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लंग कैंसर क्या होता है?

फेफड़ों की कोशिकाओं का अनियंत्रित प्रकार से बढ़ना फेफड़ों के कैंसर का कारण होता है। जैसे-जैसे कोशिकाओं की संख्या बढ़ती है, वे एक ट्यूमर बना देती हैं।

फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) सामान्य रूप से होने वाले कैंसर और दुनिया भर में कैंसर से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण है। कैंसर के सभी नए मामलों में से 13 प्रतिशत और दुनिया भर में कैंसर से संबंधित 19 प्रतिशत मृत्यु के लिए फेफड़े का कैंसर ज़िम्मेदार है। अधिकतर मामलों में फेफड़े के कैंसर का प्रमुख कारण सिगरेट पीना पाया गया है। कार्सिनोजेन्स (carcinogens) सिगरेट के धुएं में पाए जाने वाले रसायन होते हैं, जो लंग कैंसर के लिए उत्तरदायी होते हैं। हालांकि, आजकल लंग कैंसर ज़्यादातर उन लोगों में भी देखा जा रहा है, जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया है।

लंग कैंसर को मुख्य रूप से दो भागो में बाँटा गया है – स्मॉल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी; SCLC) और नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी; NSCLC)। एससीएलसी, नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर की तुलना में ज़्यादा आक्रामक होता है। एनएससीएलसी फेफड़ों के कैंसर का अधिक सामान्य रूप है - 80-85% लंग कैंसर के मामलों एनएससीएलसी के होते हैं।

लंग कैंसर का सबसे सामान्य लक्षण खाँसी है, जो धीरे धीरे गंभीर हो जाती है और ठीक नहीं होती है। इसके अन्य लक्षणों में निमोनिया या ब्रांगकाइटिस (bronchitis) जो बार-बार होता रहता है, वज़न कम होना, भूख में कमी होना, थकान, सांस लेने में तकलीफ, आवाज़ का बदलना शामिल हैं। (और पढ़ें – थकान दूर करने के लिए क्या खाएं?)

भारत में लंग कैंसर

ग्लोबोकान (GLOBOCAN) 2012 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सभी आयु और दोनों लिंगों में फेफड़ों के कैंसर की अनुमानित घटनायें  70,275 थीं। घटना दर के संदर्भ में ब्रेस्ट कैंसरसर्वाइकल कैंसर और मुंह के कैंसर के बाद फेफड़ों का कैंसर, विभिन्न प्रकार के कैंसर (नॉन-मोलेनोमा स्किन कैंसर को छोड़कर) के बीच चौथे स्थान पर था। कैंसर की घटना के मामले में पुरुषों में लंग कैंसर दूसरे स्थान पर था, जबकि महिलाओं में छठे स्थान पर था।

एक दशक पहले तक, सभी फेफड़ों के कैंसर के रोगियों में से 10% से कम धूम्रपान नहीं करते थे। यह प्रतिशत अब बढ़कर लगभग 20% तक चला गया है, जो काफी अधिक है। प्रदूषण का बढ़ता हुआ स्तर इसका एक कारण हो सकता है।

भारत में फेफड़े के कैंसर होने पर जीवित रहने का दर (survival rate) क्या है?

यह कैंसर धीरे धीरे व्यक्ति की जान ले लेता है, इसलिए इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है। इसका मुख्य कारण धूम्रपान है। प्रारंभिक स्तर पर ही इस रोग का निदान करने से व्यक्ति के जीवित रहने की संभावना बढ़ सकती है। केवल 15% फेफड़े के कैंसर का शुरुआती स्तर पर निदान किया जाता है, जहां 5 साल की जीवित रहने की दर लगभग 54% है। फेफड़े के कैंसर के लगभग 70% रोगी शुरुआती चरण में किये गए निदान के बाद कम से कम एक वर्ष तक जीवित रह सकते हैं। ट्यूमर के अन्य अंगों में फैल जाने पर अर्थात उच्च चरण / चरण 4 में पाँच साल जीवित रहने का दर घटकर केवल 4 प्रतिशत रह जाता है। (और पढ़ें – धूम्रपान छोड़ने के सरल तरीके)

  1. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के प्रकार - Types of Lung Cancer in Hindi
  2. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के चरण - Stages of Lung Cancer in Hindi
  3. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के लक्षण - Lung Cancer Symptoms in Hindi
  4. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के कारण - Lung Cancer Causes in Hindi
  5. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) से बचाव - Prevention of Lung Cancer in Hindi
  6. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) का परीक्षण - Diagnosis of Lung Cancer in Hindi
  7. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) का इलाज - Lung Cancer Treatment in Hindi
  8. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के जोखिम और जटिलताएं - Lung Cancer Risks & Complications in Hindi
  9. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) में परहेज़ - What to avoid during Lung Cancer in Hindi?
  10. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Lung Cancer in Hindi?
  11. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) की दवा - Medicines for Lung Cancer in Hindi
  12. लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के डॉक्टर

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के प्रकार - Types of Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर के प्रकार

