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संक्षेप में सुनें

कैंसर क्या है?

हमारा शरीर कई प्रकार की कोशिकाओं से बना होता है। जैसे-जैसे शरीर को इनकी जरूरत होती है वैसे वैसे ये कोशिकाएं नियंत्रित रूप से विभाजित और बढ़ती रहती हैं। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि शरीर को इन कोशिकाओं की कोई जरूरत नहीं होती है, फिर भी इनका बढ़ना जारी रहता है। कोशिकाओं का यह असामान्य विकास कैंसर कहलाता है (जो आमतौर पर एक असामान्य कोशिका से उत्पन्न होता है) जिसमें कोशिकाएं सामान्य नियंत्रण खो देती हैं। इस प्रकार कोशिकाओं का एक समूह लगातार अनियंत्रित वृद्धि करता है, जो आसपास के अजेसन्ट ऊतकों (Tissue) पर आक्रमण करता है, जो शरीर के दूर के हिस्सों में पहुंचता है और लसिका या रक्त के माध्यम से शरीर के अन्य भागों में फ़ैल जाता है। कैंसर कोशिका शरीर के किसी भी ऊतक में विकसित हो सकती है।

जैसे-जैसे कैंसर कोशिकाएं बढ़ती हैं और कई गुणा होती हैं तो वे कैंसर कोशिकाओं के एक समूह का रूप ले लेती हैं जो ट्यूमर कहलाता है। ये ट्यूमर आस पास के ऊतकों पर हमला करता है और उन्हें नष्ट करता है। ट्यूमर कैंसरस या नॉन कैंसरस हो सकते हैं। कैंसरस कोशिका एक जगह से शुरू होकर पूरे शरीर (मेटास्टाज़ेज़) में फैल सकती है।

यह कैसा होता और फैलता है?

कैंसर कोशिकाएं एक जटिल प्रक्रिया में स्वस्थ कोशिकाओं से विकसित होती हैं जिन्हें घातक परिवर्तन कहा जाता है।

इसकी शुरूआत कैसे होती है?

कोशिका के आनुवंशिक पदार्थ में परिवर्तन होने की शुरूआत कैंसर होती है। कोशिका के आनुवंशिक पदार्थ में होने वाले परिवर्तन अपने आप हो सकते हैं या कुछ एजेंट या तत्वों के द्वारा उत्पन्न हो सकते हैं। ये एजेंट्स हैं रसायन, तंबाकू, वायरस, रेडिएशन और सूर्य के प्रकाश। लेकिन ज़रूरी नहीं है कि सभी कोशिकाएं इन एजेंट से समान रूप से प्रभावित होती हैं। कोशिकाओं में एक आनुवंशिक दोष इन एजेंट्स को शरीर के प्रति अतिसंवेदनशील बना देता है। यहां तक ​​कि लंबे समय से हो रही शारीरिक जलन भी इन एजेंट्स को एक कोशिका के प्रति अतिसंवेदनशील बना सकती है।

यह कैसे बढ़ता है ?

कैंसर के विकास में बढ़ावा देने के लिए कुछ एजेंट या तत्व (प्रमोटर) कारण बनते हैं। ये एजेंट पर्यावरण में मौजूद कुछ पदार्थ या दवाइयां भी हो सकती है जैसे सेक्स हार्मोन टेस्टोस्टेरोन जिसका उपयोग वृद्ध पुरुषों में यौन इच्छा और ऊर्जा में सुधार करने के लिए लिया जाता है। कार्सिनोजेन्स के विपरीत, ये प्रमोटर स्वयं कैंसर का कारण नहीं बनते हैं। इसकी बजाये ये प्रमोटर कैंसर से प्रभावित हो रही कोशिकाओं के विकास को बढ़ावा देते हैं। इन प्रमोटर का उन कोशिकाओं पर कोई असर नहीं होता है जिनमें कैंसर की शुरुआत ही नहीं हुई हैं।

कुछ कैंसर को उत्पन्न करने वाले तत्व, प्रमोटर्स की आवश्यकता के बिना कैंसर का कारण बनते हैं। उदाहरण के लिए, आइअनाइज़िंग रेडिएशन (ionizing radiation - जो ज्यादातर एक्स-रे में प्रयोग होती है) विभिन्न कैंसर, विशेषकर सारकोमा, ल्यूकेमिया, थायरॉयड कैंसर और स्तन कैंसर का कारण बन सकती है।

यह कैसे फैलता है?

कैंसर सीधे आसपास के ऊतकों में बढ़ सकता है या अंगों में फैल सकता है, चाहें वे दूर हो या पास। कैंसर लसीका प्रणाली (lymphatic system) के माध्यम से फैल सकता है। इस प्रकार का फैलाव कार्सिनोमा में भी होता है। उदाहरण के लिए, स्तन कैंसर आम तौर पर बगल में निकटतम लिम्फ नोड्स में फैलता है और बाद में यह शरीर के दूसरे हिस्सों में फैल जाता है। कैंसर रक्त प्रवाह के माध्यम से भी फैल सकता है। इस प्रकार का प्रसार सारकोमा कैंसर में भी होता है।

  1. प्रकार
  2. चरण
  3. लक्षण
  4. कारण
  5. बचाव
  6. परीक्षण
  7. इलाज
  8. जोखिम और जटिलताएं
  9. कैंसर की दवा - Medicines for Cancer in Hindi
  10. कैंसर की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Cancer in Hindi
  11. कैंसर के डॉक्टर

