फेफड़ों का कैंसर - Lung Cancer in Hindi

Dr. Ayush PandeyMBBS

June 28, 2017

April 06, 2021

फेफड़ों का कैंसर
फेफड़ों का कैंसर

लंग कैंसर क्या होता है?

जब कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़कर एक ट्यूमर बना देती हैं, इसे कैंसर कहा जाता है। जब इसकी शुरुआत फेड़ों की कोशिकाओं में होती है, इसे फेफड़ों का कैंसर या लंग कैंसर कहा जाता है।

अधिकतर मामलों में फेफड़े के कैंसर का प्रमुख कारण सिगरेट पीना पाया गया है। हालांकि, आजकल लंग कैंसर उन लोगों में भी देखा जा रहा है जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है।

फेफड़ों के कैंसर के कोई विशिष्ट शुरुआती लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि, लंग कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण खांसी है, जो धीरे धीरे गंभीर होती जाती है और ठीक नहीं होती है। 

फेफड़ों के कैंसर के उपचार के विकल्पों में सर्जरी, कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा शामिल हैं। लंग कैंसर के प्रकार, स्टेज और अन्य कारकों के आधार पर डॉक्टर सही ट्रीटमेंट का निर्णय लेते हैं।

भारत में लंग कैंसर

फेफड़ों का कैंसर होना दुनियाभर में अब बहुत ही आम हो गया है और कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है। कैंसर के सभी नए मामलों में से 13 प्रतिशत और कैंसर से संबंधित 19 प्रतिशत मृत्यु के लिए फेफड़े का कैंसर ज़िम्मेदार है।

GLOBOCAN 2012 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सभी आयु और दोनों लिंगों में फेफड़ों के कैंसर की अनुमानित घटनायें 70,275 थीं। घटना दर के संदर्भ में ब्रेस्ट कैंसरसर्वाइकल कैंसर और मुंह के कैंसर के बाद फेफड़ों का कैंसर, विभिन्न प्रकार के कैंसर (नॉन-मोलेनोमा स्किन कैंसर को छोड़कर) के बीच चौथे स्थान पर था। कैंसर की घटना के मामले में पुरुषों में लंग कैंसर दूसरे स्थान पर था, जबकि महिलाओं में छठे स्थान पर था।

एक दशक पहले तक, सभी फेफड़ों के कैंसर के रोगियों में से 10% से कम धूम्रपान नहीं करते थे। यह प्रतिशत अब बढ़कर लगभग 20% तक चला गया है, जो काफी अधिक है। प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर इसका एक कारण हो सकता है।

भारत में फेफड़े के कैंसर होने पर जीवित रहने का दर क्या है?

यह कैंसर धीरे धीरे व्यक्ति की जान ले लेता है, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। इसका मुख्य कारण धूम्रपान है। प्रारंभिक स्तर पर ही इस रोग का निदान करने से व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है।

केवल 15% फेफड़े के कैंसर का शुरुआती स्तर पर निदान किया जाता है, जहां 5 साल की जीवित रहने की दर लगभग 54% है। फेफड़े के कैंसर के लगभग 70% रोगी शुरुआती चरण में किये गए निदान के बाद कम से कम एक वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। ट्यूमर के अन्य अंगों में फैल जाने पर अर्थात उच्च चरण / चरण चार में पांच साल जीवित रहने का दर घटकर केवल 4 प्रतिशत रह जाता है।

लंग कैंसर वीडियो - Lung Cancer video in Hindi

इस वीडियो में डॉ आशू अभिषेक लंग कैंसर से जुड़ी सारी जानकारी दे रहे हैं। डॉ अभिषेक एक सीनियर कैंसर विशेषज्ञ हैं जो लंग कैंसर के स्पेशलिस्ट हैं। myUpchar से इस चर्चा में उन्होंने लंग कैंसर के शुरुआती लक्षण, कारण, इलाज, जांच और बचाव के तरीकों के बारे में बताया है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के लक्षण - Lung Cancer Symptoms in Hindi

फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती लक्षण

आमतौर पर लंग कैंसर के शुरुआती चरणों में कोई विशिष्ट संकेत और लक्षण नहीं होते हैं। फेफड़े के कैंसर के लक्षण आमतौर पर तब होते हैं जब रोग बढ़ जाता है।

फेफड़ों के कैंसर के संकेत और लक्षण

फेफड़ों के कैंसर के लक्षण और लक्षण शामिल हो सकते हैं:

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए

यदि आपको कोई चिंताजनक लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

यदि आप धूम्रपान करते हैं और छोड़ने में असमर्थ हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें। आपका डॉक्टर धूम्रपान छोड़ने के लिए तरीके सुझा सकते हैं।

(और पढ़ें - धूम्रपान कैसे छोड़ें)

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के कारण - Lung Cancer Causes in Hindi

लंग (फेफड़ों का) कैंसर कैसे /क्यों होता है?

