सामान्य काम करने में कठिनाई,
  • खाद्य पदार्थ और तरल पदार्थ दोनों को निगलने में कठिनाई,
  • असंयमिता (पेशाब या शौच पर नियंत्रण में कमी आना),
  • आसानी से किए जाने वाले काम करने में कठिनाई होना, जैसे कि -
    • चेकबुक का इस्तेमाल करना या पढ़ना 
    • जटिल खेल खेलना जैसे कि पुल
    • नई जानकारी लेना या रूटीन बनाना इत्यादि।

डिमेंशिया रोगियों द्वारा निम्नलिखित चीजों को टाला जाना चाहिए -

  1. धूम्रपान
    यदि आप धूम्रपान करते हैं तो इसे तुरंत ही छोड़ दें, यह बेहतर होगा कि धूम्रपान को जितना जल्दी हो सके बंद कर दिया जाए (या फिर धूम्रपान कभी शुरू ही ना किया जाए)।  
     
  2. तला हुआ भोजन / प्रोसेस्ड मांस
    विशेष रूप से नाइट्राइट और नाइट्रेट्स, जो प्रोसेस्ड मीट में काफी मात्रा में होता हैं, जो नाइट्रोसामाइन कंपाउंड होता है से बचाना। 
     
  3. MSG (मोनो-सोडियम ग्लूटामेट) युक्त खाद्य पदार्थ
    पैक्ड और बाहर का तैयार खाना, जिसमें चिप्स, सलाद (चटनी/सॉस), फ्रिज में रखा रात का खना और अन्य मोनोसोडियम ग्लूटामेट आदि जिसको MCG के रूप में जाना जाता है, जिनका उपयोग पैक और तैयार खाद्य पदार्थों में किया जाता है। इसके उपयोग से खाद्य पदार्थ लंबे समय तक खराब नहीं होते और उनका स्वाद भी बढ़ जाता है। लेकिन, इसके सेवन से अल्जाइमर रोग होने के जोखिम और लक्षण बढ़ जाते हैं।
     
  4. वजन बढ़ना / मोटापा
    शारीरिक रूप से आलसी होना डिमेंशिया के लिए एक सबसे महत्वपूर्ण जोखिम कारक बन सकता है। (और पढ़ें - वजन कम करने के आसान उपाय और मोटापा कम करने के घरेलू उपाय)
     
  5. तनाव / डिप्रेशन
    जब कोई व्यक्ति 60 या उससे अधिक उम्र में होता है, तो उसके लिए जोखिम कारकों की बजाय इस उम्र में तनाव डिमेंशिया का प्रारंभिक लक्षण हो सकता है।
     
  6. उच्च रक्तचाप और हृदय रोग
    इन कार्डियोवास्कुलर स्थितियों और रक्तचाप को डिमेंशिया से जोड़ा जाता है। इसका कारण यह है कि मस्तिष्क में पर्याप्त खून नहीं पहुँच पाता है जो वैस्कुलर डिमेंशिया होने का कारण बनता है। (और पढ़ें - हाई बीपी कम करने के उपाय)
     
  7. ज्यादा शराब पीना
    नियमित रूप से और ज्यादा मात्रा में अल्कोहल के सेवन से डिमेंशिया होने का खतरा बढ़ जाता है। (और पढ़ें - शराब छोड़ने के उपाय)

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) में क्या खाएं?

डिमेंशिया में हमें भूमध्य आहार का सेवन करना चाहिए, जैसे की थोड़ा लाल मांस और हर प्रकार के अनाज, फल और सब्जियां, मछली और नट्स, जैतून का तेल भी इसमें काफी लाभदायक होता है।

