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पित्त का कैंसर क्या है ?

पित्त का कैंसर पित्ताशय की थैली में होता है। हमारे शरीर में पित्ताशय एक छोटे नाशपाती के आकार का अंग होता है जो पेट की दाईं ओर लिवर के नीचे स्थित होता है। यह पित्ताशय की थैली यकृत द्वारा उत्पादित पाचन तरल पदार्थ का संग्रह करती है। 

पित्त का कैंसर बहुत आम नहीं होता है। ध्यान दें कि यदि इसका पता इसकी शुरुआत में ही लग जाता है तो इसके इलाज की संभावनाएं बेहतर होती है। हालांकि अधिकतर इसकी पहचान बाद के चरणों में होती है जिससे इसका इलाज कठिन हो जाता है।

इसे पहचानना और निदान करना इसलिए भी मुश्किल होता है कि इसके कोई विशेष लक्षण नजर ही नहीं आते और न ही इसकी पहचान आसानी से हो पाती है। गौरतलब है कि पित्ताशय की स्वयं पहचान काफी छिपी हुई होती है, एेसे में इसका कैंसर बिना पहचान में आए बढ़ता रहता है। 

(और पढ़ें - कैंसर का इलाज)

  1. पित्ताशय का कैंसर के प्रकार - Types of Gallbladder Cancer in Hindi
  2. पित्ताशय का कैंसर के चरण - Stages of Gallbladder Cancer in Hindi
  3. पित्ताशय का कैंसर के लक्षण - Gallbladder Cancer Symptoms in Hindi
  4. पित्ताशय का कैंसर के कारण - Gallbladder Cancer Causes in Hindi
  5. पित्ताशय का कैंसर के बचाव के उपाय - Prevention of Gallbladder Cancer in Hindi
  6. पित्ताशय का कैंसर का निदान - Diagnosis of Gallbladder Cancer in Hindi
  7. पित्ताशय का कैंसर का उपचार - Gallbladder Cancer Treatment in Hindi
  8. पित्ताशय का कैंसर के जोखिम और जटिलताएं - Gallbladder Cancer Risks & Complications in Hindi
  9. पित्त का कैंसर के डॉक्टर

पित्त के कैंसर कितने प्रकार का होता हैं ?

पित्त के कैंसर के निम्नलिखित प्रकार होते हैं -

एडेनोकार्सीनोमा  (Adenocarcinoma) (ग्रंथिकैंसर)
ग्रंथिकैंसर, पित्त के कैंसर का सबसे आम प्रकार है। पित्त के कैंसर के सभी मामलों में से 85 प्रतिशत से अधिक ग्रंथिकैंसर होते हैं। यह कैंसर पित्ताशय की थैली की ग्रंथि कोशिकाओं में शुरू होता है। ये ग्रंथि कोशिकाएं आमतौर पर बलगम (मोटा तरल पदार्थ) उत्पन्न करती हैं।
ग्रंथिकैंसर के तीन निम्नलिखित प्रकार होते हैं -

  • नॉन-पेपिलरी एडेनोकार्सीनोमा (non papillary adenocarcinoma)
  • पेपिलरी एडेनोकार्सीनोमा (papillary adenocarcinoma)
  • म्यूसिनस (बलगम) एडेनोकार्सीनोमा (mucinous adenocarcinoma)
     

(और पढ़ें - मुंह के कैंसर का इलाज)

स्क्वैमस सेल कैंसर (Squamous call cancer)
स्क्वैमस सेल कैंसर ग्रंथि की कोशिकाओं के साथ पित्ताशय की थैली की परत बनाने वाली त्वचा जैसी कोशिकाओं में होता है। इसका इलाज एडेनोकार्सीनोमास के समान ही होता है।

(और पढ़ें - पेट के कैंसर का इलाज)

एडेनोस्क्वैमस कैंसर (Adenosquamous cancer)
एडेनोस्क्वामस कार्सिनोमा कैंसर वह कैंसर होते हैं जिनमें स्क्वैमस कैंसर कोशिकाएं और ग्रंथि संबंधी कैंसर कोशिकाएं होती हैं। इस कैंसर का इलाज एडेनोकार्सीनोमा के समान ही होता है।

(और पढ़ें - गले के कैंसर का इलाज)

स्माल सेल कैंसर (Small cell cancer)
स्माल सेल कार्सिनोमा को ओट सेल कार्सिनोमा भी कहा जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कैंसर की कोशिकाएं आकार में ओट जैसी होती हैं।

(और पढ़ें - गर्दन के कैंसर के लक्षण)

सारकोमा (Sarcoma)
सारकोमा एक ऐसा कैंसर है जो शरीर के सहायक या संरक्षित ऊतकों को प्रभावित करता है, जिन्हें संयोजी ऊतक भी कहा जाता है। मांसपेशियां, रक्त वाहिकाएं और नसें सभी संयोजी ऊतक होती हैं। जो कैंसर पित्ताशय की थैली की मांसपेशी की परत में शुरू होता है, उसे सारकोमा कहा जाता है।

