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स्वीडन स्थित केटीएच रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी और कैरोलिन्स्का इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने मस्तिष्क का एक नए प्रकार का नक्शा तैयार किया है। उन्होंने मस्तिष्क में ऊतकों की मैपिंग से जुड़े एक नए तरीके से इस नक्शे को तैयार किया है। इस नई खोज को मस्तिष्क से जुड़ी बीमारियों और उनके चलते दिमाग में होने वाले बदलावों को समझने के संबंध में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह अध्ययन 'साइंस एडवांसेज' नाम की विज्ञान पत्रिका में प्रकाशित हो चुका है।

शोध में शामिल वैज्ञानिकों का कहना है कि मनुष्यों और अन्य स्तनधारी जीव-जन्तुओं के मस्तिष्क को समझने के लिए फिलहाल जिन नक्शों का इस्तेमाल होता है, वे आमतौर पर इस बात पर आधारित होते हैं कि दिमाग में न्यूरॉन कहां और किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं या कहें कि मस्तिष्क के सबसे सामान्य न्यूरोट्रांसमिटर्स आकार में किस तरह बंटे हुए होते हैं। कैरोलिन्स्का इंस्टीट्यूट के न्यूरोसाइंस विभाग के सदस्य और शोध के लेखकों में शामिल कोन्सैनटिनोस मेलेटिस का कहना है कि न्यूरोसाइंस से जुड़े प्रयोगों और उनकी व्याख्या के संबंध में ऐसे नक्शों का काफी महत्व है, लेकिन अलग-अलग विशेषज्ञों द्वारा परिभाषित किए जाने के चलते ये नक्शे काफी विवादित भी रहे हैं।

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अब नए शोध के तहत यह जानने की कोशिश की गई है कि क्या आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर मस्तिष्क के नक्शों को किसी और तरीके से ज्यादा बेहतर परिभाषित किया जा सकता है। इसके लिए शोध में एक वयस्क चूहे के दिमाग का इस्तेमाल किया गया। वैज्ञानिकों ने उसके दिमाग की मैपिंग के लिए स्पैशल ट्रांसक्रिप्टोमिक्स नाम के मेथड का इस्तेमाल किया, जिसकी मदद से वे दिमाग के ऊतकों के ऐसे मॉलिक्यूल्स का पता कर पाए जो कोशिकाओं की पहचान और उनके संचालन में कोडिंग का काम करते हैं। वहीं, मस्तिष्क के ऊतकों में मॉलिक्यूल्स की सटीक लोकेशन का पता करने के लिए रिबोन्यूक्लिक एसिड को एक्सट्रैक्ट (निकालना) करने वाले मेथड का इस्तेमाल किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि शोध में चूहे के दिमाग का इस्तेमाल किया गया, जिसका आकार तुलनात्मक रूप से काफी ज्यादा छोटा होता है। हालांकि इसके बावजूद वैज्ञानिक बड़े पैमाने पर मैपिंग करने में कामयाब हुए हैं। बीते दिन सालों में उन्होंने चूहे के दिमाग में कोई 35 हजार अलग-अलग मेजरमेंट पॉइंट (मापन बिंदु) का पता लगाया है। इसी मैपिंग की मदद से शोधकर्ता चूहे के पूरे मस्तिष्क का एक वर्चुअल 3डी नक्शा बनाने में सफल हुए हैं, जिसमें दिमाग के अलग-अलग हिस्सों में सक्रिय 15 हजार से ज्यादा वंशाणुओं का डेटा शामिल है।

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह अध्ययन बताता है कि कैसे अब पहले से न्यूरोएनाटॉमिकल की जानकारी के बिना ही दिमाग का एक विस्तृत नक्शा बनाया जा सकता है। इससे दिमाग के अलग-अलग हिस्सों की डेटा आधारित परिभाषा तय करना भी संभव हुआ है, जिसके आधार पर अन्य प्रकार की प्रजातियों के मस्तिष्क की मैपिंग और स्टडी की जा सकती है। साथ ही इन्सानी दिमाग को समझने में भी मदद मिल सकती है। मिसाल के लिए इससे यह जाना जा सकता है कि दिमाग से जुड़ी कुछ विशेष प्रकार की बीमारियों के चलते मस्तिष्क में किस तरह के मॉलिक्यूलर बदलाव आते हैं।

शोध में मिली इस कामयाबी को लेकर वैज्ञानिकों का कहना है, 'दिमाग में अलग-अलग प्रकार के असंतुलन मानसिक या न्यूरोलॉजिकल बीमारी का कारण बन सकते हैं। ऐसे में नए इलाजों की खोज के संबंध में दिमाग के हिस्सों के मॉलिक्यूलर अंतर और न्यूरोनल फंक्शन के प्रभाव की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।' शोधकर्ताओं ने कहा कि यह बहुत कमाल की बात है अब केवल मॉलिक्यूलर प्रोफाइल का पता कर तमाम जानकारी के साथ मस्तिष्क की रचना की जा सकती है।

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