90 प्रतिशत फेफड़े के कैंसर के मामले धूम्रपान का परिणाम होते हैं। कुछ अन्य हानिकारक पदार्थ भी लंग कैंसर का कारण बन सकते हैं जैसे एस्बेस्टोस, आर्सेनिक आदि। कभी-कभी लंग कैंसर होने का कोई स्पष्ट कारण नहीं पता चलता है।

धूम्रपान

सिगरेट / बीड़ी के पहले कश से वह आपके फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। फेफड़े इस नुकसान की मरम्मत कर सकते हैं, लेकिन लगातार धुएं के संपर्क में बने रहने पर फेफड़ों के लिए अपनी मरम्मत करना मुश्किल या असंभव हो जाता है।

एक बार जब कोशिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, तो वे असामान्य रूप से व्यवहार करना शुरू कर देते हैं, जिससे लंग कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। स्माल सेल लंग कैंसर का कारण लगभग हमेशा भारी धूम्रपान होता है।

जब आप धूम्रपान करना बंद कर देते हैं, तो समय के साथ आपको फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।

अन्य हानिकारक पदार्थ

अन्य खतरनाक पदार्थों में सांस लेना, विशेष रूप से लंबे समय तक, फेफड़ों के कैंसर का कारण भी हो सकता है। एक प्रकार का फेफड़ों का कैंसर जिसे मेसोथेलियोमा कहा जाता है, लगभग हमेशा एस्बेस्टस के संपर्क में आने के कारण होता है।

अन्य पदार्थ जो फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकते हैं:

  • आर्सेनिक
  • कैडमियम
  • क्रोमियम
  • निकल
  • कुछ पेट्रोलियम उत्पाद
  • यूरेनियम

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) से बचाव - Prevention of Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर होने से कैसे रोकें?

फेफड़ों के कैंसर को रोकने का कोई निश्चित तरीका नहीं है, लेकिन यदि आप अपना जोखिम कम कर सकते हैं:

  • धूम्रपान करना शुरू न करें - यदि आपने कभी धूम्रपान नहीं किया है, तो शुरू न करें। अपने बच्चों से धूम्रपान कभी न शुरू करने के बारे में बात करें ताकि वे समझ सकें कि फेफड़ों के कैंसर के इस प्रमुख कारण से कैसे बचा जाए।
  • धूम्रपान बंद करें - धूम्रपान करना छोड़ दें, आज ही। धूम्रपान छोड़ने से आपको फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम हो जाता है, भले ही आप वर्षों से धूम्रपान कर रहे हों।
  • सेकेंड हैंड स्मोक से बचें - यदि आप धूम्रपान करने वाले के साथ रहते हैं या काम करते हैं, तो उसे छोड़ने के लिए आग्रह करें और जब वह सिगरेट पि रहे हों, उनसे दूर रहें।
  • काम पर कार्सिनोजेनिक पदार्थों से बचें - काम पर खुद को जहरीले रसायनों के संपर्क से बचाने के लिए सावधानी बरतें।
  • फल और सब्जियों से भरे आहार का सेवन करें - विभिन्न प्रकार के फलों और सब्जियों से भरपूर स्वस्थ आहार चुनें। विटामिन और पोषक तत्वों के खाद्य स्रोत चुनें। सप्लीमेंट के रूप में विटामिन की बड़ी खुराक लेने से बचें, क्योंकि वे हानिकारक हो सकते हैं।
  • फिट रहें - यदि आप नियमित व्यायाम नहीं करते हैं, तो धीरे-धीरे शुरुआत करें। लेकिन कोशिश करें कि आप नियमित रूप से एक्सरसाइज करें और फिट रहें।

लंग (फेफड़ों के) कैंसर की जांच - Diagnosis of Lung Cancer in Hindi

फेफड़ों के कैंसर का निदान कैसे किया जाता है?

