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क्या होता है मांसपेशियों का दर्द?

मांसपेशियों के दर्द को मायलजिया (Myalgia) भी कहा जाता है। यह दर्द बहुत आम होता है, जो शरीर के किसी ना किसी हिस्से की मांसपेशी में होता ही जाता है। इस दर्द को लगभग हर किसी ने कभी ना कभी महसूस किया होता है।

आम तौर पर मांसपेशियों का दर्द अपने कुछ सीमित समय के बाद अपने आप गायब हो जाता है, लेकिन कई बार यह लंबे समय तक किसी मांसपेशी में ठहर जाता है। जिसके जाने में महीने तक लग जाते हैं।

हमारे शरीर के लगभग हर हिस्से में मांसपेशियों के ऊतक होते हैं, इसलिए यह शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। खासतौर पर यह गर्दन, टांगे, पीठ, और हाथ जैसे शरीर के हिस्सों में इसके दर्द को अनुभव किया जा सकता है।

  

  1. मांसपेशियों में दर्द के प्रकार - Types of Myalgia in Hindi
  2. मांसपेशियों में दर्द के लक्षण - Myalgia Symptoms in Hindi
  3. मांसपेशियों में दर्द के कारण - Myalgia Causes in Hindi
  4. मांसपेशियों में दर्द से बचाव - Prevention of Myalgia in Hindi
  5. मांसपेशियों में दर्द का परीक्षण - Diagnosis of Myalgia in Hindi
  6. मांसपेशियों में दर्द का इलाज - Myalgia Treatment in Hindi
  7. मांसपेशियों में दर्द की आयुर्वेदिक दवा और इलाज
  8. मांसपेशियों में दर्द के घरेलू उपाय
  9. मांसपेशियों में दर्द की दवा - Medicines for Muscle Pain in Hindi
  10. मांसपेशियों में दर्द की दवा - OTC Medicines for Muscle Pain in Hindi
  11. मांसपेशियों में दर्द के डॉक्टर

मांसपेशियों में दर्द के प्रकार - Types of Myalgia in Hindi

मांसपेशियों के दर्द के प्रकार:

मुख्य रूप से मायलजिया के चार प्रकार होते हैं। यह किस प्रकार के व्यक्ति को होता है या फिर यह जीवन को कितना और किस प्रकार प्रभावित करता है इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। इसके प्रकार इस बात पर निर्धारित करते हैं कि इसके दर्द से शरीर का कौनसा भाग प्रभावित हो रहा है और कौन सी मांसपेशी इसमें शामिल है।

  1. एपीडेमिक मायलजिया (Epidemic Myalgia) – इसको बोर्नहोम रोग (Bornholm disease) भी कहा जाता है। यह मांसपेशियों का दर्द होता है तो मुख्य रूप से संक्रमण के कारण होता है। इस से पेट का उपर वाला भाग और छाती का नीचे वाला भाग प्रभावित होता है।
  2. फाइब्रोमायलजिया (Fibromyalgia) – यह एक फैलने वाला दर्द होता है जो शरीर के दोनो तरफ के भागों को प्रभावित करता है। इसमें दर्द कभी कम तो कभी गंभीर होता रहता है। उस विशिष्ट बिंदू या जगह पर जहां पीड़ितो को दर्द हो रहा है, वहां पर दबाव डालने पर इसका दर्द और अधिक बढ़ जाता है।
  3. ट्रैपिजियस (Trapezius) - मायलजिया के एक प्रकार को ट्रैपिजियस भी कहा जाता है। इसमें ट्रैपिजियस की मांसपेशियो में खराबी के कारण उनमें दर्द होता हैं और इसके साथ ही इसमें गर्दन की मांसपेशियों का दर्द भी शामिल है। यह लंबे समय तक रहने वाला दर्द होता है, और एक ही गतिविधि के काम के कारण यह और भी बद्तर हो जाता है।
  4. पोलिमायलजिया (Polymylagia) – यह अमेरीका के बुजुर्गों में होने वाला सबसे आम जोड़ो की सूजन वाला रोग है। इसमें बहुत गंभीर दर्द होता है, जो मुख्य रूप से शरीर के कंधों, गर्दन, उपरी बाहें और पीठ जैसे भागों को प्रभावित करता है। 

मांसपेशियों में दर्द के लक्षण - Myalgia Symptoms in Hindi

मांसेपेशियों के दर्द के लक्षण:

मांसपेशियों का दर्द शरीर की किसी भी मांसपेशी में उत्पन्न हो सकता है। चिकित्सा के संदर्भ में डॉक्टर इसे मायलजिया कहते हैं। मांसपेशियों के दर्द के कई कारण हो सकते हैं, जैसे -

