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दुनियाभर के अलग-अलग मेडिकल संस्थानों के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने एक ऐसे जीन टेस्ट की खोज की है, जो दवाओं की वजह से लिवर में होने वाली इन्जरी का सही पूर्वानुमान लगा सकता है। अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रेन्स अस्पताल, जापान की टोक्यो मेडिकल एंड डेन्टल यूनिवर्सिटी तथा ताकेदा फार्मास्यूटिकल कंपनी और इन देशों के अलावा यूरोप के कई रिसर्च सेंटरों के वैज्ञानिक लिवर से जुड़े छोटे ऑर्गेनॉइड्स की वायाबिलिटी का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इसी प्रयास के तहत उन्होंने इस जीन टेस्ट की खोज की है। यह महत्वपूर्ण जानकारी जानी-मानी विज्ञान व मेडिकल पत्रिका नेचर मेडिसिन में प्रकाशित हुई है। 

अध्ययन के मुताबिक, शोधकर्ताओं ने जीन टेस्ट की मदद से एक 'पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर' की पहचान की है, जो दवाओं से लिवर को होने वाली इन्जरी के खतरे को दर्शाता है। यहां बता दें कि पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर का मतलब किसी व्यक्ति में कई प्रकार के जेनेटिक वैरिएंट्स (वंशाणु प्रकार) के अनुमानित प्रभाव से है। इन जेनेटिक वैरिएंट्स का संबंध अलग-अलग प्रकार के मेडिकेशन से है।

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बहरहाल, जानकारों का कहना है कि मेडिकेशन से लिवर इन्जरी होने के खतरों का पता लगाने से जुड़े इस अध्ययन में जो परिणाम सामने आए हैं, वे दुनियाभर के दवा निर्माताओं की निराशा को दूर कर सकते हैं, जो दवाओं से लोगों को होने वाले नुकसान की आशंका के चलते सालों से बनी हुई है। अमेरिका के सिनसिनाटी चिल्ड्रेन्स हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी, हेपटोलॉजी और न्यूट्रिशन डिविजन के निदेशक जॉर्ज बेजेरा (जो इस अध्ययन में शामिल नहीं थे) का कहना है, 'अभी तक हमारे इस बात के विश्वसनीय सबूत नहीं थे कि जिन दवाओं का ज्यादातर लोगों पर अच्छा असर होता है वे कुछ लोगों को लिवर इन्जरी भी दे सकती हैं। इस कारण कई भरोसेमंद दवाएं क्लिनिकल ट्रायलों में फेल हो जाती हैं। कुछ मामलों में मान्यता प्राप्त दवाएं भी गंभीर इन्जरी दे सकती हैं। अगर हम इसका अनुमान लगा सकें कि इनसे किस व्यक्ति को खतरा है तो हम ज्यादा आत्मविश्वास के साथ ज्यादा और बेहतर मेडिकेशन प्रेस्क्राइब कर सकेंगे।'

जॉर्ज ने जिस समस्या का उल्लेख किया है उसका समाधान शायद अब जल्दी ही निकल सकता है। नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन के लेखक और सिनासिनाटी चिल्ड्रेन्स अस्पताल के ऑर्गेनॉइड एक्सपर्ट ताकानोरी ताकेबे बताते हैं, 'हमारे जेनेटिक स्कोर से लोगों को फायदा होगा। इस जेनेटिक टेस्ट की मदद से लोग दवाओं से खुद के चोटग्रस्त होने के खतरे के बारे में जान सकते हैं।'

पत्रिका के मुताबिक, जीन टेस्ट के तहत पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर को जानने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने विस्तृत-वंशाणु आधारित सैकड़ों अध्ययनों का पुनर्विश्लेषण किया। इन अध्ययनों में जीन वैरिएंट्स की एक लंबी श्रेणी की पहचान की गई थी, जिनसे अलग-अलग कंपाउंडों की वजह से लिवर में विपरीत या खराब रिएक्शन होने की संभावना का संकेत मिल सकता था। वैज्ञानिकों ने इन अध्ययनों के डेटा को मिलाकर कई प्रकार के गणितीय मेथडों को अप्लाई करते हुए एक फॉर्मुला तैयार किया, जो दवाओं से लिवर इन्जरी होने के खतरे का पता लगाने में कारगर साबित होता दिख रहा है।