चिकित्सक फेफड़ों के कैंसर का निदान करने के लिए लक्षणों के साथ-साथ कई अन्य प्रक्रियाओं का भी प्रयोग करते  हैं। आम इमेजिंग तकनीकों में छाती का एक्स-रे, ब्रोंकोस्कोपी, सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन और पीईटी स्कैन शामिल हैं।

उपरोक्त नैदानिक तकनीकें महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं, लेकिन कैंसर की कोशिकाओं को निकालकर माइक्रोस्कोप द्वारा उनकी जांच करना फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने का एकमात्र सटीक तरीका है। इस प्रक्रिया को बायोप्सी कहा जाता है।

यदि बायोप्सी से फेफड़ों के कैंसर की पुष्टि होती है तो डॉक्टर यह निर्धारित करेंगे कि यह नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर है या स्मॉल सेल लंग कैंसर।

डॉक्टर द्वारा रोगी के संपूर्ण शरीर की जांच, छाती की जांच और थूक के साथ निकलने वाले रक्त का विश्लेषण किया जायेगा। ये सभी परिक्षण इस बात का पता लगाने में मदद करते हैं कि ट्यूमर कहां पर है और इसके द्वारा कौन से अतिरिक्त अंग प्रभावित हो चुके हैं।

परीक्षणों के बाद कैंसर के शरीर में फैलने की स्थिति के आधार पर डॉक्टर लंग कैंसर का स्टेज निर्धारित करेंगे। स्टेज निर्धारित करता है कि उपचार के लिए कौन से विकल्प प्रयोग किये जायेंगे।

लंग (फेफड़ों के) कैंसर का इलाज - Lung Cancer Treatment in Hindi

लंग कैंसर का उपचार

डॉक्टर कई कारकों के आधार पर लंग कैंसर के उपचार की योजना बनाते हैं, जैसे – आपका संपूर्ण स्वास्थ्य, आपके लंग कैंसर का प्रकार, स्टेज और आपकी प्राथमिकताएं। आमतौर पर एक से अधिक विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और टार्गेटेड ड्रग थेरेपी शामिल हैं।

नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर का उपचार

नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी) का उपचार एक मरीज से दूसरे में भिन्न होता है। बहुत कुछ मरीज के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है।

  • स्टेज 1 एनएससीएलसी: फेफड़े के एक हिस्से को हटाने के लिए सर्जरी से मरीज ठीक हो सकता है। कीमोथेरेपी भी दी जा सकती है, खासकर यदि मरीज को दोबारा कैंसर होने का जोखिम हो।
  • स्टेज 2 एनएससीएलसी: एक फेफड़े का हिस्से या पूरी तरह हटाने के लिए सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। आमतौर पर कीमोथेरेपी की दी ही जाती है।
  • स्टेज 3 एनएससीएलसी: कीमोथेरेपी, सर्जरी और विकिरण चिकित्सा के संयोजन की आवश्यकता हो सकती है।
  • स्टेज 4 एनएससीएलसी का इलाज विशेष रूप से कठिन है। विकल्प में सर्जरी, विकिरण, कीमोथेरेपी, टार्गेटेड थेरेपी\ और इम्यूनोथेरेपी शामिल हैं।

स्माल सेल लंग कैंसर का उपचार

स्माल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी) के विकल्पों में सर्जरी, कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा भी शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में, कैंसर इतना बढ़ चुका होता है कि सर्जरी विकल्प नहीं रह जाती।

कुछ मरीज जिनका लंग कैंसर बहुत बढ़ चुका होता है, वह कोई भी इलाज न लेना चुनते हैं। ऐसे मरीजों के लिए डॉक्टर कैंसर का इलाज करने के बजाये कैंसर के लक्षणों के उपचार पर ध्यान केंद्रित करते हैं ताकि मरीज के जीवन की गुणवत्ता कुछ बढ़ सके।

(और पढ़ें - फेफड़ों के कैंसर का ऑपरेशन)

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) की जटिलताएं - Lung Cancer Complications in Hindi

