डबिन जॉनसन सिंड्रोम - Dubin Johnson Syndrome in Hindi

Dr. Rajalakshmi VK (AIIMS)MBBS

December 26, 2020

December 26, 2020

कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!
डबिन जॉनसन सिंड्रोम
डबिन जॉनसन सिंड्रोम
कई बार आवाज़ आने में कुछ क्षण का विलम्ब हो सकता है!

डबिन जॉनसन सिंड्रोम क्या है?
डबिन जॉनसन सिंड्रोम (डीजेएस) एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीलिया यानी जॉन्डिस से जुड़े लक्षण दिखाई देते हैं जैसे त्वचा और आंखों के सफेद हिस्से का पीला पड़ना। बीमारी से पीड़ित ज्यादातर लोगों में किशोरावस्था या प्रौढ़ता की शुरुआत में पीलिया की समस्या देखने को मिलती है। वैसे तो पीलिया आमतौर पर डबिन जॉनसन सिंड्रोम का एकमात्र लक्षण है। लेकिन इस दौरान कुछ लोगों को कमजोरी, हल्का पेट दर्द, मतली या उल्टी का अनुभव भी हो सकता है। डबलिन जॉनसन सिंड्रोम से पीड़ित अधिकांश लोगों के लिवर में कुछ पदार्थ जमा होने लगते हैं लेकिन इसकी वजह से लिवर के काम में कोई रुकावट नहीं आती है। मेडिकल इमेजिंग के जरिए जब इस तरह के लिवर को देखा जाता है तो इन पदार्थों के जमा होने की वजह से लिवर काला दिखाई देता है।

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डबिन जॉनसन सिंड्रोम के लक्षण - Dubin Johnson Syndrome Symptoms in Hindi

डबिन जॉनसन सिंड्रोम से पीड़ित लगभग 80 से 99 फीसदी लोगों में बार-बार होने वाले पीलिया की समस्या होती है जो अतिरिक्त बिलीरुबिन (पित्त पिग्मेंट) के कारण होता है जिसे शरीर सामान्य रूप से उत्सर्जित नहीं कर पाता। यह लिवर की कोशिकाओं में बनता है और इसके बाद ब्लड में ट्रांसफर हो जाता है जिसके बाद यह आंखों में और त्वचा में जमा हो जाता है। दूसरी ओर यही पिग्मेंट असामान्य यूरिन के रंग का कारण भी बन सकता है। वैसे तो लिवर सामान्य तरीके से ही काम करता है सिवाय उस ट्रांसपोर्टर प्रोटीन के नुकसान के जिसकी जरूरत बिलीरुबिन को लिवर से हटाने के लिए होती है। डबिन जॉनसन सिंड्रोम के अन्य असामान्य लक्षणों में शामिल है- थकान और बुखार। कुछ दुर्लभ स्थितियों में बिलीरुबिन का स्तर इतना अधिक हो सकता है कि लिवर को नुकसान पहुंचा सके।

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डबिन जॉनसन सिंड्रोम के कारण - Dubin Johnson Syndrome Causes in Hindi

डबिन जॉनसन सिंड्रोम का कारण जीन में होने वाला बदलाव है। एबीसीसी2 नाम के जीन में परिवर्तन की वजह से यह समस्या होती है। एबीसीसी2 जीन एक प्रोटीन बनाने के लिए निर्देश देने का काम करता है जो कुछ पदार्थों को कोशिकाओं से बाहर ट्रांसफर भी करता है ताकि उन्हें शरीर से बाहर निकाला जा सके। उदाहरण के लिए, यह प्रोटीन, बिलीरुबिन नामक पदार्थ को लिवर कोशिकाओं से बाहर निकालकर उसे पित्त (लिवर द्वारा उत्पादित एक पाचन द्रव) में पहुंचाता है। बिलीरुबिन का निर्माण पुरानी लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के दौरान होता है और उसका रंग नारंगी-पीले जैसा होता है।

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डबिन जॉनसन सिंड्रोम का निदान - Diagnosis of Dubin Johnson Syndrome in Hindi

एनसीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक डबिन जॉनसन सिंड्रोन का निदान डिफरेंशियल डायग्नोसिस के आधार पर किया जा सकता है। डिफरेंशियल डायग्नोसिस यानी दो या अधिक बीमारियों के बीच अंतर करने की प्रक्रिया जो समान संकेत या लक्षण साझा करती हैं। वे स्थितियां हैं- 
प्रतिरोधी पित्त नली की स्थिति
इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस
एक्यूट या क्रॉनिक लिवर की चोट
रोटर सिंड्रोम
हेमोलिसिस और अन्य हेमाटोलॉजिकल रोग
पोर्टोसिस्टिक शंटिंग
गिल्बर्ट-म्यूलेन्ग्रैच्ट सिंड्रोम
क्रिगलर-नज्जर सिंड्रोम
ब्रेस्ट मिल्क जॉन्डिस

डबिन जॉनसन सिंड्रोम का उपचार - Dubin Johnson Syndrome Treatment in Hindi

डबिन जॉनसन सिंड्रोम का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है। कई रोगियों को किसी भी प्रकार के उपचार की आवश्यकता नहीं होती है, भले ही उन्हें बार-बार पीलिया के हल्के लक्षणों का अनुभव होता हो। हालांकि, डबिन जॉनसन सिंड्रोम के मरीज, कुछ दवाओं के मेटाबॉलिज्म से प्रभावित हो सकते हैं क्योंकि कई औषधीय उत्पाद ऐसे हैं जो लिवर में मेटाबोलाइज होते हैं। इसलिए, एक डॉक्टर को मरीज को दवाएं देते वक्त काफी सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा रोगियों और उनके परिवारों के लिए आनुवंशिक परामर्श यानी जेनेटिक काउंसलिंग की भी सिफारिश की जाती है।



डबिन जॉनसन सिंड्रोम के डॉक्टर

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