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दिल्ली में कोविड-19 संकट के बीच किए गए दूसरे सेरोलॉजिकल सर्वे के परिणाम आ गए हैं। दिल्ली सरकार की तरफ से पेश किए गए इन परिणामों के मुताबिक, राजधानी की 29 प्रतिशत से ज्यादा आबादी कोविड-19 की चपेट में आ चुकी है और उसमें कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो गए हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने सेरो सर्वे से जुड़ी जानकारियां प्रेस के सामने रखते हुए कहा, 'दूसरे सेरो सर्वे में वायरस के 29.1 प्रतिशत आबादी में फैलने का पता चला है।'

दिल्ली सरकार के इस बयान की मानें तो करीब दो करोड़ की आबादी वाली दिल्ली के 58 लाख लोग कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी पैदा कर चुके हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बताया कि वायरस का सबसे ज्यादा प्रसार दक्षिण-पूर्व जिले में देखने को मिला है। सर्वे के दौरान यहां से लिए गए सैंपलों में 33.2 प्रतिशत पॉजिटिव निकले हैं। पिछले सर्वे में यहां वायरस फैलने की दर 22.12 प्रतिशत थी। वहीं, सबसे कम मामले नई दिल्ली के इलाके में देखने को मिले हैं। सर्वे में यहां के 24.6 प्रतिशत सैंपलों में एंटीबॉडी होने का पता चला है।

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इस बारे में जानकारी देते हुए सत्येंद्र जैन ने कहा, 'वैज्ञानिकों का कहना है कि हर्ड इम्यूनिटी की स्थिति तब होती है, जब आबादी का 40 फीसदी हिस्सा वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित कर ले।' जैन के मुताबिक, जिन लोगों ने संक्रमित होने के बाद सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ रोग प्रतिरोधक पैदा कर लिए हैं, वे अगले छह से आठ महीनों तक इससे सुरक्षित रह सकते हैं।

इससे पहले जून के अंत और जुलाई महीने के शुरुआती दिनों के दौरान हुए पहले सेरो सर्वे में दिल्ली की 23.48 प्रतिशत आबादी के कोरोना वायरस से संक्रमित होने के संकेत मिले थे। उसके बाद दिल्ली सरकार ने एलान किया था कि अब से हर महीने राजधानी में सेरो सर्वे कर यह पता लगाया जाएगा कि यहां कोरोना वायरस किस स्तर तक फैल चुका है। इसी सिलसिले में इस महीने की शुरुआत में दूसरे सेरो सर्वे की शुरुआत की गई थी। इसके तहत दिल्ली के सभी 11 जिलों से 15,000 लोगों के सैंपल इकट्ठे किए गए थे। दिल्ली सरकार आगे भी इस तरह के सर्वे करते रहने की योजना पर काम कर रही है। खबर है कि सितंबर और अक्टूबर में राजधानी में सेरो सर्वे कर कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी पैदा कर चुके लोगों को पता लगाया जाएगा।

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'हर्ड इम्यूनिटी के आसपास भी नहीं दुनिया'
दिल्ली में दूसरे सेरो सर्वे के परिणाम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब कोरोना वायरस संकट के हर्ड इम्यूनिटी के जरिए खत्म होने की संभावना से जुड़ी चर्चा एक बार फिर जोर पकड़ रही है। हाल में आई कुछ अध्ययन आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, दुनिया के कुछ सघन आबादी वाले इलाकों में कोविड-19 के चलते हर्ड इम्यूनिटी बनने या लगभग बनने की आशंका जताई गई है। इन इलाकों में अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के अलावा भारत के महाराष्ट्र राज्य की राजधानी मुंबई भी शामिल है, जहां हाल में हुए एक सेरो सर्वे में 40 प्रतिशत लोगों में कोरोना वायरस की चपेट में आने के बाद एंटीबॉडी पैदा होने की बात सामने आई थी। माना जाता है कि संक्रामक रोग के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी पैदा होने के लिए आबादी के 70 प्रतिशत हिस्से का वायरस के प्रति इम्यून होना जरूरी है। वहीं, कई अंतरराष्ट्रीय मेडिकल विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने कहा है कि अगर आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भी वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी पैदा कर ले तो इससे बीमारी को रोकने में काफी मदद मिल सकती है।

(और पढ़ें - वैज्ञानिकों को क्यों लगता है कि दुनिया के कुछ इलाकों में कोविड-19 के खिलाफ हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो गई है और क्यों दूसरे वैज्ञानिक इसे खारिज करते हैं?)

लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने हर्ड इम्यूनिटी से जुड़ी तमाम बहसों को एक तरह से खत्म करने वाला बयान दिया है। उसने साफ कहा है कि दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ सामूहिक प्रतिरक्षा विकसित करने के आसपास भी नहीं है। डब्ल्यूएचओ ने कोविड-19 से दुनियाभर में सात लाख 80 हजार मौतों की पुष्टि के बाद यह बयान दिया है। इसमें डब्ल्यूएचओ के आपातकालीन मामलों के प्रमुख डॉ. माइकल रेयान ने कहा है, 'वैश्विक आबादी के रूप में हम बीमारी को फैलने से रोकने के लिए जरूरी इम्यूनिटी लेवल के आसपास भी नहीं हैं। यह कोई समाधान नहीं है और न ही ऐसा कोई हल है जिसका हमें इंतजार करना चाहिए।' वहीं, डब्ल्यूएचओ प्रमुख के एक वरिष्ठ सलाहकार डॉ. ब्रूस ऐलवर्ड ने कहा कि कोविड-19 की वैक्सीन तैयार कर बड़े पैमाने पर चलाया गया कोई इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम 50 प्रतिशत से कहीं ज्यादा की आबादी को कवर कर सकता है।

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