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पल्स ऑक्सीमीटर एक साधारण उपकरण है जो इंफ्रारेड रोशनी का इस्तेमाल कर आपके खून में मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा को नापता है और महज कुछ सेकंड में ही सही नतीजे देता है। सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि आखिर खून में मौजूद ऑक्सीजन की संतृप्ति (सैचुरेशन) को नापने की जरूरत क्यों होती है?

लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ खुद को बांध लेता है और फिर शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक खून पहुंचाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के पल्स ऑक्सीमेट्री ट्रेनिंग मैनुअल 2011 के मुताबिक हीमोग्लोबिन का हर एक कण ऑक्सीजन के 4 करणों को ले जा सकता है। जिस व्यक्ति के शरीर में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के 4 कणों से खुद को बांध पाता है उस व्यक्ति के खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति 100 प्रतिशत होती है। सामान्य तौर पर हीमोग्लोबिन में ऑक्सीजन की संतृप्ति 95 प्रतिशत या इससे अधिक होनी चाहिए। हालांकि, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं जिसमें सांस लेने में दिक्कत, छाती में दर्द या श्वास संबंधी बीमारियां जैसे- अस्थमा, सीओपीडी या अब कोविड-19 की समस्या हो तो उन लोगों के खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति का लेवल 94 प्रतिशत से कम हो सकता है और इस स्थिति को हाइपोक्सीमिया कहते हैं।

हाइपोक्सीमिया के मरीजों को बिना देर किए तुरंत ऑक्सीजन थेरेपी की जरूरत होती है जिसे बेहद आसान लेकिन असरदार उपकरण ऑक्सीजन सिलिंडर और मास्क के जरिए दिया जा सकता है या फिर ऑक्सीजन कॉन्सन्ट्रेटर के जरिए जो हवा में मौजूद ऑक्सीजन का इस्तेमाल करता है और इसके लिए ऑक्सीजन सिलिंडर की भी जरूरत नहीं होती। अगर समय रहते ऑक्सीजन की इस कमी का इलाज न किया जाए तो हाइपोक्सीमिया अडवांस स्टेज में पहुंच सकता है जिसमें शरीर के अलग-अलग हिस्सों को काम करने के लिए जरूरी ऑक्सीजन नहीं मिल पाता और इस स्थिति को हाइपोक्सिया कहते हैं। यह एक जानलेवा स्थिति है जहां मरीज को सामान्य ऑक्सीजन थेरेपी के साथ-साथ वेंटिलेटर या ईसीएमओ मशीन की भी जरूरत पड़ सकती है।

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पल्स ऑक्सीमीटर एक छोटा सा उपकरण है जो तुरंत मरीज का ध्यान रखने वाले व्यक्ति, डॉक्टर या फिर मरीज को खुद सतर्क कर देता है कि उनके खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति का लेवल गंभीर रूप से कम हो रहा है। कई बार तो ऑक्सीजन का लेवल कम होने पर शरीर में कई दूसरे लक्षण भी दिखने लगते हैं जैसे- सांस लेने में मुश्किल महसूस होना। इस उपकरण की मदद से मरीज के कीमती समय को बचाकर उसे जरूरी थेरेपी मुहैया करायी जा सकती है ताकि हाइपोक्सीमिया और हाइपोक्सिया का इलाज हो सके। (सिनोसिस यानी होंठ, हाथ और पैर की उंगलियों का नीला पड़ना- ये लक्षण कई बार उन मरीजों में नजर आता है जिनके शरीर में खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति 90 प्रतिशत से कम हो जाती है। हालांकि डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि सिनोसिस का पता लगाना मुश्किल होता है और कई बार एनीमिया के मरीजों में तो दिखता भी नहीं है।)

