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अगर आप नए पैरंट हैं यानी हाल ही में अगर आपके घर किलकारियां गूंजी हैं तो यह आपके लिए जीवन की सबसे बड़ी खुशी का क्षण होगा। लेकिन नए पैरंट बनने वाले लोग अक्सर नवजात शिशु का ध्यान कैसे रखना है इसे लेकर कन्फ्यूज भी रहते हैं। खासकर बच्चे के रोने को लेकर। जी हां, नवजात शिशु, बड़ों की तरह बोलकर तो अपनी परेशानी या तकलीफ बता नहीं सकते इसलिए वे रोने लगते हैं। लेकिन बच्चा भूख लगने की वजह से रो रहा है, डाइपर गंदा होने की वजह से रो रहा है या फिर किसी और परेशानी की वजह से- ये पता लगाना मुश्किल होता है।

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नए माता-पिता के लिए यह सीखने का समय होता है और आप बच्चे के इन संकेतों को जितनी जल्दी समझ जाएंगे आपके लिए उतना ही अच्छा होगा। दरअसल, रोना एक माध्यम जिसके जरिए बच्चा अपनी बात या अपनी तकलीफ माता-पिता तक पहुंचाने की कोशिश करता है। हालांकि कई बार तो बच्चा इतना रोता है कि माता-पिता समझ ही नहीं पाते कि आखिर बच्चे रो क्यों रहा है और उसे क्या चाहिए? हम आपको उन 8 सामान्य कारणों के बारे में बता रहे हैं जिस वजह से बच्चे रोते हैं और उन्हें चुप कैसे कराना है, इस बारे में यहां जानें।

  1. जब भूख लगती है - jab bhookh lagti hai
  2. उदरशूल (पेट में दर्द) होने पर - colic hone par
  3. जब बच्चा थक जाए और उसे नींद आ रही हो - jab neend aa rhi ho
  4. जब डाइपर गंदा हो जाए - diaper change ke liye
  5. ज्यादा गर्मी लगने पर भी रोता है बच्चा - zyada garmi lag rhi ho
  6. त्वचा पर जब ठंड महसूस होती है - thand lag rhi ho
  7. जब शिशु चाहता है कि आप उसे गोद में लेकर गले से लगाएं - jab cuddle karna chahta hai bachha
  8. जब बच्चे की तबीयत खराब हो - jab tabiyat kharab ho
  9. आखिर में ये बातें भी जानना है जरूरी - takeaway
  10. इन 8 कारणों से रोते हैं ज्यादातर बच्चे, ऐसे कराएं चुप के डॉक्टर

बच्चा जब भूखा होता है तो यह बताने के लिए उसका पेट खाली हो गया है वह रोने लगता है। नवजात शिशुओं का पेट बेहद छोटा होता है और इसलिए वह एक बार में बहुत ज्यादा दूध नहीं पी सकता। यही वजह है कि नवजात शिशु को हर थोड़ी-थोड़ी देर में दूध पिलाते रहने की जरूरत होती है ताकि उनका पेट भरा रहे।

हर 2-3 घंटे में जब बच्चे का पेट खाली हो जाता है और उसे भूख लगती है तो वह रोने लगता है। ऐसे में जब भी बच्चा मांगे तो उसे दूध पिला दें ये न सोचें कि अभी कुछ देर पहले ही तो पिलाया था। कुछ समय बाद नवजात शिशु जैसे-जैसे बड़ा होने लगता है वह खुद ही भूख लगने के संकेत देने लगता है जैसे- अपनी उंगलियां चूसने लगना, जब मां बच्चे के पास आती है तो बच्चे का मां के ब्रेस्ट की तरफ मुड़ जाना आदि। जब आप बच्चे पर नजर रखेंगी तो समय के साथ आपको भी ये संकेत दिखने लगेंगे और आप इन्हें समझने भी लगेंगी।

(और पढ़ेें: बच्चे को दूध पिलाने के तरीके)

मान लीजिए आपने अभी-अभी बच्चे को दूध पिलाया है, उसका पेट भरा हुआ है और डाइपर भी गंदा नहीं है फिर भी बच्चा रो रहा है। उसे चुप कराने की सारी कोशिशें बेकार साबित हो रही हैं। ऐसे में घबराइए नहीं। हो सकता है आपके बच्चे को कोलिक यानी उदरशूल की समस्या हो। अगर आपका बच्चा 5 महीने से छोटा है, हर दिन 3 घंटे से ज्यादा रोता है, हफ्ते में 3 दिन या इससे ज्यादा रोता है और अगर यह क्रम 3 हफ्ते तक जारी रहता है तो इसका मतलब है कि आपके बच्चे को कोलिक की समस्या है।

कैसे जानें कि आपके बच्चे को कोलिक यानी उदरशूल की समस्या है:

  • अपनी उम्र के दूसरे बच्चों की तुलना में आपके बच्चे के रोने की आवाज बहुत तेज है
  • बच्चे का पेट अक्सर टाइट या कड़ा रहता है
  • बच्चा अपनी मुट्ठी को कसकर बांधे रखता है और अक्सर गैस पास करता है

बच्चे को कॉलिक की समस्या न हो इसके लिए हर बार बच्चे को दूध पिलाने के बाद उसे कंधे पर लेकर डकार जरूर दिलवाएं। साथ ही बच्चे की पीठ की मसाज भी हल्के हाथों से करें जिससे उसे आराम मिले।

