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पाचन तंत्र का रोग क्या है?


पाचन प्रणाली में शरीर के कई अंदरूनी अंग आते हैं जो सभी एक ट्यूब की मदद से एक दूसरे से जुड़े होते हैं। पाचन तंत्र में मुंह से लेकर गुदा तक कई अंग होते हैं, जिनमें भोजन नली, पेट और छोटी व बड़ी आंत शामिल होती हैं। इसके अलावा पाचन प्रणाली में लिवर, पित्ताशय की थैली और अग्नाशय भी शामिल हैं, क्योंकि ये सभी भोजन पचाने के लिए पाचक रस का निर्माण करते हैं। पाचन तंत्र शरीर में आवश्यक पोषक तत्वों का अवशोषण करने में मदद करता है और व्यर्थ पदार्थों को शरीर से बाहर निकालता है। 

पाचन तंत्र से जुड़े किसी भी अंग में कोई समस्या होने पर उसे पाचन रोग कहा जाता है। पाचन रोग से जुड़ी कुछ समस्याएं जैसे, सीने में जलन, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज और इरीटेबल बाउल सिंड्रोम आदि। पाचन प्रणाली से संबंधी बहुत सारी समस्याएं हैं, इसलिए आप सामान्य लक्षणों को गलती से नजर अंदाज भी कर सकते हैं। 

कुछ ऐसे लक्षण हैं जो पाचन तंत्र की बीमारी का संकेत देते हैं जैसे दस्त, कब्ज, पाचन प्रणाली से खून आना, रिगर्जिटेशन (Regurgitation) और निगलने में कठिनाई आदि। पाचन प्रणाली की बीमारी के सामान्य व गंभीर लक्षणों को समझना जरूरी होता है, ताकि आप डॉक्टर को इनके बारे में ठीक से बता सकें। पाचन रोग का परीक्षण गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट (Gastroenterologist; पेट संबंधी बीमारियों के विशेषज्ञ डॉक्टर) द्वारा की जाती है। स्थिति का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर खून टेस्ट, एक्स रे और एंडोस्कोपी जैसे टेस्ट करवाने  का सुझाव भी दे सकते हैं। 

पाचन तंत्र की बीमारी के इलाज में कुछ प्रकार की दवाएं संयोजन करके दी जाती हैं और मरीज की जीवनशैली में कुछ प्रकार के बदलाव किए जाते हैं। 

पाचन तंत्र रोग से होने वाली कुछ समस्याएं अधिक परेशान करने वाली नहीं होती, लेकिन अन्य समस्याएं गंभीर हो सकती हैं और अगर इनको बिना उपचार किये छोड़ दिया जाए तो ये जीवन के लिए घातक हो सकती है। 

(और पढ़ें - पाचन शक्ति बढ़ाने के उपाय)

  1. पाचन तंत्र की बीमारी के प्रकार - Types of Digestive Disorders in Hindi
  2. पाचन तंत्र की बीमारी के लक्षण - Digestive Disorders Symptoms in Hindi
  3. पाचन तंत्र के रोग के कारण - Digestive Disorders Causes in Hindi
  4. पाचन तंत्र के रोग से बचाव - Prevention of Digestive Disorders in Hindi
  5. पाचन तंत्र की बीमारी का परीक्षण - Diagnosis of Digestive Disorders in Hindi
  6. पाचन तंत्र की बीमारी का इलाज - Digestive Disorders Treatment in Hindi
  7. पाचन तंत्र रोग की जटिलताएं - Digestive Disorders Risks & Complications in Hindi
  8. पाचन तंत्र के रोग में परहेज - What to avoid during Digestive Disorders in Hindi?
  9. पाचन तंत्र की बीमारी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Digestive Disorders in Hindi?
  10. पाचन तंत्र के रोग की दवा - Medicines for Digestive Disorders in Hindi
  11. पाचन तंत्र के रोग की दवा - OTC Medicines for Digestive Disorders in Hindi
  12. पाचन तंत्र के रोग के डॉक्टर

पाचन तंत्र की बीमारी के प्रकार - Types of Digestive Disorders in Hindi

पाचन तंत्र रोग के कितने प्रकार हैं?

