myUpchar प्लस+ सदस्य बनें और करें पूरे परिवार के स्वास्थ्य खर्च पर भारी बचत,केवल Rs 99 में -

अगर आप भी दिल्ली जैसे प्रदूषित महानगरों में रहते हैं तो आपको विरासत में मिलती है दूषित हवा। आप और इन महानगरों में रहने वाले करोड़ों लोग जाने अनजाने में विषैले पदार्थों को सांस के साथ अपने फेफड़ों तक पहुंचा रहे हैं, ऐसे पदार्थ जो उन्हें जाम कर रहे हैं और श्वास संबंधी बीमारियां पैदा कर रहे हैं।

लोग वायु प्रदूषण को कम करने के लिए इको फ्रेंडली ईंधन का प्रयोग और समय-समय पर अपने वाहन की प्रदूषण जांच भी करवाते रहते हैं। सभी लोग प्रदूषण के प्रति आपकी तरह इतने सजग नहीं होते। यही वजह है कि कुछ लोगों की लापरवाही का भुगतान सब लोगों को करना पड़ता है।

(और पढ़ें : दिल्ली में धुंध के कारण, प्रभाव और बचाव)

दिल्ली में केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत सफर (SAFAR) ने एक सर्वे किया। इस सर्वे का मकसद वायु प्रदूषण के उन स्रोतों का पता लगाना था, जिनके बारे में लोगों को कम जानकारी है। ये सर्वे दिल्ली-एनसीआर के 62 इलाकों में किया गया।

सर्वे के अनुसार इनमें से 56 इलाकों में प्रदूषण का कारण ट्रैफिक जाम को पाया गया। दूसरी वजह असंगठित उद्योग हैं। तीसरी वजह सड़क के आसपास हवा से उड़े धूल कण। चौथी वजह सड़क के किनारे चल रहे ढाबे, छोटे होटल और रेहड़ियां हैं, जहां खाना पकाने के लिए कोयले का इस्तेमाल किया जाता है। खुले में कचरा जलाना, डीजल जेनरेटर, श्मशान घाट और थर्मल पावर प्लांट भी वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं।

(और पढ़ें : फेफड़ों पर ही नहीं, आपकी कोख पर भी असर कर रहा प्रदूषण)

दिल्ली जैसे महानगरों में रहने वाले लोगों के दैनिक जीवन में से दो-तीन घंटे ट्रैफिक जाम में गुजरते हैं। उस दौरान वे वाहनों से निकलने वाली गैसों और प्रदूषक तत्वों का अनजाने में सेवन करते रहते हैं। जानते हैं कुछ ऐसे ही तत्वों और गैसों के बारे में जो हमारे फेफड़ों पर गहरा असर डालते हैं -

पार्टिकुलेट मैटर : गाड़ियों के धुंए से निकलने वाली हल्की कालिख एक तरह का पार्टिकुलेट मैटर है। ये बहुत ही छोटे कण होते हैं। इन कणों का व्यास इंसान के बालों के व्यास से दस गुना छोटा होता है। यही वजह है कि ये आसानी से हवा के साथ फेफड़ों में प्रवेश कर जाते हैं। डीजल वाहनों से निकलने वाले धुंए में सबसे ज्यादा पार्टिकुलेट मैटर होते हैं। इसके अलावा पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) हाइड्रोकार्बन, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर डायऑक्साइड जैसे प्राथमिक और माध्यमिक प्रदूषक होते हैं।

वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स : ये प्रदूषक सूरज की रोशनी में नाइट्रोजन ऑक्साइड के साथ रिएक्ट कर एक ग्राउंड लेवल ओजोन बनाते हैं। ये स्मॉग बनाने वाला प्राथमिक तत्व है। ऊपरी वातावरण में ये जितनी फायदेमंद है ग्राउंड लेवल पर उतनी ही घातक। ये गैस हमारी श्वास प्रणाली को खराब कर खांसी, घुटन और फेफड़ों की हवा सोखने की क्षमता को कम करती है। वोलाटाइल ऑर्गेनिक कंपाउंड्स कार, ट्रक और बसों द्वारा छोड़ी गई गैसों में मौजूद जहरीले तत्व होते हैं। ये तत्व बैन्जीन, एसिटल्डिहाइड और 1,3- ब्युटाडीन होते हैं। इनसे लोगों को कई तरह के कैंसर होने का खतरा रहता है।

नाइट्रोजन ऑक्साइड : इस तरह के तत्व ग्राउंड लेवल ओजोन और माध्यमिक पार्टिकुलेट मैटर बनाते हैं। नाइट्रोजन ऑक्साइड फेफड़ों में जलन और सांस से जुड़े इन्फेक्शन निमोनिया और इन्फ्लूएंजा से लड़ने की शक्ति को कम करता है।

कार्बन मोनोऑक्साइड : ये एक गंध रहित और रंग रहित जहरीली गैस है। जो जीवाश्म ईंधन जैसे गैसोलीन के जलने से निकलती है। ये गैस कारों और ट्रकों के धुंए से निकलती है। कार्बन मोनोऑक्साइड वाली हवा में सांस लेने से ये गैस हमारे दिमाग, दिल और अन्य जरूरी अंगों तक ऑक्सीजन को पहुंचने से रोकती है।

सल्फर डायऑक्साइड : पावर प्लांट्स और मोटर व्हीकल जब भी सल्फर वाला ईंधन जैसे कोयला और डीजल इस्तेमाल करते हैं, तो इनके जलने पर सल्फर डायऑक्साइड रिलीज होती है। ये सल्फर डायऑक्साइड वातावरण में रिएक्ट कर छोटे कणों में तब्दील हो जाती है। दूसरे प्रदूषक तत्वों की तरह ये छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा असर डालती है। बच्चों को अस्थमा जैसी बीमारियां भी हो सकती हैं।

ग्रीनहाउस गैसें : मोटर वाहन कार्बन डायऑक्साइड भी छोड़ते हैं। कार्बन डायऑक्साइड वैश्विक स्तर पर वातावरण को नुकसान पहुंचाती है। कार, ट्रक, बस, हवाई जहाज, समुद्री जहाज और ट्रेनें गर्मी बढ़ाने वाली 30 प्रतिशत गैसों का निर्माण करती हैं।

इन सबसे होने वाली बीमारियों से बचने के लिए कुछ सावधानियां बरतीं जा सकती हैं -

  • अपने इलाके का प्रदूषण स्तर जांच लें।
  • घर के बाहर प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर एक्सरसाइज न करें। जब हवा दूषित हो तो घर के अंदर ही एक्सरसाइज करें। आप शॉपिंग मॉल और जिम की मशीनों का इस्तेमाल कर एक्सरसाइज कर सकते हैं।
  • घर से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग करें।
  • ज्यादा से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का प्रयोग करें।
  • लाल बत्ती पर अपनी गाड़ी का ईंजन बंद कर दें। 
  • खुद को ट्रैफिक में फैली जहरीली गैसों से बचाएं और गाड़ी में उच्चतम क्वालिटी का एयर प्यूरिफायर लगाएं।
  • समय रहते किसी अच्छे डॉक्टर से चेक अप करवाएं। 
(और पढ़ें : बढ़ते प्रदूषण से परेशान हैं तो घर में ये पौधे)
और पढ़ें ...
ऐप पर पढ़ें