भारत समेत पूरी दुनिया में कोविड-19 महामारी को रोकने के लिए एडवांस वैक्सीन कैंडिडेट के ट्रायल किए जा रहे हैं। इस सिलसिले में कुछ नई जानकारियां सामने आई हैं। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि अमेरिका की दवा कंपनी मॉडेर्ना द्वारा निर्मित एमआरएनए-1273 वैक्सीन बंदरों में कोरोना वायरस को के खिलाफ प्रभावी इम्यून रेस्पॉन्स पैदा करने में कामयाब रही है। वहीं, भारत की दवा कंपनी सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की चर्चित वैक्सीन के ट्रायल से जुड़े प्रोटोकॉल में बदलाव करने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, रूस ने दावा किया है कि उसके यहां अगस्त के महीने तक कोविड-19 की वैक्सीन तैयार हो जाएगी।

मॉडेर्ना वैक्सीन के एनिमल ट्रायल के सकारात्मक परिणाम
अमेरिकी दवा कंपनी मॉडेर्ना का दावा है कि कोविड-19 के इलाज के लिए उसके द्वारा तैयार की गई वैक्सीन ने बंदरों में कोरोना वायरस के संक्रमण के खिलाफ मजबूत इम्यून रेस्पॉन्स पैदा किया है। कंपनी की मानें तो उसकी वैक्सीन से नर वानरों के फेफड़ों और नाक को संक्रमण से सुरक्षा मिली है। इसे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका द्वारा तैयारी की गई चर्चित चडॉक्स एनसीओवी-19 के मुकाबले में सुधार के रूप में देखा जा रहा है। इस ट्रायल से जुड़े अध्ययन की रिपोर्ट जानी-मानी मेडिकल पत्रिका न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हुई है। गौरतलब है कि एमआरएनए-1273 वैक्सीन के अंतिम चरण के मानव परीक्षण हाल ही में शुरू किए गए हैं। इनमें 30 हजार वॉलन्टियर्स को यह वैक्सीन दी जाएगी, जिसके बाद इसे नियामक द्वारा स्वीकृति मिलने का रास्ता साफ होगा। मॉडेर्ना का कहना है कि उसकी कोशिश वैक्सीन को इस साल के अंत तक मुहैया कराने की है।

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सिरम इंस्टीट्यूट को ट्रायल से जुड़े प्रोटोकॉल में बदलाव करने का निर्देश
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई गई चडॉक्स एनसीओवी-19 कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे विश्वसनीय संभावित वैक्सीन के रूप में सामने आई है। हाल में इसके पहले और दूसरे ट्रायल के सफल परिणामों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था। भारत में भी इसके ट्रायल किए जा रहे हैं। हालांकि यहां के ड्रग कंट्रोलर जनरल (डीसीजीआई) ने सिरम इंस्टीट्यूट से कहा है कि वह ट्रायल से जुड़े प्रोटोकॉल को रिवाइज करे। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, दरअसल सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीएसएससीओ) के एक एक्सपर्ट पैनल ने ट्रायल को लेकर सबमिट किए आवेदन पर सिरम इंस्टीट्यूट से कुछ स्पष्टीकरण मांगे थे। इसमें एसआईआई से कहा गया था कि वह ट्रायल 1 और ट्रायल 2 को स्पष्ट रूप से परिभाषित करे। इसके बाद डीसीजीआई ने कंपनी को प्रोटोकॉल को रिवाइज करने वाला निर्देश जारी किया है। इस मामले में ताजा अपडेट यह है कि एसआईआई ने बुधवार को डीसीजीआई के समक्ष रिवाइज्ड प्रोटोकॉल सबमिट कर दिया है। हालांकि एक सूत्र ने एजेंसी को बताया है कि एसआईआई ने ट्रायल में शामिल किए गए 1,600 लोगों के प्रस्तावित नामांकन के संबंध में कोई जस्टिफिकेशन नहीं दिया है।

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रूस ने अगस्त तक वैक्सीन तैयार करने का दावा किया
इस बीच, रूस में कोविड-19 के इलाज के लिए तैयार किए गए वैक्सीन कैंडिडेट को अगस्त में रजिस्टर कराने की बात सामने आई है। एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की सरकार 10-12 अगस्त के बीच वैक्सीन के पंजीकरण की योजना बना रही है। बताया गया है कि इस वैक्सीन को मास्को स्थित गामालेया रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियॉलजी एंड माइक्रोबायॉलजी ने तैयार किया है। रूसी सरकार के तहत नियामकों के वैक्सीन को रजिस्टर करने के बाद इसे तीन से सात दिन के अंदर आम लोगों के इस्तेमाल के लिए अप्रूव (शर्तों के साथ) किया जा सकता है। यहां बता दें कि यह वही वैक्सीन है जिसके सफल ट्रायलों का दावा इसी महीने की शुरुआत में किया गया था। हालांकि इसे लेकर कई सवाल खड़े किए गए थे, जिनके जवाब अभी तक नदारद हैं। रूसी समाचार एजेंसी टीएसएस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि इस वैक्सीन के केवल पहले चरण के ट्रायल पूरे हुए हैं और दूसरी स्टेड के परीक्षण 13 जुलाई से शुरू होने थे। उनके परिणामों को लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है और तीसरे चरण के परीक्षणों की बात अभी चल ही रही है। जानकारों का अंदेशा है कि रूस अंतिम ट्रायलों के बिना ही वैक्सीन को आम लोगों के लिए बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है, जोकि एक असामान्य बात है।

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