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प्रोटीन अच्छे स्वास्थ्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों में से एक है। यह शारीरिक और मानसिक विकास के लिए तो जरूरी है ही, साथ ही बढ़ती उम्र के साथ मांसपेशियों को होने वाले नुकसान को भी कम करता है। उचित मात्रा में प्रोटीन लेने से बुजुर्गों में ऊर्जा की मात्रा कम होने की शिकायत दूर होती है, इसके साथ ही शरीर में मजबूती भी आती है। स्वास्थ्य और फिटनेस क्षेत्र से जुड़ी पत्रिका ‘फ्रंटियर्स इन एक्सरसाइज एंड स्पोर्ट्स न्यूट्रिशन’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह के नाश्ते और दोपहर के खाने में संतुलित मात्रा में प्रोटीन लेना लाभदायक हो सकता है। इससे उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्ग लोगों की मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है।

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जरुरी समझ कर हर आहार में लें प्रोटीन

भारतीय भोजन में कार्बोहायड्रेट की मात्रा अधिक एवं प्रोटीन व अन्य पोषक तत्वों की मात्रा कम होती है। एजिंग के कारण शरीर से स्केलेटल मसल्स मास कम होने लगता है। जिसकी मरम्मत उचित मात्रा में प्रोटीन ले कर ही किया जा सकता है । प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा लेने से कार्य के लिए शक्ति भी मिलती है इसलिए कोशिश करें की आपके छोटे आहार में एक एवं दोपहर एवं रात के भोजन में एक से दो सर्विंग प्रोटीन के हों।

नाश्ते और लंच में शामिल करें प्रोटीन

दरअसल उम्र बढ़ने के साथ बुजुर्गों में नाश्ता और लंच करने की आदत कम हो जाती है। इससे उन्हें पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन एवं अन्य पोषक तत्व नहीं मिल पाते। यही वजह है कि उम्र के एक निर्धारित पड़ाव पर आकर शरीर की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नई मांसपेशियों को बनने के लिए शरीर को नियमित रूप से सक्रिय होना एवं व्यायाम करना आवश्यकता होता है। लेकिन शरीर में यह सक्रियता या एक्टिविटी के साथ प्रोटीन युक्त भोजन लेना भी बहुत आवश्यक है।

बुजुर्ग लोगों का शरीर युवा या वयस्कों की अपेक्षा कम सक्रिय होता है, इसीलिए उन्हें युवाओं की तरह मांसपेशियों के निर्माण के लिए अधिक प्रोटीन खाने की आवश्यकता होती है। हालांकि सिर्फ अधिक प्रोटीन खाना पर्याप्त नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह जरूरी है कि बुजुर्ग सभी तरह के पोषक तत्वों के साथ उचित और संतुलित मात्रा में प्रोटीन लें। 

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व्यक्तिगत तौर पर किया गया अध्ययन

शोधकर्ताओं ने जांच करने के लिए युवा, मध्यम और बुजुर्ग उम्र के लोगों पर व्यक्तिगत तौर पर अध्ययन किया। इस दौरान शोधकर्ताओं ने प्रोटीन की मात्रा, पैटर्न और उसके स्रोत पर विशेष रूप से ध्यान दिया। इससे उन्हें पता चला कि तीनों समूहों के ज्यादातर लोगों ने निर्धारित दिशा-निर्देशों (आरडीए) के तहत प्रोटीन का सेवन किया था। हालांकि डेली रुटीन के आधार पर भोजन और नाश्ते में प्रोटीन की मात्रा अलग-अलग थी। सभी लोगों से उनके रोजमर्रा की खाने की आदतों के बारे में पूछा गया।

इसके बाद शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों के आहार से जुड़े पैटर्न की जांच की। विशेष रूप से, उन्होंने विभिन्न आयु समूहों में प्रोटीन के सेवन का मूल्यांकन किया और दिन भर में प्रोटीन के सेवन के 18 अलग-अलग पैटर्न पाए, जिसमें विभिन्न प्रकार की खाने की आदतों का पता चला। शोध के नतीजों के बाद अध्ययनकर्ताओं की टीम ने निष्कर्ष निकाला कि युवा और मध्यम आयु वर्ग के व्यक्तियों की तुलना में बुजुर्ग लोगों के दोपहर के भोजन में कम गुणवत्ता वाले प्रोटीन स्रोत शामिल थे, इसीलिए उनके भोजन में अधिक प्रोटीन शामिल करने की जरूरत है।   

विशेषज्ञों की राय

इस शोध के बाद ब्रिटेन स्थित बर्मिंघम विश्वविद्यालय के अध्ययनकर्ता बेनोइट स्मेनिंक्स कहते है, ‘हम जानते हैं कि बुजुर्ग लोगों में प्रोटीन के थोड़े से सेवन के बाद अच्छे नतीजे देखने को मिलते हैं, क्योंकि इससे उनकी नई मांसपेशियों को जल्दी बनने में मदद मिलती है। इसीलिए युवाओं की तरह चुस्त-दुरूस्त रहने के लिए बुजुर्गों को मांसपेशियों के निर्माण की जरूरत होती है और इसके लिए प्रोटीन के सेवन की जरूरत होगी।

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प्रोटीन ना ले पाने की समस्याएं एवं समाधान

चबा ना पाना- प्रोटीन ना लेने के मुख्य कारणों में दांत ना होना या कम होना देखा गया है, इसके लिए आप आहार में दाल, दूध, दही, बेसन की कढ़ी या चीला, अंडे या पनीर भुर्जी आदि तरीकों से ले सकते हैं। इन्हे ज्यादा चबाने की जरूरत नहीं होती है।

भूख कम लगना- यदि भूख कम लगने की शिकायत है, ऐसे में दाल का सूप, उबले अंडे (काला नमक के साथ), अंकुरित चना चाट, हमस, दाल के पराठे आदि भूख बढ़ाने में मदद करेंगे। इसके साथ ही इन भोजन के साथ अजवाइन, भूना जीरा एवं धनिया जरूर लें। इनसे आपके भूख ना लगने का समाधान होगा।

ध्यान दें 

यदि आप लीवर या गुर्दे (किडनी) से सम्बंधित समस्याओं से ग्रसित हैं, ऐसे में प्रोटीन की मात्रा एवं प्रकार में परिवर्तन से  पहले अपने डॉक्टर से जरूर विचार विमर्श कर लें।

 
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