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बच्चों का रोना वैसे तो सामन्य बात होती है। बच्चा छोटा हो या बड़ा अगर वो रोता नहीं है तो आमतौर पर लोग ये समझ लेते हैं कि बच्चा अस्वस्थ है। रोने के माध्यम से ही बच्चा अपनी जरूरतों को अपने माता-पिता को बता सकता है। एक शिशु पूरी तरह से अपनी मां पर आश्रित रहता है। उसे भूख और नींद लगती है तो या वो तब रोता है और जब उसे घूमना होता है। कभी-कभी तो बच्चा इतना ज्यादा रोता है कि समझ नहीं आता वो क्या चाहता है उसे किस चीज की जरूरत है?

(और पढ़ें - बच्चों में चिड़चिड़ापन के कारण)

भला हंसते-मुस्कुराते बच्चे किसे अच्छे नहीं लगते। अगर बच्चा मुस्कुराता रहे तो सबकुछ अच्छा लगता है। लेकिन कई मामलों में बच्चे रात को गहरी नींद से जगकर रोने लगते हैं ऐसे में बच्चे की परेशानी के साथ माता-पिता की दिक्क्तें बढ़ जाती हैं। बच्चों के साथ माता-पिता को भी जगना पड़ता है और इससे उन्हें भी थकान, अनिद्रा जैसी समस्याएं घेर लेती हैं। इन दिक्क्तों से बचने के लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि बच्चे रात को रोते क्यों हैं? अगर आपका बच्चा भी रात को जगकर रोता है तो कारण जानने के लिए यह लेख पढ़ें।   

  1. बच्चे रात को क्यों रोते हैं - Baccho ke raat me rone ke karan
  2. बच्चे का रात में रोना कैसे बंद करें - Raat me baccho ka rona band karne ke tarike

रात में बच्चा क्यों रोता है इसके कारण निम्नलिखित हैं:

  • अगर बच्चा बीमार है तो वो सामन्य से अलग स्वर में रोएगा और फिर बीमारी में तो बच्चे तो क्या बड़े का भी रोने का मन करता है। शिशु को बुखारखांसीउल्टी आदि के लक्षण तो नहीं हैं। बीमारी का कोई भी लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
  • कई बार बच्चे नींद पूरी न होने की वजह से भी रोते हैं जिसकी वजह से वो थक तो जाते ही हैं साथ ही चिड़चिड़े भी हो जाते हैं।
  • बच्चों को अंधेरे में अकेले सोने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि उन्हें अंधेरे से डर लगता है। ऐसे में अगर बच्चे के पास मां रहती है तो उसे सहज महसूस होता है।
  • छोटे बच्चे जल्दी-जल्दी पेशाब करते हैं जिसकी वजह से उनका डायपर गीला हो जाता है और उन्हें नींद नहीं आती। बच्चों का डायपर जल्दी-जल्दी बदलते रहना चाहिए। गीले डायपर के कारण उन्हें रैशेस भी पड़ सकते हैं। (और पढ़ें - पेशाब कम आने के कारण)
  • कई बार बच्चों के रोने का कारण पेट में गैस भी हो सकती है जिसके कारण बच्चे को पेट में दर्द हो सकता है। कई बार बच्चे भूख के कारण ज्यादा दूध पी लेते हैं लेकिन ज्यादा दूध उन्हें हजम नहीं होता। ऐसी स्थिति में फौरन डॉक्टर से सम्पर्क करना चाहिए। बच्चों के मामले में किसी प्रकार की कोई लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
  • जब बच्चों के रोने की बात आती है तो सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यही दिमाग में आता है कि कहीं उसे भूख तो नहीं लगी। इस समय बच्चे चिड़चिड़े और बेचैन हो जाते हैं।  
  • शिशु अगर गहरी नींद में सो रहा हो और अचानक रोने लगे तो कई बार एक कारण यह भी होता है कि बच्चे ने कोई डरावना सपना देखा हो और डर की वजह से उसकी नींद खुल गई हो।

(और पढ़ें - बच्चों की देखभाल कैसे करें)

अगर आपके बच्चे को कोई दिक्कत नहीं है और फिर भी वो रो रहा है तो हो सकता है उसने इसे अपनी आदत बना लिया हो। बच्चों को शांत करने के तरीके निम्नलिखित हैं:

  • अगर बच्चे को हल्की सुस्ती भी महसूस होती है तो भी उसे पालने में लिटा देना चाहिए। इससे बच्चे को जब नींद आएगी वो सो जाएगा और वो मां पर निर्भर नहीं रहेगा। (और पढ़ें - नींद की कमी का इलाज)
  • अगर बच्चा रोना नहीं बंद करता है तो उसे दस से पंद्रह मिनट के लिए बाहर घुमाने के लिए ले जाना चाहिए। जब तक बच्चा शांत न हो उसके पास से नहीं हटना चाहिए।  
  • जब तक बच्चा सो न जाए उसे पालने से बाहर नहीं निकालना चाहिए उसके सोने तक थपकी देते रहें। इससे बच्चों को जल्दी नींद आती है और गहरी नींद सो सकते हैं। 
  • छोटे शिशुओं को अक्सर हिलाते-डुलाते ही सुलाया जाता है तभी उन्हें नींद आती है।

बच्चों का रोना बंद करने के लिए निम्नलिखित तरीकों से स्तनपान कराना चाहिए:

  • कुछ बच्चे भोजन के दौरान या बाद में भी रोते हैं। ऐसे में स्तनपान कराने की पोजीशन को बदलना चाहिए।
  • स्तनपान कराने के बाद बच्चे को धीरे से थपथपाएं या उसकी पीठ पर सहलाएं जिससे उसे डकार आ सके।
  • बच्चे को सीधा रखकर दूध पिलाना चाहिए।

ऊपर लिखे बिंदुओं को ध्यान रखकर अगर आप अपने शिशु को सुलाती हैं तो जरूर गहरी नींद में सो जाएगा और बड़े होने के साथ ही उसका रात को अचानक उठकर रोना बंद हो जाएगा। इसके अतिरिक्त भी यदि आपके बच्चे को कोई दिक्क्त है जिससे उसकी नींद टूटती है तो उसके बारे में चिकित्सक से सलाह लेना जरूरी हो जाता है क्योंकि कई बार बच्चों की भाषा माता-पिता से बेहतर डॉक्टर समझ सकते हैं।

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