माइक्रोस्कोप के द्वारा कैंसर कोशिका के आकार और बनावट के आधार पर फेफड़े के कैंसर को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जा सकता है – नॉन स्मॉल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी) और स्मॉल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी)। नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर 80% फेफड़ों के कैंसर का कारण है, जबकि शेष 20% के लिए स्मॉल सेल लंग कैंसर ज़िम्मेदार है।

1. नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (एनएससीएलसी) (Non Small Cell Lung Cancer - NSCLC)

एनएससीएलसी (NSCLC) को आगे चार अलग-अलग प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है, जिनमें से प्रत्येक के उपचार के लिए अलग-अलग विकल्प हैं –

  1. स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा (Squamous cell carcinoma) या एपिडर्मोइड कार्सिनोमा (epidermoid carcinoma) – यह एनएससीएलसी का सबसे सामान्य प्रकार और पुरुषों में फेफड़ों के कैंसर का सबसे आम प्रकार है। इसका निर्माण ब्रोन्कियल नलियों (bronchial tubes) की अंदरूनी सतह में होता है।
  2. ग्रंथिकर्कटता (Adenocarcinoma) – यह महिलाओं और धूम्रपान न करने वाले लोगों में होने वाले फेफड़ों के कैंसर का सबसे सामान्य प्रकार है। फेफड़ों में उपस्थित बलगम का उत्पादन करने वाली ग्रंथियों में एडेनोकार्सिनोमा (adenocarcinoma) का निर्माण होता है।
  3. लार्ज सेल अनडिफ्रेंशिएट कार्सिनोमा (Large-cell undifferentiated carcinoma) – तेज़ी से बढ़ते कैंसर में फेफड़ों के बाहरी किनारों या सतह के पास लार्ज सेल अनडिफ्रेंशिएट कार्सिनोमा विकसित होता है।  
  4. ब्रोन्कियोलवीओलार कार्सिनोमा (Bronchioalveolar carcinoma) –  फेफड़े के कैंसर का यह प्रकार, एडिनोकैरिनोमा (adenocarcinoma) का एक दुर्लभ प्रकार होता है, जो फेफड़ों की वायु थैलियों के पास बनता है। 

2. स्मॉल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी) (Small Cell Lung Cancer - SCLC)

स्मॉल सेल लंग कैंसर (एससीएलसी) की पहचान छोटी कोशिकाओं (cells) द्वारा होती है। ये कोशिकाएं बहुत शीघ्रता से अपनी संख्या में वृद्धि करती हैं और बड़े ट्यूमर बनाती हैं, जो पूरे शरीर में फैल जाते हैं। एससीएलसी लगभग सभी मामलों में धूम्रपान के कारण होता है। लगभग 10% से 15% फेफड़ों के कैंसर एससीएलसी के होते हैं।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के चरण - Stages of Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर के चरण

कैंसर के स्तर का पता लगाने वाली सबसे साधारण विधि को टीएनएम प्रणाली (TNM Syestem) कहा जाता है। टी (1-4) प्राथमिक ट्यूमर के आकार और प्रत्यक्ष विस्तार को इंगित करता है। एन (0-3) इंगित करता है कि कैंसर लसीका नोड्स (लिम्फ नोड्स; lymph nodes) के पास कितनी हद तक फैल गया है। एम (0-1) इंगित करता है कि कैंसर शरीर के अन्य अंगों में फैला है या नहीं। उदाहरण के लिए एक छोटा ट्यूमर जो लसीका नोड्स और दूर के अंगों में नहीं फैला हो, उसे टी1एन0एम0 (T1N0M0) के रूप में प्रदर्शित किया जा सकता है।

नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर के चरण 
नॉन-स्माल सेल लंग कैंसर के लिए टीएनएम विवरण चरणों के सरल वर्गीकरण में मदद करते हैं। इन चरणों को 1 से 4 तक लेबल किया जाता है। छोटी संख्याएँ शुरुआती चरण की ओर संकेत करती है, जहां कैंसर कम फैला होता है। 

  1. चरण 1 तब होता है, जब ट्यूमर केवल एक फेफड़े में पाया जाता है और लिम्फ नोड्स में नहीं। 
  2. चरण 2 तब होता है, जब कैंसर संक्रमित फेफड़ों के आसपास मौजूद लिम्फ नोड्स में फैलता है।
  3. चरण 3 को दो भागों में विभाजित किया जाता है - 
    1. चरण 3ए तब होता है, जब संक्रमित फेफड़े की तरफ स्थित श्वास नली, सीने की दीवार और डायाफ्राम के आसपास लसीका नोड्स में कैंसर फैल जाता है।
    2. चरण 3बी तब होता है, जब कैंसर दूसरे फेफड़े या गर्दन में मौजूद लिम्फ नोड्स में फैल जाता है।
  4. चरण 4 तब होता है, जब कैंसर पूरे शरीर और फेफड़ों के अन्य भागों में फैल जाता है।

स्मॉल सेल लंग कैंसर के चरण 
स्मॉल सेल लंग कैंसर के दो चरण होते हैं – सीमित और व्यापक।

  1. सीमित स्तर में ट्यूमर एक फेफड़े में और उसके आसपास उपस्थित लिम्फ नोड्स में मौजूद होता है।
  2. व्यापक स्तर पर ट्यूमर दूसरे फेफड़े के साथ शरीर के अन्य अंगों को भी संक्रमित कर देता है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के लक्षण - Lung Cancer Symptoms in Hindi