प्रकार

कैंसर कई प्रकार के होते हैं, उनमें से कुछ यह है - 

  1. ब्रेस्ट कैंसर (स्तन कैंसर)
  2. सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर)
  3. मुँह का कैंसर (ओरल कैंसर)
  4. प्रोस्टेट कैंसर (पौरुष ग्रंथि का कैंसर)
  5. गर्भाशय कैंसर (बच्चेदानी के कैंसर)
  6. ओवेरियन कैंसर (अंडाशय कैंसर) 
  7. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर)
  8. पेट का कैंसर
  9. ब्लड कैंसर (ल्यूकेमिया)
  10. बोन कैंसर (हड्डियों का कैंसर)
  11. कोलोरेक्टल कैंसर (कोलन कैंसर)
  12. गले का कैंसर
  13. लिवर कैंसर
  14. योनि का कैंसर
  15. स्किन कैंसर
  16. ब्लैडर कैंसर
  17. अग्नाशय कैंसर
  18. ब्रेन कैंसर (मस्तिष्क कैंसर )
  19. लिम्फोमा
  20. गुर्दे का कैंसर (किडनी कैंसर)
  21. वृषण कैंसर (अंडकोष कैंसर)

चरण

कैंसर के ऊतकों को रक्त और रक्त के गठन वाले ऊतकों (ल्यूकेमिया और लिम्फोमास) और "सॉलिड" ट्यूमर (कोशिकाओं का ठोस द्रव्यमान) में विभाजित किया जा सकता है, जिन्हें अक्सर कैंसर कहा जाता है। कैंसर कार्सिनोमा या सरकोमा हो सकता है।

ल्यूकेमिया और लिम्फोमा ब्लड कैंसर होते हैं। ल्यूकेमिया खून से बनने वाली कोशिकाओं से उत्पन्न होता है जिसमें अस्थि मज्जा (bone marrow) और रक्तप्रवाह में अधिक मात्रा वाली अपरिपक्व श्वेत रक्त कोशिकाएं सामान्य रक्त कोशिकाएं की जगह विस्थापित हो जाती हैं। लिम्फोमा में कैंसर की कोशिका लिम्फ नोड्स का विस्तार करती हैं। लिम्फोमा अक्सर लिम्फ नोड्स से शुरू होता है लेकिन यह बगल, जननांग, पेट, छाती या आंत आदि अंग में भी पाया जा सकता है।

कार्सिनोमा कैंसर का सबसे आम प्रकार है। जिसमें कैंसर कोशिकाएं शरीर के आंतरिक और बाहरी भाग जैसे फेफड़े, स्तन और पेट के कैंसर को प्रभावित करती हैं। यह त्वचा के एपिथीलियम ऊतक से शुरू होता है। कार्सिनोमा के उदाहरण त्वचा, फेफड़े, बृहदान्त्र, पेट, स्तन, प्रोस्टेट, और थायरॉइड ग्रंथि के कैंसर हैं। आमतौर पर, कार्सिनोमा युवाओं की तुलना में अधिक उम्र वाले लोगों को अधिक होता है।

सारकोमा एक-दूसरे से जुड़े टिश्यूज (ऊतकों) में हो जाने वाले ट्यूमर को कहते हैं। सामान्य संयोजी ऊतकों में फैट, रक्त वाहिकाएं, तंत्रिकाएं, हड्डियां, मांसपेशियां, कार्टिलेज आदि शामिल हैं। सारकोमा के उदाहरण है - लइओम्योसर्कोमा (leiomyosarcoma) और ओस्टियोसॉर्कामा (osteosarcoma) (हड्डी का कैंसर) हैं। आमतौर पर, यह कैंसर वृद्ध लोगों की तुलना में कम उम्र के लोगों को अधिक होता है।

लक्षण

जब कैंसर की कोशिकाएं बहुत छोटे रूप में होती हैं तो कैंसर के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन जैसे कैंसर बढ़ता है, इसकी उपस्थिति आसपास के ऊतकों को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा, कुछ कैंसर की वजह से शरीर से कुछ पदार्थों का स्राव होने लगता है या कुछ कैंसर प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं को ट्रिगर करते हैं जिससे शरीर के वो हिस्से जो कैंसर की उत्पत्ति वाले हिस्सों से दूर हैं, उनमें भी कैंसर के लक्षण पैदा हो सकते हैं।

दर्द - कुछ कैंसर पहले दर्द रहित होते हैं, लेकिन कुछ कैंसर का प्रारंभिक लक्षण दर्द हो सकता है जैसे कि मस्तिष्क के ट्यूमर जिनमें सिरदर्द होता है और सिर, गर्दन और एनोफेजियल कैंसर जिनमें निगलने के समय दर्द होता है। जैसे जैसे कैंसर बढ़ता है इसका पहला लक्षण अक्सर असहज महसूस करना होता है, जो कैंसर के फैलने के साथ तेजी से गंभीर दर्द में बदल सकता है। हालांकि, सभी कैंसर गंभीर दर्द का कारण नहीं होते हैं। इसी तरह, दर्द की कमी इस बात की गारंटी नहीं देती कि कैंसर बढ़ या फैल नहीं रहा है। (और पढ़ें - सिर दर्द के घरेलु उपाय)

ब्लीडिंग - कैंसर में थोड़ा सा खून आ सकता है क्योंकि इसकी रक्त वाहिकाएं नाजुक होती हैं। बाद में, जैसे कैंसर बढ़ता है और आसपास के ऊतकों पर हमला करता है तो यह एक नजदीकी रक्त वाहिका में बढ़ सकता है, जिससे रक्तस्राव हो सकता है। यह ब्लीडिंग मामूली सी हो सकती है और इसका निदान किया जा सकता है या नहीं यह परीक्षण के साथ ही पता लग सकता है। प्रारंभिक चरण के बृहदान्त्र कैंसर (colon cancer) में ऐसा अक्सर होता है। एडवांस (advanced) कैंसर में ब्लीडिंग अधिक हो सकती है, यहां तक कि यह ब्लीडिंग जीवन के लिए खतरनाक हो सकती है। (और पढ़ें - अडुळसा काढा है ब्लीडिंग में उपयोगी)

