अमेरिका में कोविड-19 से बचाव के लिए जिस वैक्सीन के बड़े मानव परीक्षण करने की मंजूरी मिली है, उसके शुरुआती ट्रायल के सकारात्मक परिणाम आने की खबर है। आठ स्वस्थ लोगों पर किए गए इस परीक्षण के बाद वैक्सीन को सुरक्षित और संक्रमण के खिलाफ इम्यून सिस्टम को मजबूत करने में सक्षम बताया गया है। अमेरिका के चर्चित अखबार 'न्यूयॉर्क टाइम्स' (एनवाईटी) ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया है कि वैक्सीन को तैयार करने वाली कंपनी 'मॉडेर्ना' ने सोमवार को घोषणा करते हुए यह जानकारी दी।
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अखबार ने बताया कि वैक्सीन को सबसे पहले आठ लोगों पर आजमाया गया था। इन सभी प्रतिभागियों को वैक्सीन के दो डोज दिए गए थे, जिसके बाद उनके शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ मजूबत एंटीबॉडी विकसित हुए हैं। अब अगले चरण के ट्रायल में सैकड़ों लोगों को वैक्सीन दी जाएगी। अगर वह परीक्षण भी कामयाब रहा तो फिर हजारों लोगों पर यह वैक्सीन आजमाई जाएगी। इसके बाद ही पक्के तौर पर पता चल सकेगा कि वैक्सीन वाकई में कोरोना वायरस से बचाव कर सकती है या नहीं। यहां बता दें कि मॉडेर्ना ने कोरोना वायरस के जेनेटिक मटेरियल 'एमआरएनए' से वैक्सीन को तैयार किया है। बताया जा रहा है कि यह अपनी तरह की नई तकनीक है, जिसके जरिये किसी वैक्सीन का निर्माण अभी होना है।
कई वैक्सीन बनाने के पक्ष में विशेषज्ञ
कोविड-19 के खिलाफ अभी तक एक भी कारगर वैक्सीन नहीं बनी है। लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों का मानना है कि इस बीमारी से पैदा हुए संकट से निपटने के लिए एक से ज्यादा वैक्सीन होनी चाहिए। इसीलिए वे वैक्सीन बनाने में जुटी दर्जनों कंपनियों द्वारा किए जा रहे ट्रायलों का समर्थन करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दरअसल कोरोना वायरस जिस स्तर पर वैश्विक रूप से फैला है, उससे निजात पाने के लिए किसी एक कंपनी की वैक्सीन से काम नहीं चलेगा। हालांकि वैक्सीन को जल्दी से जल्दी से तैयार करने के अलावा दुनियाभर के वैज्ञानिकों की चिंता यह भी है कि इस जल्दबाजी में कहीं वैक्सीन की सुरक्षा से समझौता न हो जाए।
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मॉडेर्ना द्वारा निर्मित वैक्सीन की विशेषता यह है कि इसे बनाने में जेनेटिक फ्रैमवर्क का इस्तेमाल किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इससे वैक्सीन को कोविड-19 के हर नए वायरल थ्रेट (खतरे) के हिसाब से ढाला जा सकता है। यही कारण है कि कंपनी ने अगले परीक्षणों को लेकर तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत दूसरे चरण के मानव परीक्षण में 600 लोगों को शामिल किया गया है। वहीं, जुलाई में होने वाले तीसरे चरण के मानव परीक्षण में हजारों लोगों को शामिल किया जाएगा। बताते चलें कि अमेरिकी ड्रग एजेंसी एफडीए ने दूसरे चरण के परीक्षण के लिए मंजूरी दे दी है। ऐसे में कंपनी के सीईओ डॉ. टॉल जैक्स का कहना है कि अगर सभी ट्रायल सफल रहे तो इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में वैक्सीन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए उपलब्ध होगी।
क्या हैं पहले चरण के परिणाम?
एनवाईटी के मुताबिक, सोमवार को कंपनी की तरफ से बताया गया कि पहले चरण के तहत जिन लोगों पर वैक्सीन आजमाई गई थी, वे स्वस्थ हैं। उसने कहा कि वैक्सीन के प्रभाव के चलते 18 से 55 साल की उम्र के इन प्रतिभागियों के शरीर के इम्यून सिस्टम ने वायरस के खिलाफ रोग-प्रतिकारक यानी एंटीबॉडी विकसित कर लिए हैं। इन एंटीबॉडी को जब लैब में संक्रमित कोशिकाओं पर टेस्ट किया गया तो उन्होंने वायरस को अपनी कॉपियां बनाने से रोक दिया, जो कि एक वैक्सीन की अपेक्षित क्षमता है। जांच में इन रोग-प्रतिकारकों का स्तर उन लोगों के एंटीबॉडीज के बराबर या उससे भी ज्यादा पाया गया, जो कोरोना वायरस को पहले ही मात दे चुके हैं।
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एनवाईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, इस परिणाम के बाद एनवाईयू लैंगन वैक्सीन सेंटर के निदेशक डॉ. मार्क जे मुलिगन ने कहा है कि मॉडेर्ना की वैक्सीन के परिणाम उत्साहजनक हैं। वे कहते हैं कि भले ही ट्रायल के प्रतिभागियों की संख्या काफी कम थी, लेकिन फिर भी इसे अच्छी शुरुआत माना जा सकता है। वे इससे इतने आशावान हुए हैं कि आगे के चरणों से जुड़े शोधकार्य में भाग ले सकते हैं।
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