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अंधापन दृष्टि की हानि से जुड़ी ऐसी दिक्क्त है, जिसको सामान्य चश्में, कॉन्टेक्ट लेंस, दवाओं और सर्जरी से भी ठीक नहीं किया जा सकता। यह स्थिति किसी व्यक्ति के रोजमर्रा के जीवन को कुप्रभावित करती है। इस अवस्था में व्यक्ति कुछ भी नहीं देख पाता, यहां तक की उसे उजाला तक भी नजर नहीं आता।

यदि आपमें कुछ रूप से अंधापन है तो आपकी दृष्टि सीमित मात्रा में होती है, उदाहरण के लिए अलग-अलग आकार के ऑबजेक्ट के आकार में अंतर स्पष्ट करने में असमर्थता। पूर्ण अंधापन का मतलब है कि आप कुछ भी देख नहीं पाएंगे और आपको सिर्फ अंधेरा महसूस होगा। अगर बात लीगल ब्लाइंडनेस (Legal blindness - यह एक अमेरिकन शब्द है, जिसका आशय मरीज की दृष्टी जांचने के पैमाने से है) की करें तो इसके मरीज को दृष्टि के साथ काफी समझौता करना पड़ता है। स्वस्थ आंखों वाला एक व्यक्ति 200 फीट की दूरी तक देख सकता है जबकि लीगल अंधापन से ग्रस्त व्यक्ति सिर्फ 20 फीट की दूरी तक ही देख पाता है।

दीर्घकालिक अंधेपन के कारणों में मोतियाबिंद, अपवर्तक त्रुटियां (Refractive errors), ग्लूकोमा, कॉर्नियल ओपेसिटी, उम्र से जुड़े मैक्यूलर डीजनरेशन, बचपन से अंधापन और डायबिटिक रेटिनोपैथी आदि शामिल हैं। अंधेपन की जांच दृश्य तीक्ष्णता परीक्षण (Visual acuity examination) द्वारा की जाती है। अंधेपन का इलाज इसके कारण के आधार पर किया जाता है, इसका उपचार मेडिकल या सर्जिकल रूप से किया जा सकता है।

(और पढ़ें - आंखों की बीमारी के लक्षण)

  1. अंधापन के चरण - Stages of Blindness in Hindi
  2. अंधापन के लक्षण - Blindness Symptoms in Hindi
  3. अंधापन के कारण और जोखिम - Blindness Causes And Risks in Hindi
  4. अंधापन से बचाव - Prevention of Blindness in Hindi
  5. अंधापन का परीक्षण - Diagnosis of Blindness in Hindi
  6. अंधापन का इलाज - Blindness Treatment in Hindi
  7. अंधापन के डॉक्टर

अंधापन के क्या-क्या चरण होते हैं?

दृष्टि हानि को मापने का सबसे बेहतर तरीका यहीं देखना है कि व्यक्ति अपनी आंखों को कितना और किस तरह से काम ले पा रहा है। इन स्तरों को साफ दिखाई देना, धुंधला दिखाई देना, काफी कम दिखना और पूर्णतया अंधापन जैसी श्रेणियों में बांटा जा सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के द्वारा दृष्टि फंक्शन को 4 चरणों में बांटा गया है।

  • सामान्य
  • मध्यम दृष्टि हानि
  • गंभीर दृष्टि हानि
  • अंधापन

मध्यम से गंभीर स्तर के अंधेपन में व्यक्ति की आंखें दवाइयों, ऑपरेशन, कॉन्टेक्ट लैंसों और चश्में की सहायता से भी ठीक नहीं की जा सकती। 

 

अंधेपन में क्या लक्षण महसूस होते हैं?

