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Paurush Jeevan Capsules

उत्पादक: Dev Pharmacy

291 लोगों ने इसको हाल ही में खरीदा

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कैप्सूल Pack Size: 60 NOS

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Paurush Jeevan Capsules की जानकारी

आलस और शक्ति की कमी की भावना आने का कारण यह है की आपका शरीर ठीक से पोषक तत्वों, वसा, प्रोतिएन्स और चीनी को खून में सम्मिलित करने में असमर्थ हो रहा है। यह कैप्सूल पित्त रस का जिगर में उत्पादन बढ़ता है जो पाचन (और सभी खाद्य) में मदद करता है| यह उन एंजाइमों को शरीर में बढ़ाता है जो भोजन के पाचन के लिए उपयोगी होते हैं और इसकी वजह से जठरांत्र रोग ठीक हो जाते हैं| यह पोषक तत्वों का अवशोषण करता है जो सेल और ऊतक विकास में सुधार में मदद करता है।

इस समग्र भोजन के अवशोषण होने से भोजन का पाचन बेहतर हो जाता है जिससे ऊर्जा का स्तर में सुधार आता है और अधिक सक्रिय जीवन शैली प्राप्त होती है |

Paurush Jeevan Capsules के लाभ और उपयोग करने का तरीका - Paurush Jeevan Capsules Benefits & Uses in Hindi

Paurush Jeevan Capsules इन बिमारियों के इलाज में काम आती है -

  1. लिवर रोग मुख्य

Paurush Jeevan Capsules की खुराक और इस्तेमाल करने का तरीका - Paurush Jeevan Capsules Dosage & How to Take in Hindi

यह अनुशंसा की जाती है कि आप 1 कैप्सूल दिन में तीन बार लें। यह सबसे अच्छा है अगर आप इसे ठीक से भोजन के बाद ले। 1 महीने के भीतर, आप ध्यान देने योग्य प्रभाव को देखना शुरू कर देंगे - कुछ के लिए यह बहुत जल्दी हो सकता है। यह भी सिफारिश की है कि आप 3 महीने के बाद इसकी खुराक रोक दें और एक ब्रेक लें जिससे आप इस दवा लेने पर निर्भर होने से बच जायें|

Paurush Jeevan Capsules की सामग्री - Paurush Jeevan Capsules Active Ingredients in Hindi

Paurush Jeevan Capsules के नुकसान, दुष्प्रभाव और साइड इफेक्ट्स - Paurush Jeevan Capsules Side Effects in Hindi

रिसर्च के आधार पे Paurush Jeevan Capsules के निम्न साइड इफेक्ट्स देखे गए हैं -

कोई ज्ञात नुकसान नहीं हैं हालांकि, अगर आप किसी भी एलर्जी या कुछ भी असामान्य अनुभव करें, पौरुष जीवन तुरंत लेना बंद करें और एक डॉक्टर से बात करें। कुछ ऑनलाइन मंचों में, अवांछित वजन बढ़ने के बारे में शिकायत की गयी है, लेकिन चिकित्सा परीक्षणों में यह साबित नहीं हुआ है।

इसके अलावा, यह गर्भवती महिलाओं और स्तनपान माताओं द्वारा इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए| आप धूम्रपान नहीं करें और अन्य नशीले पदार्थों का उपयोग ना करें जब आप पौरुष जीवन का उपयोग कर रहें है| साथ ही शराब का सेवन ना करें| आप अगर अन्य दवाएँ(आयुर्वेद या नहीं) ले रहे हैं, तो आप इसे लेने से पहले एक डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

इन बिमारियों से ग्रस्त हों तो Paurush Jeevan Capsules न लें या सावधानी बरतें - Paurush Jeevan Capsules Contraindications in Hindi

अगर आपको इनमें से कोई भी रोग है तो, Paurush Jeevan Capsules को न लें क्योंकि इससे आपकी स्थिति और बिगड़ सकती है। अगर आपके डॉक्टर उचित समझें तो आप इन रोग से ग्रसित होने के बावजूद Paurush Jeevan Capsules ले सकते हैं -

