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ज्यादा वजन या मोटे लोगों को अक्सर बॉडीशेम (अपने शरीर की वजह से चिढ़ाया जाना) का शिकार होना पड़ता है। लोग अजीब-अजीब से नामों से मोटे लोगों को चिढ़ाते हैं। अगर आपके साथ भी ऐसा ही होता है तो अब आपके लिए अपने शरीर पर खुश होने की एक और वजह है। शोधकर्ताओं के अनुसार ज्यादा वजन और ज्यादा बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) कैंसर को हराने के उम्मीद बढ़ा सकता है।

ये खोज फ्लाइंडर यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने एनएससीएलसी (नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर) के मरीजों पर की। इस कैंसर के ट्रीटमेंट के दौरान दी जाने वाली अटीजोलीजुमाब रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाली थेरेपी है। इस रिसर्च के दौरान ये पता चला है कि इस दवाई का सबसे ज्यादा फायदा उन मरीजों पर होता है, जिनका बीएमआई ज्यादा होता है।

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नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर क्या है?
इस तरह के कैंसर में खतरनाक कैंसर सेल्स फेफड़े के उत्तकों में पनपते हैं। नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर कई तरह के होते हैं। फेफड़ों के इस कैंसर को फैलाने में धूम्रपान का सबसे ज्यादा हाथ है।

नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर के लक्षण
कई बार लंग कैंसर के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। ज्यादा तकलीफ होने पर छाती के एक्स रे से ही इसका पता लगाया जा सकता है। कई बार इसमें दिखने वाले लक्षण फेफड़ों से जुड़ी दूसरी बीमारियों से बहुत मेल खाते हैं। इस कैंसर के दौरान मरीजों को इन परेशानियों का सामना करना पड़ता है जैसे-

  • छाती में दर्द
  • खांसी जो समय के साथ बढ़ती जाए
  • सांस लेने में तकलीफ
  • आवाज और गला खराब
  • भूख न लगना
  • वजन घटना
  • थकान महसूस होना
  • निगलने में दिक्कत
  • मुंह और गले की नसों में सूजन
  • गले में घरघराहट

फ्लाइंडर यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता गणेशन किचेनदस्से के अनुसार ज्यादा वजन वाले कैंसर मरीजों के लिए ये एक राहत की खबर है। इस ट्रीटमेंट के बाद कई तरह की एंटी कैंसर दवाइयों को बनाने के नए फॉर्मुले बनाने में मदद मिलेगी।

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गणेसन कहते हैं कि आगे शोध करने से पहले बीएमआई और ज्यादा वजन से होने वाली सूजन को समझना पड़ेगा। इसकी मदद से ही किसी तरह के कैंसर ट्रीटमेंट का पता लगाया जाएगा।

ज्यादा वजन के नुकसान और केस
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हर साल 28 लाख लोग ज्यादा वजन की वजह से अपनी जान से हाथ धो बैठते हैं। मोटापे की वजह से हमारे शरीर के मेटाबॉलिक सिस्टम पर असर पड़ता है, जिससे बीपी, कॉलेस्ट्रोल, ट्राइग्लेसराइड्स और इंसुलिन रेजिस्टेंट पैदा होती है। हृदय रोग, एस्केमिक स्ट्रोक और टाइप 2 डायबिटीज का खतरा वजन के साथ-साथ मरीजों में बढ़ने लगता है।

पहले की गई कई शोधों के अनुसार ओबेसिटी की वजह से कई तरह के कैंसर होने का खतरा रहता है। वहीं  रिसर्च कहती है कि ज्यादा वजन कैंसर के मरीजों के इलाज में मदद पहुंचाएगा। ये स्टडी बीएमआई और बढ़ते वजन के रोगप्रतिरोधक थेरेपी से संबंध के ऊपर गहन शोध करती है।

जेएएमए ओन्कोलॉजी के जर्नल में एक स्टडी पब्लिश की गई। इस स्टडी में 1,434 लोगों ने भाग लिया था, जिसमें से 49 प्रतिशत लोगों का वजन सामान्य, 34 प्रतिशत का सामान्य से ज्यादा वजन और 7 प्रतिशत मोटापे के शिकार थे। रिसर्च से ये पता चला कि जिन एनएससीएलसी मरीजों का बीएमआई ज्यादा था। उनका चार क्लीनिकल ट्राएल के बाद अटीजोलीजुमैब के इस्तेमाल से मृत्यु दर कम हुआ है। इस तरह इम्यून चेकप्वाइंट इन्हिबिटर थेरेपी से कैंसर मरीजों को फायदा पहुंचता है।

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फेफड़ों के कैंसर का उपचार
इसके बाद फेफड़ों के कैंसर में आईसीआई, मोलिक्यूलर टार्गेटेड दवाइयां और कीमोथेरेपी दी जा रही है। ये स्टडी वजन और कैंसर को आपस में रिलेट कर इलाज के नए तरीके खोजने में मदद करेगी।

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