विटामिन बी12 हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। इसकी जरूरत को हमारा शरीर खुद-ब-खुद पूरा नहीं सकता। हमारा शरीर नियमित रूप से विटामिन बी12 प्राप्त करने के लिए डेली डाइट या आहार पर निर्भर होता है। दरअसल विटामिन बी12 ऐसा पोषक तत्व है जो सिर्फ मांस, मछली, अंडे और दूध व दुग्ध-उत्पादों जैसे पशुओं से मिलने वाले आहार में उपलब्ध होता है।

हालांकि, अगर आप शाकाहारी हैं और मीट व अंडे समेत पशुओं से मिलने वाले किसी भी प्रकार के आहार का सेवन नहीं करते हैं तो आपको विटामिन बी12 की कमी हो सकती है। डॉक्टरों ने चेताया है कि शाकाहारी लोगों में विटामिन बी12 की सबसे ज्यादा कमी होती है, जिससे कई गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जैसे-

  • अत्याधिक थकान या सुस्ती
  • कमजोरी महसूस होना
  • सांस फूलना
  • सिरदर्द
  • भूख कम लगना

विशेषज्ञों की राय
एक्सपर्ट का मानना है कि शाकाहारी आहार आमतौर पर हेल्दी होता है, क्योंकि उसमें कोलेस्ट्रॉल की मात्रा कम होती है। इससे दिल की बीमारियों का बचाव होता है, लेकिन शाकाहारी लोगों को विटामिन बी12 की गोली लेनी चाहिए। ताकि वो स्थाई रूप से हाथ और पैर के दर्द या सुन्न होने की परेशानी से बच सकें।

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अधिकांश लोग दूध के जरिए विटामिन बी12 प्राप्त करते है, लेकिन प्लांट यानी पौधों (जैसे- सोय प्रोटीन) पर आधारित विकल्प वयस्कों और बच्चों को पेरिफेरल न्यूरोपैथी (हाथ और पैर का सुन्न पड़ना या कमजोरी महसूस होना) से बचाने के लिए पर्याप्त उच्च स्तर नहीं रखते हैं, जो अपरिवर्तनीय है।

डॉक्टर की राय
लंदन के किंग्स कॉलेज में एमेरिट्स ऑफ न्यूट्रिशन एंड डायटिक्स के प्रोफेसर टॉम सैंडर्स का कहना है कि जो युवा हैं और खासतौर पर शाकाहारी आहार ले रहे हैं, उन लोगों में विटामिन बी12 की कमी का ज्यादा जोखिम है। युवाओं में बी12 की कमी होना काफी खतरनाक हो सकता है।

सैंडर्स के मुताबिक अध्ययनों से पता चला है कि शाकाहारी लोगों की डाइट हेल्दी तो होती है, लेकिन उन्हें विटामिन बी12 के एक तिहाई स्तर की जरूरत है। सैंडर्स बताते हैं कि विटामिन बी12 एक ऐसी चीज है, जिसके बारे में हम चिंतित हैं। बच्चों को लेकर विशेष चिंता है। एक मामले में, एक बच्चा जिसे उसकी मां के द्वारा स्तनपान कराया गया था, लेकिन उसमें भी बी12 की कमी थी, जो आखिर में एक न्यूरोपैथी की समस्या पर आकर खत्म होती है।

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सैंडर्स और टिम की, जो कि एपिडेमियोलॉजी के प्रोफेसर और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में कैंसर एपिडेमियोलॉजी इकाई के डिप्टी डायरेक्टर हैं, दोनों ने उन लोगों के स्वास्थ्य पर शोध किया है, जो कि कई सालों से सिर्फ शाकाहारी डाइट लेते हैं। टिम की, जो खुद एक शाकाहारी है, वो भी नियमित रूप से विटामिन बी12 की गोलियां खाते हैं।

कैसे की गई रिसर्च?
टिम की बताते हैं कि हमारे पास अध्ययन से जुड़े सीमित आंकड़े थे, जिसमें ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से करीब 2000 लोग शामिल थे। कैलिफोर्निया में की गई एक रिसर्च के साथ इन आंकड़ों को जोड़ने पर करीब 10 हजार लोगों का डाटा इकट्ठा हो गया। हालांकि, ये काफी नहीं हो सकता, क्योंकि शोधकर्ताओं के पास शाकाहारी लोगों पर इसके दीर्घकालिक असर से जुड़े सटीक आंकड़े नहीं हैं।

अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि शाकाहारी भोजन करने वाले लोग अधिक वजन वाले नहीं होते हैं। कुछ बहुत पतले होते हैं। बुढ़ापे में वजन कम हो जाना आम बात है, ऐसे में कम वजन वाले पतले शाकाहारी लोगों के लिए समस्या हो सकती है। इसके अलावा इन लोगों में टाइप 2 डायबिटीज और डायवर्टीकुलर रोग (आंत से जुड़ी बीमारी) भी शाकाहारी लोगों में कम ही पायी जाती है। साथ ही शाकाहारियों में कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है और हृदय रोगकैंसर की आशंका भी कम होती है।

हालांकि, लो बोन डेंसिटी (हड्डी की मजबूती कम होना) के परिणामस्वरूप ऐसे लोगों में हड्डी टूटने का जोखिम 30 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। टिम की ने बताया कि ये कैल्शियम की कमी या फिर विटामिन बी12 की कमी के कारण हो सकता है। इसके अलावा हड्डियों में कमजोरी हेमोरेजिक स्ट्रोक (रक्तस्त्राव की स्थिति) के बढ़ने से भी हो सकती है।

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इस रिपोर्ट के आधार पर देखा जाए तो शाकाहारी होना बीमारियों के जोखिम को कम जरूर करता है, लेकिन विटामिन बी12 की कमी से अन्य समस्याएं बढ़ सकती हैं। अगर शाकाहारी लोग विटामिन बी12 की गोलियां लें तो इस जोखिम को कम किया जा सकता है।

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