आप खट्टे फल और तले हुए खाद्य पदार्थ (वे अच्छी तरह से पचते नहीं), अतिरिक्त मिठाई, दालों और अन्य ख़ान पदार्थों से बचना चैहीए जो अची तरह से पच नहीं | डेयरी और हरी पत्तेदार खाद्य पदार्थ का सेवन करें जो पचाने में आसान रहते हैं|

Paurush Jeevan Capsules के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न - Frequently asked Questions about Paurush Jeevan Capsules in Hindi

  1. अपनी हालत में सुधार लाने के लिए मुझे पौरुष जीवन कैप्सूल का उपयोग कितने समय तक करना चाहिए?
    दो हफ्ते में सुधार आम तौर से आ जाता है। पर आपकी ज़रूरत फरक हो सकती है तो अवधि भी फरक हो सकती है जो एक डॉक्टर की सलाह से ही पता चल सकती है।

  2. पौरुष जीवन कैप्सूल को दिन में कितनी बार लेने की आवश्यकता है?
    आम तौर से पौरुष जीवन कैप्सूल दिन में दो बार लेनी चाहिए। परंतु हर व्यक्ति को अपनी ज़रूरत के हिसाब से डॉक्टर से परामर्श के बाद ही पौरुष जीवन कैप्सूल कितनी बार लेनी है तैय करना चाहिए।

  3. पौरुष जीवन कैप्सूल को खाली पेट लेना चाहिए या भोजन से पहले या भोजन के बाद?
    हमारे उपयोगकर्ताओं के अनुसार पौरुष जीवन कैप्सूल सबसे अधिक भोजन के बाद लेने की सूचना है। परंतु अपनी स्थिति के बारे में डॉक्टर से सलाह और फिर निर्णए लें।

  4. क्या यह दवा आदत या लत बन सकती है?
    अधिकतर दवाओं की लत नहीं पड़ती। ऐसी दवाइयों को भारत सरकार ने अनुसूची H या X में डाल दिया है, यानी यह नियंत्रित पदार्थ हैं। डॉक्टर के निर्देशन में कोई भी दवाई का सेवन शुरू करें।

  5. क्या पौरुष जीवन कैप्सूल को लेना एकदम से रोका जा सकता है या इसे धीरे धीरे लेना रोकना चाहिए?
    कुछ दवाइयों को एकदम से नहीं रोका जा सकता वरना उल्टा प्रभाव पड़ने का ख़तरा होता है। पौरुष जीवन कैप्सूल को रोकने से पहले अपनी स्थिति अपने डॉक्टर को बतायें और फिर निर्णय लें।

  6. क्या पौरुष जीवन कैप्सूल का उपयोग गर्भवती महिला के लिए ठीक है?
    हर महिला की स्थिति अलग होती है, इसलिए डॉक्टर से पूछें पौरुष जीवन कैप्सूल को लेने से पहले।

  7. क्या पौरुष जीवन कैप्सूल का उपयोग स्तनपान की अवधि के दौरान सुरक्षित है?
    इसके बारे में डॉक्टर से ज़रूर पूछें और उनकी सलाह के अनुसार ही निर्णय लें।

विशेष विवरण

Weight 60 Gm
Number of Contents in Sales Package 60caps

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References

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  3. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume- II. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1999: Page No 17-18
  4. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No 62-63
  5. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No 142-143
  6. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No - 168 - 169
  7. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 4. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 2004: Page No - 105 - 106
  8. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 1. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1986: Page No - 138 -139
  9. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 4. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 2004: Page No 122 - 123
  10. Ministry of Health and Family Welfare. Department of Ayush: Government of India. [link]. Volume 2. Ghaziabad, India: Pharmacopoeia Commission for Indian Medicine & Homoeopathy; 1999: Page No 70-73
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