डिमेंशिया से ग्रसित मरीजों के लिए आहार संबंधी सलाह कुछ इस प्रकार हैं -

  • हरी पत्तियों वाली सब्जियां - पालकपत्ता गोभी, सरसों के पत्ते (सरसों का साग), ये पत्तियां फोलेट और विटामिन बी 9 से परीपूर्ण होती हैं जो मरीज की अनुभूति में सुधार लाती हैं और अवसाद व तनाव को कम करती हैं।
  • पत्तेदार सब्जियां - ब्रोकली, फूलगोभी, ब्रसल स्प्राउट्स आदि में काफी मात्रा में फोलेट होता है। इसके साथ ही इनमें कार्टेनोइड भी होता है जो होमो-सिस्टिन (Homo-Cysteine) के स्तर को निम्न बना कर रखता है। होमो-सिस्टन एक प्रकार का अमीनो एसिड होता है जिससे संज्ञात्मक जोखिम जुड़े होते हैं।
  • सेम और फलियां - इन खाद्य पदार्थों में बहु मात्रा में फोलेट जैसे, आयरन, मैग्नीशियम और पॉटैशियम पाया जाता है, जो सामान्य शरीर के कार्यों और न्यूरॉन फायरिंग (Neuron Firing) में मदद करता है।  
  • साबुत अनाज - इसमें क्विनोआ, कैमट और ग्लूटेन फ्री ऑट्स शामिल हैं (रोटी, ब्रैड या आटा से बनी चीजें शामिल नहीं हैं)
  • जामुन और चेरी - इन फलों में एंथॉसायनिन होता है जो, ्शरीर में मुक्त राडिकल्स (Free radicals) से आगे होने वाली हानियों से मस्तिष्क की रक्षा करता है। इसमें शरीर में सूजन से लड़ने वाले कई प्रकार के गुण हैं, इसके अलावा इनमें काफी मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटमिन ई और सी पाए जाते हैं।
  • सीताफल, स्क्वैश, शतावरी, टमाटर, गाजर और चुकंदर - ये सब्जियां अगर ज्यादा पकाई हुई ना हो तो इनमें विटामिन ए, फोलेट और आयरन शामिल होते हैं जो मस्तिष्क को अनुभूति देने में मदद करते हैं। 
  • ओमेगा 3 - जिन लोगों के आहार में नियमित रूप से हर रोज ओमेगा 3एस शामिल होता है। उन लोगों को में मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं के होनें के 26% तक कम संभावनाएं होती हैं, उन लोगों की तुलना में जो नियमित रूप से ओमेगा 3S का सेवन नहीं कर पाते। ये वसामयी अम्ल मस्तिष्क को सही आकार में रहने में मदद करते हैं। आमतौर पर ओमेगा 3S के स्त्रोत मछली, अलसी के बीज, जैतून का तेल (सूरजमुखी का तेल का नहीं) और कुछ अच्छी किस्म के ओमेगा 3S के सप्लिमेंट्स होते हैं।
  • बादाम, काजू, अखरोट, मूंगफली, पिकेन नट - इनमें ओमेगा 3एस, ओमेगा 6एस, विटामिन ई और विटामिन बी 6, मैग्निशियम और फोलेट काफी मात्रा में पाए जाते हैं। 
  • कद्दू और सूरजमुखी के बीज - इन बीजों में जिंक, कोलीन और विटामिन ई होता है।
  • दालचीनी, हल्दी और जीरा - ये सभी प्रकार के मसाले मस्तिष्क के प्लॉक को तोड़ने और मस्तिष्क में आई सूजन को कम करने में मदद करते हैं, जिस कारण से मस्तिष्क में यादाश्त सबंधित समस्याएं होती हैं। इसके अलावा आप उन बीमारियों के जोखिम को भी कम कर सकते हैं। जिसका प्रभाव आपके मस्तिष्क पर पड़ता है, जैसे मोटापा, ह्रदय संबंधित रोग, डायबिटिज, हाई ब्लड प्रेशर आदि।

(और पढ़ें - डायबिटीज में परहेज और डायबिटीज डाइट चार्ट)