फेफड़ों के कैंसर के संकेत और लक्षण

फेफड़ों के कैंसर के लक्षण अलग-अलग होते हैं और इस बात पर निर्भर करते हैं कि ट्यूमर कहाँ और कितना फैल चुका है। फेफड़ों के कैंसर के संकेतों को हमेशा आसानी से पहचाना नहीं जा सकता है। कुछ मामलों में लंग कैंसर में दर्द या अन्य लक्षण भी नहीं पाए जाते हैं।

फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित व्यक्ति में निम्नलिखित लक्षण देखे जा सकते हैं –

1. कोई लक्षण न होना – फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित लगभग 25% लोगों में सबसे पहले कैंसर की पहचान नियमित रूप से करवाए गए छाती के एक्स-रे या सीटी स्कैन द्वारा एक छोटे घाव (जिसे 'कॉइन लेशन' (coin lesion) कहा जाता है) से की जाती है। द्विआयामी एक्स- रे (two-dimensional X-ray) या सीटी स्कैन द्वारा परीक्षण करने पर ये गोल ट्यूमर एक सिक्के की तरह लगता है। जिन रोगियों में पहली बार लंग काकनेर का निदान कॉइन लेशन से किया जाता है, उनमें लंग कैंसर पाए जाने के समय अक्सर कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। 

2. कैंसर से संबंधित लक्षण – फेफड़े और उसके आसपास के ऊतकों पर होने वाले कैंसर के आक्रमण से श्वसन प्रक्रिया में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसमें खाँसी, सांस की तकलीफ, ज़ोर ज़ोर से सांस लेना, सीने में दर्द और खाँसी के साथ रक्त निकलना (हेमोप्टेसिस; hemoptysis) जैसे लक्षण हो सकते हैं। यदि कैंसर तंत्रिकाओं (nerves) पर हमला करता है, तो कंधे में भयंकर दर्द होता है। यह दर्द कंधे से लेकर बांह को प्रभावित करता है या इसके कारण स्वरतंत्री (vocal cords) भी पैरालाइज हो सकती हैं। कैंसर से प्रभावित भोजन नली द्वारा निगलने में कठिनाई (dysphagia) हो सकती है। यदि वायुमार्ग ज़्यादा गंभीर रूप से अवरुद्ध हो जाता है तो फेफड़ों का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है और अवरुद्ध क्षेत्र में संक्रमण (फोड़ा, निमोनिया) हो सकता है।

3. मेटास्टेसिस से सम्बन्धित लक्षण  मेटास्टेसिस यानि कैंसर जिस अंग से शुरू हुआ था, उससे बढ़कर दूसरे अंगों तक पहुँच चुका है। लंग कैंसर हड्डियों में फैलकर उनके जोड़ों में असहनीय दर्द पैदा कर सकता है। मस्तिष्क में कैंसर के फैलने पर कई न्यूरोलॉजिक लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जिनमें धुंधली दृष्टि, सिर दर्द, दौरे या स्ट्रोक के लक्षण जैसे कि शरीर के कुछ हिस्सों में होने वाली सनसनी का कम या खत्म हो जाना शामिल हैं।

4. पेरानियोप्लास्टिक लक्षण –  फेफड़े के कैंसर अक्सर लक्षणों के साथ होते हैं, जो ट्यूमर कोशिकाओं द्वारा हार्मोन जैसे पदार्थों के उत्पन्न होने से विकसित होते हैं। ये पेरानियोप्लास्टिक लक्षण सबसे ज़्यादा एससीएलसी (SCLC) में पाए जाते हैं, लेकिन किसी ट्यूमर के प्रकार के साथ भी देखे जा सकते हैं।

5. गैरविशिष्ट लक्षण – गैरविशिष्ट लक्षणों को कई प्रकार के कैंसर में देखा जाता है, जिनमें लंग कैंसर भी शामिल है। इन लक्षणों में वजन घटना, कमजोरी और थकान शामिल है। मनोवैज्ञानिक लक्षण, जैसे – अवसाद और मनोदशा में होने वाले परिवर्तन भी आम हैं।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के कारण - Lung Cancer Causes in Hindi

लंग कैंसर के कारण

सिगरेट का सेवन फेफड़े के कैंसर का सबसे महत्वपूर्ण कारण है। 1950 के दशक में हुई रिसर्च ने इस सम्बन्ध को स्पष्ट रूप से स्थापित कर दिया था। यहाँ तक कि दूसरे व्यक्ति द्वारा किए गए धूम्रपान के संपर्क में आने से भी कोशिकाओं को नुकसान पहुँच सकता है और कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। 

सिगरेट के धुएं में 4,000 से अधिक रसायन शामिल होते हैं, जिनमें से कई कैंसर के लिए ज़िम्मेदार हैं। ऐसे व्यक्ति की तुलना में जिसने कभी धूम्रपान न किया हो, प्रतिदिन सिगरेट के एक से अधिक पैक का धूम्रपान करनेवाले व्यक्ति में फेफड़ों का कैंसर होने की सम्भावना 20-25 गुना ज्यादा होती है। एक बार व्यक्ति धूम्रपान छोड़ देता है, तो उसको लंग कैंसर होने का जोखिम भी धीरे-धीरे कम हो जाता है। धूम्रपान छोड़ने के करीब 15 साल बाद, फेफड़ों के कैंसर का खतरा किसी व्यक्ति में उतना ही कम हो जाता है, जितना कभी धूम्रपान न करने वाले व्यक्ति में होता है।

