अशर सिंड्रोम - Usher Syndrome in Hindi

Dr. Anurag Shahi (AIIMS)MBBS,MD

December 03, 2019

March 06, 2020

अशर सिंड्रोम
अशर सिंड्रोम

अशर सिंड्रोम क्या है 

अशर सिंड्रोम सबसे सामान्य अनुवांशिक स्थिति है, जो सुनने और देखने दोनों की क्षमता को प्रभावित करती है। अशर सिंड्रोम के प्रमुख लक्षणों में सुनने और रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (आरपी) नामक आंखों से संबंधित विकार के कारण देखने की क्षमता कम होना शामिल है। आंखो से संबंधित यह विकार बचपन से लेकर किशोरावस्था तक कभी भी शुरू हो सकता है। दूसरी तरफ सुनाई देने में दिक्कत आने को सेंसेरिन्यूरल के रूप में वर्गीकृत किया गया है जिसका मतलब है कान के अंदरूनी हिस्से में कोई असामान्यता। 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, नेत्रहीन बच्चों में से 3 से 6 फीसदी बहरेपन के शिकार बच्चों में और 3 से 6 फीसदी नेत्रहीन बच्चेअशर सिंड्रोम से ग्रस्त हैं।

अशर सिंड्रोम के लक्षण

अशर सिंड्रोम का मुख्य लक्षण रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (आरपी) के कारण आंखों की रोशनी कम होना है। आरपी से ग्रस्त लोगों में, रेटिना की कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट होने लगती हैं। इन कोशिकाओं को रॉड्स और कोन्स कहा जाता है। इसकी वजह से धीरे-धीरे आंखों की रोशनी जाने लगती है। जब रॉड्स का नष्ट होना शुरू होता है तब साइड की चीजें और अंधेरे में दिखना बंद हो जाता है। जब कोन्स कोशिकाएं नष्ट होना शुरू होती हैं, तब रंग की पहचान करने व कुछ पढ़ने में परेशानी आती है। आमतौर पर, कई वर्षों के बाद, इस समस्या से जूझ रहा शख्स अंधेपन का शिकार हो जाता है। 

अशर सिंड्रोम के कारण 

वैज्ञानिकों के अनुसार अशर सिंड्रोम जेनेटिक है, जिसका अर्थ है कि यह समस्या माता-पिता से बच्चों में आती है। यह CLRN1 नामक जीन में गड़बड़ी के कारण होता है। यह जीन कोशिकाओं को बताते हैं कि क्या करना है। मानव शरीर में 20,000 से 25,000 जीन हैं।

अशर सिंड्रोम एक ऑटोसोमल रिसेसिव डिसऑर्डर (बीमारी या लक्षण विकसित होने के लिए असामान्य जीन की दो कॉपियां होना) है। इसे निम्न तरीके से समझ सकते हैं:

  • पुरुष और महिला दोनों ही इस समस्या से प्रभावित हो सकते हैं
  • माता-पिता दोनों के CLRN1 जीन में गड़बड़ी हो लेकिन उनमें खुद अशर सिंड्रोम न हो
  • बच्चे को अपने माता या पिता से ये जीन सही या खराब मिल सकता है 

अशर सिंड्रोम का इलाज 

  • अशर सिंड्रोम या रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (आरपी) के इलाज का अभी तक पता नहीं चल पाया है। सही समय पर जांच करना ही इसका सबसे अच्छा इलाज है। 
  • कुछ शोधों से पता चला है कि विटामिन ए आरपी के कुछ रूपों के बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा कर सकता है, लेकिन यहां पर चिंता इस बात की है कि विटामिन ए के अधिक सेवन से आंखों से जुड़ी अन्य समस्याएं और भयंकर रूप ले सकती हैं। हालांकि, नेत्र विशेषज्ञ विटामिन ए के जोखिम और इसके लाभों के बारे में आपको सही सलाह दे सकते हैं और ये भी बता सकते हैं कि आपके लिए इसकी कितनी मात्रा लेना सुरक्षित है।
  • चूंकि इसका इलाज नहीं है इसलिए इस स्थिति में बच्चों को सुनने और देखने की क्षमता में आई कमी को अपनाने में मदद करने पर ध्यान दिया जाता है, ताकि वह सामान्य जीवन जी सकें। इसमें बच्चों को निम्न उपकरणों का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है:
    • कान की मशीन
    • कॉकलियर इंप्लांट - इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, जो सुनने में मदद करता है 
    • संकेतों में बात करना या अपनी बात समझाना
    • ब्रेल निर्देश



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