जिस जगह कैंसर है वही जगह ब्लीडिंग को निर्धारित करती है। पाचन तंत्र के साथ जुड़े कैंसर में मल में ब्लीडिंग हो सकती है। मूत्र पथ के साथ जुड़े कैंसर में मूत्र में ब्लीडिंग हो सकती है। अन्य कैंसर से शरीर के आंतरिक क्षेत्रों में खून आ सकता है। फेफड़ों में ब्लीडिंग से व्यक्ति को खांसी में रक्त आने का कारण बन सकता है।

ब्लड क्लॉट्स - कुछ कैंसर पदार्थों का उत्पादन करते हैं जो शरीर में रक्त के जमाने का कारण बनते हैं मुख्यतः पैरों की नसों में। पैर की नसों में ब्लड क्लॉट्स कभी-कभी टूट जाती है जो पूरे शरीर में फैल जाती है जो आपके लिए घातक हो सकता है। अग्नाशय, फेफड़े और अन्य सॉलिड ट्यूमर वाले लोगों में और मस्तिष्क ट्यूमर वाले लोगों में अत्यधिक क्लोटिंग आम है।

वजन घटना और थकान - आमतौर पर, कैंसर वाले व्यक्ति को वजन घटने और थकान का अनुभव होता है, जो कि कैंसर के बढ़ने के कारण इस कंडीशन को और भी खराब कर सकता है। कुछ लोगों ने अच्छी भूख के बावजूद वजन घटने की सूचना दी है। जबकि कुछ लोगों में भूख की कमी या खाना निगलने में कठिनाई हो सकती है। वे बहुत पतले हो सकते हैं। एडवांस (advanced) कैंसर वाले लोग अक्सर बहुत थका हुआ रहते हैं। यदि एनीमिया विकसित हो जाता है, तो ऐसे लोगों को थोड़ी सी गतिविधि के साथ थकान या सांस की कमी हो सकती है। (और पढ़ें - थकान दूर करने और ताकत के लिए क्या खाएं)

लिम्फ नोड्स में सूजन - जैसे ही कैंसर शरीर के चारों ओर फैल जाना शुरू हो जाता है, यह सबसे पहले पास की लिम्फ नोड्स में फैल सकता है जिसमें सूजन हो जाती है। सूजन लिम्फ नोड्स आम तौर पर पीड़ा रहित होते हैं और ये सख्त या रबड़ जैसे फील हो सकते हैं। यदि कैंसर अड्वान्स स्टेज पे हैं तो ये लिम्फ नोड्स ऊपर की त्वचा में फंस सकते हैं, नीचे ऊतकों की परतों में या आपस में भी फँस सकते हैं। (और पढ़ें - स्तनपान के दौरान हो रहे दर्द और सूजन का एक अनोखा उपाय)

न्यूरोलॉजिक और मस्कुलर लक्षण - कैंसर तंत्रिका या रीढ़ की हड्डी को संकुचित कर सकता है। यह न्यूरोलॉजिक और मस्कुलर (muscular) लक्षणों में से कोई भी हो सकता है जैसे दर्द, कमजोरी या अनुभूति में परिवर्तन (जैसे झुनझुनी उत्तेजना) आदि। जब मस्तिष्क में कैंसर बढ़ता है, तो लक्षणों का पता लगाना मुश्किल हो सकता है लेकिन इसमें भ्रम, चक्कर आना, सिरदर्द, मतली, दृष्टि में परिवर्तन और दौरे हो सकते हैं। न्यूरोलॉजिक के लक्षण भी एक अपरिवर्तनीय सिंड्रोम (paraneoplastic syndrome) का हिस्सा हो सकते हैं।

श्वसन लक्षण - कैंसर फेफड़ों में वायुमार्ग जैसी संरचनाओं को संकुचित या अवरुद्ध कर सकता है जिससे श्वास की कमी, खांसी या निमोनिया आदि हो सकते हैं। श्वास की तकलीफ भी हो सकती है जब कैंसर फेफड़ों और छाती के बीच द्रव के निर्माण (pleural effusion), फेफड़ों में रक्तस्राव या एनीमिया का कारण बनता है। (और पढ़े – च्यवनप्राश खाने के फायदे श्वसन प्रणाली के लिए)

कारण

कैंसर रोगों का एक व्यापक समूह है और इसके कई तरह के कारण होते हैं। कई आनुवंशिक और पर्यावरणीय कारक कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाते हैं। प्रत्येक जीव विज्ञान और रोग विज्ञान के अनुसार प्रत्येक कैंसर भिन्न प्रकार का होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कैंसर के लिए सामान्य कारक निम्नलिखित हैं :

  1. आनुवांशिक है कैंसर का कारण - Genetic Factors Cause Cancer in Hindi
  2. उम्र से संबंधित हैं कैंसर के कारण - Cancer Related to Age in Hindi
  3. पर्यावरणीय कारक हैं कैंसर की वजह - Cancer Due to Environmental Factors in Hindi
  4. खराब आहार का सेवन है कर्क रोग का कारण - Cancer Caused by Diet in Hindi
  5. दवाएं और चिकित्सा उपचार बढ़ाएँ कैंसर का जोखिम - Medical Treatments that Cause Cancer in Hindi
  6. कैंसर का कारण बनता है इंफेक्शन - Cancer Caused by Infections in Hindi
  7. सूजन संबंधी विकार हैं कैंसर रोग के कारण - Inflammation Disorders Cause Cancer in Hindi
  8. कैंसर के कारणों में से एक हैं ख़राब प्रतिरक्षा - Cancer Due to Immune System Failure in Hindi