Dr. Krishan Kumar Sharma

Dr. Krishan Kumar Sharma

साइकेट्री

Dr. Abhishek

Dr. Abhishek

साइकेट्री

Dr. Dushad Ram

Dr. Dushad Ram

साइकेट्री

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
CehamCeham 1000 Mg Injection186.0
CitimacCitimac 2 Mg Injection96.0
CitistarCitistar 250 Mg Injection95.0
CitrokCitrok 250 Mg Injection89.0
ClinaxonClinaxon 2 Mg Injection104.0
NurocolNurocol 250 Mg Injection200.0
PrexaronPrexaron 1000 Mg Tablet Sr700.0
StoraxStorax 250 Mg Injection175.0
StrocitStrocit 250 Mg Injection105.0
StrolinStrolin 500 Mg Tablet464.0
Braincit TabletBraincit Tablet421.0
CitelecCitelec 250 Mg Injection115.0
CitibralCitibral 10 Mg Tablet356.0
CitifloCitiflo 500 Mg Injection80.0
CitilinCitilin 1000 Mg Tablet Sr690.0
CitimetCitimet 500 Mg Tablet400.0
CitinerveCitinerve 500 Mg Tablet439.0
Citinerve OdCitinerve Od 1000 Mg Tablet659.0
CitinovaCitinova 250 Mg Injection113.0
CitivasCitivas 500 Mg Tablet233.0
CitizacCitizac 250 Mg Injection95.0
ColibraColibra 500 Mg Tablet375.0
ColihenzColihenz 250 Mg Injection107.0
CriticolineCriticoline 250 Mg Injection450.0
Ct Cva TabletCt Cva Tablet400.0
LinaxonLinaxon 2 Mg Injection95.0
NeticolNeticol 250 Mg Injection406.0
NeucholineNeucholine 250 Mg Injection182.0
NeucitiNeuciti 250 Mg Injection139.0
NeurosparkNeurospark 500 Mg Injection94.0
OxcityOxcity 500 Mg Tablet450.0
Somazina (Elder)Somazina 1000 Mg Injection189.0
Somazina (Dr Reddy)Somazina 1 Gm Tablet Sr707.0
StrocozStrocoz 250 Mg Injection153.0
StrozinaStrozina 1000 Mg Tablet571.0
CholinecadCholinecad 250 Mg Injection80.0
CiticoCitico 1000 Mg Tablet Cr699.0
Citicure PlusCiticure Plus Tablet485.0
CitisrinCitisrin 500 Mg Tablet460.0
CitisureCitisure 250 Mg Injection85.0
CognexCognex Tablet390.0
CognolinCognolin 500 Mg Tablet468.0
CvcitCvcit 500 Mg Tablet539.0
EncephaEncepha 500 Mg Tablet384.0
N CitiN Citi 500 Mg Tablet342.0
NeurocitiNeurociti 750 Mg Tablet500.0
NusomaNusoma Tablet381.0
PrevanorPrevanor 250 Mg Injection78.0
RecognixRecognix 500 Mg Injection99.0
ShicolinShicolin 500 Mg Tablet378.0
Strolife MonoStrolife Mono 250 Mg Injection89.0
StropilStropil 500 Mg Tablet420.0
UnicholinUnicholin 500 Mg Injection91.0
XcitiXciti 500 Mg Tablet366.0
ZiticolinZiticolin 500 Mg Tablet363.0
Cognitam PlusCognitam Plus 500 Mg/400 Mg Tablet415.0
Cogpex PlusCogpex Plus Tablet450.0
Colihenz PColihenz P 500 Mg/400 Mg Tablet495.0
Neucholine PlusNeucholine Plus Tablet460.0
Nootropil CNootropil C Tablet550.0
Strocit PlusStrocit Plus Tablet525.0
Cbcolin PCbcolin P Tablet500.0
Ceham PCeham P 500 Mg/400 Mg Tablet498.0
Ceretor PlusCeretor Plus Tablet399.0
Cholinecad PlusCholinecad Plus Tablet447.0
Citico PlusCitico Plus 500 Mg/400 Mg Tablet371.0
Citiflo PlusCitiflo Plus 500 Mg/800 Mg Tablet450.0
Citilin PCitilin P 500 Mg/400 Mg Tablet512.0
Citimac PCitimac P 500 Mg/800 Mg Tablet473.0
Citinerve PCitinerve P 500 Mg/400 Mg Tablet493.0
Clinaxon PClinaxon P 500 Mg/400 Mg Tablet530.0
Cognipil PlusCognipil Plus Tablet470.0
Dalus ForteDalus Forte Tablet470.0
N Citi PlusN Citi Plus 500 Mg/800 Mg Tablet411.0
Neuciti ForteNeuciti Forte Tablet413.0
Neuciti PlusNeuciti Plus Syrup520.0
Neurocetam PlusNeurocetam Plus Tablet490.0
Nutam PlusNutam Plus 800 Mg/500 Mg Tablet450.0
Prexaron PlusPrexaron Plus 500 Mg/800 Mg Tablet485.0
Somazina PlusSomazina Plus Tablet504.0
Storax PrStorax Pr 500 Mg/800 Mg Tablet529.0
Strocoz PlusStrocoz Plus Tablet450.0
StrolifeStrolife Tablet419.0
Strolin PStrolin P 400 Mg Tablet449.0
Strozina PlusStrozina Plus Tablet450.0
