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माइग्रेन, कोई सामान्य सिरदर्द नहीं बल्कि एक बेहद ही असहनीय स्थिति है। इस स्थिति में व्यक्ति अपने सिर में एक अलग प्रकार की चुभन महसूस करता है, लेकिन हैरानी की बात है कि तमाम दवाइयों के बावजूद भी आज तक माइग्रेन का संभव इलाज नहीं मिल पाया है। हालांकि, इसको लेकर वैज्ञानिक निरंतर अध्ययन में जुटे हैं और एक ताजा रिसर्च में इसके इलाज की उम्मीद दिखाई दी है।

हाल ही में द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित एक रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों ने उबरोगेपेंट (ubrogepant) नामक एक ऐसी दवा (मुंह से खाने वाली) बनाई है, जिसके 50 मिलीग्राम सेवन से माइग्रेन के रोगियों को दर्द से राहत मिली है। 

कैसे की गई रिसर्च?
माइग्रेन के इलाज के लिए, डॉक्टर लंबे समय तक ट्रिप्टंस नामक दवाओं की सलाह देते हैं, जो नवर्स सिस्टम पर कैमिकल सेरोटोनिन की तरह काम करती हैं और नसों को शांत कर दर्द से आराम दिलाती हैं। माइग्रेन के लिए दवा बनाते वक्त डॉक्टर सिल्बर्स्टीन ने अपने धैर्य का उदाहरण दिया। इस दौरान उन्होंने और उनके साथियों ने माइग्रेन की बीमारी से पीड़ित उन लोगों पर शोध किया, जिन्हें एक या एक महीने के बाद इस दर्द में थोड़ा आराम मिला था और 6 महीने तक कोई दर्द महसूस नहीं हुआ।

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क्या कहते हैं डॉक्टर?
थॉमस जेफरसन विश्वविद्यालय के एक न्यूरोलॉजिस्ट और जेफरसन हेडेक सेंटर के निदेशक (डायरेक्टर) डॉक्टर स्टीफन सिल्बर्स्टीन के मुताबिक अमेरिका में 4.7 करोड़ लोग माइग्रेन की समस्या से ग्रसित हैं और यह  60 लाख लोगों के लिए एक पुरानी बीमारी है, जिसका मतलब यह हुआ कि इन लोगों को महीने में 15 से अधिक बार सिरदर्द (माइग्रेन) रहता है। वहीं, स्कॉट्सडेल के मायो क्लीनिक में न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर डेविड डब्ल्यू डोडिक का कहना है कि माइग्रेन को खत्म करने और रोगियों को बेहतर इलाज देने का समय आ गया है।

क्या हैं माइग्रेन के कारण?
माइग्रेन की समस्या होने का कोई इकलौता कारण नहीं है, बल्कि कई अलग-अलग वजहों से माइग्रेन की परेशानी पैदा होती है। जैसे-

  • हार्मोन में बदलाव के कारण
  • तनाव की वजह से हो सकता माइग्रेन
  • कैफीन के कारण हो सकता है माइग्रेन
  • वातावरण में बदलाव भी एक प्रमुख कारण
  • अल्कोहल के कारण भी हो सकता माइग्रेन

माइग्रेन की समस्या को बहुत से लोगों द्वारा बहुत बुरी तरह से हैंडल किया जा रहा है। उनमें से एक तो यही है कि डॉक्टर और आम लोग इससे पीड़ित व्यक्ति को डॉक्टरी सलाह लेने या इसके पूरी तरह से इलाज के लिए प्रेरित ही नहीं करते। इसकी वजह से माइग्रेन के पीड़ित इलाज से दूर हो जाते हैं। इसके अलावा, दूसरा कारण यह है कि कुछ माइग्रेन पीड़ित लोग यह मान लेते हैं कि वह खुद ही इस समस्या से निपट लेंगे। इसके लिए वे तरह-तरह की दवाओं के जरिए दर्द को भगाने की कोशिश करते हैं।

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डॉक्टर स्टीफन सिल्बर्स्टीन का कहना है कि यह एक बड़ी बाधा है और यहां कुछ लोग दवा का दुरुपयोग करते हैं, जो वास्तव में स्थिति को पहले से ज्यादा खराब कर सकता है। उन्होंने कहा कि क्रॉनिक माइग्रेन वाले आधे मरीज हमारे द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के आधार पर उपचार करते हैं। वे बताते हैं कि जब माइग्रेन का अटैक होता है तो कई लोग इलाज का इंतजार करते हैं, क्योंकि वह एक उम्मीद में होते हैं कि यह केवल सिरदर्द ही तो है और अपने आप ठीक हो जाएगा, लेकिन जितना आप इंतजार करते हैं, माइग्रेन का ठीक होना या उससे आराम मिलना उतना मुश्किल हो जाता है।

डॉक्टर की कमी भी एक कारण
डॉक्टर डोडिक के मुताबिक शायद अमेरिका में डॉक्टरों की कमी का होना एक बड़ी समस्या हो सकती है, क्योंकि माइग्रेन से जुड़े महज 580 विशेषज्ञ हैं। इस लिहाज से करीब 80 हजार लोगों पर एक डॉक्टर है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन की ओर से माइग्रेन की रोकथाम के लिए स्वीकृत ऐसी अलग-अलग चार दवाएं (मुंह से खाने वाली) उपलब्ध हैं, जिसमें दो एंटी-सिजर ड्रग्स हैं और दो बीटा-ब्लॉकर्स। इस स्थिति में, क्रॉनिक माइग्रेन (लंबे समय से पीड़ित) से ग्रसित लोग, जिन्हें हर दिन या दूसरे दिन सिर में दर्द रहता है वो बोटॉक्स का इंजेक्शन लगवा सकते हैं।

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डॉक्टर स्टीफन सिल्बर्स्टीन के मुताबिक माइग्रेन से पीड़ित करीब 40 प्रतिशत लोग दवाओं के जरिए ठीक हो सकते हैं, लेकिन 13 प्रतिशत ही लोग दवाएं लेते पाते हैं।

कुल मिलाकर माइग्रेन से पीड़ित लोगों के लिए यह यह दवा (उबरोगेपेंट) राहत की एक बड़ी उम्मीद के तौर पर देखी जा सकती है। साथ ही उन डॉक्टरों के लिए भी, जिन्होंने कड़ी मेहनत के बाद इस दवा को बनाया है। अगर पूरी तरह से माइग्रेन की समस्या से निजात मिलती है तो यह आने वाले वक्त में डॉक्टर और वैज्ञानिकों की बड़ी उपलब्धि हो सकती है।

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