फेफड़े के कैंसर की जटिलतायें

फेफड़े के कैंसर से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे –

  1. सांस फूलना – यदि कैंसर मुख्य वायुमार्ग को अवरुद्ध कर देता है तो फेफड़ों के कैंसर से ग्रसित लोग श्वास की तकलीफ का अनुभव कर सकते हैं। लंग कैंसर से फेफड़ों के आसपास तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे कारण सांस लेते समय फेफड़ों को पूरी तरह से फैलने में कठिनाई होती है। 
  2. खांसी में खून आना – फेफड़े के कैंसर से वायुमार्ग में रक्तस्राव हो सकता है, जो आपकी खाँसी में आने वाले रक्त (हिमाप्टिसिस) का कारण बन सकता है। कभी-कभी रक्तस्राव गंभीर हो सकता है। रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए उपचार उपलब्ध हैं।
  3. दर्द – उच्च चरण में यह कैंसर जो फेफड़े के अंदरूनी भागों या शरीर के किसी अन्य हिस्से जैसे कि हड्डी में फैलकर दर्द का कारण बन सकता है। अगर आपको दर्द होता है, तो अपने चिकित्सक को बताएं। प्रारंभ में दर्द हल्का और आंतरायिक (intermittent)  हो सकता है, लेकिन धीरे धीरे स्थिर हो सकता है। दवाएं, विकिरण चिकित्सा (radiation therapy) और अन्य उपचार आपके लिए लाभदायक हो सकते हैं।
  4. सीने में तरल पदार्थ का जमा होना –  लंग कैंसर के कारण छाती की गुहा में प्रभावित फेफड़ों के आस-पास मौजूद स्थान में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। छाती में एकत्र होने वाले इस द्रव के कारण रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इसके लिए उपचार उपलब्ध हैं, जिसमें आपके सीने में जमा हुए द्रव को निकाल दिया जाता है और इस समस्या के दोबारा होने का खतरा भी कम हो जाता है। 
  5. शरीर के अन्य भागों में फैलने वाला कैंसर (मेटास्टेसिस) फेफड़े का कैंसर अक्सर शरीर के अन्य भागों, जैसे कि मस्तिष्क और हड्डियों में फैलता है। अन्य भागों में फैला हुआ कैंसर दर्द, मतली, सिर दर्द या अन्य लक्षण पैदा करता है। ये लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर से कौन सा अंग प्रभावित हुआ है। फेफड़ों के कैंसर के अन्य अंगों में फैल जाने के बाद आमतौर पर इसका उपचार नहीं किया जा सकता। इसके लिए किये जाने वाले उपचार, रोग के लक्षणों को कम करने और रोगी को लंबे समय तक जीवित रखने में सहायता करते हैं।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के प्रकार - Types of Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर के कितने प्रकार होते हैं?

फेफड़ों के कैंसर के दो मुख्य प्रकार हैं। माइक्रोस्कोप से देखे जाने पर लंग कैंसर की कोशिकाएं बड़ी या छोटी दिखाई देती हैं। इसके आधार पर ही लंग कैंसर के प्रक्कर का नाम रखा गया है -

  • स्माल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी) - स्माल सेल लंग कैंसर लगभग हमेशा ज्यादा धूम्रपान करने वालों में होता है।
  • नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी) - गैर-छोटे सेल फेफड़ों के कैंसर कई प्रकार के फेफड़ों के कैंसर के लिए एक छाता शब्द है। गैर-छोटे सेल फेफड़ों के कैंसर में स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा, एडेनोकार्सिनोमा और बड़े सेल कार्सिनोमा शामिल हैं।

एनएससीएलसी फेफड़ों के कैंसर का अधिक सामान्य रूप है - 80-85% लंग कैंसर के मामलों एनएससीएलसी के होते हैं।

दोनों तरह के लंग कैंसर का इलाज थोड़ा अलग होता है। इसलिए इलाज शुरू करने से पहले डॉक्टर यह जांच करेंगे कि मरीज को किस तरह का लंग कैंसर है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के चरण - Stages of Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर के कितने स्टेज होते हैं?

कैंसर के स्तर का पता लगाने वाली सबसे साधारण विधि को टीएनएम प्रणाली (TNM Syestem) कहा जाता है। टी (1-4) प्राथमिक ट्यूमर के आकार और प्रत्यक्ष विस्तार को इंगित करता है। एन (0-3) इंगित करता है कि कैंसर लसीका नोड्स (लिम्फ नोड्स; lymph nodes) के पास कितनी हद तक फैल गया है। एम (0-1) इंगित करता है कि कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैला है या नहीं। उदाहरण के लिए एक छोटा ट्यूमर जो लसीका नोड्स और दूर के अंगों में नहीं फैला हो, उसे टी1एन0एम0 (T1N0M0) के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है।

नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर के चरण 

नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर के लिए टीएनएम विवरण चरणों के सरल वर्गीकरण में मदद करते हैं। इन चरणों को 1 से 4 तक लेबल किया जाता है। छोटी संख्याएँ शुरुआती चरण की ओर संकेत करती है, जहां कैंसर कम फैला होता है। 

  1. स्टेज 1 तब होता है, जब ट्यूमर केवल एक फेफड़े में पाया जाता है और लिम्फ नोड्स में नहीं। 
  2. स्टेज 2 तब होता है, जब कैंसर संक्रमित फेफड़ों के आसपास मौजूद लिम्फ नोड्स में फैलता है।
  3. स्टेज 3 को दो भागों में विभाजित किया जाता है - 
    1. स्टेज 3ए तब होता है, जब संक्रमित फेफड़े की तरफ स्थित श्वास नली, सीने की दीवार और डायाफ्राम के आसपास लसीका नोड्स में कैंसर फैल जाता है।
    2. स्टेज 3बी तब होता है, जब कैंसर दूसरे फेफड़े या गर्दन में मौजूद लिम्फ नोड्स में फैल जाता है।
  4. स्टेज 4 तब होता है, जब कैंसर पूरे शरीर और फेफड़ों के अन्य भागों में फैल जाता है।

स्मॉल सेल लंग कैंसर के चरण 

स्मॉल सेल लंग कैंसर के दो चरण होते हैं – सीमित और व्यापक।

  1. सीमित स्तर में ट्यूमर एक फेफड़े में और उसके आसपास उपस्थित लिम्फ नोड्स में मौजूद होता है।
  2. व्यापक स्तर पर ट्यूमर दूसरे फेफड़े के साथ शरीर के अन्य अंगों को भी संक्रमित कर देता है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) में परहेज़ - What to avoid during Lung Cancer in Hindi?

इन चीज़ों से बचें –

  • धूम्रपान फेफड़े के कैंसर का खतरा आपके द्वारा हर दिन ज़्यादा संख्या में सिगरेट का सेवन करने और धूम्रपान किए गए वर्षों की संख्या के साथ बढ़ता है। किसी भी उम्र में धूम्रपान छोड़ने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।
  • सेकंड हैंड स्मोक – अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, फिर भी आपको फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।  इसका कारण है 'सेकेंडहैंड स्मोक' यानि किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किये गए धूम्रपान का धुआं आपके अंदर जाना। 
  • शराब शराब से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Lung Cancer in Hindi?

लंग कैंसर के रोगियों को इन पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए –

  • विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ विटामिन सी युक्त फल और सब्ज़ियाँ
  • कैरोटीनॉयड युक्त भोजन – यह चमकीली हरी, पीली, लाल और नारंगी रंग की सब्ज़ियों में पाया जाता है।
  • सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थ – इसमें ब्राजील नट्स, सूरजमुखी और तिल के बीज, मछली और समुद्री भोजन, अंडे, मांस और साबुत अनाज शामिल हैं।
  • करक्यूमिन (Curcumin) – यह भारतीय मसाले हल्दी का ही एक रूप होता है और अधिकतर करी में उपयोग किया जाता है। 
  • सोया युक्त भोजन – इसमें टोफू, टेम्पे (tempeh), तामारी (सोया सॉस) और सोया दूध शामिल हैं।
  • ओमेगा 3 इसमें ठंडे पानी में पायी जाने वाली मछलियाँ, जैसे – ट्यूना, सैल्मन, सार्डिन, हेरिंग और उनका तेल; चिया और सन के बीज और कोल्ड प्रेस प्रक्रिया द्वारा निकला गया इनका तेल शामिल है। 
  • विटामिन डी3 –  फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ (ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमे पोषक तत्वों को मिलाया जाता है), सूरज का प्रकाश या इसके पूरक (सप्लीमेंट्स)।
  • ग्रीन टी – ग्रीन टी में पॉलीफेनोल नामक कैंसररोधी तत्व होता है, इसलिए इसे दिन में दो बार नियमित रूप से पीना चाहिए।


संदर्भ

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फेफड़ों का कैंसर के डॉक्टर

David K Simson David K Simson ऑन्कोलॉजी
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फेफड़ों का कैंसर की दवा - Medicines for Lung Cancer in Hindi

फेफड़ों का कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

फेफड़ों का कैंसर की ओटीसी दवा - OTC Medicines for Lung Cancer in Hindi

फेफड़ों का कैंसर के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

फेफड़ों का कैंसर पर आम सवालों के जवाब

सवाल एक साल के ऊपर पहले

क्या ऐसा हो सकता है कि किसी व्यक्ति को फेफड़ों का कैंसर हो और उसे इस बारे में पता भी न हो?