अचानक दृष्टी खो देने की दिक्क्त कभी -कभी कुछ सेकेंड्स तो कभी कुछ मिनट या कुछ दिनों में ही हो जाती है। इसमें दृष्टी या तो पूरी तरह धुंधली हो जाती है या फिर पूरी तरह समाप्त हो जाती है। कुछ मामलों में दृष्टी चमकती रौशनी से प्रभावित हो जाती है या फिर देखने वाली जगह में धब्बे दिखाई देने लगते हैं। 

इस समस्या के दौरान हम जिस जगह को देखते हैं उसका कुछ हिस्सा या वह पूरी तरह से धुंधली दिखने लगती है। ऐसे में एक आंख बंद रखकर दूसरी आंख से देखा जाता है और यह प्रक्रिया दोनों ही आंखों से की जाती है ताकि यह पता लगाया जा सकें कि समस्या एक आंख में हैं या दोनों में।

अचानक से होने वाली दृष्टि की हानि अक्सर दर्द रहित होती है, लेकिन इसके साथ आंख में दर्द, लालिमा और सिर दर्द जैसी दिक्क्तें भी हो सकती है। दृष्टी क्षमता में हुआ किसी भी तरह का परिवर्तन अपने आप में गंभीर है। भलें ही यह परिवर्तन देखने के दायरे के एक छोटे से हिस्से में हुआ हो या फिर अपने आप ठीक हो गया हो। 

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अन्य लक्षण जो एक या दोनों आंखों में अचानक से होते हैं इनमें निम्न शामिल हैं:

  • दृष्टि जाने के साथ-साथ सिर्द दर्द या जिस आंख की दृष्टि में हानि हुई है उसी तरफ शरीर में गंभीर कमजोरी महसूस होना।
  • अचानक से और बिना दर्द किए दृष्टि में हानि होना, कभी-कभी सुबह उठने पर दृष्टि हानि महसूस होना
  • सिर में चोट आदि लगने के बाद देखने में कठिनाई होना
  • मंद रौशनी में एडजस्ट करने में कठिनाई
  • फोकस करने में कठिनाई
  • रोशनी से दर्द होना और उजाले के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होना
  • आंखों में जलनआंखों में सूखापन, सूजन या पपड़ी होना
  • धुंधला दिखाई देना या दो तस्वीरें दिखाई देना
  • जो चीज देख रहे हैं उसके चारों तरफ प्रकाश का घेरा नजर आना
  • देखने वाले स्थान पर खाली धब्बे दिखाई देना
  • अंधापन अचानक और पूरी तरह अनपेक्षित रूप से शुरू हो जाना
  • कई बार यह दिक्क्त बेहद दबे पांव आती है और समय के साथ साथ बढ़ते हुए बेहद भयंकर हो जाती है
  • एक घंटे तक समस्या अपने आप ठीक हो जाना या कुछ मामलों में एक घंटे से भी कम समय लेना।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

अगर आपको अचानक से देिखने में कमी महसूस होने लगे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अपने साथ साथी के रूप में किसी दोस्त या रिश्तेदार को रखें जो आपके साथ इमर्जेन्सी रूप तक जा सके और वहां रुके। अपनी दृष्टि आने का इंतजार न करें तुरंत डॉक्टर के पास जाने की व्यवस्था करें। कई बार तत्काल उपचार करने से आपकी दृष्टि वापस आने की संभावनाएं बढ़ जाती है, लेकिन यह परिणाम पूर्णतया आपके अंधेपन के लिए उत्तरदायी कारण पर निर्भर करता है। इसके उपचार में सर्जरी से लेकर दवाएं जैसे विकल्प शामिल हो सकते हैं।

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अंधापन क्यों होता है?

चोट लगना –

  • सीधे आंख पर चोट लगना, आंख के आसपास की हड्डियों या टिश्यू पर चोट लगने से आंखों को क्षति पहुंचती है और इससे दृष्टी तक बाधित हो सकती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि इस चोट की वजह कोई बाहरी वस्तु ही हो। 
  • सिर पर लगे किसी आघात के कारण भी दृष्टी की हानि हो सकती है। इसकी वजह यह है कि कई नसें सिर से आंखों तक जाती है और सिर पर लगे आघात से ये नसें क्षतिग्रस्त हो सकती है। यह सिर को लगी किसी मामूली चोट में भी संभव है और मस्तिष्क को लगे किसी भीषण आघात में भी।