  1. शरीर के अत्यधिक आराम करने से शरीर का अकड़ जाना
  2. किसी प्रकार की चोट
  3. नरम ऊतकों में संक्रमण
  4. शरीर में कहीं पर सूजन आना
  5. शरीर में सामान्यकृत दर्द कई कारण से हो सकता है, जैसे इंफ्लूएंजा

मांसपेशियों का दर्द एक मांसपेशी के समूह तक भी सिमित रह सकता है और अन्य मांसपेशियों के समूह में फैल भी सकता है। जब शरीर द्वारा उस मांसपेशी को बार-बार काम में लाए जाने के कारण या किसी चोट के कारण दर्द होता है। वह दर्द आमतौर पर फैलता नहीं है सिर्फ प्रभावित मांसपेशियों तक ही सिमित रहता है।

मांसपेशियों का दर्द हल्का या गंभीर और दुर्बल कर देने वाला हो सकता है- यह सिर्फ उसके होने के कारण पर निर्भर करता है। मांसपेशियों में दर्द होना फाइब्रोमायल्जिया जैसी गंभीर समस्याओं की पहचान हो सकती है। मांसपेशियों के दर्द से संबंधित लक्षण जैसे मांसपेशियों का नरम होना, सूजन आना, त्वचा में लाली आना या बुखार आदि

मांसपेशियों में दर्द के कारण - Myalgia Causes in Hindi

मांसपेशियों के दर्द के कारण

मांसपेशी में दर्द होने के मुख्य कारण चिंता, तनाव, किसी गतिविधि को ज्यादा करना या चोट लगना आदि होते हैं। इस प्रकार के दर्द आमतौर पर शरीर के किसी छोटे से हिस्से या कुछ मांसपेशियों के समूह को प्रभावित करते हैं।

सिस्टेमिक (systemic) दर्द जिसमें पूरे शरीर में दर्द होने लग जाता है जो मुख्य रूप के संक्रमण, बीमारी या किसी दवाई के दुष्प्रभाव के कारण होता है। इसके कारणों में निम्न मौजूद हैं जैसे

  1. क्रोनिक एक्सर्शनल कम्पार्टमेंट सिंड्रोम (Chronic exertional compartment syndrome)
  2. क्रोनिक फेटीग (fatigue) सिंड्रोम (Chronic fatigue syndrome )
  3. क्लोडिकेश्न (एक ऐसी स्थिति जिसमें टांग में एंठन के जैसा दर्द होने लगता है, जो आमतौर पर व्यायाम के कारण होता है)
  4. डर्मेटोमायसाइटिस (त्वचा और अंदरूनी मांसपेशियों में सूजन)
  5. फाइब्रोमायलज्यिया (मांसपेशियों और नरम ऊतकों को प्रभावित करने वाला गंभीर दर्द)
  6. हाइपोथायरायडिज्म (थॉयरयड ग्रंथि मे होने वाली एक गंभीर बीमारी)
  7. इंफ्लुएंजा (फ्लू)
  8. ल्यूपस के लिए ली जाने वाले दवाईयां (विशेष रूप से कोलेस्ट्रोल की दवाइयां जिनको स्टैटिन (statins) के रूप में जाना जाता है।)
  9. मांसपेशियों में खिंचाव
  10. पोलिमायल्जिया रयूमेटिक (सूजन के कारण मांसपेशियों में दर्द और कठोरता)
  11. पोलीमायसाइटिस (मांसपेशियों में गंभीर दर्द और सूजन)
  12. रयूमेटोइड अर्थराइटिस (गठिया का एक प्रकार जिसमें शरीर के जोड़ों की मांसपेशियों में दर्द और सूजन होते हैं)

मांसपेशियों में दर्द से बचाव - Prevention of Myalgia in Hindi

मांसपेशियों के दर्द की रोकथाम के लिए कुछ टिप्स:

अगर शारीरिक गतिविधि और शारीरिक खिंचाव के कारण उनमें दर्द हो जाता है तो भविष्य में मांसपेशियों के रोग होने की संभावना को कम करने के लिए ये टिप्स अपनानी चाहिए -