1. आनुवांशिक है कैंसर का कारण - Genetic Factors Cause Cancer in Hindi

कैंसर का कारण होने वाले आनुवांशिक परिवर्तन हमारे माता-पिता से विरासत में मिल सकते हैं। कुछ परिवारों को कुछ प्रकार के कैंसर विकसित होने का काफी अधिक जोखिम होता है। कभी-कभी एक सिंगल जीन की वजह से इसके बढ़ने का जोखिम होता है। गंभीर जीन को प्रभावित करने वाली असामान्यताएं (म्यूटेशन) कैंसर के विकास में योगदान करने के लिए जानी जाती है। ये जीन प्रोटीन उत्पन्न करते हैं जो कि विकास को विनियमित करते हैं और सेल डिवीजन और अन्य बुनियादी सेल गुणों को बदलते हैं।

एक अतिरिक्त या असामान्य गुणसूत्र से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। उदाहरण के लिए, डाउन सिंड्रोम वाले लोगों में सामान्य दो प्रतियों के बजाय क्रोमोसोम 21 की तीन प्रतियां होती है। उनमें ल्यूकेमिया के विकास का 12 से 20 गुना अधिक जोखिम होता है। (और पढ़ें - डाउन सिंड्रोम के कारण, लक्षण, इलाज)

2. उम्र से संबंधित हैं कैंसर के कारण - Cancer Related to Age in Hindi

कुछ कैंसर जैसे कि विल्म्स ट्यूमर, रेटिनोब्लोस्टोमा (retinoblastoma) और न्यूरोब्लास्टोमा (neuroblastoma) आदि बच्चों में विशेष रूप से होते हैं। ये कैंसर सिप्रेसर जीन म्यूटेशन से उत्पन्न होते हैं जो या तो विरासत में मिलते हैं या ये भ्रूण के विकास के दौरान होते हैं। हालांकि, अधिकांश अन्य कैंसर वयस्कों में अधिक आम हैं, खासकर वृद्ध लोगों में। कैंसर की वृद्धि दर संभवतः कार्सिनोजन के सम्पर्क में लंबे समय रहने के कारण होती है।

3. पर्यावरणीय कारक हैं कैंसर की वजह - Cancer Due to Environmental Factors in Hindi

कई पर्यावरणीय कारक कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाते हैं।

तंबाकू के धुएं में कार्सिनोजेन होते हैं जो फेफड़े, मुंह, गले, अन्नप्रणाली, गुर्दे और मूत्राशय के कैंसर के जोखिम को काफी हद तक बढ़ाते हैं। जो लोग धूम्रपान करते हैं उनमें भी फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। (और पढ़ें - धूम्रपान से फेफड़ों का कैंसर)

वायु या पानी में प्रदूषक जैसे एस्बेस्टोस, इंडस्ट्रियल वेस्ट या सिगरेट का धुआं आदि कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। कई रसायनों को कैंसर होने का कारण जाना जाता है। उदाहरण के लिए, एस्बेस्टोस के संपर्क में रहना फेफड़ों के कैंसर और मेसोथेलियोमा (फुफ्फुस के कैंसर) का कारण हो सकता है। कीटनाशकों के संपर्क में रहना कुछ प्रकार के कैंसर (उदाहरण के लिए, ल्यूकेमिया और गैर-हॉजकिन लिंफोमा) के साथ जुड़ा हुआ है। रसायनों और कैंसर के विकास के बीच का कारण लम्बे समय तक केमिकल के सम्पर्क में आना होता है।

कैंसर के विकास के लिए रेडिएशन का एक्सपोज़र एक प्रमुख कारण है। अल्ट्रावायलेट रेडिएशन का एक्सपोज़र मुख्य रूप से सूर्य के प्रकाश से होता है जो त्वचा के कैंसर का कारण बनता है। आइअनाइज़ेशन रेडिएशन (Ionization radiation) एक विशेष कार्सिनोजन है। एक्स-रे (कम्प्यूटेड टोमोग्राफी [CT] सहित) आइअनाइज़ेशन रेडिएशन का उपयोग करते हैं और जिन लोगों के एक्स-रे की उच्च खुराक का उपयोग करने वाले कई परीक्षण होते हैं उनमें कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। रेडियोएक्टिव गैस रेडोन का एक्सपोजर (जिसे मिट्टी से रिलीज़ किया जाता है) से फेफड़ों के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। 

कई अन्य पदार्थ के लिए कैंसर के संभावित कारणों की जांच कर रहे हैं, लेकिन अधिक अध्ययन की आवश्यकता है उन रसायनों की पहचान करने के लिए जो कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।

4. खराब आहार का सेवन है कर्क रोग का कारण - Cancer Caused by Diet in Hindi

आहार में खाए गए पदार्थ कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए असंतृप्त वसा में भरपूर आहार और मोटापा, बृहदान्त्र, स्तन और संभवतः प्रोस्टेट कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। जो लोग बड़ी मात्रा में शराब पीते हैं उनमें सिर, गर्दन और एनोफेगल कैंसर के विकास के उच्च जोखिम से होते हैं। मसालेदार भोजन या बारबेक्यूड मांस का अधिक सेवन पेट के कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। अधिक वजन या मोटापे वाले लोगों को स्तन के कैंसर का अधिक जोखिम रहता है।  (और पढ़ें – कैंसर से लड़ने वाले दस बेहतरीन आहार)

