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चीन में कोरोना वायरस से लगातार लोगों की जानें जा रही हैं। अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। 31,000 से ज्यादा लोग संक्रमित हैं। इनमें करीब 4,900 लोगों की हालत नाजुक है। चीन के अलावा दुनिया के कई ताकतवर देश इस बीमारी के आगे बेबस नजर आ रहे है। वैज्ञानिक इसका कारगर इलाज ढूंढने में लगे हैं। कुछ आंशिक कामयाबियां मिली भी हैं, लेकिन पुख्ता इलाज अभी तक सामने नहीं आया है। वहीं, लगातार हो रही मौतों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैश्विक स्वास्थ्य संकट (या अंतरराष्ट्रीय आपातकाल) घोषित किया हुआ है। ऐसे में कई लोग जानने चाहते हैं कि आखिर कब किसी बीमारी के चलते इस तरह की घोषणा की जाती है। 

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कोरोना वायरस को वैश्विक संकट करार देने के कारण
डब्ल्यूएचओ ने नए कोरोना वायरस को 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑफ इंटरनेशनल कंसर्न' यानी पीएचईआईसी घोषित किया है। इसका मतलब यह है कि नया कोरोना वायरस 2019-nCoV स्वास्थ्य से जुड़ी एक ऐसी असाधारण घटना है जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल कर लोगों के जीवन के लिए खतरा बन गई है और जिसे दूर करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग की जरूरत हो। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह छठवीं बार है जब किसी बीमारी के चलते डब्ल्यूएचओ को पीएचईआईसी की घोषणा करनी पड़ी है।

पीएचईआईसी की घोषणा 'अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम, 2005' के तहत की जाती है। स्वास्थ्य से जुड़ा यह अंतरराष्टीय कानून साल 2007 में लागू किया गया था। इसके तहत जब भी पीएचईआईसी की घोषणा की जाती है, तो डब्ल्यूएचओ तुरंत बीमारी से प्रभावित देश और बाकी दुनिया को स्वास्थ्य संकट से बचाने का काम शुरू कर देता है। वहीं, घोषणा के बाद सभी देशों को संकट से संबंधित सभी अपडेट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साझा करनी होती हैं और बीमारी की काट ढूंढने के लिए साझा प्रयास करने होते हैं।

ज्यादातर देशों के पास ऐसी स्थिति से निपटने की क्षमता नहीं
साल 2018 में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी पत्रिका 'ब्रिटिश मेडिकल' ने अपनी एक रिपोर्ट में ग्लोबल हेल्थ को लेकर एक जानकारी दी थी। पत्रिका ने डब्ल्यूएचओ के एक रिसर्च का हवाला देते हुए बताया कि दुनिया के केवल एक तिहाई देशों में इस तरह की आपात स्थितियों का संतोषजनक आंकलन करने, उसका पता लगाने और प्रतिक्रिया देने की क्षमता है। यह बात कोरोना जैसी संकट की स्थिति को पीएचईआईसी घोषित करने की बड़ी वजह देती है। इसी कारण आईएचआर कानून बनाया गया है जो 196 देशों के बीच एक समझौता है। 

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सबकी सुरक्षा जरूरी
डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि चिंता केवल इस बात की नहीं है कि यह कोरोना वायरस चीन में कितना घातक रूप ले चुका है, बल्कि यह भी देखने की जरूरत है कि बाकी देशों पर इसका क्या असर पड़ रहा है। कोरोना के अन्य देशों में फैलने के बाद डब्ल्यूएचओ ने आशंका जताई है कि यह वायरस बाकी देशों में फैल कर बहुत बड़े पैमाने पर महामारी फैलने और जनहानि होने का कारण बन सकता है। यह नुकसान कितना बड़ा होगा, इसका आंकलन करना अभी मुश्किल है। इसीलिए वक्त रहते इसे अंतरराष्ट्रीय आपातकाल घोषित किया गया है।

आर्थिक पहलू की अनदेशी संभव नहीं
कोरोना वायरस या किसी भी स्वास्थ्य संकट को वैश्विक आपातकाल घोषित करने के पीछे की वजह केवल एक देश के लोगों की जान की सुरक्षा नहीं होती, बल्कि ऐसा करने से पहले और भी कई पहलू देखे जाते हैं। स्वास्थ्य संकट के साथ-साथ इससे होने वाले आर्थिक नुकसान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह नहीं भूलना चाहिए कि कोरोना वायरस के डर से चीन में लोगों ने घरों से बाहर निकलना बंद कर दिया है। सभी तरह के कामकाज ठप पड़े हैं। चीन को इससे जबर्दस्त आर्थिक नुकसान हुआ है। यह स्थिति अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न पैदा हो, इसलिए भी कोरोना को डब्ल्यूएचओ के तहत वैश्विक संकट घोषित किया गया है।

क्या कोरोना वायरस नई बीमारी है?
कोरोना वायरस कोई अंजान शब्द नहीं है। यह संक्रमण फैलाने वाले एक विशेष विषाणु समूह के लिए इस्तेमाल होने वाला नाम है। कोरोना वायरस '2019-nCoV' को नया इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इसने पहले कभी भी इंसानों को प्रभावित नहीं किया था। लेकिन अब ऐसा हो रहा है और इस कोरोना वायरस का इलाज अभी तक नहीं मिला है। यही कारण है कि इसे 'नया' कोरोना वायरस कहा जा रहा है।

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