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भारत को पहली स्वदेशी निमोनिया वैक्सीन मिल गई है। इसे भारतीय दवा कंपनी सिरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) ने तैयार किया है। बीते मंगलवार को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) ने वैक्सीन को अप्रूवल दे दिया। कहा जा रहा है कि इससे निमोनिया के इलाज के लिए वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर भारत की आयात पर निर्भरता कम होगी। डीसीजीआई से मंजूरी मिलने के बाद पुणे स्थित एसआईआई निमोनिया वैक्सीन का निर्माण में भारत में कर सकेगी।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इस देसी निमोनिया वैक्सीन को लेकर नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वीके पॉल ने बताया कि इसका इस्तेमाल 'स्ट्रेप्टोकोकस निमोनिया' नामक बैक्टीरिया से होने वाली निमोनिया बीमारी के खिलाफ सक्रिय प्रतिरक्षण विकसित करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'एक स्वदेशी नियोमोकोकल वैक्सीन होना बच्चों में मृत्यु दर कम करने के हमारे अभियान में गेम-चेंजर साबित होगा। ज्यादातर बाल मृत्यु के लिए निमोनिया ही जिम्मेदार होता है और नियोमोकोकी (बैक्टीरिया) की वजह से निमोनिया के आधे मामले गंभीर हो जाते हैं। इस वैक्सीन का आना हमारे देश के लिए वरदान है।'

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साल 2018 में निमोनिया से पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामले में भारत दूसरे नंबर पर रहा था। यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक, उस साल भारत में एक लाख 27 हजार बच्चे निमोनिया के चलते मारे गए थे। इस बीमारी के इलाज के लिए जरूरी वैक्सीन की आपूर्ति अभी तक आयात के जरिये की जाती रही है। जानकारों के मुताबिक, अगर किसी स्वदेशी कंपनी को इसके निर्माण के लिए अप्रवूल चाहिए हो तो उसे पहले, दूसरे और तीसरे चरण के ट्रायल कर वैक्सीन के सुरक्षित होने के साक्ष्य देने होंगे। सिरम इंस्टीट्यूट ने इन सभी ट्रायलों को भारत के साथ-साथ अफ्रीकी देश गांबिया में भी किया था। इसके बाद डीसीजीआई से उसे वैक्सीन के निर्माण की स्वीकृति मिली है।

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निमोनिया क्या है?
यह एक संक्रमण है जो फेफड़े के एक या दोनों थैलों को लिक्विड या मवाद से भर कर सुजा देता है। इसके चलते पीड़ित व्यक्ति को बलगम, बुखार, ठंड लगना और सांस में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। निमोनिया होने से मरीज की जान को खतरा हो सकता है। यह शिशुओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों (65 वर्ष से ऊपर), पहले से किसी बीमारी से पीड़ित लोगों और कमजोर इम्यून सिस्टम वालों के लिए ज्यादा हानिकारक या जानलेवा हो सकता है। ज्यादातर निमोनिया संक्रामक प्रकृति के होते हैं और वायरल तथा बैक्टीरियल दोनों प्रकार के हो सकते हैं। निमोनिया छींकने या खांसने से अन्य लोगों में भी फैल सकता है। हालांकि जानकारों के मुताबिक, कवक निमोनिया इस तरह नहीं फैलता।

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