(और पढ़ें - थायराइड कैंसर का इलाज)

न्यूरोन्डोक्राइन ट्यूमर (Neuroendocrine tumour)
न्यूरोन्डोक्राइन ट्यूमर दुर्लभ कैंसर होते हैं जो आमतौर पर पाचन तंत्र में ऊतक पैदा करने वाले हार्मोन में बढ़ते हैं। सबसे सामान्य प्रकार के न्यूरोन्डोक्राइन ट्यूमर को कारसीनोइड कहा जाता है।

(और पढ़ें - लिवर कैंसर ट्रीटमेंट)

लिम्फोमा और मेलेनोमा (Lymphoma and Melanoma)
ये पित्ताशय की थैली के कैंसर के बेहद दुर्लभ प्रकार हैं। इनका इलाज अन्य प्रकारों के कैंसर के समान नहीं किया जाता है। उदाहरण के लिए, लिम्फोमा कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी से ठीक हो जाते हैं, तो लिम्फोमा के इलाज के लिए सर्जरी किए जाने की संभावना कम होती है।

(और पढ़ें - कोलोरेक्टल कैंसर के उपचार)

पित्त के कैंसर के कितने चरण होते हैं ?

पित्त के कैंसर के निम्नलिखित चरण होते हैं -

  • पहला चरण - इस चरण में, पित्त का कैंसर पित्ताशय की थैली की भीतरी परतों तक ही सीमित होता है।
  • दूसरा चरण - इस चरण में, कैंसर पित्ताशय की थैली की बाहरी परत में प्रवेश करता है। (और पढ़ें - ब्लैडर कैंसर ट्रीटमेंट)
  • तीसरा चरण - इस चरण में पित्त का कैंसर अपने पास के एक या एक से अधिक अंगों जैसे लिवर, छोटी आंत या पेट आदि में फैल जाता है। कैंसर पास के लिम्फ नोड्स में भी फैल सकता है।
  • चौथा चरण - इस चरण में, बड़े ट्यूमर शामिल होते हैं जो शरीर के दूर के अंगों में फैले होते हैं और ये किसी भी आकार के माप के हो सकते हैं।

(और पढ़ें - अग्नाशय कैंसर के लक्षण)

पित्त के कैंसर के क्या लक्षण होते हैं ?

पित्त के कैंसर के निम्नलिखित लक्षण हो सकते हैं -

(और पढ़ें - पीलिया में क्या खाएं)

पित्त के कैंसर के क्या कारण होते हैं ?

यह स्पष्ट नहीं है कि पित्त के कैंसर का क्या कारण होता है।

पर डॉक्टरों का यह कहना है कि पित्त की थैली का कैंसर तब होता है जब पित्त की सामान्य कोशिकाओं के डीएनए में परिवर्तन होता है। इस परिवर्तन से कोशिकाएं अनियंत्रित होकर बढ़ती हैं। इकठ्ठी हुई कोशिकाएं एक ट्यूमर बनाती हैं जो पित्ताशय की थैली से भी ज्यादा बढ़ जाता है और शरीर के अन्य क्षेत्रों में फैल सकता है।

अधिकांश पित्ताशय की थैली का कैंसर ग्रंथि कोशिकाओं में शुरू होता है जो पित्ताशय की थैली की आंतरिक सतह को रेखांकित करती हैं। इस प्रकार के सेल में शुरू होने वाले पित्त के कैंसर को एडेनोकार्सीनोमा कहा जाता है।
 

पित्त के कैंसर का खतरा कब बढ़ जाता हैं ?

पित्त की थैली के कैंसर के जोखिम कारक निम्नलिखित हैं -

(और पढ़ें - शराब छोड़ने के उपाय)

पित्त के कैंसर का बचाव कैसे होता है ?

पित्त के कैंसर के कई कारक हैं जिनका बचाव संभव नहीं है। जैसे कि आपके लिंग या आयु को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।

लेकिन कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप पित्त के कैंसर के जोखिम को कम कर सकते हैं। इनमें मुख्य है

इससे बीमारी से लड़ने में मदद मिलेगी और आपका स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

पित्त के कैंसर का निदान कैसे होता है ?

