फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी (एफएसएचडी) - Facioscapulohumeral Muscular Dystrophy in Hindi

Dr. Nadheer K M (AIIMS)MBBS

January 04, 2021

January 04, 2021

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी
फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी (एफएसएचडी) क्या है?
फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी (एफएसएचडी) एक ऐसा विकार है जिसमें मांसपेशियों की कमजोरी और उनके खराब होने की समस्या होती है। इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति का चेहरा (फेसियो), कंधे के ब्लेड (स्कैपुलो) के आसपास का हिस्सा और ऊपरी बांह या बाजू (हुमेरल) का हिस्सा प्रभावित होता है। हैमस्ट्रिंग (जांघ के पीछे की मसल्स) और ट्रंक (धड़) की मांसपेशियां प्रभावित होती हैं लेकिन शुरुआत में इसकी पहचान कम हो पाती है। वहीं, इस बीमारी के दौरान आगे चलकर हाथ और पैर की अन्य मांसपेशियां पर भी असर देखा जाता है।

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फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी के लक्षण - Facioscapulohumeral Muscular Dystrophy Symptoms in Hindi

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी के लक्षण कई तरह के होते हैं। समस्या की शुरुआत में पीड़ित व्यक्ति को चेहरे, कंधे से नीचे कमर तक और बाजुओं की मांसपेशियों में कमजोरी का अनुभव हो सकता है। चेहरे की मसल्स में कमजोरी की वजह से होंठों की गतिविधियां (लिप्स मूवमेंट) सीमित हो सकती है, जिससे सीटी बजाने में, स्ट्रॉ का इस्तेमाल करने में और होंठ को सिकोड़ने में मुश्किल हो सकती है। इसके साथ ही पीड़ित व्यक्ति के चेहरे पर एक विशिष्ट "मास्क-जैसी" उपस्थिति भी विकसित हो सकती है। वहीं, चेहरे के ऊपरी हिस्से में कमजोरी की वजह से सोते वक्त आंखों को पूरी तरह से बंद करने में भी परेशानी या असमर्थता पैदा हो सकती है।

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इस स्थिति में आमतौर पर गर्दन और कंधे के ब्लेड की मांसपेशियां कमजोर हो जाती है। यह कमजोरी, ऊपरी बाजू (बाइसेप्स और ट्राइसेप्स की मांसपेशियां) के आगे और पीछे की मांसपेशियों से जुड़ी होती है। बीमारी के बढ़ने के साथ ही कंधे की ब्लेड को स्थिर करने वाली मांसपेशियों की कमजोरी के कारण हाथ उठाने की क्षमता में कमी होती है। इसके अलावा, सामने से देखने पर कॉलरबोन (हंसली) दबी और झुकी दिखाई देती है।

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी का कारण - Facioscapulohumeral Muscular Dystrophy Causes in Hindi

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी का कारण आनुवांशिक है यानी जेनेटिक बदलावों की वजह से यह समस्या आती है जिसमें क्रोमोसोम4 की भूमिका होती है। क्रोमोसोम के आखिर में D4Z4 नाम की जगह होती है और डीएनए के इसी क्षेत्र में बदलाव की वजह से यह बीमारी होती है। इस क्षेत्र में 11 से लेकर 100 से अधिक रिपीटिड सेगमेंट (खंड) शामिल हैं, जिनमें से हर एक सेगमेंट में लगभग 3,300 डीएनए के बेस जोड़े (3.3 केबी) होते है।

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी का निदान - Diagnosis of Facioscapulohumeral Muscular Dystrophy in Hindi

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी का निदान पूरी तरह से क्लीनिकल एग्जाम और विशिष्ट शारीरिक लक्षणों की पहचान के आधार पर किया जा सकता है। इसके साथ ही एक पूर्ण व्यक्तिगत और पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिक परीक्षण की जरूरत होगी। प्रयोगशाला अध्ययन के दौरान कुछ पीड़ित लोगों में रक्त के तरल भाग में एक विशेष एंजाइम के उच्च स्तर का पता चल सकता है।

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी का इलाज - Facioscapulohumeral Muscular Dystrophy Treatment in Hindi

फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी का उपचार उन विशिष्ट लक्षणों की ओर निर्देशित होता है जो हर रोगी में साफ तौर पर दिखाई देते हैं। इस तरह के उपचार के लिए चिकित्सा पेशेवरों की एक टीम के संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता होती है, जैसे कि वो डॉक्टर, जो तंत्रिका संबंधी विकारों (न्यूरोलॉजिस्ट) के उपचार में विशेषज्ञ हों, वे डॉक्टर जो कंकाल, जोड़ों, मांसपेशियों और संबंधित ऊतकों के विकारों का निदान और इलाज करते हों (आर्थोपेडिस्ट), फिजियाट्रिस्ट (भौतिक चिकित्सक), ऑडियोलॉजिस्ट, पल्मोनोलॉजिस्ट और अन्य स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर आदि।

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फेसियोस्कैपुलोह्युमेरल मस्कुलर डिस्ट्रोफी (एफएसएचडी) के डॉक्टर

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