वैसे तो इस उपकरण का अस्पतालों में काफी इस्तेमाल होता है लेकिन पल्स ऑक्सीमीटर बेहद आसान उपकरण है और घर में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। आपको सिर्फ इतना करना है कि ये मशीन जो देखने में स्टेपलर जैसी होती है उसे आपको अपनी तर्जनी उंगली (इंडेक्स फिंगर) में, पैर के अंगूठे में या कान की पाली पर लगाना है जो भी आपके लिए सुविधाजनक हो और फिर मशीन को ऑन कर दें। मशीन SpO2 में रीडिंग दिखाती है जो खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति का प्रतिशत होता है। अगर रीडिंग 95 प्रतिशत से कम हो तो इसका मतलब है कि आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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मौजूदा समय में बड़ी संख्या में लोग पल्स ऑक्सीमीटर खरीद रहे हैं और इसका कारण है कोविड-19 महामारी। दरअसल, कोविड-19 बीमारी हैपी हाइपोक्सिया या साइलेंट हाइपोक्सिया से संबंधित है। आसान शब्दों में समझें तो हैपी हाइपोक्सिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें मरीज बाहर से तो शरीर में ऑक्सीजन का लेवल बहुत ज्यादा कम होने के कोई संकेत नहीं दिखाता लेकिन शरीर के अंदर उसके खून में मौजूद ऑक्सीजन की संतृप्ति का लेवल बेहद कम हो जाता है। ऐसे समय में मरीज को आपातकालीन देखभाल की जरूरत होती है। ऐसे में अगर घर में ही पल्स ऑक्सीमीटर हो तो समय-समय पर लोगों के ब्लड ऑक्सीजन लेवल को चेक कर उन्हें सतर्क किया जा सकता है जब भी उनका ऑक्सीजन लेवल बहुत ज्यादा नीचे आने लगे।

इसके विपरित अगर मरीज की रीडिंग नॉर्मल आती है तो उन्हें मानसिक शांति और आराम मिल पाता है कि सबकुछ ठीक है और उन्हें फिलहाल कोई खतरा नहीं है। हालांकि आपके लिए यह जानना जरूरी है कि सांस लेने में तकलीफ और हाइपोक्सिया कोविड-19 के गंभीर लक्षणों में शामिल हैं। कोविड-19 के हल्के लक्षणों में बुखार, खांसी, थकान, सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता में कमी आदि शामिल है। हालांकि आपका ऑक्सीजन संतृप्ति लेवल ठीक रहने के बावजूद इन हल्के लक्षणों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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इस आर्टिकल में हम आपको पल्स ऑक्सीमीटर के बारे में सभी जरूरी जानकारियां देने के साथ ही ये भी बता रहे हैं कि आखिर ये साधारण सा दिखने वाला उपकरण काम कैसे करता है और किन लोगों को इसकी ज्यादा जरूरत होती है।

  1. पल्स ऑक्सीमीटर है क्या?
  2. कैसे काम करता है पल्स ऑक्सीमीटर?
  3. क्या कोविड-19 महामारी के समय पल्स ऑक्सीमीटर उपयोगी है?
  4. आखिर में इन बातों का रखें ध्यान
  5. पल्स ऑक्सीमीटर के डॉक्टर

पल्स ऑक्सीमीटर एक चिकित्सीय उपकरण है जो मरीज के खून में मौजूद ऑक्सीजन के लेवल का आकलन कर डॉक्टर या स्वास्थ्यकर्मी को मरीज के शारीरिक सेहत के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने का काम करता है। इस उपकरण का इस्तेमाल करके जो टेस्ट किया जाता है उसे पल्स ऑक्सीमेट्री कहते हैं जहां पर उपकरण को व्यक्ति की उंगली पर क्लिप करके लगाया जाता है और मशीन व्यक्ति की हृदय गति के साथ-साथ लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद ऑक्सीजन की संतृप्ति का भी आकलन करती है। वैसे लोग जिन्हें लंबे समय से श्वास संबंधी बीमारियां हों उन्हें इस तरह के छोटे से उपकरण का इस्तेमाल करते हुए अक्सर देखा जाता है।

पल्स ऑक्सीमीटर पर दिखने वाली रीडिंग अगर 95 से 100 प्रतिशत के बीच हो तो इसे औसतन व्यक्ति के लिए सामान्य माना जाता है लेकिन अगर वैल्यू किसी भी हाल में 90 प्रतिशत से कम हो जाए तो इसका मतलब है कि खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति का लेवल कम है। आसान शब्दों में समझें तो इसका मतलब है कि हाथ और पैर जैसे शरीर के हिस्से जो हृदय से दूर हैं वहां तक खून और ऑक्सीजन कितनी बेहतर तरीके से पहुंच पा रहा है। अगर रीडिंग 90 प्रतिशत से भी नीचे चली जाए तो इसका मतलब है कि मरीज के खून में पर्याप्त ऑक्सीजन पहुंचाने के लिए सप्लिमेंटल ऑक्सीजन की जरूरत है। 