नीचे बताए गए आंखों के रोग भी अंधेपन का कारण बन सकते हैं, जैसे:

  • ऑप्टिक न्युराइटिस (Optic neuritis) - यह आंखों में सूजन का एक प्रकार है जिससे आंशिक रूप से कुछ समय के लिए या फिर हमेशा के लिए आंखों की रोशनी जा सकती है। 
  • रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा (Retinitis pigmentosa) - रेटिना में किसी प्रकार की क्षति होने को रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा कहा जाता है। काफी दुर्लभ मामलों में ही इससे अंधेपन की दिक्क्त होती है। 
  • मोतियाबिंद - इसके कारण दृष्टि में धुंधलापन आ जाता है, वृद्ध लोगों में यह काफी सामान्य होता है। (और पढ़ें - मोतियाबिंद के घरेलू उपाय)
  • लेजी आई - इसे एम्बलाइयोपिया (Amblyopia) या मंद दृष्टि के नाम से भी जाना जाता है। इसमें पीड़ित को सामने नजर आ रही वस्तु या व्यक्ति का पूरा विवरण देखने में दिक्क्त होती है। आगे जाकर इससे अंधापन भी हो सकता है।
  • ट्यूमर - आपकी रेटिना या आंख की नस को प्रभावित करने वाले ट्यूमर भी अंधापन का कारण बन सकते हैं।
  • ग्लूकोमा - ग्लूकोमा का आशय आंखों की चार ऐसी परिस्थितियों से है जो आपकी आंखों की नस को क्षतिग्रस्त कर सकती है। इन नसों की ही मदद से आप जो देखते हैं उसकी सूचना मस्तिष्क तक पहुंचती है और हम जान पाते हैं कि हमने क्या देखा। 
  • मैक्यूलर डिजनरेशन (Macular degeneration) - आपकी आंख के उस भाग को नष्ट कर देता है जिससे आप किसी ऑबजेक्ट को डिटेल में देख सकते हैं। आम तौर पर यह बड़े वयस्कों को ही प्रभावित करता है।

यदि आप डायबिटीज या स्ट्रोक से पीड़ित हैं तो इस बात की पूरी संभावनाएं हैं कि आप अंधेपन की चपेट में आ सकते हैं। जन्म दोष, आंख में चोट लगना और आंख की सर्जरी से होने वाली अन्य जटिलताए भी अंधापन विकसित होने के अन्य सामान्य कारण हैं।

अचानक से दृष्टि खो देने के मुख्य तीन कारण हो सकते हैं जैसे:

  1. सामान्य रूप से आंख की पारदर्शी संरचनाओं में धुंधलापन
  2. रेटिना में असामान्यता (आंख के पीछे प्रकाश-संवेदन संरचना को रेटिना कहा जाता है)
  3. उस नस में असामान्यता जो दृष्टि के संकेतों को आंख से मस्तिष्क तक पहुंचाती है।

जोखिम कारक

निम्न वर्गों के लोगों में अंधापन होने के जोखिम अधिक होते हैं:

  • समय से पहले पैदा होने वाले शिशु
  • ब्लड प्रेशर की दवाओं की उच्च खुराक लेने वाले लोग
  • माइग्रेन सिर दर्द जिनकी पारिवारिक या वंशानुगत बीमारी रही है
  • जिन लोगों को आंख से संबंधित रोग हैं जैसे मैक्यूलर डीजेनेरेशन और ग्लूकोमा
  • डायबिटीज से ग्रस्त लोग (और पढें - डायबिटीज में परहेज)
  • वे मरीज जिनकी आंख की सर्जरी हुई है
  • जो लोग तेज धार वाली वस्तुओं या विषैले केमिकल के संपर्क में काम करते हैं
  • स्ट्रोक से ग्रस्त लोग
  • वे लोग जिनको संचार संबंधी समस्याएं हैं जैसे धमनियों में कठोरता, रक्तवाहिकाओं में सूजन व जलन आदि

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अंधेपन से बचाव कैसे किया जा सकता है?