5. दवाएं और चिकित्सा उपचार बढ़ाएँ कैंसर का जोखिम - Medical Treatments that Cause Cancer in Hindi

कुछ दवाएं और चिकित्सा उपचार कैंसर के विकास को बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए, मौखिक गर्भ निरोधकों में मौजूद एस्ट्रोजेन से धीरे धीरे स्तन कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, हालांकि यह जोखिम समय के साथ घटता है। रजोनिवृत्ति (हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी) के दौरान महिलाओं को दिए जाने वाले हार्मोन एस्ट्रोजेन और प्रॉजेस्टिन से भी स्तन कैंसर का खतरा बढ़ता है।

अतिरिक्त एस्ट्रोजन का स्तर गर्भाशय कैंसर को बढ़ावा देता है। टैमॉक्सीफेन स्तन कैंसर का इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा है जिससे एंडोमेट्रियल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। टेस्टोस्टेरोन या अन्य पुरुष हार्मोन (एण्ड्रोजन) के दीर्घकालिक उपयोग से भी लिवर के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। कुछ कीमोथेरेपी दवाओं (एल्किलिंग एजेंट) और रेडिएशन चिकित्सा के साथ कैंसर का उपचार बाद में दूसरे कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ा सकता है। (और पढ़ें - टेस्टोस्टेरोन बढ़ाने के घरेलू उपाय)

6. कैंसर का कारण बनता है इंफेक्शन - Cancer Caused by Infections in Hindi

कई वायरस मनुष्यों में कैंसर के कारण के लिए जाने जाते हैं और कई अन्य वायरस से लोगों को कैंसर होने का संदेह रहता है। मानव पपिलोमा वायरस (HPV - human papilloma virus) महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का एक प्रमुख कारण है और पुरुषों में पेनाइल और गुदा कैंसर का एक कारण है। एचपीवी गले के कुछ कैंसर का भी कारण बनता है। हेपेटाइटिस बी वायरस या हेपेटाइटिस सी वायरस से लिवर कैंसर हो सकता है। कुछ मानव रेट्रोवायरस रक्त प्रणाली के लिम्फोमा और अन्य कैंसर के कारण होते हैं। कुछ वायरस कुछ देशों में कैंसर के एक प्रकार का कारण बनते है, लेकिन दूसरे देशों में कैंसर के दूसरे प्रकार का कारण होते हैं। उदाहरण के लिए, एपस्टीन-बार वायरस अफ्रीका में बुर्किट लिम्फोमा (कैंसर का एक प्रकार) और चीन में नाक और ग्रसनी के कैंसर का कारण बनता है।

कुछ बैक्टीरिया भी कैंसर का कारण हो सकते हैं। हेलिकोबैक्टर पाइलोरी (Helicobacter pylori) जो पेट के अल्सर का कारण बनता है, पेट कैंसर और लिम्फोमा के खतरे को बढ़ा सकता है। (और पढ़ें - नाखून खाने के नुकसान बढ़ाए संक्रमण)

कुछ परजीवी (parasites) कैंसर का कारण बन सकते हैं। शिस्टोसमा हेमेटोबियम (Schistosoma haematobium) मूत्राशय की सूजन और घाव का कारण बन सकता है जिससे कैंसर हो सकता है। एक अन्य प्रकार ke परजीवी ओपिस्टोर्चिस सीनेन्सिस (Opisthorchis sinensis), को अग्न्याशय और पित्त नलिकाएं के कैंसर से जोड़ा गया है।

7. सूजन संबंधी विकार हैं कैंसर रोग के कारण - Inflammation Disorders Cause Cancer in Hindi

सूजन संबंधी विकारों से अक्सर कैंसर का खतरा बढ़ जाता है। इस तरह के विकारों में अल्सरेटिव बृहदांत्रशोथ (ulcerative colitis) और क्रोन रोग (Crohn disease) शामिल हैं जिनका परिणाम बृहदान्त्र कैंसर और पित्त नलिका कैंसर हो सकता है।  (और पढ़े – अल्सरेटिव कोलाइटिस में उपयोगी है शल्लकी)

8. कैंसर के कारणों में से एक हैं ख़राब प्रतिरक्षा - Cancer Due to Immune System Failure in Hindi

ख़राब प्रतिरक्षा एचआईवी (HIV) संक्रमण सहित कई कैंसर का कारण होती है जिनमें कपोसी सरकोमा, गैर-हॉजकिन के लिम्फोमा और एचपीवी से जुड़े गुदा कैंसर और ग्रीवा कैंसर शामिल हैं। (और पढ़ें - नाशपाती खाने के फायदे बढ़ाएँ प्रतिरक्षा)

बचाव

कैंसर की रोकथाम कैसे करें?

कैंसर को रोकने के लिए कोई निश्चित तरीका नहीं है। लेकिन डॉक्टरों ने आपके कैंसर के जोखिम को कम करने के कई तरीकों की पहचान की है। जैसे -