पाचन संबंधी कई समस्याओं और बीमारियों के समूह को पाचन तंत्र विकार या पाचन तंत्र रोग कहा जाता है। लिवर, पेट, पित्ताशय, अग्नाशय, छोटी आंत और कोलन से जुड़ी बीमारियों को पाचन तंत्र के रोग के नाम से जाना जाता है। 

(और पढ़ें - कोलन कैंसर के लक्षण

पाचन तंत्र के रोगों में निम्न प्रकार की बीमारियां शामिल हैं:

(और पढ़ें - कब्ज दूर करने के घरेलू उपाय)

पाचन तंत्र की बीमारी के लक्षण - Digestive Disorders Symptoms in Hindi

पाचन तंत्र की बीमारी के क्या लक्षण हैं?

पाचन तंत्र रोग से पैदा होने वाले लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं क्योंकि वे पाचन तंत्र रोग के प्रकार पर निर्भर करते हैं। पाचन तंत्र के रोग से होने वाले कुछ आम लक्षण जैसे:

डॉक्टर के पास कब जाएं?

यदि आपको निम्न समस्याएं हो रही हैं, तो आपको जल्द से जल्द डॉक्टर को दिखा लेना चाहिए:

  • लगातार कुछ दिनों तक दस्त रहे तो
  • बिना कारण लगातार वजन घट रहा हो
  • मल में खून आ रहा हो
  • पेट में दर्द जो तेजी से बढ़ रहा हो
  • यदि जीवनशैली में बदलाव और मेडिटेशन आदि से भी आपके पाचन संबंधी लक्षणों में सुधार ना आए तो आपको डॉक्टर के पास जाकर इसकी जांच करवा लेनी चाहिए।

(और पढ़ें - पेट दर्द के घरेलू उपाय)

पाचन तंत्र के रोग के कारण - Digestive Disorders Causes in Hindi

पाचन तंत्र के रोग के कारण - Digestive Disorders Causes in Hindi

पाचन तंत्र रोग क्यों होता है?

पाचन तंत्र की बीमारी के कई कारण हो सकते हैं:

पेट में अल्सर:

(और पढ़ें - पेट में छाले के उपाय)

कब्ज:

यह आमतौर पर अस्वस्थ आहार और सुस्त जीवनशैली के कारण होती है।

(और पढ़ें - कब्ज में क्या खाये)

भोजन संबंधी आदतें जो कब्ज का कारण बन सकती हैं:

  • अधिक मात्रा में मीठा और वसा वाले भोजन खाना
  • कम मात्रा में फाइबर वाले खाद्य पदार्थ का सेवन करना (और पढ़ें - फाइबर युक्त आहार)  
  • भोजन में पर्याप्त मात्रा में पानी व अन्य तरल पदार्थ मौजूद न होना
  • शराबचाय, कॉफी आदि का सेवन करना

पित की पथरी:

पित्ताशय एक तरल पदार्थ का निर्माण करता है जिसे पितरस कहते हैं, पितरस शरीर में कोलेस्ट्रॉल को पचाने का काम करता है। अभी स्पष्ट रूप से पित्ताशय में पथरी पैदा करने वाले कारण का पता नहीं चल पाया है। यदि पित्ताशय से पितरस के बहाव में किसी प्रकार की बाधा हो रही है या फिर पित्तरस में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ गई है तो पित्ताशय में पथरी बनने लग सकती है।

(और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण)

इसके अलावा कुछ अन्य कारक भी हैं, जिनके कारण पित्ताशय में पथरी हो सकती है:

  • अधिक वसा वाले भोजन खाना
  • अधिक कोलेस्ट्रॉल वाले भोजन खाना (और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल डाइट)
  • नियमित रूप से ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना जिनमें फाइबर कम हो
  • परिवार में पहले किसी को पित्ताशय में पथरी होना
  • शरीर का तेजी से वजन कम होना
  • लिवर से संबंधित कोई रोग होना (और पढ़ें - लिवर रोग के लक्षण)

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज (IBD):

इस रोग में आपके पाचन तंत्र में सूजन, लालिमा और जलन पैदा हो जाती है। 

  • अल्सरेटिव कोलाइटिस
  • क्रोन रोग

प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़े विकार:

जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर के अंदर संक्रमण फैला रहे वायरस और बैक्टीरिया से लड़ती है, तो प्रतिरक्षा प्रणाली में कोई विकार होने पर वह पाचन तंत्र की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नष्ट करने लग जाती है। 

इरीटेबल बाउल सिंड्रोम:

जब मल त्याग करने के लिए मांसपेशियां पूरी तरह से संकुचित ना हो पाएं तो इस स्थिति को इरीटेबल बाउल सिंड्रोम कहा जाता है। 