Dr. Kuldeep Meena MBBS, MD , श्वास रोग विज्ञान

जी हां, ऐसा हो सकता है। अधिकतर मामलों में फेफड़ों के कैंसर का पता तब तक नहीं चलता जब तक कि यह शरीर में फैल नहीं जाता, जबकि कुछ लोगों को लंग कैंसर के कुछ शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं जैसे सीने में दर्द, खांसी और सांस लेने में तकलीफ होना। इन लक्षणों के दिखाई देने के बाद आप इसकी जांच के लिए डॉक्टर के पास जाते हैं, तो तब यह पहली स्टेज पर हो सकता है और इस स्थिति में इसका इलाज काफी प्रभावी होता है।

सवाल एक साल के ऊपर पहले

कुछ दिनों से मुझे कंधे में दर्द और सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। आज मैंने डॉक्टर को दिखाया था, उन्होंने जांच के बाद बताया कि मुझे लंग कैंसर है और यह दूरसी स्टेज पर है। मैं सुबह से ही बहुत डरा हुआ हूं। क्या कैंसर की वजह से मैं मर भी सकता हूं?

Dr. Prakash kumar MBBS , सामान्य चिकित्सा

जी हां, फेफड़ों के कैंसर की वजह से व्यक्ति की जान जा सकती है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि लंग कैंसर कौन-सी स्टेज पर है। अगर लंग कैंसर पहली स्टेज पर होता है, तो इसका मतलब है कि सिर्फ एक फेफड़े में ट्यूमर पाया गया है, लिम्फ नोड्स में नहीं। दूसरी स्टेज पर कैंसर संक्रमित फेफड़ों के आसपास मौजूद लिम्फ नोड्स में फैल जाता है। तीसरी स्टेज पर संक्रमित फेफड़े की तरफ स्थित श्वास नली और दूसरे फेफड़े या गर्दन में मौजूद लिम्फ नोड्स में फैल जाता है। चौथी स्टेज जो कि सबसे घातक होती है, इसमें कैंसर पूरे शरीर और फेफड़ों के अन्य भागों में फैल जाता है।

इस स्टेज पर इसे ठीक नहीं किया जा सकता। चौथी स्टेज के लंग कैंसर में मरीज के लक्षणों को कम करने के लिए दवा दी जाती है, ताकि वह लंबे समय तक जी सके। अभी आपको दूसरे स्टेज का लंग कैंसर है, जिसका इलाज कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी और दवा की मदद से किया जा सकता है। आप नियमित रूप से डॉक्टर से सलाह लेते रहें।

सवाल एक साल के ऊपर पहले

मेरे भाई को फेफड़ों का कैंसर हो गया है। हम उसका इलाज करवा रहे हैं? मैं जानना चाहता हूं कि क्या लंग कैंसर बहुत घातक है?

Dr. Mayank Yadav MBBS , सामान्य चिकित्सा

डाना-फार्बर कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, फेफड़े के कैंसर से ग्रस्त लगभग 25 प्रतिशत लोगों को पीठ में दर्द की समस्या रहती है। जब लोग इसके लिए चेकअप करवाने जाते हैं, तो सबसे पहले उन्हें पीठ में दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। पीठ में दर्द फेफड़े के कैंसर या किसी बीमारी के फैलने का संकेत हो सकता है।

सवाल एक साल के ऊपर पहले

मेरे भाई को फेफड़ों का कैंसर हो गया है। हम उसका इलाज करवा रहे हैं? मैं जानना चाहता हूं कि क्या लंग कैंसर बहुत घातक है?

Dr. Ramraj Meena MBBS , सामान्य चिकित्सा

जी हां, फेफड़ों का कैंसर बहुत ही जानलेवा है। महिला और पुरुष दोनों में सबसे ज्यादा होने वाला आम कैंसर 'फेफड़ों का कैंसर' है। कैंसर का पता लगने के बाद भी आधे से ज्यादा लोगों की मौत लंग कैंसर की वजह से हो जाती है। ग्लोबोकान (GLOBOCAN) 2012 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सभी आयु और दोनों लिंगों में फेफड़ों के कैंसर की अनुमानित घटनाएं 70,275 थीं।

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