इस बात को साबित करने के लिए ढेरों सबूत मौजूद हैं कि सेक्स सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक रूप से भी फायदेमंद है। यह बात तो हम सभी जानते हैं कि सेक्शुअल इंटरकोर्स न केवल आपके मूड को बेहतर बनाता है बल्कि हृदय रोग के जोखिम को भी कम करता है और इम्यून सिस्टम को बेहतर बनाने से भी जुड़ा हुआ है। हालांकि, बहुत से हार्ट अटैक सर्वाइवर्स को अक्सर इसी बात की चिंता रहती है कि अगर वे फिर से सेक्शुअल गतिविधि में शामिल होंगे तो इससे उन्हें दोबारा अटैक होने का खतरा हो सकता है। लेकिन एक नई रिसर्च का सुझाव इसके ठीक उलट है। 

यूरोपियन जर्नल ऑफ प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी में 22 सितंबर 2020 को प्रकाशित एक हालिया शोध में पाया गया कि जिन लोगों ने हार्ट अटैक के बाद तीन से सात महीने के भीतर यौन गतिविधि को फिर से शुरू किया, उनमें जीवित रहने की दर और बेहतर हो गई। इजरायल की यह रिसर्च बताती है कि हार्ट अटैक के कुछ महीनों बाद अगर सामान्य सेक्स लाइफ को फिर से शुरू किया जाए तो यह वास्तव में जीवित रहने की संभावनाओं को और बढ़ा सकती है।

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मायोकार्डियल इन्फार्क्शन और सेक्स
मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (एमआई), जिसे सामान्य बोलचाल की भाषा में हार्ट अटैक या दिल का दौरा पड़ने के रूप में जाना जाता है, की समस्या तब होती है जब हृदय की रक्त वाहिकाएं (आमतौर पर एक धमनी) अवरुद्ध हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप हृदय के उस हिस्से में रक्त का प्रवाह कम या पूरी तरह से बंद हो जाता है। इजरायल के वैज्ञानिकों ने 495 सेक्शुअली ऐक्टिव मरीजों को इस स्टडी में शामिल किया, जिनकी औसत उम्र 53 साल थी। ये सभी लोग पहले से ही लॉन्जिट्यूडनल (देशांतर) इजरायल स्टडी ऑफ फर्स्ट एक्यूट मायोकार्डियल इन्फार्क्शन में नामांकित थे। इन 495 प्रतिभागियों में से करीब 90 प्रतिशत पुरुष थे। सभी प्रतिभागियों को जब पहली बार अस्पताल में भर्ती कराया गया था उस वक्त उनसे सवाल पूछे गए, उनका इंटरव्यू लिया गया और फिर 3 से 6 महीने बाद भी।

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88 प्रतिशत मरीजों ने 3-7 महीने के भीतर यौन गतिविधि शुरू की
पहली बार हार्ट अटैक पड़ने के बाद करीब 88 प्रतिशत मरीजों ने यानी 495 में से 434 प्रतिभागियों ने 3 से 7 महीने के भीतर अपनी यौन गतिविधि को फिर से शुरू कर दिया। दिल का दौरा पड़ने से पहले ये लोग जितनी बार सेक्शुअल ऐक्टिविटी में शामिल होते थे उसकी तुलना में  263 मरीज यौन संबंध बनाने की अपनी आवृत्ति को बनाए रखने या बढ़ाने में सक्षम थे। इन 263 मरीजों में से 179 मरीज ऐसे थे जो हार्ट अटैक आने से पहले की यौन गतिविधि की फ्रीक्वेंसी को बनाए रखने में कामयाब रहे, जबकी 84 मरीज ऐसे थे जिनकी फ्रीक्वेंसी में बढ़ोतरी देखने को मिली।

हालांकि, 171 मरीज ऐसे थे जिनकी यौन गतिविधियों की आवृत्ति में कमी देखने को मिली और बाकी के मरीज ऐसे थे, जिन्होंने यौन गतिविधियों में लिप्त होने से परहेज करना ही बेहतर समझा। सभी 495 प्रतिभागियों पर लगभग 22 वर्षों तक नजर रखी गई और इस दौरान 211 मरीजों की मृत्यु भी हो गई।

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क्या रहे स्टडी के नतीजे?
स्टडी में शामिल मरीजों पर लगभग 22 वर्षों तक नजर रखने के बाद, यह पाया गया कि दिल का दौरा पड़ने के बाद शुरुआती कुछ महीनों के भीतर ही जिन मरीजों ने अपनी सेक्शुअल ऐक्टिविटी की फ्रीक्वेंसी को बनाए रखा या उसमें बढ़ोतरी की उन मरीजों के जीवित रहने की संभावना में काफी सुधार हुआ। हालांकि, स्टडी के दौरान यह भी नोट किया गया कि औसतन, जिन मरीजों ने अपनी यौन गतिविधि की आवृत्ति में वृद्धि की उनकी उम्र बाकियों की तुलना में थोड़ी कम थी, उन्होंने अपनी ओवरऑल सेहत को बेहतर बनाए रखा, उनमें अवसाद कम था और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति भी बेहतर थी उन लोगों की तुलना में जिन्होंने सेक्स से परहेज किया या जिनकी मृ्त्यु हो गई।

अध्ययन से यह भी पता चला कि जिन लोगों ने दिल का दौरा पड़ने के बाद अपनी यौन गतिविधि को बनाए रखा या फ्रीक्वेंसी में बढ़ोतरी की, उनमें मृत्यु की आशंका 35 प्रतिशत कम थी उन लोगों की तुलना में जो यौन गतिविधियों में कम शामिल हुए या फिर जिन्होंने पूरी तरह से यौन संबंध बनाने से परहेज किया।

निष्कर्ष : हार्ट अटैक के बाद सेक्स करना सेफ है
हालांकि, दुनियाभर के बाकी वैज्ञानिकों के अनुसार, इस अध्ययन में बहुत सारी कमियां हैं, क्योंकि इस स्टडी में प्रमुख रूप से सिर्फ पुरुषों को शामिल किया गया था और इसलिए इसमें भागीदारी पक्षपात होने का खतरा अधिक था, क्योंकि यह अनुचित रूप से दखल देने वाली स्टडी है। 

बावजूद इसके वैज्ञानिकों ने यह निष्कर्ष जरूर निकाला कि मायोकार्डियल इन्फार्क्शन के इतिहास वाले लोगों को कुछ महीनों के बाद यौन गतिविधि को फिर से शुरू करना चाहिए क्योंकि यह सकारात्मक रूप से लंबे समय तक जीवित रहने के साथ जुड़ा हुआ है और इसमें किसी तरह का कोई जोखिम भी नहीं है।

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