  1. किसी भी शारीरिक गतिविधि को शुरू या व्यायाम करने से पहले अपनी मांसपेशियों को अच्छे से स्ट्रेच कर लें।
  2. व्यायाम करने से पहले शरीर को थोड़ा वार्मअप दें, मतलब धीरे-धीरे शुरू करें। ऐसे ही व्यायाम पूरा होने के बाद उसको एक दम ना छोड़ें धीरे-धीरे गतिविधियों को कम करें। (और पढ़ें - क्या आपको पता है व्यायाम करने से पहले जरूरी क्यों है वार्म अप)
  3. जब आप गतिशील हों तो उस दौरान खूब पानी पीएं और खुद को हाइड्रेटेड रखें।
  4. शारीरिक मांसपेशियों को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या में नियमित व्यायाम शामिल करें।
  5. कंप्यूटर या डेस्क पर काम करने वाले व्यक्तियों को रोज सुबह उठकर खुले वातारवरण में अपने मांसपेशियों को स्ट्रेच करना चाहिए। (और पढ़ें - सारा दिन डेस्क पर बैठकर काम करने से हो रही स्वास्थ्य समस्याओं का इलाज हैं ये योगासन)

मांसपेशियों में दर्द का कारण शारीरिक गतिविधि और खिंचाव के अलावा कुछ अलग भी हो सकता है, ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए उसके मांसपेशियों के दर्द को पूरी तरह से ठीक करने का तरीका मिल सकता है। मरीज के मुख्य दर्द के अनुसार उसके इलाज को प्राथमिकता दी जाएगी। 

मांसपेशियों में दर्द का परीक्षण - Diagnosis of Myalgia in Hindi

मांसपेशियों के दर्द का निदान

ध्यान रहे की मांसपेशियों में दर्द एक लक्षण होता है ना कि कोई रोग। इसलिए यह किसी गंभीर रोग के शुरूआती लक्षण या संकेत भी हो सकते हैं इसलिए इसका निदान करना बहुत जरूरी होता है।

इसका निदान करने के कुछ प्रकार हैं:

पहले की जानकारी – दर्द और उसके लक्षणों की पूर्ण जानकारी जिसमें डॉक्टर दर्द से प्रभावित जगह, उसकी गंभीरता और कठोरता की जांच करेंगे। अगर किसी व्यक्ति को हाल में में कोइ इंजेक्श्न लगा है, किसी कीट द्वारा काटा गया है, या वह किसी प्रकार का ड्रग लेता है तो डॉक्टर को उसके बारे में बताना बहुत जरूरी होता है। इसके कुछ ऐसे लक्षण जैसे ठंड या गर्मी लगना, बुखार, वजन घटना, जोड़ों में दर्द या अकड़न, तंत्रिका संबंधी लक्षण (सुन्न होना, कांपना, देखने में परेशानी, कानों में आवाजे आना आदि), डिप्रेशन, नींद संबंधी परेशानी, थकावट, लाल चकत्ते, सांस लेने से जुड़ी परेशानी, हृदय संबंधी परेशानी आदि के लक्षण भी दिख सकते हैं। जानकारी लेने के दौरान मरीज से दर्द की शुरू की जानकारी (एकदम या धीरे-धीरे), दर्द के प्रकार (स्थायी या बार-बार होना) आदि जैसे लक्षणों की जानकारी ली जा सकती है।

शारीरिक परिक्षण – इसमें मरीज की चाल, ढंग और अन्य व्यक्तियों के प्रति उसके हाव-भाव कि असमान्यता का निरिक्षण किया जाएगा। मांसपेशियों में खराबी (atrophy), मांसपेशियों का फैलना (hypertrophy), और कॉन्ट्रैकचर (contracture) होने के कारण को जानने के लिए मांसपेशियों का निरिक्षण किया जा सकता है। मांसपेशियों का सामान्य खिंचाव और बल की जानकारी के लिए रेजिस्टेंस एक्सरसाइज की मदद ली जा सकती है। परिक्षण के दौरान हाथ से छू कर देखने से मांसपेशियों कि कोमलता या असामान्य तनाव का पता लगाया जा सकता है। जोड़ों की बीमारी जैसे सूजन, लाल चकत्ते, द्रव संग्रह, मांसपेशी में कोमलता, बढ़ते तापमान और जोड़ों में गतिशीलता का पता लगाने के लिए जोड़ों का परीक्षण किया जाता है।

टेस्ट – सूजन और अन्य अंदरूनी समस्याओं का पता लगाने के लिए खून की जांच की जाती है। इसमें शामिल हैं कंम्पलीट ब्लड काउंट (CBC), एरिथ्रोसाइट सेडीमेंटेशन रेट (ESR), हार्मोन का स्तर, विभिन्न रसायनों (कैल्सियम, फॉसफेट, सेरम एंजाइम्स) और सेरोलोजिकल टेस्ट। ESR का बढ़ा हुआ स्तर सूजन या संक्रमण या फिर अंदरूनी नुकसानदेह समस्याओं के संकेत दिखाता है। सेरम एंजाइम (serum enzyme) का स्तर तब बढ़ता है जब मांसपेशियों को चोट या मांसपेशियों के ऊतक टूटने लगें। सर्लोजिकल टेस्ट खून में एंटीबोडीज का पता लगाता है, इसका प्रयोग संक्रमण, परजीवी संक्रमण (कीट पतंगे आदि)। मांसपेशियों के विकारों का पता लगाने के लिए पेशाब की जांच भी की जा सकती है।