एसिड भाटा रोग (GERD): 

जब आप कुछ निगलते हैं तो भोजन नली के अंत में स्थित स्फिंक्टर खुल जाते है जिससे भोजन व तरल पेट के अंदर चला जाता है और फिर वे बंद हो जाते हैं। लेकिन जब ये स्फिंक्टर कमजोर पड़ जाते हैं या असाधारण तरीके से काम करने लग जाते हैं तो कई बार बिना किसी वजह से खुल जाते हैं जिससे पेट के अंदर के अम्लीय पदार्थ वापस भोजन नली में आ जाते हैं। ये अम्लीय पदार्थ भोजन नली की परत में जलन पैदा कर देते हैं इस स्थिति को एसिड भाटा रोग कहा जाता है। कई बार इस स्थिति में भोजन नली में में सूजन व लालिमा भी हो जाती है। कुछ स्थितियां हैं जो एसिड भाटा रोग के विकसित होने की आशंका को बढ़ा देती हैं:

बवासीर :

नसों में सूजन आने से गुदा के आस-पास के क्षेत्र में दबाव बढ़ जाता है, जिसे बवासीर कहा जाता है। बवासीर निम्न कारणों से हो सकती है:

  • मोटापा
  • गर्भावस्था
  • टॉयलेट में लंबे समय बैठा रहना
  • लंबे समय से दस्त या कब्ज होना
  • मल त्याग करने के दौरान अधिक जोर लगाना
  • कम फाइबर वाले आहार खाना

(और पढ़ें - शराब की लत का इलाज)

पाचन तंत्र के रोग से बचाव - Prevention of Digestive Disorders in Hindi

पाचन तंत्र रोग से बचाव कैसे करें?

पाचन प्रणाली से जुड़ी कुछ ऐसी समस्याएं है जिनकी रोकथाम नहीं की जा सकती। जीवनशैली व आहार में बदलाव करके कुछ प्रकार की पाचन संबंधी समस्याएं विकसित होने से बचाव किया जा सकता है और पाचन क्रिया को सामान्य स्थिति में रखा जा सकता है:

  • सोफ्ट ड्रिंक ना पिएं।
  • पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ पिएं।
  • धीरे-धीरे खाएं या पिएं।
  • अधिक वसायुक्त, मसालेदार और चिकनाई वाले भोजन ना खाएं। (और पढ़ें - मसालेदार भोजन के नुकसान)
  • भोजन को अधिक मात्रा में ना खाएं।
  • रात के समय हमेशा हल्का खाना खाएं।
  • खाने के बाद तुरंत कतई न लेटें। 
  • धूम्रपान छोड़ दें। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने घरेलू उपाय)
  • खूब व्यायाम करें और अपना स्वस्थ वजन बनाएं रखें। (और पढ़ें - एक्सरसाइज के फायदे)
  • तनाव से बचें, क्योंकि तनाव आपके पूरे शरीर को प्रभावित करता है जिसमें पाचन प्रणाली भी शामिल है।
  • नियमित रूप से हाथ धोते रहें, पाचन प्रणाली में समस्याएं पैदा करने वाले ज्यादातर रोगाणु हाथ से मुंह तक होते हुए पाचन प्रणाली के अंगों में पहुंचते हैं। जब कोई व्यक्ति किस दूषित वस्तु मल को छू लेता है तो रोगाणु उसके हाथ पर लग जाते हैं और फिर खाने या पीने के दौरान मुंह तक चले जाते हैं। नियमित रूप से हाथ धोने से रोगाणुओं के मुंह तक पहुंचने की संभावनाएं कम हो जाती है। 
  • जब आपको मल त्याग करने की इच्छा होती है उसी समय मल त्याग करने के लिए चले जाएं। यदि आप उस समय मल त्याग नहीं करते तो कुछ देर बाद इच्छा खत्म हो जाती है और मल कठोर हो जाता है जिसे निकालने में भी कठिनाई हो सकती है।
  • दवाओं की जांच करें, क्योंकि यदि आप नियमित रूप से सूजन कम करने वाली और दर्द कम करने वाली दवाएं ले रहें हैं तो उनसे सीने में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। (और पढ़ें - व्यायाम करने का सही समय)

पाचन तंत्र की बीमारी का परीक्षण - Diagnosis of Digestive Disorders in Hindi

पाचन तंत्र के रोग की जांच कैसे की जाती है?

