एड्स ऐसी बीमारी है, जो एचआईवी वाले लोगों में विकसित होती है. यह एचआईवी का सबसे गंभीर स्टेज होता है. असल में एचआईवी एक वायरस है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली को नुकसान पहुंचाता है. एचआईवी सीडी4 कोशिकाओं को प्रभावित करता है, जो एक तरह की प्रतिरक्षा कोशिकाएं होती हैं, जिसे टी सेल कहा जाता है. एक स्वस्थ वयस्क में आमतौर पर 500 से 1600 प्रति घन मिलीमीटर सीडी4 होती हैं.

एचआईवी की स्थिति में सीडी4 की संख्या 200 प्रति घन मिलीमीटर से कम हो जाती है. यह स्थिति बेहद गंभीर हो सकती है. महिला हो या पुरुष दोनों को एड्स होने पर आमतौर पर लक्षण एक जैसे ही नजर आते हैं. वहीं, अगर सिर्फ महिलाओं की बात करें, तो कुछ लक्षण ऐसे हाेते हैं, जो सिर्फ महिलाओं में ही नजर आते हैं.

इस लेख में आप महिलाओं में एचआईवी एड्स के लक्षणों के बारे में जानेंगे -

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  1. महिलाओं में नजर आने वाले एड्स के लक्षण
  2. सारांश
महिलाओं में एड्स के लक्षण के डॉक्टर

एचआईवी के लक्षण इसके संक्रमण स्टेज पर निर्भर करते हैं. वायरस के संपर्क में आने के बाद महिलाओं में तीनों चरणों में अलग-अलग लक्षण देखने को मिल सकते हैं. इन सभी स्तरों व उनके लक्षणों के बारे में नीचे बताया गया है -

एक्यूट एचआईवी संक्रमण

यह एचआईवी संक्रमण का पहला स्टेज होता है. इस दौरान प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस से लड़ने और संक्रमण को नियंत्रण में रखने के लिए एंटीबॉडी बनाती है. कई महिलाओं को इस स्टेज में कोई लक्षण महसूस नहीं होता है. 2016 के एक अध्ययन के अनुसार 43 फीसदी महिलाओं को तीव्र एचआईवी संक्रमण में कोई भी लक्षण नजर नहीं आया था. वायरस के संपर्क में आने के 2-4 सप्ताह के अंदर कुछ महिलाओं में बुखार और फ्लू जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. ये लक्षण 7-14 दिन तक रह सकते हैं -

  • फ्लू - एचआईवी के शुरुआती लक्षणों में बुखार शामिल होता है. एचआईवी होने के 2-6 सप्ताह बाद महिलाओं में फ्लू जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इसमें सिरदर्द, बुखार, खांसी और बहती नाक आदि शामिल हैं. ये लक्षण एक सप्ताह या महीने तक रह सकते हैं. अक्सर ये लक्षण सर्दी या फ्लू की तरह होते हैं, ऐसे में व्यक्ति इसे एचआईवी से नहीं जोड़ पाता है.
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  • लिम्फ नोड्स में सूजन - जब एचआईवी का संक्रमण तेजी से फैलता है, तो महिला के लिम्फ नोड्स में सूजन होने लगती है. इस स्थिति में महिला के जबड़े के नीचे और कानों के पीछे गर्दन में सूजन आ सकती है. सूजन की वजह से खाना निगलने में परेशानी हो सकती है. एचआईवी का यह लक्षण महिलाओं में कुछ दिनों से लेकर महीनों तक रह सकता है. अगर किसी महिला का एचआईवी का इलाज चल रहा है, तो इस स्थिति में वायरस की गति रुक सकती है.
  • गले में खराश - एचआईवी संक्रमण के पहले स्टेज में गले में खराश की समस्या हो सकती है. यह लक्षण कुछ महिलाओं में ही देखने को मिलता है. एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति में गले में खराश कुछ दिनों, हफ्तों या महीनों तक भी रह सकती है.
  • (और पढ़ें - एड्स का आयुर्वेदिक इलाज)
  • तेजी से वजन कम होना - एचआईवी संक्रमण की वजह से महिलाओं का वजन भी कम हो सकता है. अगर कोई महिला एचआईवी का इलाज नहीं ले रही है, तो उसे मतलीदस्त और भूख की कमी जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इस स्थिति में महिला का तेजी से वजन घटने लगता है. 
  • मूड में बदलाव - एचआईवी होने पर महिलाओं के मूड में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. एचआईवी महिलाओं में तंत्रिका संबंधी विकारों का भी कारण बन सकता है. इस दौरान महिला में निराशा, उदासी व तनाव जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. इसके साथ ही महिलाएं मेमोरी लॉस का भी अनुभव कर सकती हैं.
  • (और पढ़ें - एचआईवी टेस्ट कैसे होता है)
  • त्वचा में बदलाव - एचआईवी से पीड़ित महिलाओं में त्वचा पर असामान्य धब्बे जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं. ये धब्बे लाल, गुलाबी, भूरे या बैंगनी रंग के हो सकते हैं. ये धब्बे मुंह, पलकों या नाक के अंदर दिखाई दे सकते हैं. इतना ही नहीं मुंह, जननांगों या गुदा पर भी घाव हो सकते हैं. 
  • मुंह में छाले - एचआईवी से संक्रमित महिला को पहले स्टेज में मुंह में छालों की समस्या भी हो सकती है. ये छाले पीड़ादायक हो सकते हैं, खाने में दिक्कत पैदा कर सकते हैं. कुछ महिलाओं को तो गालों पर, होंठों के अंदर भी लाल छाले हो सकते हैं. 

