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अमेरिका की नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी (एनएसीएसयू) के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा चिप विकसित किया है जो बिना तार के ऊर्जायुक्त रहते हुए मस्तिष्क में इंप्लांट किया जा सकता है। इसे बनाने वाले वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस चिप की मदद से न्यूरल सिग्नल्स का पता लगाया जा सकता है। उन्होंने चूहों पर इस तकनीक को सफलतापूर्वक इस्तेमाल करके दिखाया है। इस बारे में चिप के डेवलेपमेंट से जुड़े अध्ययन के लेखक और एनएसीएसयू में इलेक्ट्रिकल एंड कंप्यूटर इंजीनियरिंग के प्रोफेसर याओयाओ जिया ने बताया, 'हमारा उद्देश्य एक ऐसा रिसर्च टूल बनाना था जिसे मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों के व्यवहार को बेहतर समझने के लिए इस्तेमाल किया जा सके, विशेषकर न्यूरल स्टिम्युलेशन से जुड़े रेस्पॉन्स के मामले में।'

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प्रोफेसर जिया का मानना है, 'इस टूल से हमें उन सवालों के जवाब पाने में मदद मिलेगी, जो अल्जाइमर या पार्किन्सन जैसे न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स के एडवांस ट्रीटमेंट की खोज करने में मदद कर सकते हैं।' खबर के मुताबिक, यह नई तकनीक अपने दो फीचर्स के कारण पहले से मौजूद अन्य अत्याधुनिक तकनीकों से अलग है। पहला, यह पूरी तरह वायरलेस है। शोधकर्ता इस 5x2 एमएम2 के साइज वाली इस चिप को इसमें पहले से डाले गए पावर रिसीवर कॉइल की मदद से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड को अप्लाई करते हुए चार्ज कर सकते हैं। चूहों पर की टेस्टिंग के दौरान ऐसा किया जा चुका है। इसमें चूहों के पिंजरे के आसपास इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बनाई गई थी, जिससे डिवाइस चूहे की गतिविधियों से प्रभावित हुए बिना पूरी तरह चालित रहती थी। चिप की एक और खासियत यह है कि यह सूचना को बिना तार के भेज और प्राप्त कर सकती है।

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दूसरा फीचर, जो इस चिप को विशेष बनाता है, यह कि यह एक ट्राइमॉडल डिवाइस है, यानी यह तीन काम कर सकती है। इसके पहले बनाई गई न्यूरल इंटरफेस चिप्स मुख्यतः दो काम कर पाती हैं: एक, वे मस्तिष्क के जिस हिस्से में लगाई जाती हैं, वहां से इलेक्ट्रिकल बदलावों को डिटेक्ट कर न्यूरल सिग्नल को पढ़ सकती हैं; दो, वे ब्रेन के ऊतकों में छोटे स्तर के इलेक्ट्रिकल करंट से दिमाग को उत्तेजित कर सकती हैं। नया चिप ये दोनों काम करने के अलावा ब्रेन टिशू या ऊतक को लाइट से जगमगा भी सकता है, जिसे ऑप्टिकल स्टिम्युलेशन कहते हैं। हालांकि ऐसा करने के लिए पहले लक्षित न्यूरॉन्स को आनुवंशिक रूप से मोडिफाई करना होगा ताकि वे लाइट की प्रकाश के आयाम यानी वेवलेन्थ पर प्रतिक्रिया दे सकें।

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इन फीचर्स को लेकर नए चिप पर बात करते हुए प्रोफेसर जिया कहते हैं, 'जब आप इलेक्ट्रिकल स्टिम्युलेशन का इस्तेमाल करते हैं तो इलेक्ट्रिकल करंट पर आपका थोड़ा नियंत्रण हो जाता है। लेकिन ऑप्टिकल स्टिम्युलेशन से आप (ऐसा करने में) कहीं ज्यादा सटीक हो सकते हैं, क्योंकि फिर आप केवल उन्हीं न्यूरॉन्स को मोडिफाई कर सकते हैं, जिन्हें आप टार्गेट करना चाहते हैं ताकि उन्हें लाइट के प्रति संवेदनशील बनाया जा सके। यह न्यूरोसाइंस रिसर्च की एक एक्टिव फील्ड है, लेकिन इसमें इलेक्ट्रॉनिक टूल्स की कमी रही है। यहीं इस शोधकार्य का महत्व है।' दूसरे शब्दों में कहें तो न्यूरल टिशू को शाइन कर यह चिप वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद करेगा कि हमारा दिमाग आखिर कैसे काम करता है।

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