पाचन तंत्र के रोग का परीक्षण करने से पहले डॉक्टर आपसे आपके लक्षणों, जीवनशैली और पिछली मेडिकल स्थिति के बारे में कुछ सवाल पूछेंगे और यदि आप किसी प्रकार की दवाएं खा रहे हैं तो उनके बारे में भी पूछेंगे। 

पाचन तंत्र के रोगों का परीक्षण करने के लिए डॉक्टर निम्न टेस्ट कर सकते हैं:

  • सीटी स्कैन और एमआरआई स्कैन
    पाचन प्रणाली के सभी अंगों के आकार और उनकी जगह की ठीक से जांच करने के लिए ये टेस्ट किये जाते हैं।
     
  • एक्स रे: 
    • सामान्य एक्स रे: आपकी पाचन प्रणाली में कहीं पर किसी प्रकार की रुकावट है तो इस टेस्ट की मदद से उसका पता लगाया जा सकता है। 
    • बेरियम एक्स रे: इस टेस्ट में एक्स रे करने से पहले मरीज को बेरियम नामक एक विशेष पदार्थ पिलाया जाता है। यह बेरियम शरीर के अंदर जाने पर एक्स रे की तस्वीर में सफेद रंग का दिखाई देता है। इस टेस्ट से यह पता लगाया जाता है कि भोजन नली और पेट ठीक तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं।
       
  • पाचन तंत्र का इंट्यूबेशन (Intubation): 
    इस टेस्ट के दौरान एक छोटी, पतली और लचीली ट्यूब को नाक या मुंह के माध्यम से मरीज के पेट या छोटी आंत के अंदर डाला जाता है। इस टेस्ट का उपयोग पाचन संबंधी रोग के कारण का पता लगाने के लिए या पेट के द्रव से सेंपल निकालने के लिये किया जाता है।
     
  • स्टूल टेस्ट -
    स्टूल टेस्ट के दौरान मरीज के मल का सेंपल लिया जाता और उसमें खून, फंगी, वायरस, बैक्टीरिया, सफेद रक्त कोशिकाओं, पितरस और कैंसर की उपस्थिति का पता लगाने के लिए उसकी जांच की जाती है। यदि मरीज ठीक तरह से पोषक तत्वों को नहीं पचा पा रहा तो स्टूल टेस्ट की मदद से इस स्थिति का भी पता लगाया जा सकता है।
     
  • अल्ट्रासाउंड: 
    अल्ट्रासाउंड में मरीज के शरीर के अंदरुनी अंगों की तस्वीरें लेने के लिए ध्वनि तरंगों का इस्तेमाल किया जाता है। यदि पाचन प्रणाली के किसी भी अंग में किसी प्रकार की असामान्यता है तो इस टेस्ट की मदद से उसका पता लग जाता है। 

(और पढ़ें - लैब टेस्ट क्या है)

पाचन तंत्र की बीमारी का इलाज - Digestive Disorders Treatment in Hindi

पाचन तंत्र के रोग का इलाज कैसे किया जाता है?

पाचन तंत्र की बीमारी के प्रकार के अनुसार ही उसका इलाज किया जाता है। पाचन संबंधी किसी भी समस्या का परीक्षण और इलाज डॉक्टर के द्वारा ही किया जाना चाहिए। बिना डॉक्टर से पूछे किसी भी प्रकार की दवा नहीं लेनी चाहिए। 

पाचन संबंधी कुछ रोग सिर्फ जीवनशैली में बदलाव करने से ठीक हो सकते हैं और अन्य का इलाज दवाओं के द्वारा किया जाता है। अगर ये रोग दवा या अन्य उपायों से ठीक ना हो पाए तो अंत में ऑपरेशन करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। 

पेट में छाले का इलाज:

पेट में अल्सर के संक्रमण का इलाज करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं और पेट में एसिड की मात्रा को को कम करने के लिए प्रोटोन पंप इन्हीबिटर दवा (PPIs) का इस्तेमाल किया जाता है। 

कब्ज का इलाज:

कब्ज का इलाज करने के लिए  निम्न दवाएं लिखी जा सकती हैं:

  • मल को नरम बनाने वाली दवाएं (Stool softeners)
  • फाइबर के सप्लीमेंट्स
  • लेक्सेटिव

पित्ताशय की पथरी का इलाज:

