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एचआईवी को दबाने वाली दवा एड्स के वायरस को एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलने से रोक सकती है। यह बात हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आई है। इसको लेकर पूरे यूरोप में एक अध्ययन किया गया। 8 वर्ष तक चले इस अध्ययन को करीब 1 हजार समलैंगिक जोड़ों के ऊपर किया गया। इन जोड़ों में एक पार्टनर एचआई से संक्रमित था, जो एंटीरेट्रोवायरल (एआरटी) की दवाइयां ले रहा था। वहीं, दूसरे पार्टनर एचआईवी से संक्रमित नहीं था।

अध्ययन की इस अवधि के दौरान एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया, जिसमें संक्रमित पार्टनर से गैरसंक्रमित पार्टनर में एचआईवी का वायरस फैला हो। इससे उम्मीद जागी है कि बड़े पैमाने पर चल रहे एआरटी कार्यक्रम से एचआईवी के नए संक्रमण को रोका जा सकता है।

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पूरे यूरोप में हुआ संक्रमण पर अध्ययन
इस अध्ययन से जुड़े प्रमुख शोधकर्ता ने कहा, 'हमें इस अध्ययन में निर्णायक सबूत मिले हैं कि समलैंगिक पुरुषों में एआरटी उपचार के साथ एचआईवी फैलने का खतरा शून्य पाया गया।'

यह शोध दि लेनसेट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा कि यह एक ‘मजबूत संदेश’ है, जिससे विश्व में एचआईवी के सबसे ज्यादा खतरे वाली जनसंख्या में इसके संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिल सकती है। शोधर्कताओं ने पाया कि इन आठ वर्षों में एंटीरेट्रोवायरल उपचार से करीब 472 मामलों में एचआईवी संक्रमण को दूसरे पार्टनर में फैलने से बचाया।

शोध में शामिल जोड़ों ने बिना कंडोम बनाए संबंध 
इस शोध में शामिल समलैंगिक जोड़ों ने शारीरिक संबंध बनाते वक्त कंडोम का इस्तेमाल नहीं किया था, जिनमें एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर में एचआईवी संक्रमण फैलने  के खतरे का आंकलन किया गया।

शोध के पहले चरण में गैरसमलैंगिक जोड़ों में भी एक पार्टनर से दूसरे पार्टनर में एचआईवी फैलने के खतरे का आकलन किया गया, जिसमें इसके संक्रमण का खतरा शून्य पाया गया। जबकि, 972 समलैंगिक जोड़ों में से 15 समलैंगिक पुरुषों को इस अवधि के दौरान एचआईवी संक्रमण हुआ। जेनेटिक टेस्टिंग से पता चला कि उन्हें एचआईवी का यह संक्रमण शायद किसी अन्य पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाने के कारण हुआ।

अब तक करोड़ों लोगों की मृत्यु 
1980 में एड्स के एक महामारी के रूप में सामने आने से लेकर अब तक दुनियाभर में इस जानलेवा वायरस से 7.7 करोड़ लोग संक्रमित हो चुके हैं। लगभग 3.54 करोड़ लोगों की एड्स होने से मौत हो चुकी है। दुनियाभर से हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि एचआईवी के खिलाफ लड़ाई एक ऐसे चरण पर है, जिसमें एड्स से होने वाली मौतों के आंकड़ों में कमी आ रही है।

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संक्रमण के नए मामलों में हो रहा इजाफा
मौजूदा समय में एंटीरेट्रोवायरल उपचार लेने वाले लोगों की संख्या में इजाफा हो रहा है। लेकिन एचआईवी के नए संक्रमण के मामलों में असमान्य रूप से भारी इजाफा हो रहा है।

एक वर्ष में दुनियाभर में करीब 18 लाख लोग एचआईवी से संक्रमति हो रहे हैं। हालिया वर्षों में काफी सुधार होने के बावजूद भी एचआईवी और इससे होने वाली दूसरी घातक बीमारियां एक बड़ी समस्या बनीं हुई हैं। मौजूदा समय में 2.1 करोड़ से ज्यादा लोग नियमित रूप से एआरटी का उपचार ले रहे हैं, जो इसके वायरस को दबाकर रखती है। यह आंकड़ा दुनियाभर के एचआईवी पीढ़ितों का केवल 59 फीसदी है।

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शोध के लेखक ने कई सीमाओं का उल्लेख किया, जिसमें एचआईवी से गैरसंक्रमित पुरुष की औसत आयु 38 वर्ष थी। वहीं, ज्यादातर मामलों में एचआईवी संक्रमण 25 वर्ष से कम आयु में सामने आया। एचआईवी का उपचार ले रहे लोगों को आजीवन इसकी दवाइयां खानी पड़ती हैं, जिसमें अक्सर अलग-अलग कारणों से इलाज बधित हो जाता है।

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