पित्त के कैंसर के निदान के लिए निम्नलिखित परीक्षणों का उपयोग किया जाता है -

चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षा
आपके डॉक्टर पित्त के कैंसर और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के लक्षण देखने के लिए आपकी जांच करेंगे। इस परीक्षण में डॉक्टर आपके पेट के हिस्से में किसी भी गांठ, कोमलता या तरल पदार्थ के निर्माण की जांच करते हैं। आंखों की त्वचा और सफेद हिस्से की पीलिया के लिए जांच की जाती है। कभी-कभी, पित्ताशय का कैंसर लिम्फ नोड्स में फैलता है, जिसके कारण गांठ को त्वचा के नीचे महसूस किया जा सकता है।

(और पढ़ें - बिलीरुबिन क्या है)

लिवर और पित्ताशय की थैली के परीक्षण
रक्त में बिलीरुबिन (bilirubin) की मात्रा का पता लगाने के लिए आपके डॉक्टर प्रयोगशाला परीक्षण कर सकते हैं। बिलीरुबिन वह रसायन होता है जो पित्त को पीला रंग देता है। पित्ताशय की थैली, पित्त नलिकाओं या लिवर में समस्याएं  रक्त में बिलीरुबिन के स्तर को बढ़ा सकती हैं। बिलीरुबिन का उच्च स्तर डॉक्टर को यह बताता है कि आपको पित्ताशय की थैली, पित्त नली या जिगर की समस्या हो सकती है।

(और पढ़ें - लिवर फंक्शन टेस्ट)

ट्यूमर बनाने वाले रसायनों का परीक्षण
सीईए (CEA) और सीए (CA) 19-9 ट्यूमर बनाते हैं (कुछ कैंसर मौजूद होने पर रक्त में पाए जाने वाले प्रोटीन)। अक्सर पित्ताशय की थैली के कैंसर से ग्रस्त लोगों में इनका स्तर उच्च पाया जाता है (लेकिन हमेशा नहीं)। आमतौर पर इन रसायनों का रक्त स्तर केवल तभी ज़्यादा होता है जब कैंसर एक विकसित चरण में होता है।

(और पढ़ें - क्रिएटिनिन टेस्ट)

अल्ट्रासाउंड (Ultrasound)
अल्ट्रासाउंड में, एक ट्रांसड्यूसर नामक छोटा सा यंत्र ध्वनि तरंगें उत्पन्न करता है और शरीर के अंदर के अंगों से टकराकर वापिस आती हुई तरंगों दर्ज करता है। इस पैटर्न से ट्यूमर खोजने में मदद मिल सकती है और यह दिखा सकते हैं कि ट्यूमर आस-पास के क्षेत्रों में कितनी दूर तक फैले हैं।

(और पढ़ें - अल्ट्रासाउंड क्या है)

सीटी स्कैन (CT scan)
सीटी स्कैन आपके शरीर की विस्तृत छवियों को बनाने के लिए एक्स-रे का उपयोग करता है। नियमित रूप से एक्स-रे की तरह एक तस्वीर लेने के बजाय, यह कई चित्र लेता है। एक कंप्यूटर की मदद से आपके शरीर के हिस्से की छवियों को जोड़कर उसका अध्ययन किया जाता है।

(और पढ़ें - सीटी स्कैन क्या है)

एमआरआई स्कैन (MRI scan)
सीटी स्कैन की तरह, एमआरआई स्कैन शरीर के ऊतकों की विस्तृत छवियां बनाता है। लेकिन एमआरआई स्कैन एक्स-किरणों के बजाय रेडियो तरंगों और मजबूत चुंबक का उपयोग करता है। बेहतर देखने के लिए, स्कैन से पहले गैडोलिनियम (gadolinium) नामक एक सामग्री का नस में इंजेक्शन दिया जा सकता है।

(और पढ़ें - एमआरआई जांच)

कोलएनजियोग्राफी (Cholangiography)
कोलएनजियोग्राम एक इमेजिंग टेस्ट है जो यह पता लगाने में मदद करता है कि क्या पित्त नलिकाएं अवरुद्ध हैं, संकुचित हैं या फैली हुई हैं। इसे यह देखने में मदद मिल सकती है कि क्या आपको ट्यूमर है, जो नलिका को अवरुद्ध कर रहा है। यह सर्जरी की योजना बनाने में भी मदद कर सकता है।

(और पढ़ें - ऑपरेशन)

एंजियोग्राफी (Angiography)
एंजियोग्राफी या एंजियोग्राम एक एक्स-रे परीक्षण है जो रक्त वाहिकाओं को देखने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह परीक्षण यह भी दिखा सकता है कि क्या कुछ रक्त वाहिकाओं की दीवारों के माध्यम से पित्ताशय की थैली का कैंसर तो नहीं फैला है।

(और पढ़ें - कोरोनरी एंजियोग्राफी)

बायोप्सी (Biopsy)
बायोप्सी के दौरान, डॉक्टर एक माइक्रोस्कोप से एक ऊतक का नमूना लेते हैं और यह देखते हैं कि कैंसर मौजूद है या नहीं। अधिकांश प्रकार के कैंसर के निदान के लिए बायोप्सी की आवश्यकता होती है। बायोप्सी का उपयोग यह पता लगाने में भी किया जाता है कि कैंसर कितना फैल गया है।

(और पढ़ें - बायोप्सी क्या है)

पित्त के कैंसर का इलाज कैसे होता है ?

