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डायपर रैश छोटे बच्चों में होने वाली आम समस्या होती है। इसमें बच्चे के डायपर पहनने वाली त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते हो जाते हैं और इसकी वजह से बच्चों खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वैसे तो इस समस्या को आप घरेलू उपाय की मदद से भी ठीक कर सकती हैं, लेकिन घरेलू उपचार से लाभ न होने पर आपको डॉक्टरी इलाज की आवश्यकता होती है।

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डायपर रैश की वजह से बच्चा हर समय असहज महसूस करता है और वह रोता रहता है। बच्चों को होने वाली इस आम परेशानी को आगे विस्तार से बताया जा रहा है।

साथ ही आपको डायपर रैश क्या है, डायपर रैश के लक्षण, डायपर रैश के कारण, डायपर रैश से बचाव और डायपर रैश के इलाज के बारे में भी बताया जा रहा है।  

  1. डायपर रैश क्या है - Diaper rash kya hai
  2. डायपर रैश के लक्षण - Diaper rash ke lakshan
  3. डायपर रैश के कारण - Diaper rash ke karan
  4. डायपर रैश से बचाव - Diaper rash se bachav
  5. डायपर रैश का इलाज - Diaper rash ka ilaaj
  6. डायपर रैश के लक्षण, कारण, उपचार के डॉक्टर

डायपर रैश बच्चों की त्वचा में होने वाली एक आम समस्या है। इसमें आपके बच्चे के डायपर पहनने वाली जगह पर लाल रंग के चकत्ते हो जाते हैं।   

डायपर रैश मुख्यतः अधिक समय तक गीले रहने, डायपर के बार-बार न बदलने, दस्त होने और डायपर को कवर करने के लिए प्लास्टिक पैंट का उपयोग करने से संबंधित होता है। इसके अलावा बच्चे के आहार में ठोस खाद्य पदार्थों को शामिल करने, बच्चे को एंटीबायोटिक्स देने और स्तनपान कराने वाली महिला के द्वारा कुछ विशेष तरह के खाद्य पदार्थ खाने से डायपर रैश की समस्या शुरू हो सकती है।

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डायपर रैश की स्थिति में बच्चा माता-पिता को परेशान कर सकता है, लेकिन डायपर रैश के अधिकतर मामले घरेलू उपायों की मदद से आसानी से ठीक हो जाते हैं।

(और पढ़ें - बच्चे के दाँत निकलते समय होने वाले दर्द का घरेलू इलाज)

डायपर रैश में बच्चे की त्वचा में निम्न तरह के लक्षण दिखाई देते हैं-

  • त्वचा के संकेत – डायपर रैश में आपके बच्चे के कूल्हे, जांघों और जननांगों की त्वचा लाल और फूली हुई दिखाई देती है। ऐसे में बच्चे की त्वचा में जलन और दर्द होता है। (और पढ़ें - त्वचा पर चकत्ते का इलाज)
  • बच्चे के स्वभाव में बदलाव – इस समस्या के आप दौरान देखेंगी कि आपका बच्चा असहज महसूस कर रहा है और खासकर डायपर को बदलते समय उसको ज्यादा परेशानी होती है। डायपर वाली त्वचा को छूने या धोते समय बच्चा दर्द से रोने लगता है। डायपर रैश आपके बच्चे को डायपर पहनने के दौरान कभी भी हो सकता है। लेकिन यह समस्या सामान्यतः जन्म के बाद से 15 महीनों तक ही हो सकती है, विशेषकर 9 से 12 महीने के बच्चों में डायपर रैश होना आम बात है। (और पढ़ें - स्किन एलर्जी का उपचार)

डॉक्टर के पास कब जाएं

डायपर रैश आसानी से ठीक हो जाते हैं। घरेलू उपचार को अपनाने के कुछ दिनों बाद ही डायपर रैश में आराम आने लगता है। अगर घरेलू उपचार को अपनाने के कुछ दिनों बाद भी बच्चे को आराम न मिलें तो आपको दर्द को कम करने वाले मरहम (ointment) का उपयोग करना चाहिए और डायपर को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए। इस समय अपने डॉक्टर से बात करें। कई मामलों में डायपर रैश बढ़ने से संक्रमण हो जाता है, जिसको ठीक करने के लिए दवाओँ की जरूरत होती है।

बच्चे को डॉक्टर के पास कब दिखाएं -

  • डायपर रैश की गंभीर स्थिति होने पर।
  • घरेलू उपचार के बावजूद रैश ठीक न होने पर। 

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डायपर रैश के साथ निम्न तरह की परेशानी होने पर भी आपको तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

डायपर रैश होने के कई कारण होते हैं, इनको निम्नतः बताया जा रहा है।

  • मल या मूत्र से त्वचा में जलन होना –
    डायपर में मल या मूत्र लंबे समय तक रहने से बच्चे की संवेदनशील त्वचा में कई तरह की समस्याएं हो सकती है। यदि आपके बच्चे को बार-बार मल आता हो तो बच्चे को डायपर रैश होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, क्योंकि मल, मूत्र के मुकाबले बच्चों की त्वचा को जल्द नुकसान पहुंचा सकता है। (और पढ़ें - मल में खून आने का उपचार)
     