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शोधकर्ताओं ने जिस रिस्क स्कोर का पता लगाया है, उसमें 20 हजार से ज्यादा जीन वैरिएंट्स शामिल हैं। टीम ने लैब में बनीं कोशिकाओं के नमूनों, ऑर्गेनॉइड टिशू और मरीजों के जेनोमिक डेटा का इस्तेमाल करते हुए स्कोर की प्रेडिक्शन पावर (अनुमान लगाने की क्षमता) की पुष्टि की है। यह स्कोर अध्ययन में शामिल कई मेडिकशन के विपरीत प्रभावों का अनुमान लगाने में सही साबित हुआ है। इनमें साइक्लोस्पोरिन, बोसेनटन, ट्ऱॉग्लिटाजोन, टैक्रिन, टोलकापोन आदि दवाएं शामिल हैं।

तकनीकी बातों से अलग इस जीन टेस्ट के फायदों की बात करें तो इसकी मदद से डॉक्टर उन मरीजों की पहचान कर पाएंगे, जिन्हें विशेष प्रकार की दवाओं के चलते लिवर इन्जरी हो सकती है। कहा जा रहा है कि जीन टेस्ट ऐसी दवाओं को रिप्लेस कर उनकी जगह दूसरी दवाएं प्रेस्क्राइब करने में डॉक्टरों की खासी मदद सकर सकता है। वे डोज में भी बदलाव कर सकेंगे। लिवर इन्जरी को जल्दी डिटेक्ट करने के लिए डॉक्टर ज्यादा फॉलोअप टेस्ट कर पाएंगे। इसके अलावा, पहले से चल रही दवाओं को पूरी तरह से रिप्लेस करने के लिए भी जीन टेस्ट काम का साबित हो सकता है। ड्रग रिसर्च में भी इस टेस्ट का महत्व होगा। इससे लिवर इन्जरी के प्रति ज्यादा संवेदनशील लोगों को दवाओं के क्लिनिकल ट्रायलों से पहले ही अलग करने में मदद मिलेगी। इससे मेडिकेशन के फायदों का ज्यादा सही आंकलन हो सकेगा।

ताकेबे बताते हैं कि डायबिटीज के संभावित इलाज के रूप में सामने आए एक ड्रग ट्रीटमेंट 'फैसिग्लियम' को 2014 में इसके तीसरे ट्रायल से वापस ले लिया गया था। इस दवा के इस्तेमाल से कुछ मरीजों के शरीर में एंजाइम लेवल बढ़ गए थे, जिससे लिवर इन्जरी का खतरा पैदा हो गया था। लिवर टॉक्सिसिटी के कारण ऐसे कई ड्रग फेलियर्स सालों से देखने को मिल रहे हैं। यह जानने का कोई सक्षम तरीका नहीं था कि किन लोगों को दवा से लिवर इन्जरी हो सकती है। इससे ड्रग अस्वीकार्य रूप से खतरनाक हो जाते हैं। लेकिन पॉलीजेनिक रिस्क स्कोर की मदद से ऐसे लिवर ऑर्गेनॉइड्स का पता लगाया जा सकता है, जो अलग-अलग रिस्क वैरिएंट्स से यह बता सकते हैं कि कोई दवा उसे लेने वाले व्यक्ति के लिए खतरनाक है या नहीं। हालांकि टेस्ट की सही क्षमता को जानने के लिए रिसर्च में और अधिक विविध जनसंख्या को शामिल करने की बात शोधकर्ताओं की तरफ से कही गई है।

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