कैंसर का उपचार इसके चरण, आपके स्वास्थ्य और आपकी प्राथमिकताओं पर निर्भर करता है।
उपचार का प्रारंभिक लक्ष्य होता है पित्त के कैंसर को हटाना, लेकिन जब यह संभव नहीं होता है, तो अन्य उपचार रोग को फैलने से नियंत्रित कर सकते हैं और आपको जितना संभव हो उतना आराम दे सकते हैं।

(और पढ़ें - स्किन कैंसर की सर्जरी)

प्रारंभिक चरण के पित्त के कैंसर के लिए सर्जरी
यदि आपका कैंसर प्रारंभिक चरण में है, तो पित्त के कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी एक विकल्प हो सकती है। अन्य विकल्प निम्नलिखित हैं -

  • पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए सर्जरी - शुरुआती चरण के पित्ताशय की थैली का कैंसर जो पित्ताशय की थैली तक ही सीमित है, उसका पित्ताशय की थैली को हटाने के लिए ऑपरेशन से इलाज किया जाता है।
  • पित्ताशय की थैली और लिवर के एक हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी - अगर पित्त का कैंसर पित्ताशय की थैली से बढ़कर लिवर में फैल गया है, तो उसके लिए पित्ताशय की थैली को हटाने की सर्जरी की जाती है, साथ ही लिवर और इसके आस पास मौजूद पित्त नलिकाओं को भी हटाया जाता है।

(और पढ़ें - लिवर की प्रत्यारोपण सर्जरी)

यह स्पष्ट नहीं है कि सर्जरी के बाद अतिरिक्त उपचार इस संभावना को बढ़ा सकते हैं कि आपको पित्त का कैंसर वापस नहीं होगा। कुछ मामलों में, आपके डॉक्टर सर्जरी के बाद, कीमोथेरेपी (chemotherapy), रेडिएशन थेरेपी (radiation therapy) या दोनों के संयोजन की सलाह दे सकते हैं।

विकसित चरण के पित्त के कैंसर के लिए उपचार
अगर कैंसर अन्य जगहों में फैल गया है, तो सर्जरी से इसका इलाज नहीं होता है। डॉक्टर ऐसे उपचार का उपयोग करते हैं जो कैंसर के लक्षणों को कम करता है और आपको आराम देता है।

यह विकल्प निम्नलिखित हैं -

  • कीमोथेरेपी - कीमोथेरेपी एक दवा वाला उपचार है जो कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए रसायनों का उपयोग करता है। (और पढ़ें - कीमोथेरेपी क्या है)
  • विकिरण उपचार - विकिरण उपचार, कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए एक्स-किरणों जैसे ऊर्जा के उच्च-संचालित बीम का उपयोग करता है।
  • क्लिनिकल ट्रायल - इसके तहत नए तरीके के उपचारों से और प्रयोगों के माध्यम से बीमारी का निदान किया जाता है। आपको अपने डॉक्टर से यह पूछना होगा कि क्या आप इस तरह के उपचार को हासिल कर सकते हैं या नहीं। 

(और पढ़ें - लंग कैंसर का ऑपरेशन)

अवरुद्ध पित्त नलिकाओं के लिए उपचार
विकसित पित्त का कैंसर पित्त नलिकाओं में अवरोध पैदा कर सकता है, जिससे और जटिलताएं हो सकती हैं। पित्त नलिकाओं से अवरोध को हटाने की प्रक्रिया पित्त के कैंसर के इलाज में मदद कर सकती हैं। इन्हें हटाने और खोलने के लिए आपके डॉक्टर मेटल ट्यूब का इस्तेमाल कर सकते हैं।

(और पढ़ें - स्तन कैंसर की सर्जरी)

पित्त के कैंसर से क्या समस्याएं होती हैं ?

पित्त के कैंसर की समस्याओं की बात करें तो इससे कई सारी एेसी समस्याएं भी हो जाती हैं जिनका इससे कोई संबंध नहीं होता लेकिन वे कैंसर की वजह से होने वाले अन्य लक्षण और विकार होते हैं। यानी की एेसी दिक्कतें जिनका पित्त के कैंसर से कोई संबंध ही न हो। 
कई मामलों में, पित्त के कैंसर के लक्षणों और जटिलताओं के बीच भेद अस्पष्ट होता है।

इसकी  निम्नलिखित हैं -

(और पढ़ें - पीलिया डाइट चार्ट)

Dr. Ashutosh Gawande

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ऑन्कोलॉजी

Dr. C. Arun Hensley

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ऑन्कोलॉजी

Dr. Sanket Shah

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