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केंद्र सरकार के थिंक टैंक नीति आयोग ने भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए होने वाले निवेश को लेकर अहम टिप्पणी की है। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, नीति आयोग में स्वास्थ्य मामलों के सदस्य डॉ. वीके पॉल ने कहा है कि भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र पर किया जाने वाला खर्च कुल-मिलाकर 'निम्न' स्तर का है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को ठीक करने की काफी ज्यादा जरूरत है। गुरुवार को कन्फिडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआईआई) द्वारा आयोजित एक वर्चुअल इवेटं में बोलते हुए डॉ. वीके पॉल ने जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों दोनों से स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ाने की अपील करने की जरूत है। नीति आयोग के सदस्य ने कोविड-19 का हवाला देते हुए कहा कि इस महामारी के अनुभव से यह साबित होता है कि भारत को अपने हेल्थ सेक्टर पर निवेश बढ़ाने की आवश्यकता है।

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एजेंसी के मुताबिक, सीआईआई के इवेंट में लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. वीके पॉल ने कहा, 'कुल मिलाकर भारत में हेल्थ सेक्टर का खर्च निम्न स्तर का है। यह (खर्च) लाचार संसाधनों के जरिये हो रहा है। (लिहाजा) बहुत ज्यादा प्रतियोगी प्राथमिकताओं की जरूरत है। यह बहुत कम है और इसे दुरुस्त कने की जरूरत है।' नीति आयोग के सदस्य ने आगे कहा, '2018-19 में भारत अपनी जीडीपी का 1.5 प्रतिशत हिस्सा स्वास्थ्य क्षेत्र पर खर्च कर रहा था, जो पिछले एक दशक की तुलना में थोड़ा बढ़ा हुआ था।' लेकिन इसके साथ डॉ. पॉल ने यह भी कहा कि जीडीपी का 1.5 प्रतिशत हिस्सा हेल्थ पर खर्च करना 'निश्चित ही स्वीकार्य नहीं' है, क्योंकि इतना कम खर्च इस क्षेत्र के लिए 'अच्छा नहीं है'। यह कहते हैं कि डॉ. पॉल ने यूरोपीय देशों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन देशों में जीडीपी का 7-8 प्रतिशत हिस्सा हेल्थ सेक्टर के लिए खर्च किया जाता है।

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खबर के मुताबिक, नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के दस्तावेज का उल्लेख करते हुए पॉल ने बताया कि भारत को जीडीपी का तीन प्रतिशत हिस्सा अपने हेल्थ सेक्टर पर लगाना चाहिए। उनके मुताबिक, यह काम 2025 तक हो जाना चाहिए। बकौल डॉ. वीके पॉल 'हम सबके केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से अपील करने की जरूरत है कि स्वास्थ्य पर व्यय बढ़ाया जाए।' इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोविड-19 संकट के बाद हेल्थकेयर सेक्टर के बुनियादी ढांचे को बढ़ाने का मौका होगा। कोरोना वायरस संकट से निपटने में केंद्र सरकार के प्रयासों में प्रमुख रूप से शामिल डॉ. पॉल का मानना है कि पोस्ट-कोविड में सरकार प्राथमिक हेल्थकेयर सेक्टर को टार्गेट कर सकती है। वहीं, निजी क्षेत्र को माध्यमिक और तृतीयक हेल्थकेयर सेक्टर पर फोकस करना चाहिए। पॉल की मानें तो 'माध्यमिक और तृतीयक हेल्थकेयर में एक्सपेंशन की काफी ज्यादा संभावनाएं हैं।'

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