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क्रोनिक संक्रमण

क्रोनिक संक्रमण एचआईवी का दूसरा स्टेज होता है. इसमें वायरस शरीर के अंदर रहता है. कुछ महिलाओं में इस अवधि के दौरान कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं. वहीं, कुछ लोगों में पहले स्टेज के ही लक्षण गंभीर रूप से नजर आ सकते हैं। इसमें खांसी, थकान, वजन घटना, दस्त व तेज बुखार जैसे लक्षण महसूस हो सकते हैं.

(और पढ़ें - एड्स की दवा से समलैंगिक पुरुषों में संक्रमण का खतरा कम)

एक्वायर्ड इम्युनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स)

यह एचआईवी का सबसे गंभीर स्टेज होता है. इस स्थिति में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गंभीर रूप से कमजोर पड़ जाती है. इस दौरान महिलाओं में गंभीर लक्षण नजर आ सकते हैं, जो इस प्रकार हैं -

  • पीरियड्स में बदलाव - महिलाओं के मासिक धर्म में बदलाव एचआईवी एड्स का मुख्य लक्षण हो सकता है. इस दौरान महिला को हल्का या भारी रक्तस्त्राव हो सकता है. इतना ही नहीं पीरियड्स स्किप भी हो सकते हैं या फिर प्रीमेंस्ट्रूअल सिंड्रोम (PMS) हो सकता है. पीरियड्स में बदलाव सामान्य भी हो सकता है, जरूरी नहीं कि यह एचआईवी का ही संकेत हो, लेकिन अगर पीरियड्स में बदलाव के साथ अन्य लक्षण भी नजर आते हैं, तो एचआईवी जांच की जरूरत हो सकती है.
  • पेट के निचले हिस्से में दर्द - गर्भाशय, अंडाशय और फैलोपियन ट्यूब के संक्रमण होने पर पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस हो सकता है. इसे पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज कहा जाता है. एचआईवी से पीड़ित महिलाओं में पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज के लक्षण नजर आ सकते हैं. इस स्थिति में असामान्य योनि स्राव, बुखार, यौन संबंध के दौरान दर्द और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द भी महसूस हो सकता है.
  • वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन - जिन महिलाओं को एचआईवी होता है, उन्हें बार-बार वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन हो सकता है. इस स्थिति में योनि से व्हाइट डिस्चार्ज, यौन क्रिया के दौरान दर्द, पेशाब करते समय दर्द और योनि में जलन जैसे लक्षण नजर आ सकते हैं. वहीं, लगभग सभी महिलाओं को कभी-न-कभी वजाइनल यीस्ट इंफेक्शन का सामना जरूर करना पड़ता है. अगर ऐसा बार-बार होता है, तो ये एचआईवी का संकेत हो सकता है. ऐसे में टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है. महिलाओं में वेजाइनल यीस्ट इंफेक्शन काफी आम है. यह सिर्फ एचआईवी का लक्षण नहीं होता है.

जब किसी व्यक्ति को एचआईवी होता है, तो उसकी प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के प्रति प्रतिक्रिया देने के लिए ऊर्जा का उपयोग करती है. इसकी वजह से शरीर दूसरे संक्रमणों से लड़ने में सक्षम नहीं हो पाता है.

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असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित व्यक्ति के निजी चीजों का इस्तेमाल करने से एचआईवी वायरस एक व्यक्ति से दूसरे में भी फैल सकता है. इसके अलावा, एक ही इंजेक्शन के इस्तेमाल से भी यह वायरस फैल सकता है. सीडीसी के अनुसार कि 13-64 तक की उम्र के सभी लोगों को समय-समय पर एचआईवी टेस्ट जरूर करवाते रहना चाहिए. इसके अलावा, हर गर्भवती को भी एचआईवी टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है. एचआईवी वायरस का कोई भी लक्षण नजर आने पर डॉक्टर से जरूर कंसल्ट करें.

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