मीठे पेय पदार्थ सामान्यतः हर किसी के स्वास्थ्य के लिहाज से अच्छे नहीं माने जाते। लेकिन बुजुर्गों के लिए स्वीट ड्रिंक्स विशेष रूप से हानिकारक हो सकते हैं। एक नए अध्ययन में कहा गया है कि शुगर और आर्टिफिशियल दोनों प्रकार के मीठे पेय पदार्थ 60 साल से ज्यादा उम्र की महिलाओं में कमजोरी या निर्बलता का खतरा बढ़ा सकते हैं। अध्ययन में इस कमजोरी के लिए 'फ्रैल्टी' शब्द का इस्तेमाल किया गया है और इसके होने के पांच क्राइटेरिया रखे गए हैं, जो कि इस प्रकार हैं:

  • थकान
  • कम ताकत
  • कसरत करने की कम क्षमता
  • पांच या उससे ज्यादा क्रोनिक डिजीज होना
  • पिछले दो सालों में कम से कम पांच प्रतिशत वजन कम होना

वैज्ञानिकों के मुताबिक, इन पांच क्राइटेरिया में से कोई भी तीन होने पर व्यक्ति को फ्रैल्टी से ग्रस्त माना गया है।

यह अध्ययन मेडिकल पत्रिका प्लोस मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है। इसमें शामिल की गई 71 हजार 935 महिलाओं ने 1992 से लेकर 2014 के बीच समय-समय पर प्रश्नावलियों के तहत अपने स्वास्थ्य और फूड फ्रीक्वेंसी की जानकारी दी थी। शोधकर्ताओं ने बताया है कि इस दौरान 11 हजार 559 महिलाएं उल्लिखित क्राइटेरिया के तहत फ्रैल्टी से ग्रस्त पाई गईं।

अध्ययन के आधार पर शोधकर्ताओं ने कहा है कि जो महिलाएं हर दिन दो या उससे ज्यादा मीठे पेय पदार्थ का सेवन करती हैं, उनमें कमजोरी पैदा होने का खतरा 32 प्रतिशत बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों ने उनके लिए शुगर और आर्टिफिशियल दोनों प्रकार के ड्रिंक्स लगभग एक समान रूप से खतरनाक पाए हैं। इस बारे में अध्ययन के प्रमुख लेखक एलन ए स्ट्रूक ने कहा है, 'यह एक बहुत बड़ी स्टडी है, जिसमें कई सालों का फॉलोअप किया गया है। हालांकि आबादी के लिहाज से इस तरह के और अध्ययन करने की जरूरत है ताकि हम अंतिम निष्कर्ष निकाल सकें। हम लोगों को सलाह देना चाहेंगे कि वे शुगर आधारित मीठे पेय पदार्थ लेने से बचें। आर्टिफिशियल ड्रिंक्स भी संतुलन के साथ ग्रहण करें। बड़े ड्रिंक्स हर हाल में अवॉइड किए जाने चाहिए।'

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