  1. धूम्रपान बंद करना - अगर आप धूम्रपान करते हैं, तो उसे तुरंत छोड़ दें। और अगर नहीं करते हैं तो करना शुरू ना करें। धूम्रपान से सिर्फ फेफड़ों का कैंसर ही नहीं, बल्कि अन्य प्रकार के कैंसर हो सकतें हैं।   
  2. ज़्यादा धुप में रहने से बचें - सूरज से हानिकारक पराबैंगनी (यूवी) किरणें त्वचा के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकती हैं। छाया में रहकर, सुरक्षात्मक कपड़े पहनकर या सनस्क्रीन लगाने से आप सूर्य के जोखिम को सीमित कर सकतें हैं।
  3. एक स्वस्थ आहार खाएं - फलों और सब्जियों से समृद्ध आहार चुनें। साबुत अनाज और चर्बी निकले हुए प्रोटीन का चयन करें।
  4. सप्ताह के अधिकांश दिन व्यायाम करें - नियमित व्यायाम करने से कैंसर होने की सम्भावना को कम किया जा सकता है। व्यायाम करने की कम से कम 30 मिनट की अवधि रखें।
  5. स्वस्थ वजन - स्वस्थ वजन बनाए रखें अधिक वजन या मोटापे होने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। एक स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के संयोजन के माध्यम से स्वस्थ वजन को प्राप्त करने और बनाए रखने के लिए कार्य करें।
  6. शराब का सेवन कम करें - शराब का अधिक सेवन भी कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकता है।
  7. कैंसर के स्क्रीनिंग परीक्षणों की अनुसूची करें - अपने जोखिम के कारकों के आधार पर डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए कोनसा कैंसर का स्क्रीनिंग परिक्षण सबसे बेहतर रहेगा।

परीक्षण

कैंसर का निदान किस तरह किया जाता है?

अगर कैंसर का निदान शुरूआती चरण में हो जाता है। तो उसके ठीक होने की सम्भावना उतनी ही ज़्यादा बढ़ जाती है। डॉक्टर से पूछें कि आपके लिए सबसे बेहतर कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट कोनसे होंगे।

कुछ प्रकार के कैंसरों में, स्क्रीनिंग टेस्ट कैंसर का निदान करके जीवन को बचाया जा सकता है।

विभिन्न प्रकार की चिकित्सा संगठनों और रोगी-एडवोकेसी समूहों में कैंसर की जांच के लिए सिफारिशें और दिशानिर्देश दिए जातें हैं।

अपने चिकित्सक के साथ विभिन्न दिशानिर्देशों की समीक्षा करें और यह निर्धारित करें कि आपके कैंसर के जोखिम कारकों के आधार पर आपके लिए सबसे अच्छा इलाज क्या है।

कैंसर के निदान के लिए डॉक्टर एक या अधिक तरीकों का इस्तेमाल कर सकते है -

  1. शारीरिक परीक्षण  -  डॉक्टर आपके शरीर के कुछ हिस्सों में गांठों को महसूस कर सकते है, जो ट्यूमर को इंगित करता है। शारीरिक परीक्षण के दौरान, वह असामान्यताएं देख सकते है, जैसे कि त्वचा के रंग में परिवर्तन या एक अंग का बढ़ना जो कैंसर की उपस्थिति का संकेत दे सकता है।

  2. प्रयोगशाला परीक्षण - मूत्र और रक्त परीक्षण से डॉक्टर असामान्यताओं की पहचान कर सकते हैं जो कैंसर के कारण हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, ल्यूकेमिया वाले लोगों में, एक सामान्य रक्त परीक्षण जिसे पूर्ण रक्त गणना भी कहा जाता है, उनमें असामान्य संख्या या प्रकार के सफेद रक्त कोशिकाएं होती है।

  3. इमेजिंग टेस्ट - इमेजिंग टेस्ट्स डॉक्टर को आपकी हड्डियों और आंतरिक अंगों को एक गैर-अप्रभावी तरीके से जांचने देती हैं। कैंसर के निदान में प्रयोग किए जाने वाले इमेजिंग टेस्ट में एक कंप्यूटरीकृत टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन, हड्डी स्कैन, चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई), पोसिट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे शामिल हैं।

  4. बायोप्सी - बायोप्सी के दौरान, डॉक्टर प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए कोशिकाओं का एक नमूना एकत्र करते हैं। नमूना इकट्ठा करने के कई तरीके उपलब्ध हैं। आपके लिए कोनसे प्रकार की बायोप्सी प्रक्रिया सही है, वह आपके कैंसर और उसके स्थान पर निर्भर करती है। ज्यादातर मामलों में, कैंसर का निश्चित रूप से निदान करने के लिए बायोप्सी एकमात्र तरीका है। प्रयोगशाला में, डॉक्टर माइक्रोस्कोप से सेल के नमूनों को देखते हैं। सामान्य सेल समान आकार और व्यवस्थित संगठन के साथ एक समान दिखते हैं। कैंसर की कोशिकाएं अलग आकार और बिना स्पष्ट संगठन के, कम व्यवस्थित दिखती हैं।

कैंसर का निदान होने के बाद, डॉक्टर आपके कैंसर की सीमा को जानेंगे। डॉक्टर आपके कैंसर के चरण के आधार पर आपका इलाज करेंगे।

स्टेजिंग टेस्ट और प्रक्रियाओं में इमेजिंग टेस्ट, जैसे हड्डी का स्कैन या एक्स-रे शामिल हो सकते हैं। यह देखने के लिए कि क्या कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल गया है। कैंसर के चरणों को आम तौर पर रोमन अंकों द्वारा इंगित किया जाता है - i से iv तक, जितने ज़्यादा अंक होते हैं, उतना अधिक उन्नत कैंसर होता है। कुछ मामलों में, कैंसर के चरण में वर्ण या शब्दों का उपयोग किया जाता है।

इलाज

कैंसर का उपचार कैसे किया जाता है?