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मेडिकल एक्सपर्ट्स आपातकालीन परिस्थिति में, ऑपरेशन के दौरान और जब कोई मरीज गंभीर स्थिति में होता है तो पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल कर मरीज के खून में मौजूद ऑक्सीजन के लेवल का आकलन करते हैं। पल्मोनोलॉजिस्ट्स के द्वारा सामान्य रूटीन में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। कोविड-19 महामारी के इस समय जब से लोगों को इस बात की जानकारी हुई है कि व्यक्ति के खून में मौजूद ऑक्सीजन की संतृप्ति के लेवल को सार्स-सीओवी-2 कोरोना वायरस से होने वाली बीमारी का गंभीर संकेत माना जाता है तब से पल्स ऑक्सीमीटर उपकरण की मांग दुनियाभर में बहुत ज्यादा बढ़ गई है। 

पल्स ऑक्सीमीटर उपकरण को शरीर के जिस हिस्से में लगाया जाता है उंगली, पैर का अंगूठा या कान पर, उस हिस्से में मौजूद सबसे छोटी रक्त धमनी जिसे केशिका या कैपिलरीज भी कहते हैं उसे यह उपकरण इन्फ्रारेड रोशनी भेजता है और ऑक्सीजन से प्रतिबिंबित होकर वापस लौटने वाली रोशनी को नापकर, महज कुछ सेकंड में इस बात का अंदाजा लगा लेता है कि ऑक्सीजन की संतृप्ति कितनी है। साथ ही साथ मशीन पल्स रेट की भी निगरानी करती है।

(माथे और नाक के हिस्सों के लिए भी पल्स ऑक्सीमीटर मौजूद है। रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि शरीर में बेहद कम ऑक्सीजन संतृप्ति (80 प्रतिशत से कम) होने पर नाक और कान के हिस्से उंगली या पैर के अंगूठे की तुलना में जल्दी पकड़ पाते हैं। हालांकि उंगली या पैर के अंगूठे से ली जाने वाली रीडिंग को ज्यादा सही माना जाता है।)

95 से 100 प्रतिशत के बीच की रीडिंग को सामान्य माना जाता है। अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से श्वास संबंधी बीमारी है तो उस व्यक्ति के लिए नॉर्मल ऑक्सीजन का लेवल भी कुछ कम हो सकता है- खासकर तब जब मरीज को लंबे समय से फेफड़ों की कोई बीमारी हो। ऐसे में उन्हें डॉक्टर से पूछकर उनका ऑक्सीजन संतृप्ति लेवल क्या होना चाहिए इसकी जानकारी लेनी चाहिए।

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हालांकि पल्स ऑक्सीमीटर उपकरण की अपनी कुछ परिसीमाएं भी हैं। सबसे पहला ये कि इनमें करीब 2 प्रतिशत तक गलती की संभावना (मार्जिन ऑफ एरर) होती है और दूसरा- ये उपकरण तब काम नहीं करेगा जब नाखून पर नेल पेंट लगा हो या फिर अगर आपके हाथ और पैर बहुत ज्यादा ठंडे हों। बाकी के मामलों में पल्स ऑक्सीमीटर बेहद आसानी से इस्तेमाल होने वाली और भरोसेमंद मशीन है जिसके जरिए खून में ऑक्सीजन की संतृप्ति की जांच हो सकती है।

पल्स ऑक्सीमीटर किस ब्रैंड का है इस बात पर निर्भर करता है कि उसकी कीमत 500 रूपये से लेकर 5 हजार रुपये तक हो सकती है। कुछ ऑक्सीमीटर्स में ब्लूटूथ जैसे फीचर्स भी होते हैं जो आपके फोन से कनेक्ट होकर अपने आप ही रीडिंग को रेकॉर्ड करते रहते हैं। लेकिन अगर आप ऐसे पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल कर रहे हैं जो स्वतः ही रीडिंग को रेकॉर्ड नहीं कर सकता है तो आपको खुद इन रीडिंग्स को लिखकर या ऑनलाइन इसका एक डेटा रखना चाहिए ताकि जरूरत पड़ने पर आप उसे डॉक्टर को दिखा सकें।