पित की पथरी से ग्रस्त कई लोगों में किसी प्रकार के लक्षण पैदा नहीं होते, इसलिए उन्हें उपचार की जरूरत नहीं पड़ती। यदि पित की पथरी के लक्षण विकसित हो रहे हैं तो उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है। कुछ स्थितियों में डॉक्टर ऑपरेशन करके मरीज के शरीर से पित को निकाल देते हैं। 

सीलिएक रोग का इलाज:

जीवन भर पूरी तरह से ग्लूटेन (लस) मुक्त आहार का सेवन करना ही सेलिएक रोग के लक्षणों को जीवन भर नियंत्रित रखने का एकमात्र तरीका है। 

इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज का इलाज:

इसके इलाज का मुख्य लक्ष्य पाचन तंत्र में आई सूजन और लालिमा को कम करना होता है। क्योंकि इससे इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज के लक्षण पैदा होने लगते हैं। 

इस स्थिति का इलाज करने के लिए पोषक तत्वों के सप्लीमेंट्स, सूजन व जलन कम करने वाली और प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने वाली दवाएं दी जाती हैं। गंभीर मामलों में आंत के क्षतिग्रस्त हिस्से को निकालने के लिए ऑपरेशन भी किया जा सकता है।

(और पढ़ें - फैटी लिवर का इलाज)

एसिड भाटा रोग का इलाज:

आमतौर पर दवाओं की मदद से गर्ड के लक्षणों को नियंत्रण में रखा जा सकता है। लेकिन कुछ मामलों में यदि दवाएं काम ना कर पाएं या फिर आप लंबे समय तक दवाएं नहीं लेना चाहते तो डॉक्टर इसका इलाज करने के लिए सर्जरी कर सकते हैं। एसिड भाटा रोग का इलाज करने के लिए आमतौर पर निम्न दवाएं लिखी जा सकती हैं:

  • प्रोटोन पंप इन्हीबिटर, पेंटाप्राजोल (Pantoprazole), ओमेप्राजोल (Omeprazole), रिबेप्राजोल (Rabeprazole)
  • एच2 रिसेप्टर ब्लॉकर - रेनिटिडिन (Ranitidine), नाइजेशिडिन (Nizatidine)
  • बैक्लोफेन (Baclofen)

(और पढ़ें - लिवर बढ़ने का इलाज)

बवासीर का इलाज:

बवासीर के इलाज के रूप में मरीज को खूब मात्रा में पानी पीने और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी जाती है।

बवासीर का इलाज करने के लिए डॉक्टर हाइड्रोकोर्टिसोन (Hydrocortisone ) युक्त क्रीम भी लिख सकते हैं। यदि नसों में गंभीर रूप से सूजन आ गई है तो उसके लिए ऑपरेशन करने की आवश्यकता भी पड़ सकती है। 

(और पढ़ें - बवासीर के घरेलू उपचार)

पाचन तंत्र रोग की जटिलताएं - Digestive Disorders Risks & Complications in Hindi

पाचन तंत्र की बीमारी से कौन-कौन सी समस्याएं होती हैं?

पेट में अल्सर होने पर विकसित होने वाली जटिलताएं - 

  • पेट के अंदर रक्तस्त्राव
  • पेट की अंदरूनी परत में छिद्र होना
  • गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्सट्रक्शन (Gastric outlet obstruction)

बवासीर और कब्ज से होने वाली जटिलताएं:

  • एनल फिशर, गुदा की त्वचा में सूक्ष्म छिद्र व दरारें बनना
  • मलाशय में मल एकत्रित होकर कठोर हो जाना
  • रेक्टल प्रोलेप्स, गुदा के अंदर से आंत बाहर आना

अल्सरेटिव कोलाइटिस और क्रोन रोग से होने वाली जटिलताएं - 

  • कोलन कैंसर होने का खतरा बढ़ जाना
  • बड़ी आंत में फोड़ा बनना
  • कुअवशोषण (भोजन में मौजूद तत्वों का ठीक से अवशोषण न होना) और कुपोषण होना

पित की पथरी से होने वाली जटिलताएं - 

कुछ लोगों में पित की पथरी से किसी प्रकार की जटिलता पैदा नहीं होती, हालांकि कुछ लोगों में निम्न जटिलताएं हो सकती हैं:

  • पित्ताशय में ,सूजन व जलन
  • अग्नाशय में सूजन व जलन
  • आंतों में रुकावट

(और पढ़ें - पथरी के दर्द का इलाज)

इरीटेबल बाउल डिजीज से होने वाली जटिलताए:

  • डिप्रेशन
  • चिंता (और पढ़ें - टेंशन के लक्षण)
  • गंभीर रूप से दस्त लगना जिससे शरीर में पानी की कमी हो जाती है
  • जीवन के कई पहलू प्रभावित होना (ठीक से जीवन व्यतीत ना कर पाना या जीवन स्तर में गड़बड़ी आ जाना)

(और पढ़ें - चिंता दूर करने के घरेलू उपाय)

पाचन तंत्र के रोग में परहेज - What to avoid during Digestive Disorders in Hindi?