मांसपेशियों में दर्द का इलाज - Myalgia Treatment in Hindi

मांसपेशियों के दर्द कम करने के लिए घरेलू उपचार:

अक्सर मांसपेशियों के दर्द घरेलू उपचारों से ठीक हो जाते हैं। चोट या अधिक काम से होने वाले मासपेशियों के दर्द को कम करने के लिए कुछ उपाय नीचे दिए गए हैं।

  1. दर्द से प्रभावत शरीर के भागों को आराम देना
  2. आइबूप्रोफेन (ibuprofen) दवाई लेने से भी मांसपेशियों के दर्द से राहत पाई जा सकती है।
  3. दर्द से प्रभावित जगह को बर्फ लगाएं, जिससे दर्द और सूजन को कम किया जा सकता है।
  4. लगातार 3 दिन तक दर्द वाली त्वचा पर बर्फ लगाएं और उसके बाद 3 दिन तक गर्म चीज से सेकें।

इनके अलावा मांसपेशियों के दर्द से राहत पाने के लिए कुछ अन्य उपाय -

  1. धीरे-धीरे मांसपेशियों को स्ट्रेच करें
  2. जब तक मांसपेशियों का दर्द पूरी तरह से ठीक ना हो जाए, ऐसा कोई काम ना करें जिससे मांसपेशियों पर ज्यादा असर पड़े
  3. मांसपेशियों के पूरी तरह से ठीक ना हो जाने तक वेट लिफ्टिंग जैसे काम ना करें
  4. आराम करने के लिए समय निकालें
  5. तनाव से राहत देने वाली गतिविधियां करें जैसे योगा करना और ध्यान लगाने की मुद्रा। (और पढ़ें - तनाव के घरेलू उपाय)

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए:

मांसपेशियों का दर्द भी शरीर को अन्य हानियां पहुंचा सकता है अगर उसके होने के कारण की जानकारी ना हो तो। घरेलू उपचार मांसपेशियों के दर्द को कम या खत्म कर सकतें हैं, लेकिन दर्द के होने का कारण नहीं बता सकते। और ऐसी स्थिति में मायल्जिया रोग के आसार भी बढ़ जाते हैं इसीलिए दर्द के कारण को जानना बहुत जरूरी होता है

  1. मरीज को ऐसी स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए अगर:
  2. घरेलू उपचार के बाद भी दर्द अगर कुछ दिन के अंदर कम ना हो।
  3. मांसपेशियों में गंभीर दर्द जिसके कारण का स्पष्ट रूप से पता ना हो।
  4. दर्द के साथ-साथ उस जगह पर लाल दाने या चकत्ते दिखने लगें।
  5. किसी कीड़े के काटने के बाद मांसपेशियों में दर्द।
  6. त्वचा के लाल होने या सूजन आदि के जैसे मायल्जिया के लक्षण दिखना।
  7. दवाइयो में बदलाव के बाद दर्द होने लगना।
  8. मांसपेशियों में दर्द और उसके साथ तापमान बढ़ना (बुखार)। (और पढ़ें - बुखार कम करने के घरेलू उपाय)
Dr. Vivek Dahiya

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Dr. Vipin Chand Tyagi

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Dr. Vineesh Mathur

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मांसपेशियों में दर्द की दवा - Medicines for Muscle Pain in Hindi

मांसपेशियों में दर्द के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

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मांसपेशियों में दर्द की दवा - OTC medicines for Muscle Pain in Hindi

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References

  1. American Academy of Orthopaedic Surgeons [Internet] Rosemont, Illinois, United States; Compartment Syndrome.
  2. American Academy of Orthopaedic Surgeons [Internet] Rosemont, Illinois, United States; Sprains, Strains and Other Soft-Tissue Injuries.
  3. National Fibromyalgia Association [Internet] California; Diagnosis Fibromyalgia.
  4. MedlinePlus Medical Encyclopedia: US National Library of Medicine; Muscle aches.
  5. National Pharmaceutical Council [Inetrnet]; Management of Acute Pain and Chronic Noncancer Pain.
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