कैंसर के उपचार के कई प्रकार होते हैं। मरीज को दिए जाने वाले उपचार का प्रकार कैंसर के प्रकार पर ही निर्भर करता है, और इस बात पर निर्भर करता है, की कैंसर कितना विकसित (गंभीर) हो चुका है।

कैंसर से पीड़ित कुछ लोगों का इलाज एक ही प्रकार की उपचार थेरेपी से किया जाता है। लेकिन ज्यादातर कैंसर से पीड़ित लोगों का उपचार कई थेरेपी को संयोजित करके किया जाता है, जैसे सर्जरी के साथ कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी करना। जब मरीज को कैंसर का इलाज करवाने की जरूरत पड़ती है, तो इसके इलाज के बारे में काफी विस्तार से समझना और सीखना पड़ता है। इसमें मरीज का व्याकुल और भ्रमित होना सामान्य होता है, लेकिन डॉक्टर से बात करना और इसके उपचारों के बारे में सीखने से मरीज अपनी व्याकुलता को नियंत्रित कर सकते हैं।

  • सर्जरी (Surgery)
    इसका इस्तेमाल जब कैंसर का इलाज करने के लिए किया जाता है, तो सर्जरी को एक ऐसी प्रक्रिया के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जिससे शरीर के अंदर से कैंसर को निकाला जाता है।
     
  • रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy)
    इस प्रक्रिया में कैंसर कोशिकाओं को मारने और ट्यूमर्स को कम करने के लिए उच्च रेडिएशन किरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
     
  • कीमोथेरेपी (Chemotherapy)
    इस प्रक्रिया में कुछ ऐसी दवाईयां मरीज को दी जाती हैं, जो शरीर में सीधे कैंसर कोशिकाओं पर आक्रमण करती हैं।
     
  • इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy)
    यह कैंसर कोशिकाओं और ट्यूमर को खत्म करने में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की मदद करती है।
     
  • टारगेटेड थेरेपी (Targeted Therapy)
    इस थेरेपी से कैंसर कोशिकाओं के उन बदलावों को टारगेट किया जाता है, जो कैंसर को विकसित होने और फैलने में मदद करते हैं।
     
  • हार्मोन थेरेपी (Hormone Therapy)
    इस थेरेपी की मदद से स्तन कैंसर व पौरुष ग्रंथि में होने वाले कैंसर की रोकथाम या उसकी गति को धीमा किया जाता है।
     
  • स्टेम कोशिका प्रत्यारोपण (Stem Cell Transplant)
    यह प्रक्रिया खून से बनने वाले स्टेम सेल को फिर से निर्मित कर देती है। यह स्टेम सेल मरीज के शरीर से कीमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी लेने के दौरान नष्ट हो जाते हैं।
     
  • प्रेसिजन मेडिसिन (Precision Medicine)
    ये दवाएं मरीज की आनुवांशिकता के आधार पर बीमारी को समझती हैं, और डॉक्टर को मरीज के लिए सबसे बेहतरीन उपचार चयन करने में मदद करती है।

जोखिम और जटिलताएं

कैंसर से क्या जटिलताएं पैदा हो सकती हैं?

कैंसर और उसके इलाज में कई जटिलताएं पैदा हो सकती है -

  1. दर्द - दर्द कैंसर या कैंसर के इलाज के कारण हो सकता है, हालांकि सभी कैंसर दर्दनाक नहीं होते है। दवाएं और अन्य तरीकों से कैंसर संबंधी दर्द का प्रभावी ढंग से इलाज किया जा सकता है।

  2. थकान - कैंसर वाले लोगों में थकान के कई कारण होते हैं, लेकिन अक्सर इसका प्रबंधन किया जा सकता है। किमोथेरेपी या विकिरण चिकित्सा में थकान आम है, लेकिन यह आमतौर पर अस्थायी होता है।

  3. श्वास में कठिनाई - कैंसर या कैंसर के इलाज से श्वास लेने में दिक्कत हो सकती है। इलाज राहत प्रदान कर सकता है।

  4. मतली - कुछ कैंसर और कैंसर के इलाज में मतली हो सकती है। मतली कभी-कभी इलाज के कारण भी होती है। दवाएं और अन्य इलाज मतली को रोकने या घटाने में मदद कर सकते हैं।

  5. दस्त या कब्ज - कैंसर और कैंसर का इलाज आपके आंत्र को प्रभावित कर सकता है। और दस्त या कब्ज पैदा कर सकता है।

  6. वजन घटाने - कैंसर और उसके इलाज के कारण वजन कम हो सकता है। कैंसर सामान्य कोशिकाओं से भोजन निकालता है और उन्हें पोषक तत्वों से वंचित करता है।

  7. आपके शरीर में रासायनिक परिवर्तन - कैंसर आपके शरीर में सामान्य रासायनिक संतुलन को परेशान कर सकता है। और गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ा सकता है। रासायनिक असंतुलन के लक्षणों में अत्यधिक प्यास, लगातार पेशाब, कब्ज और भ्रम शामिल हो सकते हैं।

  8. मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र की समस्याएं - कैंसर आस-पास की तंत्रिकाओं को दबा सकता है और आपके शरीर के एक हिस्से में दर्द और हानि का कारण बन सकता है। कैंसर में सिर दर्द और स्ट्रोक जैसे लक्षण शामिल है, आपके शरीर में एक तरफ कमजोरी हो सकती है।

  9. कैंसर के लिए असामान्य प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रियाएं - कुछ मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करके कैंसर की उपस्थिति पर प्रतिक्रिया कर सकती है। इसे पैरानाओप्लास्टिक सिंड्रोम भी कहते है, इसकी दुर्लभ प्रतिक्रियाओं के कारण चलने में दिक्कत जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

  10. कैंसर का फैलना - कैंसर के बढ़ने की वजह से, यह शरीर के अन्य भागों में (मेटास्टेसिस) फैल सकता है। कैंसर का फैलना उसके प्रकार पर निर्भर करता है।

