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नए कोरोना वायरस या न्यू कोरोना वायरस निमोनिया (एनसीपी) से जुड़ी एक ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट भारत को चिंता में डाल सकती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत उन देशों में शामिल है जहां हवाई परिवहन के जरिये कोरोना वायरस के फैलने का खतरा सबसे ज्यादा है। मीडिया में आई खबरों की मानें तो जर्मनी स्थित दो मेडिकल संस्थानों हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी और रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने हवाई परिवहन से जुड़े एक विशेष पैटर्न का विश्लेषण किया है। इसमें बताया गया है कि कोरोना वायरस के फैलने का सबसे बड़ा जरिया हवाई यातायात है। लेकिन क्या यह भारत में कोरोना वायरस के फैलने का कारण बन सकता है?

क्या कहता है अध्ययन?
शोधकर्ताओं ने 30 देशों की सूची में भारत को 17वें स्थान पर रखा है और यहां के तीन बड़े हवाई अड्डों के वायरस से संक्रमित होने का अनुमान लगाया है। इनमें दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे आगे है। बाकी दो एयरपोर्ट मुंबई और कोलकाता के हैं। शोधकर्ताओं ने दुनिया के 4,000 हवाई अड्डों से जुड़े 25,000 अंतरराष्ट्रीय हवाई कनेक्शन्स पर गौर किया। इसमें उन्होंने पाया कि जिस देश का हवाई रूट सबसे ज्यादा व्यस्त होगा, उसमें संक्रमित लोगों के होने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। अध्ययन में जो गणित लगाया गया, उस आधार पर एक शोधकर्ता ने कहा, 'मान लीजिए किसी हवाई अड्डे पर 1,000 संक्रमित उतरते हैं, तो उनमें से दो भारतीय हो सकते हैं।'

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हालांकि जिस पैटर्न या मॉडल के तहत यह आशंका जताई गई है, वह यह अनुमान लगाने में काम नहीं आ सकता कि किसी दूसरे देश से किस मात्रा में कोरोना वायरस भारत या किसी अन्य देश में आ सकता है। हम्बोल्ट यूनिवर्सिटी में भौतिकविज्ञानी डर्क ब्रॉकमैन ने इस अध्ययन का नेतृत्व किया है। वे जानी-मानी पत्रिका 'साइंस' से बातचीत में कहते हैं, 'इस मॉडल से यह बता पाना मुश्किल है कि वायरस कितनी मात्रा में फैल सकता है। नए विषाणु के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए स्वास्थ्य अधिकारियों और नीति निर्माताओं को इस बारे में विचार करना होगा।'

चीनी उड़ानों के क्रू सदस्यों पर प्रतिबंध नहीं
अध्ययन में कहा गया है कि कोरोना वायरस फैलने का सबसे ज्यादा खतरा हवाई परिवहन से है। ऐसे में भारत में विदेशियों के आने को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। शायद इसीलिए भारतीय विमानन नियामक डीजीसीए ने चीन की यात्रा करने वाले विदेशी यात्रियों के भारत आने पर रोक लगा दी है। उसने कहा है कि जो भी विदेशी नागरिक 15 जनवरी या उसके बाद चीन गए हैं, उन्हें अब भारत में प्रवेश करने नहीं दिया जाएगा। इस आदेश के बाद किसी भी विदेशी को हवाई अड्डे या बंदरगाह के जरिये भारत में प्रवेश करने की इजाजत नहीं होगी। हालांकि डीजीसीए ने साफ किया है कि यह आदेश विमानों के क्रू सदस्यों पर लागू नहीं होगा, जो चीनी या अन्य विदेशी नागरिक भी हो सकते हैं।

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क्यों कम नहीं हुआ है खतरा?
जर्मनी के इन मेडिकल संस्थानों की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है, जब भारत में कोरोना वायरस को रोकने के सभी मुमकिन प्रयास किए जा रहे हैं। देशभर में भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद् यानी आईसीएमआर से जुड़ी प्रयोगशालाओं में अब तक करीब 1,500 सैंपलों की जांच हो चुकी है। इनमें से तीन सैंपल पॉजिटिव पाए गए थे। ये तीनों मरीज ठीक हैं। फिलहाल इन्हें कुछ दिनों के लिए आइसोलेशन वॉर्ड में ही रखा जाएगा। एक अच्छी बात यह भी है कि इन तीनों मामलों के अलावा विषाणु से संक्रमित लोगों की संख्या आगे नहीं बढ़ रही है। लेकिन इससे कोरोना वायरस के फैलने का खतरा कम नहीं हो जाता, क्योंकि चीन से भारतीयों का लौटना अभी भी जारी है और यह सिलसिला आगे भी जारी रहने की उम्मीद है।

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हाल में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अनुमान के तहत बताया था कि वुहान में कई भारतीय छात्र अभी भी फंसे हो सकते हैं। ताजा मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक बीते सप्ताहांत केरल के 15 और छात्र चीन के वुहान शहर से वापस लौटे हैं। इन सभी की कोच्चि हवाई अड्डे पर स्क्रीनिंग की गई और आगे की जांच के लिए कलामासेरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया है। वहीं, मिजोरम में वायरस के छह संदिग्ध मामले सामने आए हैं। ये सभी संदिग्ध भारतीय छात्र हैं। मिजोरम का एक और छात्र मंगलवार को चीन से लौटेगा। उसे भी एयरपोर्ट से सीधे आइसोलेशन वॉर्ड में भेजा जा सकता है। इसके अलावा, उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में दो नए मामले सामने आए हैं। इनमें से एक पिछले दस सालों से चीन में काम कर रहा है। वहीं, दूसरा संदिग्ध एक नेवी अधिकारी है, जिसने जनवरी के अंत में चीन की यात्रा की थी।

केरल में ब्रेथअलाइजर टेस्ट पर रोक
उधर, हवाई परिवहन के जरिये कोरोना वायरस फैलने के डर के चलते डीजीसीए ने केरल से ऑपरेट होने वाली उड़ानों को लेकर भी निर्देश जारी किया है। उसने राज्य के चार हवाई अड्डों (कोच्चि, कन्नूर, त्रिवेंद्रम और कालीकट) से उड़ान भरने वाले क्रू सदस्यों के प्री-फ्लाइट ब्रेथअलाइजर टेस्ट पर अस्थायी रोक लगा दी है। ब्रेथअलाइजर एक डिवाइस होता है जिससे किसी व्यक्ति में ऐल्कहॉल (शराब) की मात्रा मांपी जाती है। विमान के पायलट और अन्य क्रू सदस्यों को हरेक उड़ान से पहले यह टेस्ट देना होता है। हालांकि, डीजीसीए ने साफ किया है कि यह निर्देश केवल इन हवाई अड्डों से उड़ान भरने वाले क्रू सदस्यों पर लागू होगा। लैंडिंग वाली उड़ानों के क्रू सदस्यों को ब्रेथलाइजर टेस्ट देना अभी भी अनिवार्य है।

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