  • खाने की आदत में बदलाव –
    बच्चा के ठोस आहार लेने से उसके मल में बदलाव आने लगता है, जिससे डायपर रैश होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। इसके अलावा बच्चे के भोजन में बदलाव से उसको बार-बार मल आने लगता है और इस बदलाव की वजह से भी डायपर रैश होने की संभावनाएं हो सकती हैं। स्तनपान कराने वाली मां की भोजन संबंधी विशेष आदत से भी बच्चे को डायपर रैश हो सकता है। (और पढ़ें - स्टूल टेस्ट क्या है)
     
  • नए उत्पादों से जलन होना –
    डायपर के ब्रैंड (Brand) में बदलाव, कूल्हे के हिस्से को पोंछने वाले डिस्पोसल वाइप्स ( disposal wipes), साबुन और बच्चे के कपड़ों को धोने वाले डिटर्जेंट से भी डायपर रैश होने की संभावनाएं होती हैं। इसके आलावा बेबी लोशन, बेबी पाउडर और बेबी ऑयल में बदलाव से भी बच्चे को डायपर रैश हो सकते हैं। (और पढ़ें - मां बनने की सही उम्र)
     
  • बैक्टीरियल और यीस्ट संक्रमण –
    डायपर रैश त्वचा के साधारण संक्रमण की तरह शुरु होकर अन्य हिस्सों में भी फैल सकते हैं। डायपर से ढका हिस्सा (कूल्हे, जांघ और जननांग) नम और गर्म होने की वजह से, इसमें बैक्टीरिया संक्रमण और यीस्ट संक्रमण होने की होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं। रैश त्वचा की सिलवटों (creases: क्रीज) में लाल बिंदु की तरह दिखाई देते हैं। (और पढ़ें - फंगल संक्रमण के घरेलू उपाय)
     
  • संवदेनशील त्वचा –
    बच्चे की त्वचा में एटॉपिक डर्मेटाइटिस (Atopic dermatitis) और एक्जिमा (Eczema) जैसी स्थितियां होने पर डायपर रैश होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। हालांकि, एटॉपिक डर्मेटाइटिस और एक्जिमा दोनों ही परेशानियां मुख्य रूप से डायपर की त्वचा के अलावा शरीर के अन्य हिस्सों की त्वचा को प्रभावित करती है। (और पढ़ें - फंगल संक्रमण का इलाज)
     
  • त्वचा पर रगड़ लगना और पपड़ी आना –
    टाइट फिटिंग के डायपर और कपड़ों की रगड़ से त्वचा पर रैश हो सकते हैं।
     
  • एंटीबायोटिक का इस्तेमाल –
    एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को मारते हैं, लेकिन इसके फायदो के साथ ही कुछ नुकसान भी होते हैं। जब बच्चे एंटीबायोटिक लेते हैं तो इससे यीस्ट को नियंत्रित करने वाले बैक्टीरिया भी नष्ट हो जाते हैं, जिसके चलते बच्चे को यीस्ट संक्रमण से डायपर रैश हो सकता है। स्तनपान कराने वाली महिलाओं के द्वारा एंटीबायोटिक लेने से भी बच्चे इसकी चपेट में आ सकते हैं। 

(और पढ़ें - एंटीबायोटिक दवा लेने से पहले ज़रूर रखें इन बातों का ध्यान)

नीचे बताए कुछ सरल तरीके आपके बच्चे की त्वचा पर होने वाले डायपर रैश की संभावनाओं को कम करने में मदद कर सकते हैं -

  • डायपर को समय-समय पर बदलें –
    बच्चों के गंदे डायपर को तुरंत बदलें। अगर आपने बच्चे की देखभाल के लिए किसी को काम पर रखा हुआ है तो उसे अपने बच्चे के गंदे डायपर को नियमित रूप से बदलने के लिए कहें।
     
  • डायपर को बदलने के बाद बच्चों के कूल्हों और गुदा क्षेत्र को अच्छी तरह साफ करें –
    गंदे डायपर को बदलने के बाद बच्चे के कूल्हों और गुदा क्षेत्र को पानी से साफ करें। इसके लिए आप पानी में भीगे साफ कपड़े को भी इस्तेमाल कर सकती हैं। कूल्हे को साफ करने के लिए बाजार में मिलने वाले वाइप (wipes) का उपयोग न करें, क्योंकि इनमें कई तरह के कैमिकल मिलें होते हैं। (और पढ़ें - बच्चे के जन्म के बाद माँ को क्या खाना चाहिए)
     
  • बच्चे को सूखाने के लिए साफ तौलिये का उपयोग करें –
    बच्चे के निचले हिस्से को रगड़े नहीं, रगड़ने से बच्चे की त्वचा पर जलन हो सकती है।
     