  11. कैंसर का वापस आना - कैंसर से बचे लोगों को कैंसर फिर से होने का खतरा होता है। कुछ कैंसर में दूसरों की तुलना में फिर से होने की अधिक संभावना होती है। डॉक्टर से पूछें कि आप कैंसर के पुनरुत्थान के जोखिम को कम करने के लिए क्या कर सकते हैं। इलाज के बाद  डॉक्टर आपके लिए अनुवर्ती देखभाल योजना तैयार कर सकतें हैं।

कैंसर की पुनरावृत्ति देखने के लिए इस योजना में आपके इलाज के बाद महीनों और वर्षों में आवधिक स्कैन और परीक्षा शामिल हो सकती है।

कैंसर के जोखिम कारक

कैंसर के जोखिम कारक है -

  1. आपकी आयु - कैंसर को होने में दशक तक लग जाते है। यही कारण है कि कैंसर के निदान के ज्यादातर लोग की उम्र 65 साल से अधिक होती हैं।

  2. आपकी आदतें - कुछ जीवन शैली विकल्पों को कैंसर के जोखिम को बढ़ाने के लिए जाना जाता है। अधिक धूम्रपान करना, ज़्यादा देर तक सूरज के संपर्क में आना या मोटापे से ग्रस्त होना, और असुरक्षित यौन संबंध होने से कैंसर हो सकता है।

  3. पारिवारिक इतिहास - पारिवारिक इतिहास के कारण भी कैंसर हो सकता है। अगर आपके परिवार में कैंसर आम है। तो सम्भावना है की म्युटेशन एक पीड़ी से दूसरी पीड़ी में जाएँ।

  4. आपकी स्वास्थय समस्याएं - अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी कुछ स्वास्थय समस्याएं आप में कुछ प्रकार के कैंसर होने की स्थति को बढ़ा देता है। डॉक्टर से अपने जोखिम के बारे में बात करें।

  5. आपका पर्यावरण - आपके आस-पास के वातावरण में हानिकारक रसायन शामिल हो सकते हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। यदि आप किसी धूम्रपान करने वाले के साथ रहते हैं। या अगर घर या कार्यस्थल में रसायन, जैसे कि एस्बेस्टोस और बेंजीन, मौजूस हैं तो यह कैंसर का जोखिम बढ़ा सकतें हैं।

Dr. Ashok Vaid

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Dr. Susovan Banerjee

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Dr. Rajeev Agarwal

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कैंसर की दवा - Medicines for Cancer in Hindi

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कैंसर की ओटीसी दवा - OTC medicines for Cancer in Hindi

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कैंसर से जुड़े सवाल और जवाब

सवाल लगभग 1 साल पहले

कैंसर के बारे में पता चलने से पहले किस तरह के संकेत दिखाई देते हैं?

Dr. Manju Shekhawat MBBS, सामान्य चिकित्सा

कैंसर का पता चलने से पहले आपको कई तरह की दिकक्तें होने लगती हैं जिसमे मूत्राशय और आंत की क्रियाओं में बदलाव आना, गले की खराश ठीक न होना, असामान्य ब्लीडिंग या डिस्चार्ज होना, शरीर का कोई हिस्सा मोटा या ब्रेस्ट या कही पर गांठ का बनना शामिल है।

सवाल लगभग 1 साल पहले

क्या हीमोग्लोबिन की कमी कैंसर का संकेत है?

Aakash Shah MBBS, MBBS, सामान्य चिकित्सा

कैंसर से संबंधित एनीमिया के कारण निम्न हैं:

कीमोथेरेपी-प्रेरित एनीमिया: कुछ कैंसर से संबंधित साइटोकिन्स का उच्च स्तर बोन मैरो द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन को धीमा कर सकता है।

डाइट में बदलाव: कैंसर की वजह से भूख कम लगती है जिसके कारण शरीर में पोषण संबंधी कमियां हो सकती हैं जिस वजह से भी एनीमिया की प्रॉब्लम होती है।

सवाल लगभग 1 साल पहले

क्या स्मोकिंग से शरीर में किसी प्रकार का कैंसर हो सकता है?

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धूम्रपान से आपके शरीर के कई हिस्सों में कैंसर हो सकता है, लेकिन अधिकतर मामलो में, मुख्य रूप से स्मोकिंग फेफड़ो के कैंसर के लिए जिम्मेदार है।

सवाल लगभग 1 साल पहले

क्या कोई ऐसा भी कैंसर है जिसके होने से किसी भी तरह के लक्षण दिखाई नहीं देते है? अगर हां, तो यह किस तरह का कैंसर है और इसका कैसे पता चलता है?

Dr. Manju Shekhawat MBBS, सामान्य चिकित्सा

जी हां, ऐसे कुछ कैंसर होते हैं जिनका पता शुरुआती चरण में नहीं लगाया जा सकता है जैसे ओवरी का कैंसर, इस कैंसर का पता सिर्फ इसके आखिरी स्टेज पर चलता है और तभी इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं। अगर आपके परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर या ओवरी का कैंसर रहा हो तो इन कैंसर के होने की संभावना अधिक होती है।

कैंसर

बीमारी के लेख

References

  1. National Cancer Institute [Internet]. Bethesda (MD): U.S. Department of Health and Human Services; Risk Factors for Cancer
  2. American Cancer Society [Internet] Atlanta, Georgia, U.S; What Causes Cancer?.
  3. American Cancer Society [Internet] Atlanta, Georgia, U.S; Cancer Staging.
  4. Harsh Mohan: Harshmohan’s textbook of pathology [Internet]
  5. Stuart Ralston Ian Penman Mark Strachan Richard Hobson. Davidson's Principles and Practice of Medicine E-Book. 23rd Edition: Elsevier; 23rd April 2018. Page Count: 1440
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