अधिकतर कैंसरजनित तत्वों (कार्सिनोजेन्स) का शरीर के अंदर जाना फेफड़े के कैंसर का मूल कारण है। कार्सिनोजेन्स पदार्थों का एक वर्ग है जो सीधे डीएनए (DNA) को हानि पहुँचाता है और कैंसर को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है। धूम्रपान के अलावा एस्बेस्टस, आर्सेनिक, गामा और एक्स-रे, और कार का ईंधन जलने से निकलने वाला धुआं – ये सभी कार्सिनोजेन्स के उदाहरण हैं।

फेफड़े के कैंसर के अन्य कारण भी हैं, लेकिन धूम्रपान के द्वारा शरीर के अंदर जाने वाले कैंसरजनित तत्वों की तुलना में ये बहुत कम महत्वपूर्ण हैं –

  1. वायु प्रदूषण – हम जानते हैं कि वायु प्रदूषण लंग कैंसर का कारण बन सकता है। यह जोखिम वायु प्रदूषण के स्तर पर निर्भर करता है, जिसका आप नियमित रूप से सामना करते हैं।
  2. फेफड़ों के पूर्व रोग – फेफड़ों के पूर्व रोग लंग कैंसर का खतरा बढ़ा सकते हैं। ये जोखिम आमतौर पर धूम्रपान करने वालों में अधिक होते हैं, उदाहरण के लिए टीबी (क्षय रोग) और सीओपीडी (COPD)।
  3. फेफड़ों के कैंसर का पारिवारिक इतिहास – यदि आपके किसी करीबी रिश्तेदार (जैसे कि माता-पिता या भाई-बहन) को लंग कैंसर है, तो आपको भी फेफड़ों का कैंसर होने का खतरा ज़्यादा है। 
  4. पूर्व रेडियोथेरेपी उपचार – कुछ अन्य प्रकार के कैंसर के लिए करवाई गयी रेडियोथेरेपी फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकती है।
  5. कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता  – एचआईवी एड्स और अंग प्रत्यारोपण के बाद ली जाने वाली दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमज़ोर कर देती हैं। एचआईवी या एड्स (AIDS) से ग्रस्त लोगों में फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) से बचाव - Prevention of Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर की रोकथाम

लंग कैंसर की रोकथाम मुख्य रूप से धूम्रपान छोड़ने पर केंद्रित है।

ऐसे व्यक्ति जो धूम्रपान की आदत को छोड़ना चाहते हैं, उनके लिए कई उपाय उपलब्ध हैं। इनमें निकोटीन रिप्लेसमेंट थेरेपी आधारित च्यूइंग गम, चिकठसक से परामर्श और समर्थन समूह शामिल हैं। ऐसे व्यक्ति जो धूम्रपान छोड़ना नहीं चाहते, लेकिन उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जाता है, अगर वे इसे कभी छोड़ भी देते हैं तो उनकी वापस धूम्रपान शुरू करने की संभावना काफ़ी अधिक होती है। तो सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप धूम्रपान छोड़ना चाहें। (और पढ़ें - धूम्रपान छोड़ने के लिए घरेलू उपचार)

निष्क्रिय तंबाकू धुआं जैसे कि सेकेंडहैंड स्मोक भी फेफड़ों के कैंसर का कारण होती है। हमें इससे बचना चाहिए। 

घर और ऑफिस में रेडॉन गैस के परीक्षण के लिए रेडॉन डिटेक्शन किट का इस्तेमाल करें। विश्वभर में प्रति वर्ष 10,000 से अधिक फेफड़े के कैंसर से होने वाली मौतों का कारण रेडॉन गैस है। इसके साथ ही यह गैस धूम्रपान न करने वाले लोगों में फेफड़े के कैंसर का एक प्रमुख कारण है।

इस महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्या के संबंध में स्क्रीनिंग की सिफारिशों में हाल ही में कुछ बदलाव आये हैं। 55 से 77 वर्ष की आयु वाले वयस्कों जिन्होंने अपने जीवन में बहुत सिगरेट पी हो या जिन्होंने पिछले 15 सालों से धूम्रपान करना छोड़ दिया है, उन्हें हर वर्ष सीटी स्कैन से फेफड़ों की जांच ज़रूर करानी चाहिए (कृपया अपने डॉक्टर से इसके बारे में चर्चा करें)। अमेरिका में ये साबित किया गया है कि जो व्यक्ति हर वर्ष छाती का एक्स-रे करवाते हैं, उनमें 15% से 20% तक मरने के जोखिम को कम किया जा सकता है।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) का परीक्षण - Diagnosis of Lung Cancer in Hindi

