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हृदय और फेफड़ों में संबंध
शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाने के लिए हृदय और फेफड़े एक साथ कार्य करते हैं। हृदय और फेफड़े दोनों ही शरीर के महत्वपूर्ण अंग हैं। ये एक-दूसरे से अन्य अंगों की तुलना में अधिक करीब से जुड़े होते हैं, ये न सिर्फ कार्यों के लिए एक-दूसरे पर निर्भर होते हैं बल्कि संरचनात्मक रूप से भी एक-दूसरे के साथ संपर्क में होते हैं। एक नाजुक ऊतक प्ल्यूरा और पेरीकार्डियम फेफड़े और हृदय को एक-दूसरे से अलग करते हैं। इसीलिए यदि एक अंग के कार्य किसी भी कारण से प्रभावित होते हैं, तो यह दूसरे को भी किसी न किसी तरह से प्रभावित करता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि हृदय छाती के मध्य में मौजूद मांसपेशियों से बना एक अंग है, जिसमें अनेक वाहिकाएं हैं, वहीं फेफड़े छाती की दोनों तरफ होते हैं। 

जैसा कि बताया गया है कि हृदय और फेफड़े शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त पहुंचाने के लिए एक साथ कार्य करते हैं। हृदय की दायीं तरफ पल्मोनरी लूप शरीर से कम ऑक्सीजन वाला रक्त लेता है और इसे फिर से साफ व ऑक्सीजन युक्त बनाने के लिए फेफड़ों में भेज देता है।
जब रक्त ऑक्सीजेनेटिड (ऑक्सीजन युक्त) हो जाता है, तो सिस्टमिक लूप (हृदय की दायीं साइड) पूरे शरीर में रक्त पहुंचाता है, ताकि शरीर के हर अंग को ऑक्सीजन मिल जाए।

हृदय और फेफड़ों के बीच के करीबी संबंध का मतलब है कि सांस से जुड़ी समस्या हृदय या फेफड़े की या फिर इन दोनों की किसी भी समस्या के कारण हो सकती है।
इसके अलावा कुछ ऐसी समस्याएं भी होती हैं जो कि हृदय और फेफड़ों के संपर्क से संबंधित भी होती हैं जैसे:

ऐसे हृदय रोग जिनसे फेफड़े प्रभावित होते हैं

पल्मोनरी हाइपरटेंशन: 
पल्मोनरी हाइपरटेंशन उच्च रक्त चाप का एक प्रकार है जो कि फेफड़ों की धमनियों और हृदय के दाहिने हिस्से को प्रभावित करता है।
पल्मोनरी हाइपरटेंशन में फेफड़ों की छोटी धमनियां (केशिकाएं) संकुचित, अवरुद्ध व क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। जिसके कारण फेफड़ों में रक्त पहुंचना मुश्किल हो जाता है और फेफड़ों की धमनियों में दबाव बढ़ जाता है। दबाव बढ़ने पर हृदय को खून पहुंचाने में कठिनाई होने लगती है और हृदय की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं व काम करना बंद कर देती हैं। इससे फेफड़ों में खून बहने लगता है, जिससे खांसी में खून आने जैसे लक्षण विकसित हो जाते हैं।

पल्मोनरी इडिमा: 
इस स्थिति का मतलब होता है फेफड़ों में अत्यधिक पानी भर जाना जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। यह आमतौर पर हृदय की समस्याओं के कारण होता है। यदि हृदय कमजोर या क्षतिग्रस्त है तो यह फेफड़ों से मिले रक्त को पर्याप्त मात्रा में पंप नहीं कर पाता। जब ऐसा होता है तो हृदय में दबाव बढ़ना शुरू हो जाता है, जिसके कारण फेफड़ों के वायु कोषों में द्रव्य जाने लगता है इसके परिणामस्वरूप सांस लेने में तकलीफ होने लगती है।

हार्ट फेलियर:
हार्ट फेलियर एक ऐसी स्थिति है, जिसमें हृदय कमजोर हो जाता है। इसमें सांस फूलना, थका हुआ महसूस होना जैसी स्थिति पैदा हो जाती हैं। क्षतिग्रस्त हृदय पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता। जिसके कारण शरीर से रक्त वापस हृदय में आता है और इससे फेफड़ों की नसों में दबाव बढ़ने लगता है। 

टैकीकार्डिया: 
टैकीकार्डिया का मतलब है हृदय की गति का तेज होना, इस स्थिति में आमतौर पर एक व्यस्क का हृदय एक मिनट में 100 बार धड़कता है। इस स्थिति में हृदय की गति तेजी से बढ़ती है और पूरे शरीर में रक्त नहीं पहुंच पाता। इस स्थिति में सांस फूलने लगती है और शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।

इसके अलावा कार्डियोमायोपैथी जैसे कई अन्य हृदय रोग भी हैं जिनसे फेफड़े प्रभावित होते हैं। 

किस तरह रखें हृदय को स्वस्थ ताकि फेफड़े भी न हो प्रभावित

यदि हृदय किसी भी तरह से प्रभावित होता है, तो इससे फेफड़ों पर भी असर पड़ता है। यदि हृदय स्वस्थ रहेगा तो फेफड़ों के बीमार होने की आशंका भी कम हो जाती है।
हृदय और फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए आप निम्न उपाय अपनाएं:

  • धूम्रपान न करें, वायु प्रदूषण आज के समय की बड़ी समस्या है हम हर समय दूषित हवा में सांस ले रहे हैं। ऐसे में यदि आप धूम्रपान भी करते हैं, तो यह आपके लिए जानलेवा हो सकता है।
  • हृदय और फेफड़े दोनों ही कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित होते हैं, इसीलिए कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखना अत्यंत आवश्यक है।
  • व्यायाम आपके शरीर और हृदय को स्वस्थ रखता है। सुबह जल्दी उठकर व्यायाम करने से ताजी हवा आपके शरीर में जाएगी, जिससे शरीर में रक्त का संचार ठीक प्रकार से होगा।
  • यदि आपको किसी भी प्रकार का हृदय रोग है, तो शराब का सेवन बिल्कुल भी न करें और ना ही अन्य कोई नशा करें।
  • घर के अंदर की हवा बाहर से अधिक प्रदूषित होती है, जिससे आपके फेफड़े और अधिक प्रभावित होते हैं। ऐसे में या तो आप घर में एयर प्यूरीफायर लगवा सकते हैं या फिर घर में लैवेंडर जैसे पौधे लगा सकते हैं।
  • भोजन में ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों और फलों को शामिल करें। कई फलों में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जो आपके शरीर को तंबाकू के सेवन के दौरान या दूषित हवा में सांस लेने के दौरान बने मोलेक्युल्स से बचाते हैं।

उपरोक्त उपायों को अपनाकर आप न सिर्फ हृदय और फेफड़ों को स्वस्थ रखते हैं बल्कि यह आपके संपूर्ण शरीर के स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी हैं।

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