हम सभी जानते हैं कि नया साल कुछ ही दिनों में शुरू होने वाला है। नया साल अपने साथ इस बात का भी संकेत देता है कि आपकी उम्र एक साल और बढ़ने वाली है। बढ़ती उम्र के साथ रोटेटर कफ इंजरी होना बेहद आम बात होती है, खासतौर से 35 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओ में। अगर आप भी अपनी 30 की उम्र पार कर चुकी हैं तो बता दें कि आपके शरीर में अब कैल्शियम और लुब्रिकेटिंग तरल पदार्थ कम होने लगेंगे। इनके कारण रोटेटर कफ में चोट जैसी आशंका बढ़ जाती है।

हमारे कंधे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग हैं जो बांह की हड्डी को धड़ से जोड़ते हैं। इनकी वजह से हमारे हाथ कई प्रकार के कार्य करने में सक्षम हो पाते हैं, जैसे वजन उठाना, धक्का देना, खिचना आदि। छोटी सी बाधा भी आपकी गतिविधि में रुकावट डाल सकती है और रोजाना के कई कार्यों को प्रभावित कर सकती है।

रोटेटर कफ कॉलरबोन (क्लेविकल), शोल्डर ब्लेड (स्कैपुला) और बांह की ऊपरी हड्डी (ह्यूमरस) को चार पेशियों और नसों के जरिए एक साथ जोड़कर रखती है। यह मांसपेशियां कंधे को कार्य करने में मदद करती हैं।

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रोटेटर कफ का कार्य
रोटेटर कफ की चार मांसपेशियों में शामिल हैं :

  • सुप्रास्पिनेटस : यह मांसपेशी आपकी बांह को उठाने में मदद करती है।
  • इंफ्रास्पिनेटस : यह मांसपेशी कंधे को बाहर की ओर (शरीर से दूर) घूमने में मदद करती है।
  • टेरेस माइनर : यह इंफ्रास्पिनेटस के ठीक नीचे स्थित होता है और कंधे को बाहर की तरफ घुमाने में सहायता करता है।
  • सबस्कैपुलेरिस : यह पेशी अन्य तीन मांसपेशियों के नीचे होती है और कंधे को अंदर की तरफ (शरीर के पास) घुमाने में महत्वपूर्ण कार्य करती हैं।

कुछ ऐसे व्यवसाय हैं, जिनमें ऊपरी शरीर का इस्तेमाल अधिक किया जाता है। इनकी वजह से अक्सर कंधे पर चोट लगने की आशंका रहती है जैसे कि बढ़ई और घर की पुताई वाले पेंटर (न की चित्रकार)। खेल के दौरान कंधों में दर्द होना आम बात है, खासतौर से तब जब कंधे को लगातार एक ही गतिविधि में इस्तेमाल किया जाए। ऐसा अकसर टेनिस, बैडमिंटन, स्क्वॉश, क्रिकेट और तैराकी जैसे खेलों में होता है।

रोटेटर कफ की चोट की आशंका ज्यादातर उन खिलाड़ियों में होती है जो कंधों से ऊपर वजन उठाते हैं, तैराकी करते हैं और किसी वस्तु जैसे गेंद को दूर फैंकते हैं। ऐसा मांसपेशियों और ऊतकों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण होता है।

रोटेटर कफ इंजरी के कारण
यह एक ऐसा अंग है जिसका काफी ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है, जिस कारण जोड़ में दर्द, टेंडनाइटिस, बर्साइटिस और अन्य चोट लगना बेहद आम बात है। कंधे के अत्यधिक इस्तेमाल से नसों और मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है। इसकी वजह से रोटेटर कफ संबंधित कई चोटें उभर कर सामने आती हैं, जिनमें दर्द और गंभीरता की तीव्रता अलग-अलग होती है। कई ऐसे भी मामले सामने आए हैं, जिनमें मरीज के रोटेटर कफ के अत्यधिक इस्तेमाल के बिना भी उसे क्षति पहुंची हो।

रोटेटर कफ इंजरी के प्रकार
रोटेटर कफ इंजरी तीन प्रकार की होती हैं : 

रोटेटर कफ टेंडनाइटिस : यह रोटेटर कफ की सबसे आम इंजरी है जो ज्यादातर कंधे के अत्यधिक इस्तेमाल कर कारण होती है। ज्यादातर टेंडनाइटिस इंजरी की ही तरह यह भी कंधे की मांसपेशियों के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण होती है, जिनमें फास्ट बॉलिंग (तेजी गेंदबाजी) और टेनिस के दौरान सिर के ऊपर से गेंद को मारना शामिल हैं। साथ ही यह 35 वर्ष से अधिक आयु वाली महिलाओं में भी सामान्य है।  

रोटेटर कफ बर्साइटिस: बर्सा एक थैली है जो लुब्रिकेटिंग तरल पदार्थ से भरी होती है जो घुटनों, कोहनियों, कूल्हों और कंधों में पाई जाती है। यह थैली हड्डियों, मांसपेशी, टेंडन और त्वचा जैसे ऊतकों के बीच स्थित होती है और अक्सर अंगों को घुमाने व मोड़ने जैसी गतिविधियों में इस्तेमाल होती हैं। बर्साइटिस बर्सा की सूजन और जलन के कारण होता है। यह भी खिलाड़ियों में एक सामान्य इंजरी है जो कि रोटेटर कफ के अत्यधिक इस्तेमाल की वजह से होती है।

रोटेटर कफ टीयर : यह अक्सर रोटेटर कफ पर अचानक वजन या प्रेशर पड़ने के कारण होता है, जैसे कि किसी सड़क हादसे या कंधे पर सामान गिरने पर।

अगर आपको भी हाथ ऊपर उठाते समय दर्द महसूस होता है तो यह रोटेटर कफ इंजरी हो सकती है। ठंड के मौसम में इसे नजरअंदाज न करें और जल्द ही किसी डॉक्टर से संपर्क करें। 

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