फेफड़ों के कैंसर का निदान

चिकित्सक फेफड़ों के कैंसर का निदान करने के लिए लक्षणों के साथ-साथ कई अन्य प्रक्रियाओं का भी प्रयोग करते  हैं। आम इमेजिंग तकनीकों में छाती का एक्स-रे, ब्रोन्कोस्कोपी (एक छोर पर कैमरे के साथ एक पतली ट्यूब), सीटी स्कैन, एमआरआई (MRI) स्कैन और पीईटी स्कैन शामिल हैं।

हालांकि उपरोक्त नैदानिक तकनीकें महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करती हैं, लेकिन कैंसर की कोशिकाओं को निकालकर माइक्रोस्कोप द्वारा उनकी जाँच करना फेफड़ों के कैंसर का पता लगाने का एकमात्र सटीक तरीका है। इस प्रक्रिया को बायोप्सी (Biopsy) कहा जाता है।

यदि बायोप्सी फेफड़ों के कैंसर की पुष्टि करता है, तो चिकित्सक यह निर्धारित करेगा कि यह नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर है या स्मॉल सेल लंग कैंसर। चिकित्सक द्वारा रोगी के संपूर्ण शरीर की जाँच, छाती की जाँच और थूक के साथ निकलने वाले रक्त का विश्लेषण किया जायेगा। ये सभी परिक्षण इस बात का पता लगाने में मदद करते हैं कि ट्यूमर कहाँ पर है और इसके द्वारा कौन से अतिरिक्त अंग प्रभावित हो सकते हैं।

परीक्षणों के बाद कैंसर के शरीर में फैलने की स्थिति के आधार पर कैंसर विशेषज्ञ रोग का चरण निर्धारित करेगा। रोग का चरण निर्धारित करता है कि उपचार के लिए कौन-से विकल्प प्रयोग किये जायेंगे।

फेफड़ों के कैंसर का निदान करने के लिए टेस्ट

फेफड़ों के कैंसर का निदान करने के लिए निम्न परीक्षण सामान्यतः उपयोग किए जाते हैं –

  1. कम्पलीट ब्लड काउंट (सीबीसी; CBC)किसी भी उपचार के शुरू होने से पहले सीबीसी (CBC) द्वारा आपके समग्र स्वास्थ्य के बारे में कुछ बुनियादी जानकारी प्राप्त की जाती है।
  2. ब्लड केमिस्ट्री परीक्षणब्लड  केमिस्ट्री परीक्षणों का उपयोग यह देखने के लिए किया जाता है कि फेफड़ों का कैंसर शरीर के अन्य भागों में फैल गया है या नहीं।
  3. एक्स-रे (X-Ray) – छाती का एक्स-रे फेफड़ों की समस्याओं, जैसे – ट्यूमर या फेफड़ों में होने वाले बदलावों को देखने के लिए किया गया पहला इमेजिंग परीक्षण होता है।
  4. सीटी स्कैन (CT Scan)सीटी स्कैन का उपयोग फेफड़े के ट्यूमर के स्थान, आकार और बनावट को दिखाने के लिए किया जाता है। चेस्ट में मौजूद कोई लिम्फ नोड्स जो सामान्य आकार से बड़े हों, ट्यूमर शरीर के अन्य अंगों में तो नहीं फैल गया और बायोप्सी को निर्देशित करने के लिए भी सीटी स्कैन का उपयोग किया जाता है। 
  5. पीईटी स्कैन (PET Scan) – पीईटी स्कैन का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि फेफड़ों का  कैंसर शरीर में कितना फैल गया है। इस प्रक्रिया में पूरे शरीर की स्कैनिंग होती है।
  6. एमआरआई (MRI) –  एमआरआई का उपयोग यह जानने के लिए किया जाता है कि कैंसर मस्तिष्क में फैल गया है या नहीं।
  7. अल्ट्रासाउंड (Ultrasound) – इसका उपयोग फेफड़ों के आसपास एकत्र होने वाले तरल पदार्थ के बारे में जानने के लिए किया जाता है। एंडोस्कोपिक प्रक्रियाओं के दौरान अल्ट्रासाउंड का उपयोग बायोप्सी को निर्देशित करने के लिए भी किया जाता है।
  8. ब्रोंकोस्कोपी और बायोप्सी (Biopsy) – यदि सीटी स्कैन से पता चलता है कि आपकी छाती के मध्य भाग में कैंसर हो सकता है, तो आपको ब्रोंकोस्कोपी करवानी होगी।  ब्रोंकोस्कोपी एक प्रक्रिया है, जिसमे डॉक्टर आपके फेफड़ों के अंदर से कोशिकाओं के एक छोटे नमूने को निकाल लेता है (जिसे बायोप्सी कहा जाता है)।
  9. थोरैकोस्कोपी (Thoracoscopy) – थोरैकोस्कोपी एक प्रक्रिया है, जिसमें चिकित्सक आपकी छाती के किसी विशेष क्षेत्र की जांच करता है और उसमे मौजूद ऊतक और तरल के नमूने लेता है।
  10. मेडिएस्टिनस्कोपी (Mediastinoscopy) –  मेडियैस्टिनस्कोपी प्रक्रिया में दौरान डॉक्टर आपकी छाती के मध्य फेफड़ों के बीच के क्षेत्र की जाँच करता है (mediastinum)।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) का इलाज - Lung Cancer Treatment in Hindi