एक स्वस्थ व्यवहार की मदद से आंखों में अचानक रक्त का प्रवाह रुक जाने से होने वाले अस्थायी अंधेपन की रोकथाम की जा सकती है, साथ ही साथ स्ट्रोक व अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी रोका जा सकता है।

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अंधेपन की जांच कैसे की जाती है?

रोग की जांच के लिए किए जाने वाले कई मूल्यांकनों से दृष्टि हानि के मूल कारण को निर्धारित करने में मदद मिलती हैं। इसके लिए आपको निम्न बातों का पता होना चाहिए:

  • बेसिक टेस्टिंग - उचित जांच की पुष्टि करने के लिए मौलिक परीक्षा तकनीकें महत्वपूर्ण हैं। इस टेस्ट में सबसे पहला काम सर्वोत्तम - सही दृश्य तीक्ष्णता निर्धारित करना होता है।
    • डॉक्टर सबसे पहले मरीज को किसी चार्ट पर कुछ अक्षर पढ़ने के लिए कहकर उसकी दृष्टि की तीक्ष्णता की ध्यानपूर्वक जांच करेंगे। इस टेस्ट में पहले एक-एक आंख बंद करवाकर पढ़ने के लिए कहा जाता है और फिर दोनो आंख खोलकर पढ़ने के लिए कहा जाता है।
    • इसके अलावा दृष्टि हानि के संभावित कारणों को कम करने के लिए पिनहोल परीक्षण महत्वपूर्ण है। पिनहोल, आंख की एक ढाल होती है, जिसमें कई छोटे-छोटे छेद होते हैं। यह आंखों की ऑप्टिकल समस्याओं में हस्तक्षेप किये बिना प्रकाश किरणों को रेटिना तक पहुंचने की अनुमति देता है। यह आंखों के लेंस के कारण हो रही समस्याओं तथा अन्य समस्याओं को बीच अंतर स्पष्ट करने का उत्कृष्ट तरीका है।
    • मरीज की दोनों आंखों पर अलग-अलग रूप से यह परीक्षण भी किया जाता है कि उन्हें दोनों आंखों से अलग अलग रंग किस तरह नजर आते हैं।
  • पुतली परीक्षण – दृष्टि हानि का मूल्यांकन करते समय पुतली की प्रतिक्रियाएं देखी जाती है, यह भी जांचा जाता है कि पीड़ित और स्वस्थ आंख में रोशनी ड़ालने से क्या होता है, यह एक विशेष जांच (Afferent pupillary defect) है।
  • दृष्टि क्षेत्र – दृष्टि हानि की सीमा और उसके पैटर्न का पता करने के लिए विजुअल फिल्ड (दृष्टि क्षेत्र) टेस्ट करना आवश्यक होता है।
  • फन्डस परीक्षण – रेटिना से जुड़े ज्यादातर विकार इतने गंभीर होते है कि वे दृष्टि हानि पैदा कर सकते हैं। ये विकार केयरफुल रेटिना परीक्षण के दौरान दिखाई दे जाते हैं।
  • लेब टेस्टिंग - दृष्टि हानि के संदेहास्पद कारणों के आधार पर लेबोरेटरी टेस्ट आवश्यक हो सकते हैं। जो लोग 55 साल से अधिक उम्र के हो गए हैं और उनको अचानक से अंधापन हुआ है, उनको सीबीसी (CBC), प्लेटलेट काउंट, इएसआर (Erythrocyte sedimentation rate) और सी रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट करवा लेने चाहिए। हाइपरलिपिडिमिया और डायबिटीज के लिए स्क्रीनिंग करवाना भी कार्डियोवस्कुलर जोखिम कारकों को खोजने के लिए उपयोगी है। साथ ही, इन ऑफिस ब्लड प्रेशर मापन भी उन मरीजों के लिए अति उपयोगी है जिनको अचानक से अंधापन हुआ है। (और पढ़ें - डायबिटीज में क्या खाएं)
  • आगे की जांच – अतिरिक्त टेस्टिंग की भी आवश्यकता पड़ सकती है, जिसमें ऑप्टिकल कोहरेन्स टोमोग्राफी (Optical coherence tomography), फ्लुरेसेन एंजियोग्राफी (Fluorescein angiography), न्यूरोइमेजिंग (Neuroimaging), कैरोटिड डॉपलर अल्ट्रासोनोग्राफी (Carotid Doppler ultrasonography), इकोकार्डियोग्राफी (Echocardiography) या टेंम्पोरल अर्टरी बायोप्सी (Temporal artery biopsy) आदि शामिल हैं। हालांकि यह दृष्टि हानि के कारण पर निर्भर करता है।

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अंधेपन का इलाज कैसे किया जा सकता है?

