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अल्जाइमर भूलने की बीमारी को कहते है। ये बीमारी आमतौर पर वृद्ध लोगों को होती है। वहीं टीबी इंसानों फैलने वाली एक बैक्टीरिया जनित बीमारी है। दोनों बीमारियां एक-दूसरे से अलग हैं। ज्यादा उम्र के कैंसर मरीजों को अल्जाइमर होने का खतरा रहता है। इस संदर्भ में युनिवर्सिटी ऑफ जेरूसलम ने एक शोध किया है। इस शोध की मदद से कैंसर मरीजों में अल्जाइमर नियंत्रित करने का एक तरीका ढूंढा गया है। इस शोध के अनुसार टीबी के इलाज में इस्तेमाल किया जाने वाला टीका कैंसर मरीजों को अल्जाइमर से बचा सकता है।

टीबी के बारे में संक्षेप में जानकारी
टीबी (ट्यूबरकुलोसिस, यक्ष्मा, तपेदिक या क्षयरोग) एक संक्रामक रोग है, जो आमतौर पर फेफड़ों को प्रभावित करता है। टीबी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में हवा के द्वारा फैलता है। ये बैक्टीरिया टीबी रोगी से स्वस्थ लोगों में फैलता है। इसके लक्षणों में लगातार तीन हफ्ते से ज्यादा बलगम वाली खांसी होना, थकान और वजन घटना शामिल है। टीबी आमतौर पर उपचार के साथ ठीक हो जाता है। इसके उपचार में एंटीबायोटिक दवाओं के कोर्स शामिल हैं।

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अल्जाइमर बीमारी के बारे में आवश्यक जानकारी
अल्जाइमर तेजी से फैलने वाला रोग है। ये रोग याददाश्त और अन्य महत्वपूर्ण मानसिक कार्यों को हानि पहुंचाता है। अल्जाइमर रोग में मस्तिष्क की कोशिकाएं खुद ही बनती और खत्म होती हैं, जिससे याददाश्त और मानसिक कार्यों में लगातार गिरावट आती है।

वर्तमान में अल्जाइमर रोग की दवाएं और प्रबंधन रणनीतियां अस्थायी रूप से इसके लक्षणों में सुधार कर रही हैं। अल्जाइमर रोग के लिए कोई पुख्ता इलाज उपलब्ध नहीं है। भलाई इसी में है कि इससे जुड़ी संभव सहायक सेवाओं को ही अपनाया जाए।

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ब्लैडर कैंसर पर की गई शोध और इसका अल्जाइमर से संबंध
65 से ऊपर के 10 में से एक व्यस्क को अल्जाइमर होता ही है। रिसर्च के अनुसार 2030 आते-आते ये आंकड़ा तीन गुना हो जाएगा। आने वाले समय में अल्जाइमर के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी होगी। ऐसे में टीबी के टीके के द्वारा कैंसर मरीजों में अल्जाइमर के स्तर को कम करने की ये खोज बहुत फायदेमंद होगी।

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टीबी और ब्लैडर कैंसर में प्रयोग में लाया जाने वाला टीका
हिब्रू युनिवर्सिटी के माइक्रोबायलॉजी और मोलिक्युलर जेनेटिक्स ने बीसीजी (बैसिलस कामैट्टे ग्युरिन) टीके की खोज टीबी के इलाज के लिए की थी। टीबी के अलावा ये ब्लैडर कैंसर के मरीजों को भी दिया जाता है।

इस रिसर्च को हर्व बर्कोवियर, चार्ल्स ग्रीनब्लाट और बेंजामिन क्लीन हेड कर रहे थे। उनके अनुसार 1960 से अब तक के ब्लैडर कैंसर के डाटा से कुछ खास जानकारियां सामने आई हैं। जिन मरीजों को ब्लैडर कैंसर था, उन्हें बीसीजी का टीका लगाया गया। इन मरीजों को अल्जाइमर नहीं हुआ।

कैंसर मरीजों में अल्जाइमर के केस
अभी तक बर्कोवियर और उनकी टीम ने 1,371 ब्लैडर कैंसर मरीजों का डाटा इकट्ठा कर लिया है। ये सब मरीज 'हदास्साह मेडिकल सेंटर' में इलाज करवा रहे थे। सभी मरीजों की औसतन उम्र 68 वर्ष थी। उन पर की गई रिसर्च से पता लगा कि कैंसर के इलाज के दौरान 65 मरीजों को अल्जाइमर हो गया था।

बीसीजी का मरीजों पर प्रभाव
जिन मरीजों को कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान बीसीजी नहीं दिया जाता, उन्हें अल्जाइमर होने का खतरा रहता है। बर्कोवियर ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि उनकी ये खोज, अल्जाइमर का रोगजनक जानने में मदद करेगी। इसके अलावा बीसीजी का टीका रोग प्रतिरोधक क्षमताओं के साथ संबंध स्थापित कर कैंसर मरीजों को अल्जाइमर के प्रभावों से बचा सकता है।

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