लंग कैंसर का उपचार

चिकित्सक कई कारकों के आधार पर कैंसर के उपचार की योजना बनाते हैं, जैसे – आपका संपूर्ण स्वास्थ्य, आपके कैंसर के प्रकार तथा चरण और आपकी प्राथमिकताएँ। आमतौर पर लंग कैंसर के उपचार के एक से अधिक विकल्प इस्तेमाल किए जाते हैं, जिनमें सर्जरी, कीमोथेरेपी, विकिरण थेरेपी (radiation therapy) या लक्षित दवा उपचार (targeted drug therapy) शामिल हैं। 

नॉन-स्मॉल सेल लंग कैंसर (NSCLC) का उपचार इनके द्वारा किया जा सकता है –

  1. सर्जरी
  2. कीमोथेरेपी
  3. विकिरण थेरेपी (Radiation therapy)
  4. लक्षित दवा चिकित्सा (Targeted drug therapy)

या इन सभी पचारों का एक संयोजन इस्तेमाल किया जा सकता है।

स्मॉल सेल लंग कैंसर का उपचार आमतौर पर इस प्रकार किया जा सकता है –

  1. विकिरण उपचार (radiation therapy)
  2. कीमोथेरेपी

इन उपचार विकल्पों के बारे में जानकारी -

1. लंग कैंसर का ऑपरेशन

लंग कैंसर के ऑपरेशन के दौरान आपका सर्जन फेफड़ों के कैंसर को निकलते हैं। इसके साथ बहुत छोटा हिस्सा स्वस्थ ऊतकों का भी निकाला जाता है। लंग कैंसर के ऑपरेशन चार प्रकार के होते हैं –

  1. वैज रिसेक्शन (Wedge resection) – फेफड़े के ट्यूमर वाले एक छोटे से हिस्से को हटाया जाता है, और साथ ही एक स्वस्थ ऊतकों का बहुत छोटा भाग भी।
  2. सेगमेंटल रिसेक्शन (Segmental resection)  फेफड़े के एक बड़े भाग को निकाला जाता है
  3. लोबेक्टमी (Lobectomy) एक फेफड़े के पूरे भाग को निकाला जाता है
  4. न्यूमोनेक्टमी (Pneumonectomy)  एक पूरे फेफड़े को निकाला जाता है

यदि आप सर्जरी से गुजरते हैं, तो कैंसर के लक्षण की जाँच करने के लिए के लिए आपका सर्जन आपकी छाती से लसीका नोड्स ( लिम्फ नोड्स) को निकाल सकता है।

2. कीमोथेरेपी

सर्जरी के बाद भी शरीर में शेष बची हुई किसी कैंसर कोशिका को नष्ट करने के लिए अक्सर कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जाता है। कैंसर को सिकोड़ने और उसे आसानी से निकालने के लिए सर्जरी से पहले भी इसका उपयोग किया जा सकता है। कुछ मामलों में, कैंसर की चरम अवस्था में दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने के लिए कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

3. रेडिएशन थेरेपी

सर्जरी के बाद शरीर में बची रहने वाली किसी भी कैंसर की कोशिकाओं को मारने के लिए रेडिएशन थेरेपी का उपयोग किया जा सकता है। यह फेफड़ों के कैंसर के उन मामलों में लिए पहले उपचार के रूप में भी इस्तेमाल की जा सकती है जो सर्जरी से निकाले नहीं जा सकता।

4. लक्षित दवा उपचार (Targeted drug therapy)

लक्षित दवा उपचार कैंसर के नवीन उपचार हैं, जो कैंसर कोशिकाओं में विशिष्ट असामान्यताओं को लक्षित करते हैं। लक्षित चिकित्सा दवाओं का प्रयोग अक्सर कीमोथेरेपी दवाओं के साथ संयोजन में किया जाता है, उदाहरण के लिए क्रिज़ोटिनिब (Crizotinib - जैसे Crizalk)।

5. प्रशामक देखभाल (Palliative care)

लंग कैंसर के मरीज़ अक्सर कैंसर के लक्षणों के साथ-साथ उपचार के दुष्प्रभावों को भी अनुभव करते हैं। सहायक देखभाल, जिसे प्रशामक देखभाल के रूप में भी जाना जाता है, उपचार का एक विशेष क्षेत्र है जिसमें आपके लक्षणों को कम करने की कोशिश की जाती है। आपका डॉक्टर यह सुझाव दे सकता है कि आप अपने निदान के तुरंत बाद एक प्रशामक देखभाल टीम से मिलें, ताकि आप अपने कैंसर के उपचार के दौरान और बाद में आरामपूर्वक रह सकें।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के जोखिम और जटिलताएं - Lung Cancer Risks & Complications in Hindi

फेफड़े के कैंसर के जोखिम 

कई कारक आपके लंग  कैंसर के खतरे को बढ़ा सकते हैं। उदाहरण के लिए धूम्रपान को छोड़कर कुछ जोखिम कारक नियंत्रित किए जा सकते हैं। कुछ ऐसे कारक भी हैं, जिन्हें नियंत्रित नहीं किया जा सकता, जैसे- इस बीमारी से जुड़ा आपके परिवार का इतिहास।