कारण के आधार पर ही अंधेपन का इलाज किया जाता है। यदि उपचार जल्दी से शुरू किया जाए तो दृष्टि की हानि को कम किया जा सकता है। आंख से संबंधित समस्या के कारण दृष्टि हानि को आई ड्रोप्स, दवाएं या सर्जरी की मदद से ठीक किया जा सकता है।

  • यदि दृष्टि हानि का कारण सूजन व जलन है तो स्टेरॉयड का इस्तेमाल किया जा सकता है। (और पढ़ें - सूजन कम करने के उपाय)
  • यदि अचानक से रक्त वाहिकाओं में रुकावट होना ही दृष्टि हानि का कारण बन रहा है, तो इलाज के लिए जितनी जल्दी हो सके रक्त प्रवाह को ठीक और सुचारु करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। 
  • यदि आपकी गर्दन की किसी रक्त वाहिका में गंभीर रूप से रुकावट हो गई है, तो इसको ठीक करने के लिए आपको सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
  • सूजन, जलन और संक्रमण के कारण होने वाली अंधेपन की स्थिति को दवाओं और कुछ प्रकार की आई ड्रोप्स की मदद से ठीक किया जा सकता है। (और पढ़ें - आँखों में जलन का इलाज)
  • पोषण की कमी के कारण होने वाली अंधेपन की स्थिति को आहार में बदलाव करके ठीक किया जा सकता है। (और पढ़ें - पौष्टिक आहार के गुण)
  • ऐसी परिस्थितियां जिसमें आंखें ठीक से रोशनी नहीं ले पाती जिसके चलते उन्हें सामने वाली वस्तु साफ नहीं दिखती तो इस परिस्थिति का इलाज करने के लिए रोगी को एक उचित चश्मा प्रदान किया जा सकता है। (और पढ़ें - चश्मा छुड़ाने के लिए घरेलू उपाय)
  • हाई कोलेस्ट्रॉलहाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को आहार तथा दवाओं के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। यदि आप धूम्रपान करते हैं यह बहुत जरूरी है कि आप उसे छोड़ें। (और पढ़ें - कोलेस्ट्रॉल कम करने के उपाय)
  • ज्यादातर लोग मोतियाबिंद के कारण ही अंधे होते हैं। इन मरीजों में मोतियाबिंद की सर्जरी की जाती है और ज्यादातर मामलो में दृष्टि वापस आ जाती है। आमतौर पर आंख से प्राकृतिक अपारदर्शी लेंस को हटाकर एक इंट्राओक्युलर लेंस (IOL) लगाया जाता है।

(और पढ़ें - मोतियाबिंद के घरेलू उपाय)

वैसे दृष्टि हानि किसी भी उम्र में हो सकती है, लेकिन ज्यादातर यह समस्या वयस्कों में ही होती है। किसी अन्य प्रमुख जीवन घटना की तरह अंधापन अकेलापन, मजबूरी, चिंता और डिप्रेशन की भावनाओं को ला सकता है। ऐसे में डॉक्टर अंधेपन के पीड़ितों को काउंसलिंग भी देते हैं, साथ ही उनकी आवश्यकताओं के आधार पर उन्हें आगे रेफर कर सकते हैं ताकि रोगी को किसी तरह का कोई अवसाद न हो। जिन लोगों को पूर्ण नेत्रहीनता हुई है उन्हें तो निश्चित रूप से काउंसलिंग लिए जाने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए। 

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Dr. Nishant Singh

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