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आप, मैं और बड़ी तदात में वो लोग जो जिंदगी की भागदौड़ में अपना गांव, शहर छोड़कर बड़े महानगरों में आ गए हैं। उन्हें हर दिन ये एहसास जरूर होता होगा कि वो क्या छोड़ आए हैं। वो छोड़ आए हैं सुकून और साफ हवा। बाहर से रोजगार के लिए आए लोगों के पास फिर भी विकल्प रहता है कि वो कभी उन गलियों में वापसी कर सकते हैं। लेकिन वहीं पैदा हुए, पले बड़े लोगों की किस्मत में ये अवसर भी नहीं। इतने सालों तक उस पर्यावरण में रहने के बाद वो अपना और अपनों का स्वास्थ्य खो देते हैं।

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वायु प्रदूषण की वजह से फेफड़ों का कैंसर, स्ट्रोक, हृदय रोग, अस्थमा, डिमेंशिया और डिप्रेशन होता है। अभी हाल ही में की गई एक रिसर्च कहती है कि खराब हवा में सांस लेने और डीजल, पेट्रोल के दूषित कणों के भीतर जम जाने से लोगों की हड्डियां कमजोर हो रही हैं और लोग समय से पहले ही बूढ़े होने लगे हैं।

विश्व में वायु प्रदूषण पर चल रही रिसर्च
दक्षिण भारत में हैदराबाद के पास के 28 गांवों में रहने वाले 4000 लोगों पर की गई रिसर्च से वायु प्रदूषण के बारे में नए तथ्य सामने आए हैं। ये रिसर्च जेएएमए नेटवर्क ओपन जर्नल में छपी थी। इस रिपोर्ट में बताया गया कि जो लोग खराब हवा के संपर्क में ज्यादा रहे उनके नितंब और रीढ़ की हड्डियों का घनत्व समय के साथ कम हो गया।

ओटावि टी रंजानी इस स्टडी को करने वाली बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ की प्रमुख शोधकर्ता हैं। रंजानी कहती हैं कि शरीर में ऑक्सिडेटिव स्ट्रेस और सूजन की वजह पर्टिकुलेट मैटर है। पीएम की वजह से ओस्टिओपोरोसिस जैसी परिस्थितियां पैदा होती हैं, जिससे हड्डियां कमजोर और भुरभुरी होकर टूटने लगती हैं।

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रिसर्च को किस तरह से आगे बढ़ाया गया
शोधकर्ताओं ने पीएम 2.5 और ब्लैक कार्बन की मात्रा को हर गांव के वातावरण में जांचा। पीएम 2.5 सबसे बारीक और महीन पर्टिकुलेट मैटर है, जबकि ब्लैक कार्बन सबसे बड़ा प्रदूषक। दोनों पेट्रोल और डीजल के जलने से उत्पन्न धुंए में मौजूद होते हैं। रिसर्च का एनालिसिस कर पता चला कि पीएम 2.5 का हवा में घनत्व 33 माइक्रोग्राम प्रति मीटर घन है जो विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से तीन गुना ज्यादा है। इन नतीजों को लोगों तक पहुंचाने में कार्ल्स मिले नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ न्युट्रीशियन और आईसीएमआर हैदराबाद की शोधकर्ता का दिमाग है। इस शोध को पूरा करने में डिपार्टमेंट ऑफ नॉन कॉम्युनिकेबल डिजीज एपिडेमियोलॉजी, लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन और ट्रोपिकल मेडिसिन लंदन की शोधकर्ता भारती कुलकर्णी का भी बहुत बड़ा हाथ है।

हड्डियों पर पड़ा प्रदूषण का प्रभाव 
लोगों के पीठ के नीचे वाले हिस्से और नितंब के पास वाली हड्डियों के एक्स-रे लिए गए। रिजल्ट से पता चला कि वायु प्रदूषण ने लोगों की हड्डियों के घनत्व को कम कर दिया है।  प्रदूषित तत्वों में 3 मिलीग्राम प्रति घन मीटर बढ़ोतरी पर रीढ़ की हड्डी में -0.57 ग्राम और नितंब के पास वाली हड्डी में - 0.13 ग्राम की गिरावट आती है। ये रिसर्च भविष्य में हड्डियों के स्वास्थ्य और वायु प्रदूषण के संदर्भ में काफी मदद करेगी।

विश्व स्वास्थ्य के चौंकाने वाले आंकड़े
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विश्व में 70 लाख लोगों की मौत समय से पहले हो जाती है। इसमें से एक तिहाई मौतें स्ट्रोक, फेफड़ों के कैंसर और हृदय रोगों से होती हैं। संगठन के अनुसार 15 साल से कम उम्र के 93 प्रतिशत बच्चों की सेहत पर वायु प्रदूषण सबसे ज्यादा बुरा असर डालता है। सबसे खौफनाक बात ये है कि ज्यादातर बच्चे व्यस्क होने से पहले ही मौत के शिकार हो जाते हैं। 2016 में 6 लाख बच्चे वायु प्रदूषण के चलते श्वास इन्फेक्शन्स से मर गए थे।

गर्भवती महिलाओं पर असर
ग्लोबल हेल्थ एजेंसी ने बताया कि जब गर्भवती महिलाएं प्रदूषित हवा में ज्यादा समय तक सांस लेती हैं। तो बच्चे समय से पहले, कमजोर और छोटे पैदा होते हैं। उनका वजन भी कम होता है। बच्चों में पैदा होते ही अस्थमा और कैंसर होने का खतरा रहता है। जो बच्चे ज्यादा समय तक इस प्रदूषण में रहते हैं उन्हें बाद में कार्डियोवैस्कुलर डिजीज भी हो सकती हैं।

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