  • बच्चे को ज्यादा टाइट डायपर न पहनाएं –
    ज्यादा टाइट डायपर के कारण बच्चे के निचले हिस्से की त्वचा को हवा नहीं लग पाती है और ऐसे में नमी बनी रहने के कारण डायपर रैश हो सकते हैं। टाइट डायपर से कमर और जांघ की त्वचा पर रगड़ लगने की संभावनाएं भी बढ़ जाती है। (और पढ़ेें - अपने बच्चे की तेल मालिश करते समय ज़रूर रखें इन दस बातों का ध्यान)
     
  • हर समय बच्चे को डायपर न पहनाएं –
    अगर संभव हो तो बच्चे को हर समय डायपर न पहनाएं। खुले रहने से आपके बच्चे का निचला हिस्सा प्राकृतिक तरह से नमी मुक्त होता है। जब बच्चे ने डायपर न पहना हो तो आप उसके नीचे किसी बड़े तौलिये को बिछा सकती हैं।
     
  • कपड़े से बने डायपर को सावधानिपूर्वक धोएं –
    कपड़े से बने गंदे डायपर को कुछ समय के लिए पानी में भिगोकर रखें और इनको गर्म पानी से ही धोएं। अगर आपके बच्चे को डायपर रैश हो या उनके होने की संभावना हो, तो आपको उनके डायपर दो बार धोने चाहिए। (और पढ़ेें - गर्भ संस्कार से पाएं सुखी और बुद्धिमान बच्चा)
     
  • मरहम का नियमित उपयोग करें –
    अगर आपके बच्चे को डायपर रैश अकसर होते हों, तो आपको इनकी संभावनाओं को कम करने के लिए डायपर बदलते समय हर बार मरहम का उपयोग करना चाहिए। पैट्रोलियम जैली और जिंक ऑकसाइड से कई तरह के मरहम बनाए जाते हैं और इससे त्वचा की कई समस्याओं को दूर किया जाता है।
     
  • गंदे डायपर को बदलने के बाद हाथों को जरूर धोएं –
    गंदे डायपर को बदलने के बाद हाथों को धोने से आपके बच्चे की त्वचा में बैक्टीरिया और यीस्ट होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। साथ ही हाथों के साफ होने से घर के अन्य बच्चों को संक्रमण का खतरा नहीं रहता है। (और पढ़ेें - आयुर्वेद के अनुसार बच्चे के जन्म से पूर्व महिलाओं को करना चाहिए इन बातों का पालन)
     
  • एक साइज बड़ा डायपर लें –
    डायपर रैश होने पर आप सामान्य साइज से बड़ा डायपर ले। 

डायपर रैश के इलाज का सबसे बेहतर तरीका है आप अपने बच्चे की त्वचा को साफ और सूखी रखें। अगर घरेलू उपचार के बाद भी डायपर रैश की समस्या बनी रहती है, तो आपके डॉक्टर आपको निम्न तरह के उपाय अपनाने की सलाह दे सकते हैं।

  • अगर बच्चे को फंगल संक्रमण है तो आपके डॉक्टर आपको एंटीफंगल क्रीम लगाने की सलाह देते हैं। (और पढ़ें - प्रसव के बाद के 40 दिनों तक क्या खाना चाहिए)
  • अगर बच्चे को बैक्टीरियल संक्रमण हो तो डॉक्टर बच्चे को एंटीबायोटिक दवा खाने के लिए दे सकते हैं।

बच्चे की त्वचा पर लगाए जाने वाले स्टेरॉयड युक्त मरहम बाल रोग विशेषज्ञ या त्वचा रोग विशेषज्ञ से पूछ कर ही लें। तीव्र प्रभाव वाले कुछ स्टेरॉयड त्वचा की अन्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

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डायपर रैश को ठीक होने में कुछ दिनों को समय लगता है और ये समस्या कुछ दिनों के बाद दोबारा भी हो सकती है। इलाज के बाद भी रैश की समस्या बनी रहने पर आपके डॉक्टर बच्चे को त्वचा रोग विशेषज्ञ के पास जाने की सलाह दे सकते हैं।

जिंक ऑक्साइड डायपर रैश के मरहम में मुख्य तत्व माना जाता है। अपने बच्चे की त्वचा पर रैश के प्रभावों को कम करने के लिए आप मरहम की मोटी परत को दिन में थोड़े-थोड़े समय बाद लगाती रहें। 

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मरहम और क्रीम से लोशन और अन्य तरल दवा के मुकाबले त्वचा में जलन कम होती है, लेकिन मरहम हवा को त्वचा तक पहुंचने से रोकते हैं। आपके डॉक्टर बच्चे की समस्या के अनुसार मरहम या क्रीम का सुझाव दे सकते हैं। बोरिक एसिड (Boric acid), कैंफर (Camphor), फिनोल (Phenol), बेंजोकेन (benzocaine) और सैलिसिलेट्स (salicylates) युक्त उत्पादों को बच्चों की त्वचा पर न लगाएं, ये सभी तत्व बच्चे के लिए हानिकारक होते हैं।

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