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भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के शोधकर्ताओं ने फेफड़ों से संबंधित बीमारी सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज) की मॉनिटरिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से एक डायग्नॉस्टिक एंड मॉनिटरिंग डिवाइस तैयार की है। खबर के मुताबिक, इस डिवाइस का नाम सेनफ्लेक्स.टी है। आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर दीपक कुमार गोस्वामी और उनकी रिसर्च टीम ने संस्थान की ऑर्गैनिक इलेक्ट्रॉनिक्स लैबोरेटरी (फिजिक्स डिपार्टमेंट) में इस डिवाइस को विकसित किया है। इसमें एंड्रॉयड मॉनिटरिंग एप के साथ एक स्मार्ट मास्क लगा हुआ है, जो ब्लूटूथ की मदद से काम करता है। यह सिस्टम लगातार मरीज के सांस लेने के पैटर्न, हर्ट रेट और खून में ऑक्सीजन के सैच्युरेशन लेवल पर नजर रखता है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, आईआईटी खड़गपुर द्वारा तैयार की गई इस डिवाइस में एक क्लाउड कंप्यूटिंग सर्वर होता है। इसी में एआई को इम्प्लीमेंट किया गया है ताकि वह मशीन लर्निंग की मदद से सीओपीडी की तीव्रता का पूर्वानुमान लगा सके। इसकी इस क्षमता के बारे में प्रोफेसर गोस्वामी कहते हैं, 'सीओपीडी के मरीज सेनफ्लेक्स.टी मास्क को घर में इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्हें डायग्नॉस्टिक सेंटर आने के जरूरत नहीं है। इससे सीओपीडी को इसकी शुरुआती स्टेज में ही ट्रीट किए जाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर फोकस किया जा सकेगा, जो मरीजों और हेल्थकेयर सिस्टम दोनों के लिए फायदे की बात होगी।'

सेनफ्लेक्स.टी के डेवलेपमेंट के तहत वैज्ञानिकों ने डिवाइस को ब्लूटूथ से जोड़ते हुए एक उच्च स्तर का संवेदनशील और लचीला टेम्प्रेचर सेंसर लगाया है जो इलेक्ट्रॉन्स को मापने का काम करता है। यह सेंसर सिस्टम सांस लेने और छोड़ने के दौरान हवा के तापमान में होने वाले बदलावों को लगातार मॉनिटर कर सकता है, साथ ही सांस लेने के पैटर्न को भी रिकॉर्ड कर सकता है। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने बाजार में उपलब्ध एक पल्स ऑक्सीमीटर को भी इस सेंसट सिस्टम से जोड़ा है ताकि ब्रेथिंग के समय ऑक्सीजन सैच्युरेशन लेवल की भी निगरानी की जा सके। आईआईटी के मुताबिक, इस उत्पाद की कीमत 2,500 रुपये के आसपास है। संस्थान के प्रवक्ता ने समाचार एजेंसी को बताया कि इसके निर्माताओं ने इसके पेटेंट के लिए आवेदन दे दिया है और यह बाजार में बिकने के लिए भी तैयार है। इसके अलावा, निर्माण और अध्ययन की जानकारी अंतरराष्ट्रीय पत्रिका एसीएस अप्लाइड मटीरियल्स एंड इंटरफेसेज को भी भेज दी गई है।

क्या है सीओपीडी?
क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिसीज फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों के एक समूह का नाम है। इस बीमारी में सांस लेने में अवरुद्ध होता है, जिससे श्वसन प्रक्रिया बाधित होती है। सीओपीडी होने पर वास्तफीति (एम्फाइसेमा) और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस जैसी मेडिकल कंडीशन आमतौर पर देखने को मिलती हैं। क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस आप की सांस की नलियों में सूजन पैदा करती है। ये नलियां हवा को फेफड़ों तक ले जाने का काम करती हैं। वहीं, वास्तफीति की समस्या तब होती है, जब फेफड़ों में हवा के अंशों से बनी थैली धीरे-धीरे नष्ट होती है। बताया जाता है कि सीओपीडी से होने वाले नुकसानों को दोबारा ठीक नहीं किया जा सकता। हालांकि उपचार से लक्षणों को नियंत्रित कर आगे के नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

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