ToplineTopline Forte Tablet424.0
Topline PlusTopline Plus Tablet350.0
Exelon TtsExelon Tts 13.3 Mg Patch4423.0
ExelonExelon 1.5 Mg Capsule4260.0
RivademRivadem 3 Mg Capsule65.0
RivamerRivamer 1.5 Mg Capsule105.0
RivaplastRivaplast 9 Mg Transdermal Patch297.0
RivasmineRivasmine 1.5 Mg Capsule46.0
RiveraRivera 1.5 Mg Capsule44.0
Higado LsHigado Ls 150 Mg/500 Mg Capsule140.0
AlzilAlzil 10 Mg Tablet156.35
AricepAricep 10 Mg Tablet156.0
CognidepCognidep 10 Mg Tablet66.66
DnpDnp 10 Mg Tablet132.37
DoneceptDonecept 10 Mg Tablet139.61
DonepDonep 10 Mg Tablet156.35
DonetazDonetaz 11.5 Mg Tablet149.12
DozareDozare 5 Mg Tablet100.5
LapezilLapezil 10 Mg Tablet171.81
SanezilSanezil 5 Mg Tablet100.0
AlzepilAlzepil 10 Mg Tablet120.0
DemenzaDemenza 10 Mg Tablet100.1
DepzilDepzil 10 Mg Tablet100.0
DonazDonaz 10 Mg Tablet130.0
DopeDope 10 Mg Tablet125.0
DopezilDopezil 5 Mg Tablet106.25
DorentDorent 10 Mg Tablet152.0
NepzilNepzil 10 Mg Tablet72.12
PezilPezil 5 Mg Tablet185.87
RemendaRemenda 5 Mg Tablet79.0
CerebrolysinCerebrolysin Injection805.0
CognifastCognifast Tablet160.0
CerebrainCerebrain 90 Mg Tablet24.0
CerevateCerevate 60 Mg Injection805.0
CerevionCerevion Tablet139.0
CognistarCognistar 30 Mg Injection500.0
CognitracCognitrac 60 Mg Injection750.0
NeurobrosinNeurobrosin 30 Mg Injection882.86
StropinStropin 60 Mg Injection770.0
EncephabolEncephabol 100 Mg Suspension159.9
RenervolRenervol 100 Mg Suspension63.0
CogvinCogvin 10 Mg Tablet59.4
NeurovinNeurovin 5 Mg Tablet82.9
ReqollectReqollect 5 Mg Capsule70.0
VinpaceVinpace 10 Mg Tablet109.52
VinpocareVinpocare 5 Mg Tablet260.0
Colphos ForteColphos Forte Capsule98.17
Essentiale LEssentiale L 350 Mg Capsule130.5
LeciLeci 5% Lotion38.1
LivintactLivintact 525 Mg Capsule116.02
LivophosLivophos 175 Mg Capsule74.81
Full 24 AmFull 24 Am Injection32.4
Oto SureOto Sure 40 Mg Tablet130.0
TebokanTebokan Forte 120 Mg Tablet520.0
CereloidCereloid 1 Mg Tablet220.0
Aricep MAricep M Forte Tablet175.0
CogmentinCogmentin 10 Mg/10 Mg Tablet114.28
DonamemDonamem 5 Mg/10 Mg Tablet179.0
Donep M ForteDonep M Forte 10 Mg/10 Mg Tablet189.0
Larentine DLarentine D 5 Mg/10 Mg Tablet170.0
Alzil MAlzil M 10 Mg/10 Mg Tablet164.5
Donecept MDonecept M 5 Mg/5 Mg Tablet126.5
Donep MDonep M 5 Mg/5 Mg Tablet139.0
Dope PlusDope Plus 5 Mg Tablet104.76
Memancad DMemancad D Tablet152.6
ClinhairClinhair 2%/1% Shampoo125.62
DanclearDanclear 1%/2% Gel214.16
DandropDandrop 2%/1% Lotion228.57
SeborenSeboren 2%/1% Shampoo97.0
CutiglosCutiglos Shampoo149.31
Dandruff PlusDandruff Plus Soap18.93
HighgrowHighgrow Shampoo129.37
KetokemKetokem Shampoo150.0
CognivelCognivel Tablet179.0
Moracetam VMoracetam V Forte 60 Mg/800 Mg/5 Mg Tablet171.33
Cognix PlusCognix Plus Tablet218.4
Gencephal TrioGencephal Trio 60 Mg/800 Mg/5 Mg Tablet199.0
DancureDancure 1%/2% Shampoo70.0
Triben AdTriben Ad Lotion216.0
Gb VertGb Vert Tablet95.0
StablanzStablanz 24 Mg/60 Mg Tablet107.6
Vernil PlusVernil Plus Tablet95.0
BetacitamBetacitam 16 Mg/60 Mg Tablet160.0
ToxifiteToxifite Tablet180.97
Insulate NpInsulate Np Tablet200.0
Moracetam AgMoracetam Ag Tablet799.0
Cet PlusCet Plus 400 Mg/60 Mg Tablet40.0
Stablanz PvStablanz Pv Tablet180.9
BestflowBestflow Tablet164.5
EmidasEmidas Ls Tablet84.36
Zevert PvgZevert Pvg Tablet198.0

डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Himalaya Mentat TabletHimalaya Mentat Tablets95.0
Divya SaraswatarishtaDivya Sarswatarishta105.0

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