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मां के गर्भ से बाहर आकर इस दुनिया में बच्चे को कई तरह के समझौते करने पड़ते हैं। ऐसे में इन चीजों का सामना करने के लिए बेहद जरूरी है कि बच्चा हर दिन कम से कम 16 से 18 घंटे की नींद ले। लेकिन कई बार बच्चा बहुत ज्यादा थक जाने की वजह से सो नहीं पाता और तब चिड़चिड़ेपन की वजह से भी रोने लगता है। बच्चे पर नजर रखें और उसके द्वारा दिए जा रहे संकेतों को समझें। जैसे- अगर बच्चा रो रहा हो या खाली जगह पर चुपचाप से देख रहा हो तो इसका मतलब है कि वह नींद लेने के लिए तैयार है। ऐसे में बच्चे को शोर-शराबे से दूर किसी शांत कमरे में ले जाएं और नींद दिलाने में बच्चे की मदद करें।

(और पढ़ें: नवजात शिशु को कैसे डालें समय पर सोने की आदत)

जब बच्चे का डाइपर या लंगोटी सूसू या पॉटी की वजह से गीली और गंदी हो जाती है तब बच्चे की नाजुक त्वचा में इरिटेशन होने लगती है और इस वजह से बच्चा रोते हुए यह बताने की कोशिश करता है कि उसका डाइपर बदलने का वक्त आ गया है। जहां तक संभव हो बच्चे के रोने का इंतजार न करें और समय-समय पर खुद ही चेक करते हुए बच्चे का डाइपर या लंगोटी बदल दें ताकि बच्चे को गीलापन महसूस न हो। इसके अलावा हर बार डाइपर या लंगोटी बदलते वक्त बैरियर क्रीम का इस्तेमाल जरूर करें। साथ ही रोजाना बच्चे को कुछ देर के लिए नैपी-फ्री टाइम भी जरूर दें।

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कई बार हम ये सोचते हैं कि कहीं बच्चे को ठंड न लग जाए ये सोचकर हम उसे खूब सारे कपड़े पहना देते हैं। लेकिन ज्यादा कपड़ों की वजह से न सिर्फ बच्चे को मूवमेंट करने में परेशानी होती है बल्कि उसे गर्मी और बेचैनी भी महसूस होने लगती है। ऐसे में हमेशा याद रखें कि आपके बच्चे को आपकी तुलना में सिर्फ एक लेयर कपड़ा ज्यादा पहनाएं यानी अगर आपने 2 कपड़े पहने हैं तो बच्चे को 3 पहनाएं।

अक्सर आपने देखा होगा कि जब आप बच्चे का डाइपर या लंगोटी बदलने लगते हैं या फिर जब आप बच्चे को नहलाने लगते हैं तब भी बच्चा बहुत रोता है। ऐसे इसलिए क्योंकि नवजात शिशु की स्किन पर जब ठंडी हवा लगती है तो उन्हें यह अहसास अच्छा नहीं लगता, उन्हें असहज महसूस होने लगता है और इस वजह से वे रोकर अपनी असहजता आप तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं। ऐसी स्थिति में परेशान होने की जरूरत नहीं। समय के साथ आपका बच्चा भी स्किन पर ठंडी हवा को सहने सीख जाएगा और आप भी टाइम के साथ ट्रेन्ड हो जाएंगे जिससे बेहद कम समय में आप बच्चे का डाइपर या लंगोटी चेंज कर पाएंगे।

नवजात शिशुओं को अक्सर आपने देखा होगा कि उन्हें बिस्तर पर जाना पसंद नहीं होता। जब तक वे आपकी गोद में रहते हैं चुप रहते हैं और जैसे ही बिस्तर पर लिटाओ वे रोना शुरू कर देते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जब आप बच्चे को गोद में लेकर गले लगाकर रखते हैं तो उन्हें यह आश्वासन मिलता रहता है कि आप उनसे प्यार करते हैं और वे सुरक्षित हैं। ऐसे में अगर बच्चा रो रहा हो तो उसे कुछ देर गोद में ही उठाकर रखें, उसे अपने सीने से लगाकर रखाएं, गाना सुनाएं, लोरी सुनाएं, कहानियां सुनाएं। आप चाहें तो बच्चे को अपने बेहद करीब रखने के लिए बेबी स्लिंग का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

बच्चे को उसकी मां और पिता से बेहतर और कोई समझ नहीं सकता। अगर आपको लग रहा है कि आपका बच्चा हर दिन सामान्य रूप से जैसे रहता है वैसे नहीं है, जरूरत से ज्यादा रो रहा है और कराह रहा है तो हो सकता है कि उसकी तबीयत खराब हो। ऐसे में तुरंत डॉक्टर से बात करें या खुद बच्चे को लेकर डॉक्टर के पास जाएं।

नवजात शिशु अपनी हर जरूरत के लिए आप पर यानी अपने माता-पिता पर ही निर्भर रहता है। ऐसे में रोना ही एकमात्र माध्यम है जिसके जरिए वह अपनी जरूरतें और समस्याएं आप तक पहुंचा सकता है। जब बच्चा रोता है तो किसी भी माता-पिता को अच्छा नहीं लगता। वे हर संभव कोशिश करते हैं बच्चे को चुप कराने की, उसे खुश रखने की। लेकिन समय के साथ आप भी यह सीख जाएंगे और बच्चे के रोने में फर्क कर पाएंगे कि आखिर बच्चा भूख की वजह से रो रहा है, गोद में आने के लिए रो रहा है या फिर तबीयत खराब होने की वजह से।

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