पाचन तंत्र के रोग में परहेज - What to avoid during Digestive Disorders in Hindi?

पाचन तंत्र की बीमारी में क्या ना खाएं?

यदि आपको  पाचन तंत्र के रोग हैं, तो आपको निम्न खाद्य पदार्थ नहीं खाने चाहिए:

(और पढ़ें - प्याज का रस बालों के लिए)

पाचन तंत्र की बीमारी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Digestive Disorders in Hindi?

पाचन तंत्र की बीमारी में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Digestive Disorders in Hindi?

पाचन तंत्र के रोग में क्या खाएं?

पाचन तंत्र की बीमारी मे निम्न खाद्य पदार्थ आपके लिए स्वस्थ रहते हैं:

(और पढ़ें - नींबू के फायदे)

Dr. Suraj Bhagat

Dr. Suraj Bhagat

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Smruti Ranjan Mishra

Dr. Smruti Ranjan Mishra

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

Dr. Sankar Narayanan

Dr. Sankar Narayanan

गैस्ट्रोएंटरोलॉजी

पाचन तंत्र के रोग की दवा - Medicines for Digestive Disorders in Hindi

पाचन तंत्र के रोग के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
OcidOCID 20MG CAPSULE 20S43
RantacRantac 150 Mg Tablet18
ZinetacZinetac 150 Mg Tablet17
AcilocAciloc 150 Tablet17
Omez DOMEZ D CAPSULE 15S0
OmezOmez 10 Mg Capsule27
AristozymeARISTOZYME FIZZ TABLET 4S15
Reden OReden O 2 Mg/150 Mg Tablet33
ADEL 28 Plevent DropADEL 28 Plevent Drop200
Schwabe Anacardium occidentale CHSchwabe Anacardium occidentale 12 CH96
BoniprazBonipraz 20 Mg Capsule36
R T DomR T Dom 10 Mg/150 Mg/20 Mg Tablet7
ADEL 29 Akutur DropADEL 29 Akutur Drop200
Schwabe Natrum muriaticum TabletSchwabe Natrum muriaticum Biochemic Tablet 200X560
SBL Asarum canadense DilutionSBL Asarum canadense Dilution 1000 CH86
BromezBromez 20 Mg Capsule12
Schwabe Natrum phosphoricum TabletSchwabe Natrum phosphoricum Biochemic Tablet 200X560
CapcidCapcid 20 Mg Tablet1280
Schwabe Natrum sulphuricum TabletSchwabe Natrum sulphuricum Biochemic Tablet 200X560
Bjain Angelica archangelica Mother Tincture QBjain Angelica archangelica Mother Tincture Q 143
CapocidCapocid 20 Mg Capsule0

पाचन तंत्र के रोग की दवा - OTC medicines for Digestive Disorders in Hindi

पाचन तंत्र के रोग के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

OTC Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
Baidyanath Avipattikar ChurnaBaidyanath Avipattikar Churna80
Baidyanath Shankh BhasmaBaidyanath Shankh Bhasma Combo Pack Of 2112
Dabur DashmularishtaDABUR DASHMULARISHTHA SYRUP 450ML100
Herbal Hills Lavan Bhaskar ChurnaHerbal Hills Lavan Bhaskar Churna 1kg1560
More Power Capsule 40 CapsulesMore Power Ayurvedic Capsule198
Baidyanath Mahavatvidhwansan RasBaidyanath Mahavatvidhwansan Ras110
Baidyanath Anand Bhairav Ras (Jwar)Baidyanath Anand Bhairav Ras (Jwar)70

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References

  1. Craig OF, Quigley EM. Current and emerging therapies for the management of functional gastrointestinal disorders. Ther Adv Chronic Dis. 2011 Mar;2(2):87-99. PMID: 23251744
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  3. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Digestive Diseases
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Digestive diseases
  5. Center for Disease Control and Prevention [internet], Atlanta (GA): US Department of Health and Human Services; Digestive Diseases
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