फेफड़ों के कैंसर के लिए जोखिम उत्पन्न करने वाले कारकों में शामिल हैं –

  1. धूम्रपान – फेफड़े के कैंसर का खतरा आपकी प्रतिदिन की  सिगरेट की खपत और आपके द्वारा धूम्रपान किए गए वर्षों की संख्या के साथ बढ़ता है। किसी भी उम्र में धूम्रपान छोड़ने से फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को बढ़ने से रोका जा सकता है।
  2. सेकेंडहैंड स्मोक (secondhand smoke) में वृद्धि – अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं तो भी आपको फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ सकता है। इसका कारण है – सेकेंडहैंड स्मोक यानि किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किये गए धूम्रपान के धुएं का सांस लेते वक़्त हवा के साथ आपके अंदर जाना। 
  3. रेडॉन गैस का बढ़ना – रेडॉन गैस का उत्पादन मिट्टी, चट्टान और पानी में यूरेनियम के प्राकृतिक रूप से टूटने के  कारण होता है। यह गैस अंततः हवा का हिस्सा बन जाती है, जिसमे हम सांस लेते हैं। रेडॉन गंभीर स्तर पर घरों के साथ साथ किसी भी इमारत में जमा हो सकती है। रेडॉन परीक्षण किट को होम इम्प्रूवमेंट स्टोर्स (home improvement stores) से खरीदा जा सकता है। इस किट के द्वारा निर्धारित किया जा सकता है कि स्तर सुरक्षित हैं या नहीं। यदि असुरक्षित स्तर का पता चलता है, तो इसके उपचार उपलब्ध हैं।
  4. ऐस्बेस्टस  और अन्य कार्सिनोजेन्स का बढ़ना – कार्यस्थल पर ऐस्बेस्टस और अन्य पदार्थों के अत्यधिक संपर्क में आना कैंसर का कारण माना जाता है, जैसे कि आर्सेनिक, क्रोमियम, और निकल। ये फेफड़ों के कैंसर के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं, खासकर तब जब आपको धूम्रपान की आदत हो।
  5. फेफड़े के कैंसर का पारिवारिक इतिहास  ऐसे लोग जिनके माता-पिता, भाई-बहन या बच्चे लंग कैंसर से पीड़ित हों, उनमें इस रोग के बढ़ने का अधिक खतरा होता है।

फेफड़े के कैंसर की जटिलतायें

फेफड़े के कैंसर से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं, जैसे –

  1. सांस की तकलीफ – यदि कैंसर मुख्य वायुमार्ग को अवरुद्ध कर देता है तो फेफड़ों के कैंसर से ग्रसित लोग श्वास की तकलीफ का अनुभव कर सकते हैं। लंग कैंसर से फेफड़ों के आसपास तरल पदार्थ जमा हो सकता है, जिससे कारण सांस लेते समय फेफड़ों को पूरी तरह से फैलने में कठिनाई होती है। 
  2. रक्त खाँसी – फेफड़े के कैंसर से वायुमार्ग में रक्तस्राव हो सकता है, जो आपकी खाँसी में आने वाले रक्त (हिमाप्टिसिस) का कारण बन सकता है। कभी-कभी रक्तस्राव गंभीर हो सकता है। रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए उपचार उपलब्ध हैं।
  3. दर्द – उच्च चरण में यह कैंसर जो फेफड़े के अंदरूनी भागों या शरीर के किसी अन्य हिस्से जैसे कि हड्डी में फैलकर दर्द का कारण बन सकता है। अगर आपको दर्द होता है, तो अपने चिकित्सक को बताएं। प्रारंभ में दर्द हल्का और आंतरायिक (intermittent)  हो सकता है, लेकिन धीरे धीरे स्थिर हो सकता है। दवाएं, विकिरण चिकित्सा (radiation therapy) और अन्य उपचार आपके लिए लाभदायक हो सकते हैं।
  4. सीने में तरल पदार्थ का जमा होना (pleural effusion) –  लंग कैंसर के कारण छाती की गुहा (chest cavity) में प्रभावित फेफड़ों के आस-पास मौजूद स्थान में तरल पदार्थ जमा हो जाता है। छाती में एकत्र होने वाले इस द्रव के कारण रोगी को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। इसके लिए उपचार उपलब्ध हैं, जिसमें आपके सीने में जमा हुए द्रव को निकाल दिया जाता है और इस समस्या के दोबारा होने का खतरा भी कम हो जाता है। 
  5. शरीर के अन्य भागों में फैलने वाला कैंसर (मेटास्टेसिस) फेफड़े का कैंसर अक्सर शरीर के अन्य भागों, जैसे कि मस्तिष्क और हड्डियों में फैलता है। अन्य भागों में फैला हुआ कैंसर दर्द, मतली, सिर दर्द या अन्य लक्षण पैदा करता है। ये लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कैंसर से कौन सा अंग प्रभावित हुआ है। फेफड़ों के कैंसर के अन्य अंगों में फैल जाने के बाद आमतौर पर इसका उपचार नहीं किया जा सकता। इसके लिए किये जाने वाले उपचार, रोग के लक्षणों को कम करने और रोगी को लंबे समय तक जीवित रखने में सहायता करते हैं।

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) में परहेज़ - What to avoid during Lung Cancer in Hindi?

