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मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों में मलेरिया और डेंगू के केस सबसे ज्यादा सेहत पर बुरा प्रभाव डालते हैं। जब शुरुआत में डेंगू भारत में फैला था, तब इसके टेस्ट से लेकर इलाज का खर्च उठाना भी लोगों के बस में नहीं था। अब इलाज और दवाइयों के क्षेत्र में विकास की वजह से चीजें काफी विकसित हो गई हैं।

हर आम इंसान के दिमाग में कभी न कभी ये ख्याल जरूर आया होगा कि अगर ये मच्छर ही न रहें तो बीमारी फैलेगी कैसे। वैज्ञानिकों ने भी सोचा और इसका हल निकालने के लिए शोध शुरू कर दिया। उनके द्वारा किया गया ये शोध डेंगू फैलाने वाले मच्छरों को बीमार करता है।

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कुआलालंपुर की मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट की एक टीम डेंगू फैलाने वाले एडीस इजिप्ती मच्छर पर रिसर्च कर रही है। इस टीम को हेड करने वाली डॉक्टर नाजनी वसी अहमद के अनुसार, दक्षिण पूर्वी एशिया की उस प्रजाति को रिसर्च के लिए लिया गया, जो सबसे ज्यादा डेंगू फैलाती है।

कैसे लगेगी डेंगू मच्छरों पर रोकथाम
वैज्ञानिकों ने खोज की है कि अगर एडीस इजिप्ती मच्छरों के अंडों में वोल्बाचिया बैक्टीरिया को इंजेक्ट कर दिया जाए तो मादा मच्छरों में उन अंडों की बदौलत डेंगू वायरस नहीं फैलेगा। अगर मच्छरों को डेंगू नहीं होगा तो इंसानों तक भी नहीं पहुंचेगा।

2013 के आंकड़ों के अनुसार हर साल 52 करोड़ लोगों को डेंगू होता है। जिनमें से 9 करोड़ लोगों को मेडिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। कुछ एक्सपर्ट लोगों का कहना है कि ये बीमारी आने वाले समय में यूरोप तक अपना साम्राज्य फैला सकती है।

बैक्टीरिया और डेंगू फैलाने वाले मच्छर
जब दो मच्छर जिनमें वोल्बाचिया बैक्टीरिया है आपस में संबंध बनाते हैं तो उनसे उत्पन्न प्रजाति में भी वो बैक्टीरिया स्वत: आ जाता है। एक वोल्बाचिया बैक्टीरिया वाला नर मच्छर जब बिना संक्रमण वाली मादा के साथ संबंध बनाता है तो अंडे फूटते नहीं है। इस तरह ये बैक्टीरिया दूसरे खतरनाक वायरसों को भी फैलने से रोकता है। जैसे येलो फीवर, ज़ीका और चिकनगुनिया।

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लैब में किए गए एक्सपेरिमेंट
इस पूरी प्रक्रिया में लैब में बनाए गए हजारों मच्छरों को ज्यादा जनसंख्या वाले इलाकों में छोड़ दिया जाएगा। इस तकनीक का इस्तेमाल हर उस जगह पर किया जाएगा, जहां मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से लोगों को खतरा है। पारंपरिक तौर पर देखा जाए तो डेंगू से लड़ने का सबसे आम तरीका है धुंआ छोड़ना और इन्सेक्टिसाइड्स का मच्छरों पर प्रयोग करना। इन पुराने तरीकों की जगह नया तरीका मच्छरों को नई कलोनियां बनाने से रोकेगा।

इस बीमारी का 40 प्रतिशत खात्मा
यूनिवर्सिटी ऑफ मेल्बर्न के प्रोफेसर एरी हॉफमैन के अनुसार ये रिसर्च बहुत बड़े पैमाने पर लोगों को फायदा पहुंचाएगी। शुरुआती चरण में की गई रिसर्च से डेंगू में 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। चार साल पहले जब ये ट्रायल शुरू हुआ था, तब डेंगू के 363 केस थे और इस साल ये घटकर 72 हो गए हैं। एक अंडे को व्यस्क मच्छर में बदलने में दो हफ्ते लगते हैं। एक मादा मच्छर अपने पूरे जीवन काल में 300 अंडे दे सकती है। दक्षिण पूर्वी एशिया में डेंगू तेजी से फैल रहा है और घातक साबित हो सकता।

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