24 अप्रैल 2020 को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने कहा था कि पल्स ऑक्सीमीटर के इस्तेमाल से कोविड-19 के मरीजों की जल्दी पहचान और डायग्नोसिस में मदद मिल सकती है जिसके जरिए बीमारी को बढ़ने और निमोनिया जैसी बीमारी बनने से रोका जा सकता है। साथ ही इससे मृत्यु के आंकड़ों को भी कम किया जा सकता है। कोविड-19 के गंभीर लक्षणों में सांस फूलने को भी शामिल किया गया है और वैसे लोग जिनमें ये संकेत विकसित हो जाएं उनके लिए पल्स ऑक्सीमीटर उपयोगी हो सकता है। लेकिन कोविड-19 बीमारी होने पर शरीर में कई और लक्षण भी नजर आते हैं जैसे- बुखार, सूखी खांसी, थकान आदि जिन्हें बीमारी के हल्के लक्षणों के तौर पर माना गया है।

इसके अलावा भी कुछ लक्षण हैं जो ज्यादा कॉमन नहीं हैं जैसे- बदन दर्द, गले में खराश या गले में दर्द, डायरिया, आंखों में कंजंक्टिवाइटिस, सिरदर्द, सूंघने और स्वाद लेने की क्षमता में कमी, त्वचा पर चक्त्ते होना आदि। सांस फूलना या सांस लेने में तकलीफ का लक्षण तब तक नजर नहीं आता जब तक बीमारी गंभीर न हो जाए। येल मेडिसिन के मुताबिक, कुछ डॉक्टरों ने ये जानकारी दी है कि कोविड-19 के मरीजों में अचानक एक स्थिति विकसित हो जाती है जिसे साइलेंट हाइपोक्सिया कहते हैं। इसमें मरीज को असहज महसूस होने लगता है लेकिन उसे सांस लेने में तकलीफ नहीं होती है, जबकी उसका ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो चुका होता है।

हालांकि इस तरह के लक्षण अस्पताल में भर्ती मरीजों के साथ ही घर में रहने वाले मरीजों में भी नजर आ सकते हैं और इस तरह की समस्या सिर्फ तभी देखने को मिलती है जब मरीज में संक्रमण गंभीर स्थिति में पहुंच जाता है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत होती है। लिहाजा इस तरह के स्वास्थ्य से जुड़े संकट के समय घर पर ही अपने खून में मौजूद ऑक्सीजन की संतृप्ति लेवल की जांच करना और उस पर नजर रखना जरूरी हो जाता है।

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सामान्य परिस्थितियों में लंबे समय से फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे मरीजों जैसे- सीओपीडी, अस्थमा, निमोनिया, लंग कैंसर और हृदय की बीमारी के मरीजों को भी पल्स ऑक्सीमीटर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है। साथ ही इस उपकरण की मदद से डॉक्टर के लिए भी यह आकलन करना आसान होता है कि ऊपर बताई गई बीमारियों के लिए दी जाने वाली दवाइयां सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं, मरीज के बाकी के पैरामीटर्स सही हैं या नहीं और मरीज के लिए वेंटिलेटर का इस्तेमाल कितना फायदेमंद साबित हुआ।

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मरीज में अगर खांसी, बुखार, सांस फूलना जैसे लक्षण दिखें तो उन्हें पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल कर ऑक्सीजन संतृप्ति लेवल की जांच करनी चाहिए क्योंकि इससे उन्हें इस बात का अंदाजा लग जाएगा कि उन्हें तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत है या नहीं। इसके अलावा वैसे लोग जिन्हें पहले से कोई दूसरी बीमारी है जैसे- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या फिर किसी भी तरह का हृदय रोग तो उनके लिए भी पल्स ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल फायदेमंद हो सकता है। हालांकि उपकरण का सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है क्योंकि अगर व्यक्ति की उंगली या पैर के अंगूठे में गलत तरीके से इस मशीन को लगाया जाए या फिर नेल पेंट लगे हुए नाखून पर लगाया जाए तो मशीन गलत रीडिंग दे सकती है।

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References

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