इन चीज़ों से बचें –

  1. धूम्रपान फेफड़े के कैंसर का खतरा आपके द्वारा हर दिन ज़्यादा संख्या में सिगरेट का सेवन करने और धूम्रपान किए गए वर्षों की संख्या के साथ बढ़ता है। किसी भी उम्र में धूम्रपान छोड़ने से फेफड़ों के कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है।
  2. दूसरों से ग्रहण किया जाने वाला धुआं (secondhand smoke) – अगर आप धूम्रपान नहीं करते हैं, फिर भी आपको फेफड़े के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।  इसका कारण है 'सेकेंडहैंड स्मोक' यानि किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा किये गए धूम्रपान का धुआं आपके अंदर जाना। 
  3. रेडॉन गैस से खतरा – रेडॉन गैस का उत्पादन मिट्टी, चट्टान और पानी में यूरेनियम के प्राकृतिक रूप में टूटने से होता है। यह गैस अंततः हवा में मिल जाती है, जिसमे हम सांस लेते हैं। 
  4. शराब शराब से भी कैंसर का खतरा बढ़ता है।  

 

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) में क्या खाना चाहिए? - What to eat during Lung Cancer in Hindi?

लंग कैंसर के रोगियों को इन पोषक तत्वों को अपने आहार में शामिल करना चाहिए –

  1. विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ विटामिन सी युक्त फल और सब्ज़ियाँ
  2. कैरोटीनॉयड युक्त भोजन – यह चमकीली हरी, पीली, लाल और नारंगी रंग की सब्ज़ियों में पाया जाता है।
  3. सेलेनियम युक्त खाद्य पदार्थ – इसमें ब्राजील नट्स, सूरजमुखी और तिल के बीज, मछली और समुद्री भोजन, अंडे, मांस और साबुत अनाज शामिल हैं।
  4. करक्यूमिन (Curcumin) – यह भारतीय मसाले हल्दी का ही एक रूप होता है और अधिकतर करी में उपयोग किया जाता है। 
  5. सोया युक्त भोजन – इसमें टोफू, टेम्पे (tempeh), तामारी (सोया सॉस) और सोया दूध शामिल हैं।
  6. ओमेगा 3 इसमें ठंडे पानी में पायी जाने वाली मछलियाँ, जैसे – ट्यूना, सैल्मन, सार्डिन, हेरिंग और उनका तेल; चिया और सन के बीज और कोल्ड प्रेस प्रक्रिया द्वारा निकला गया इनका तेल शामिल है। 
  7. विटामिन डी3 –  फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थ (ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमे पोषक तत्वों को मिलाया जाता है), सूरज का प्रकाश या इसके पूरक (सप्लीमेंट्स)।
  8. ग्रीन टी – ग्रीन टी में पॉलीफेनोल नामक कैंसररोधी तत्व होता है, इसलिए इसे दिन में दो बार नियमित रूप से पीना चाहिए।
Dr. Susovan Banerjee

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Dr. Nitin Sood

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लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) की दवा - Medicines for Lung Cancer in Hindi

लंग कैंसर (फेफड़ों का कैंसर) के लिए बहुत दवाइयां उपलब्ध हैं। नीचे यह सारी दवाइयां दी गयी हैं। लेकिन ध्यान रहे कि डॉक्टर से सलाह किये बिना आप कृपया कोई भी दवाई न लें। बिना डॉक्टर की सलाह से दवाई लेने से आपकी सेहत को गंभीर नुक्सान हो सकता है।

Medicine NamePack SizePrice (Rs.)
GeftinatGeftinat 250 Mg Tablet4720
FolitraxFolitrax 10 Tablet99
AbraxaneAbraxane 100 Mg Injection13312
TortaxelTortaxel 100 Mg Injection3436
ZpacZpac 100 Mg Injection1813
ZupaxelZupaxel 100 Mg Injection1813
BevetexBevetex 100 Mg Injection10000
ChemoressaChemoressa 250 Mg Tablet2628
DutaxelDutaxel 100 Mg Injection3268
DenritDenrit 250 Mg Tablet3784
MaclitaxelMaclitaxel 260 Mg Injection2942
GeftibGeftib 250 Mg Tablet2521
PaxtalPaxtal 100 Mg Injection3197
GefticipGefticip 250 Mg Tablet8160
PaxubaPaxuba 100 Mg Injection3400
IressaIressa 250 Mg Tablet3521
KabigefKabigef 250 Mg Tablet1422
XeftaXefta 250 Mg Tablet0
ZefotibZefotib 250 Mg Tablet2528
ZufinibZufinib 250 Mg Tablet2492
ChemofitChemofit 250 Mg Tablet2710
EmfibEmfib 250 Mg Tablet1523
GefitrustGefitrust 250 Mg Tablet2543
GeftiglanGeftiglan 250 Mg Tablet2799

क्या आप या आपके परिवार में किसी को यह बीमारी है? सर्वेक्षण करें और दूसरों की सहायता करें

References

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